جـــوش ســـخـــن مـــن بــــود از جــــذبــــه مـــردانهـــر خــــام مـــرا بــــر ســــر گـــفـــتــــار نـــیـــارددلــوی کــه چـــهــل کــس نــتـــ…
| جـــوش ســـخـــن مـــن بــــود از جــــذبــــه مـــردان | هـــر خــــام مـــرا بــــر ســــر گـــفـــتــــار نـــیـــارد |
| دلــوی کــه چـــهــل کــس نــتـــوانــنــد کــشـــیــدن | یـک کــس چــه خــیـال اســت کــه از چــاه بــرآرد؟ |
| *** | |
| رخـــســار تـــو بـــا خـــط ســیــه کــار چـــه ســازد؟ | آیــیــنــه بـــه تـــردســتـــی زنــگــار چـــه ســـازد؟ |
| از جــــلـــوه شـــیـــریـــن دهـــنـــان آب نـــگـــردیـــد | فـرهـاد بــه جــان سـخـتــی کـهـسـار چــه سـازد؟ |
| *** | |
| مــی بـــی خــبـــر از نــرگــس شــهــلــای تــو ریــزد | خـــمــیــازه نــمــکـــســـود ز لـــبـــهــای تـــو ریــزد |
| در گـــوش صــــدف جــــای کــــنـــد از بــــن دنـــدان | هــر نــکـــتـــه کـــه از لــعـــل گــهــرزای تـــو ریــزد |
| *** | |
| از دیـــــده حـــــیـــــرت زده چــــــون آب نـــــریـــــزد؟ | از دســـت چـــســـان آیــنــه ســـیــمــاب نــریــزد؟ |
| در کـــلـــبـــه مــن از پـــی آســـایــش (مــن) چـــرخ | گـــورنــگ ز خـــاکـــســـتـــر ســـنـــجـــاب نـــریــزد |
| *** | |
| در دور خـــط آن ســیــم ذقــن تـــلــخ ســخــن شــد | خــط ابــجــد بــی رحــمـی آن غـنـچــه دهـن شــد |
| شــد آتـــش گــل اخـــگــر خـــاکــســـتـــر بـــلــبـــل | روزی کـــه گـــل روی تـــو پـــیــدا ز چـــمـــن شـــد |
| اخـــگـــر نـــتـــوانـــد ز گـــریـــبـــان بـــدر انـــداخـــت | دســتــی کــه گــرفــتــار ســر زلـف ســخــن شــد |
| *** | |
| لـب تــشـنـه تــو، سـوخــتــه ای نـیـســت نـبــاشـد | شـاد از تــو غـم انـدوخــتــه ای نـیـســت نـبــاشـد |
| انــدیــشـــه زلـــف تـــو چـــو عـــزم ســـفـــر هــنــد | در هــیــچ دل ســوخــتــه ای نــیــســت نــبــاشــد |
| *** | |
| تـــوفـــیــق، مـــرا رخـــت بـــه مـــنــزل نـــرســـانـــد | خـــاشــاک مــرا مــوج بـــه ســـاحـــل نــرســـانــد |
| ای وای بـــر آن کـــشـــتـــه کـــه از گــریــه شـــادی | آبـــی بـــه کـــف خـــنـــجـــر قـــاتـــل نـــرســـانـــد |
| *** | |
| تــرســم کــه مــرا عــشــق بـــه مــردی نــرســانــد | دل را بــــه شــــفــــاخــــانـــه دردی نـــرســــانــــد |
| امـشـب نـفـســم مـضـطـرب از ســیـنـه بــرون رفـت | بــــر آیـــنـــه حـــســـن تـــو گـــردی نـــرســـانـــد! |
| *** | |
| چـــون حــرف زنــد، غــنــچـــه ز گــفــتـــار بـــمــانــد | چـــون جـــلــوه کــنــد، ســـرو ز رفــتـــار بـــمــانــد |
| آن کـــبــــک خـــرامـــنـــده بــــه رفـــتـــار چـــو آیـــد | ســـیـــمـــاب بـــر آیــیـــنـــه ز رفـــتـــار بـــمـــانـــد |
| *** | |
| جـمـعـی کـه سـر خـویـش بــه فـتـراک تـو بــسـتـنـد | چـنـدان کـه بــه گـردش بــود ایـن دایـره، هـسـتـنـد |
| شــد پــنــجــه ســیـمــیـن تــو در مــهــد، نــگــاریـن | از رشـتـه جـانـهـا کـه بــه انـگـشـت تــو بــسـتــنـد |
| *** | |
| کــــی در تـــــن خـــــاکــــی دل آگــــاه گــــذارنــــد؟ | یـوســف نــه عــزیــز اســت کــه در چــاه گــذارنــد |
| صــد مــرتـــبـــه خــوشــتــر بـــود از قــیــمــت نــازل | گـــر یـــوســـف مـــا را بــــه تــــه چــــاه گـــذارنـــد |
| *** | |
| جـــویـــای تـــو آســـودگـــی از مـــرگ نـــبــــیـــنـــد | در خـــاک، طـــلــبـــکـــار تـــو از پـــا نــنــشـــیــنــد |
| از عـــمـــر بـــرومـــنــد شـــود هــر کـــه دریــن بـــاغ | در ســایـه نــخــلــی کــه نــشــانــد بــنــشــیــنــد |
| *** | |
| تـــا صـــدق طـــلــب خـــضـــر مــن آبـــلــه پـــا بـــود | هــر مــوجــه ای از ریــگ روان قــبـــلــه نــمــا بــود |
| از کــشــمــکــش عــشــق رســیــدیــم بـــه دولــت | ایــن اره بـــه فـــرق ســـر مـــا بـــال هـــمـــا بـــود |
| ســـــر داد بـــــه صـــــحـــــرا دل دیــــوانــــه مــــا را | آن گـــنـــج کـــه در گـــوشـــه ویـــرانـــه مـــا بــــود |
| *** | |
| احـــوال دل خـــســـتـــه بـــه اغـــیـــار مـــگـــویــیــد | حـــال ســـرشــوریــده بـــه دســـتـــار مــگــویــیــد |
| در خــلــوت دل رشــتـــه جـــان مــوی دمــاغ اســت | ایــنــجــا ســخــن از ســبــحــه و زنــار مــگــویــیــد |
| در ســـنــگ پـــر و بـــال نــهــد حـــشـــر مــکــافــات | هــرگــز ســخــن ســخــت بـــه دیــوار مــگــویــیــد |
| *** | |
| (شــکـســت حــال پــریـشــان مـا چــه فـایـده دارد؟ | خــــرابــــی دل ویـــران مـــا چــــه فـــایـــده دارد؟) |
| (بـگـیر دامنش ای اشـک (و) چـاره سـازی (مـا) کـن | هـمــیـن گــرفــتــن دامــان مــا چــه فــایـده دارد؟) |
| (کـسـی که تـخـم محـبـت بـه دل نکـشـتـه چـه داند | کـــه آب دیــده گـــریـــان مـــا چـــه فـــایــده دارد؟) |
| *** | |
| کـــدام شـــوخ کــه بـــا مــن ســـر عـــتـــاب نــدارد؟ | کــدام گـوشــه کـه چــشــمـم گـلـی در آب نـدارد؟ |
| مـرا کــه تــشــنـه آن لــعــلـم از عــتــاب چــه پــروا؟ | کــه مـی پــرســت غــم از تــلـخــی شــراب نـدارد |
| *** | |
| عــجـــب نــبـــاشــد اگــر دل ز آســمــان بـــگــریــزد | کـه تــیـر راســت رو از صــحــبــت کــمـان بــگـریـزد |
| گـل حـمـایـت (و) مـظـلـوم پـروری اسـت شـجـاعـت | وگــرنــه گــرگ چــرا از ســگ شــبـــان بــگــریــزد؟ |
| *** | |
| خــراب شــو کــه بــه مــلــک خــراب بــاج نــبــاشــد | بــرهـنـه شـو کـه بــه عـریـان تـنـان خـراج نـبــاشـد |
| چـــنــان بـــزی کـــه چـــو فـــرمــان کـــردگــار درآیــد | تـــرا بـــه حــال دگــر نــقــل احــتـــیــاج نــبـــاشــد |
| *** | |
| هـــمـــت عـــالـــی نـــظـــر بــــه پــــســــت نـــدارد | خــــانــــه گــــردون غــــم نــــشــــســــت نــــدارد |
| تـــیــر تـــو از شـــســـت صـــاف، گـــرد نـــشـــانـــه | چـــون صـــف مــژگــان بـــلــنــد و پـــســـت نــدارد |
| *** | |
| دور قـــــــــدح را مــــــــه تـــــــــمـــــــــام نــــــــدارد | روشــــــــنـــــــی مــــــــاه ایـــــــن دوام نــــــــدارد |
| بـــر لــب کــوثــر شــکــســتــه اســت ســبـــویــش | هــر کـــه بـــه کـــف وقـــت صـــبـــح جـــام نـــدارد |
| بــا هـمــه دلــهــا یـکــی اســت نــســبــت آن زلــف | دیــــــــده آهــــــــوشــــــــنــــــــاس دام نــــــــدارد |
| *** | |
| ره بـــــه فـــــروغ رخـــــش نــــقـــــاب نــــگـــــیــــرد | ابـــــر تــــنــــک پــــیــــش آفــــتــــاب نــــگــــیــــرد |
| گـــــرد دل عـــــاشــــــقـــــان مـــــگـــــرد خــــــدا را | رخــــت تـــــو بـــــوی دل کــــبـــــاب نــــگــــیــــرد! |
| *** | |
| طــــالــــع مــــا عــــیــــش را غــــم مــــی کــــنــــد | ســـور را هـــمـــچـــشـــم مـــاتــــم مـــی کـــنـــد |
| تــــــا خـــــیـــــال گـــــریـــــه کـــــردم یـــــار رفـــــت | ایــــن غــــزال از بــــوی خــــون رم مــــی کــــنــــد |
| *** | |
| گــــریــــه مــــا دل بـــــه طـــــوفــــان مــــی دهــــد | نـــالــــه مــــا جــــان بــــه افــــغــــان مـــی دهـــد |
| بــــــلــــــبــــــلــــــان را داغ دارد بـــــــاغــــــبـــــــان | کـــــاو ســـــزای هــــرزه گــــویــــان مــــی دهــــد |
| *** | |
| نــــه هــــر دل جـــــای ســـــودای تـــــو بـــــاشــــد | دلـــــی کـــــز جـــــا رود جـــــای تـــــو بـــــاشـــــد |
| گـــل از شـــبــــنـــم ســـراپــــا چـــشـــم گـــردیـــد | کــــه حــــیــــران تــــمــــاشــــای تــــو بـــــاشــــد |
| دو عــــــالـــــم را تــــــوانـــــد پــــــشــــــت پــــــا زد | ســــر هـــر کــــس کـــه در پــــای تــــو بــــاشــــد |
| *** | |
| هــر کــه نــبـــرد آب خــود چــشــمــه کــوثــر شــود | هـر کــه فــرو خــورد اشــک مـخــزن گــوهـر شــود |
| هـر کـه فـشـانـد از جـهـان دسـت خـود آسـوده شـد | خــواب فــراغــت کــنـد نــخــل چــو بــی بــر شــود |
| *** | |
| خـــار پــــیـــراهـــن مـــشـــو آســـودگـــان خـــاک را | تــا پــس از مـردن نـگــردد بــر تــنـت هـر مـوی مـار |
| *** | |
| غــم مـرا در جــان بــی حــاصــل نـمـی گــیـرد قــرار | جــغـد از وحــشــت دریـن مـنـزل نـمـی گـیـرد قـرار |
| جـان قـدسـی در تـن خـاکـی دو روزی بـیش نیسـت | مــوج دریــا دیــده در ســاحــل نــمــی گــیـرد قــرار |
| راهــرو چــون مــی تــوانــد پـــشــت بـــر دیــوار داد؟ | در بــیــابـــان طــلــب مــنــزل نــمــی گــیــرد قــرار |
| *** | |
| آشــیـان بــلــبــلــان پــر گــل شــد از جــوش بــهــار | خـوش وصـالی قـسـمت بـلبـل شـد از جـوش بـهار |
| از در گـــلـــشـــن بـــه دشـــواری بــــرون مـــی آورد | بــس کـه دامـان صـبــا پـر گـل شـد از جـوش بـهـار |
| سـبــزه پــشـت لـبــت چــون ریـشـه در دلـهـا دوانـد | گـوشـه دسـتــار پــر سـنـبــل شـد از جـوش بــهـار |
| *** | |
| بــــاز دارم نــــعــــل در آتــــش ز پــــیـــکــــان دگــــر | مـی کــنـد در ســیـنـه کــاوش تــیـر مــژگــان دگــر |
| کـشـتـه آن دسـت و بــازویـم کـه در مـیـدان عـشـق | زخـــم را دل مــی دهــد هــر دم ز پـــیــکـــان دگــر |
| *** | |
| ای ز رویــت هــر نــظـــر مــحـــو تـــمــاشـــای دگـــر | در دل هــر ذره ای خـــورشـــیــد ســـیــمــای دگــر |
| چــون رود بــیـرون ز بــاغ آن یـوســف گــل پــیـرهــن | مـی شــود هـر شــاخ گـل دســت زلـیـخــای دگــر |
| *** | |
| نـوازش مـی کـنـد بــی حـاصـلـان را آسـمـان کـمـتـر | بــه نـخـل بــی ثـمـر دارد تــوجـه بــاغـبــان کـمـتــر |
| ز آه گــرم مــن دل ســخـــت تـــر گــردیــد گــردون را | چه حرف است این که از آتش شود زور کمان کمتر |
| نــــدارد در درازی کــــوتــــهــــی دســــت دراز مــــن | بــه پــا گـر مـی دهـم دردسـر آن آســتــان کـمـتــر |
| *** | |
| بـــا بـــخــت تــیــره کــوکــب مــا را چــه اعــتــبـــار؟ | در روز ابــــر، بــــال هـــمـــا را چــــه اعـــتــــبــــار؟ |
| در کــوی دوســت نــرخ دل از خـــاک کــمــتـــرســت | در صــحــن کـعــبــه قـبــلـه نـمـا را چــه اعــتــبــار؟ |
| *** | |
| درویــش خــامــش اســت ز مــبـــرم کــشــنــده تــر | از پــشــه هــاســت پــشــه خــاکــی گــزنــده تــر |
| خـــامــوش بـــی کـــمــال چـــو بـــاروت بـــی صـــدا | بـــاشــد ز پـــوچ گــو بـــه مــراتــب کــشــنــده تــر |
| *** | |
| اقـــبـــال، گـــلـــی از چـــمـــن نــیــت خـــیــرســـت | زاغ ار بــه ســرت ســایـه کــنــد بــال هــمــا گــیــر |
| *** | |
| ای دل بــــــــــــــی تـــــــــــــاب زاری واگـــــــــــــذار | گــــــریــــــه بـــــــا ابـــــــربـــــــهــــــاری واگــــــذار |
| کـــــی ز صــــــنـــــدل بــــــه شــــــود دردســــــرم؟ | نــــاصـــــحـــــا ایــــن چـــــوبـــــکـــــاری واگـــــذار! |
| *** | |
| رزق نــزدیــکــان حــق آیــد بـــه پــای خــویــشــتــن | از تـــردد در حـــرم بـــاشــد کــبـــوتـــر بـــی نــیــاز |
| *** | |
| رنــگ مــن کـــرده بـــه بـــال و پـــر عـــنــقـــا پـــرواز | نـیـسـت مـمـکـن کـه بـه چـنـدیـن بـط مـی آیـد بـاز |
| مــی شــود صــاحــب آوازه ز یـکــدســتــی، شــعــر | ایـن چــه حــرف اســت کـه یـک دسـت نـدارد آواز؟ |
| *** | |
| ســرو از قــد تـــو کــســـب رعــونــت کــنــد هــنــوز | خـــورشـــیــد از عــذار تـــو حـــیــرت کــنــد هــنــوز |
| از جـــوش بـــلـــبـــلـــان نــفـــس دام تـــنــگ شـــد | صــیــاد مــن ز بـــخـــت شــکــایــت کــنــد هــنــوز |
| *** | |
| چــون مـســیـحــا فــرد شــو دل زنـده جــاویـد بــاش | ســوزن از خــود دور کـن در دیـده خــورشـیـد بــاش |
| چـون کـدو بـرجـاسـت گـو مـیـنـای شـیـرازی مـبـاش | چون سفال از ماست گو جـام جم از جمشید بـاش |
| هـر ثــمـر ســنـگـی بــه قـصــد نـخــل دارد در بــغـل | ایمـنـی مـی خـواهی از سـنـگ حـوادث، بـید بـاش |
| *** | |
| مـسـت نـاز مـن چـنـیـن مـغـرور و بــی پـروا مـبــاش | پــادشــاه عــالـمـی، در حــکـم اســتــغـنـا مـبــاش |
| حـسـن چـون تـنها شـود، از چـشـم خـود دارد خـطـر | در تــمــاشــاخــانــه آیـیـنــه هــم تــنــهــا مــبــاش |
| *** | |
| یـوســف مـن از زلــیـخــا مــشــربــان دامـن بــکــش | سـر بـه کـنـعـان حـیـا چـون بــوی پـیـراهـن بــکـش |
| از کـجـی هـای تـو دشـمـن بــر تـو مـی یـابــد ظـفـر | راسـت بـاش و صـد الـف بـر سـینه دشـمـن بـکـش |
| *** | |
| ســـرمــه یــعـــقـــوب را مــالـــیــده گـــرد دامــنــش | دســت بــرده اسـت از یـد بــیـضـا بــیـاض گـردنـش |
| عــشــق در هــر دل کــه افــروزد چـــراغ دوســتـــی | بــرق چــون پــروانـه مـی گـردد بــه گـرد خـرمـنـش |
| *** | |
| کـاکـل او درهـم اسـت از شـورش سـودای خــویـش | از پـــریــشــانــی نــدارد زلــف او پـــروای خــویــش |
| نـشأه مـسـتــی ز عـمـر جــاودانـی خــوشـتــرسـت | خــضـر و آب زنـدگـانـی، مـا و تــه مـیـنـای خــویـش |
| در مـیـان هـر دو مـوزون آشــنـایـی مـعــنـوی اســت | سـرو تـا بـالـای او را دیـد جـسـت از جـای خـویش! |
| *** | |
| فــصــل گــل مـی گــذرد بــی قــدح و جــام مـبــاش | غــنــچــه مــنـشــیـن، گــره خــاطــر ایـام مــبــاش |
| گـل و سـنـبــل بــه از اســبــاب گـرفـتــاری نـیـسـت | گــر بــه گــلــزار روی بــی قــفــس و دام مــبـــاش |
| *** | |
| آن کـــه از چـــاک دل خـــویــش بـــود مـــحـــرابـــش | نــشـــود پـــرده نـــســـیــان عـــبـــادت خـــوابـــش |
| جـوش عـشـق از لـب مـن مهر خـموشـی بـرداشـت | ایـن نـه بـحـری اسـت کـه در حـقـه کـنـد گـردابـش |
| *** | |
| آه کــــان ســــرو گــــل انـــدام ز رعــــنــــایـــی هـــا | جــامـه را فـاخــتــه ای کـرده کـه نـشــنـاســنـدش |
| *** | |
| مــوجـــه ای کــو کــه ز دریــا نــبـــود مــا و مــنــش؟ | یــا حــبــابــی کــه نــه از بــحــر بــود پــیـرهــنــش |
| خـبــر یـوسـف گـم گـشـتــه مـا بــی خـبــری اسـت | وقـت آن خـوش کـه نـبـاشـد خـبـر از خـویشـتـنـش |
| *** | |
| خــرقـه ای دوخــتــم از داغ جــنـون بــر تــن خـویـش | نیست یک تـن بـه تـمامی چـو من اندر فن خـویش |
| ســــر مــــیـــنــــای مــــی و هــــمــــت او را نــــازم | کـه گـرفـتــه اسـت گـنـاه هـمـه بــر گـردن خـویـش |
| این چـه بـخـت است که هر خـار که گل کرد از خـاک | در دل آبـــلـــه مــن شـــکـــنــد ســـوزن خـــویــش |
| *** | |
| بـــه گــوشـــه قــفــس از آشـــیــانــه قــانــع بـــاش | نــه ای حــریــف مــیــان، بــا کــرانــه قــانــع بــاش |
| مـــریــض مــصـــلـــحـــت خـــویــش را نــمــی دانــد | بــه تــلــخ و شــور طــبــیـب زمــانــه قــانــع بــاش |
| *** | |
| از عــشــق اگــر لــاف زنــی دشــمــن کــیــن بــاش | بـا بـخـت سـیـه هـمـچـو سـیـاهـی و نـگـیـن بـاش |
| ای صـبــح مـزن خــنـده بــیـجــا، شـب وصـل اســت | گـر روشــنـی چــشــم مـنـی پــرده نـشـیـن بــاش |
| *** | |
| خـــــطــــی کــــه دمــــیــــد گــــرد رخـــــســـــارش | شــــد پــــرده گــــلــــیـــم چــــشــــم عــــیـــارش |
| بـــــــر خـــــــاطــــــر نــــــازکــــــش گــــــران آیــــــد | گـــــل تـــــکـــــیــــه زنــــد اگـــــر بـــــه دیــــوارش |
| *** | |
| تـــیــغــی کــه غــمــزه تـــو کــنــد ســایــه پـــرورش | ابــــریـــشـــم بـــریـــده شـــود زلـــف جـــوهـــرش |
| بـــی عـــشـــق، آه در جـــگـــر روزگـــار نـــیــســـت | خـاکسـتـری اسـت چـرخ که عشق است اخـگرش |
| دارد خــطــر ز جـــنــبـــش مــژگــان ســفــیــنــه اش | چــشــمـی کــه نـیـســت حــیـرت دیـدار لـنـگــرش |
| *** | |
| در گــرد خـــط نــهــان شــد روی عــرق فــشــانــش | خـــط غـــبـــار گـــردیــد دیــوار گـــلـــســـتـــانـــش |
| کــوتـــاه بـــود دســـتـــم تـــا داشـــت اخـــتـــیــاری | قــالــب چــو کــرد خــالــی شــد بــهـلــه مـیـانـش |
| آن شــوخ پــاکــدامــن تــا لــب ز بــاده تــر ســاخــت | بـــــوی امــــیــــدواری مــــی آیــــد از دهــــانــــش |
| *** | |
| هر که پیش از مرگ مرد از یک جهان غم شد خلاص | هر کـه بـیرون رفـت از عـالـم، ز عـالـم شـد خـلـاص |
| تــنـگــدســتــی راســت لــازم گــریـه بــی اخــتــیـار | تــاک تــاآورد بــرگ از چــشـم پــر نـم شـد خـلـاص |
| *** | |
| لــالــه آتـــش زبـــان افــروخــت در گــلــشــن چــراغ | بــعــد ازیـن در خــواب بــیـنــد دیـده روشــن چــراغ |
| از جـــبـــیـــن صـــورت دیـــوار آتـــش مـــی چـــکـــد | در چـنـیـن بــزمـی چــرا انـدیـشـد از مـردن چــراغ؟ |
| خــضـر دلـسـوزی نـمـی بــیـنـم دریـن صـحــرا، مـگـر | گــرم رفــتـــاری فــروزد پـــیــش پـــای مــن چـــراغ |
| *** | |
| هـر کـس کـه چــون صـدف دهـن خـویـش کـرد پــاک | لـــبـــریــز مـــی شـــود ز گـــهــرهــای تـــابـــنــاک |
| بـــی ســـجـــده مـــی کـــنــنــد نــمـــاز جـــنــازه را | مــگــذار پــیـش مــرده دلــان روی خــود بــه خــاک |
| *** | |
| زلــفــت ز کــجـــا و ز کــجـــا ســلــســلــه مــشــک | یــک تـــار ز زلــف تـــو و صـــد قـــافـــلــه مــشـــک |
| شـب تــا ســحــر از ســلـســلـه جــنـبــانـی زلـفـی | در کـــوچـــه زخـــمــم گـــذرد قـــافـــلــه مــشـــک |
| *** | |
| بـــازآ کـــه بـــی تـــو رنـــگ نــیــایــد بـــه روی گـــل | در جـــیـــب غـــنـــچـــه زنـــگ بـــرآورد بـــوی گـــل |
| در گــلــســتــان حــســن تــو از جــوش عــنـدلــیـب | تــنـگ اســت جــای بــال فـشــانـی بــه بــوی گـل |
| *** | |
| گــر چــه زنــگ خــاطــر تـــن پـــروران چـــون روزه ام | صـــیـــقـــل آیــیــنـــه روحـــانـــیـــان چـــون روزه ام |
| بــا گـرانـقــدری ســبــک در دیـده هـایـم چــون نـمـاز | بــا سـبــکـروحـی بـه خـاطـرهـا گـران چـون روزه ام |
| *** | |
| مــی تــراود وحــشــت از بـــوم و بـــر کــاشــانــه ام | دارد از چـــشــم غــزالــان حـــلــقــه در خـــانــه ام |
| دام زیـــر خـــاک ســـازد ســـیـــل بــــی زنـــهـــار را | بـس کـه بـاشـد گـرد کـلـفـت فـرش در کـاشـانه ام |
| *** | |
| دیـده از صـورت پــرســتــی بــســتــه بــود آیـیـنـه ام | نـوخــطــی دیـدم کـه بــازی کـرد دل در ســیـنـه ام |
| *** | |
| مــن کــه بــودم رونــق کــوی خــرابــات، ایــن زمــان | آفـــتــــاب شـــنـــبــــه و ابــــر شــــب آدیـــنـــه ام |
| *** | |
| جـلوه ای مسـتـانه زان گـلـگـون قـبـا می خـواسـتـم | زان گـلـسـتـان یـک نـسـیـم آشـنـا مـی خـواسـتـم |
| بــا گـواهـان لـبــاســی دعـوی خــون بــاطـل اســت | ورنـه خـون خـود ازان گـلـگـون قـبــا مـی خـواسـتـم |
| تـــا بـــه کــام دل چــو مــرکــز گــرد ســر گــردم تــرا | پــایـی از آهـن چــو پــرگـار از خـدا مـی خـواسـتــم |
| *** | |
| چــنـد زور آرد جــنـون بــر مـن، گــریـبــان نـیـســتــم | چــنـد بــی تــابــی کــنـم، آه غــریـبــان نـیـســتــم |
| عـهد خـوبـانم کـه می غـلطـم در آغـوش شـکـسـت | شـمـع صـبــحـم در پــی دلـسـوزی جـان نـیـسـتـم |
| *** | |
| تــیـغ کــوه هـمــتــم، دامـن ز صــحــرا مـی کــشــم | مـی روم تــا اوج اســتــغــنـا، دگــر وا مـی کــشــم |
| تـا دهن بـازسـت چـون پـیمـانـه مـی نـوشـم شـراب | چون سبـو تا دست بـر تن هست صهبـا می کشم |
| *** | |
| پــرده بــر حــســن عــمـل از دامـن تــر مـی کـشــم | چــون صــدف دامـان تــر در آب گـوهـر مـی کـشــم |
| مـهـر گــل را بــر گــلـاب انـداخــتــن کــار مـن اســت | نـاز آن لـبــهـای مـیـگـون را ز ســاغــر مـی کـشــم |
| *** | |
| در لـبــاس از سـیـنـه تــفـسـیـده آهـی مـی کـشـم | شـمع فـانوسـم نفـس در پـرده گـاهی می کـشـم |
| گـر چـه از مـشـق جـنون افـتـاده ام چـون خـامـه بـاز | کـار هـر جــا بــر سـر افـتــد مـد آهـی مـی کـشـم |
| صـحــبــت خــلـق اسـت مـجــنـون مـرا بــر دل گـران | خـویـش را از کـام شـیـران در پـنـاهـی مـی کـشـم |
| *** | |
| چــون نـظــر بــر روی آن دشــمـن مـروت مـی کــنـم | از بــهــار گــریـه گــلــریـزان حــســرت مــی کــنــم |
| تـا بـه کـی چـون جـام می عـمرم بـه گردش بـگذرد؟ | مـدتــی در پــای خــم قــصــد اقــامــت مـی کــنـم |
| *** | |
| گـریـه را بــی طـاقـتــی آمـوخــتــن حــق مـن اسـت | در دو مجـلس قطـره را همچـشـم طـوفان می کنم |
| دیــده افـــســـردگـــان گــرمــی ز آتـــش مــی بـــرد | داغ را در رخــنـه هـای ســیـنـه پــنـهـان مـی کـنـم |
| *** | |
| نیسـت ناخـن در کـف و مشـکـل گـشـایی می کـنم | کـار عـالـم را بـه این بـی دسـت و پـایی مـی کـنـم |
| نـیـســت مـانـنـد ســپــنـد از سـوخــتــن فـریـاد مـن | دور گــردان را بــه آتــش رهـنــمــایـی مــی کــنــم |
| *** | |
| (تــا بــه چــنــد از گــریــه آزار دل جــیــحــون دهــم؟ | از دعــــای بــــی اثــــر دردســــر گــــردون دهـــم) |
| (آشــیـانـی مـی تــوانـم ســاخــت در کـنـج قــفــس | گــر ز دل ایــن خــارخــار رشــک را بـــیــرون دهــم) |
| *** | |
| در دل اســت آن کـس کـه از نـادیـدنـش دیـوانـه ایـم | آن کــه مــا را دربــدر دارد بــه او هــمــخــانــه ایــم |
| بــی تــکــلـف یـار خــود را تــنـگ در بــرمـی کــشــد | مـــا در آیــیـــن مـــحـــبـــت امـــت پـــروانـــه ایـــم |
| *** | |
| مـا بـه زور اشـک، مـوج از روی جـیـحـون مـی بــریـم | چـیـن جـوهـر از جــبــیـن تــیـغ بــیـرون مـی بــریـم |
| مـنـع مـا دریـاکـشــان ای زاهـدان از ابــلـهـی اســت | مــا گــلــیـم خــویـش را از آب بــیــرون مــی بــریـم |
| *** | |
| چــون بــه دریــا روی بــا ایـن دیــده پــر نــم کــنــیـم | حــلــقــه گــرداب هــا را حــلــقــه مــاتــم کــنــیــم |
| پــیـش ازان کـز یـکـدگـر ریـزیـم چــون قـصــر حــبــاب | خــیــز تـــا چــون مــوجــه دریــا وداع هــم کــنــیــم |
| *** | |
| ز کـویـت رفـتـم و الـمـاس طـاقـت بــر جـگـر بـسـتـم | تـو بـا اغیار خـوش بـنشین که من بـار سفر بـستـم |
| هـمـان بـهـتـر کـه روگـردان شـوم از خـیل مـژگـانـش | به غیر از خون دل خوردن چه طرف از نیشتر بـستم |
| بــه هـر چــوب قــفــس پــیـونـد دیـگــر بــود بــالـم را | بــه زور ایـن قـوت پــرواز را بــر بــال و پــر بــســتــم |
| *** | |
| بــه مـی گـرد مـلـال از چــهـره دل پــاک مـی کــردم | ز هـر پــیـمـانـه ای خــون در دل افـلـاک مـی کـردم |
| دریـن ظـلـمـت سـرا مـی یـافـتــم گـم کـرده خــود را | اگــر صـــبـــح بـــنــاگــوش تـــرا ادراک مــی کــردم |
| *** | |
| من آن بـخـت از کـجـا دارم کـه بـا او همسـفـر گردم؟ | زهـی دولـت اگـر در رهـگـذارش پــی ســپــر گـردم |
| همان خـجـلت کـشـم، بـا عـمر جـاویدان اگر خـواهم | بــه قـدر گـرد دل گـشــتــن تــرا بــرگـرد ســرگـردم |
| *** | |
| بـه بـوسـی قـانـع از لـبـهـای شـکـربــار چـون گـردم؟ | ازیـن قــنـد مـکـرر ســیـر مـن یـکـبــار چــون گـردم؟ |
| ز بــوی گــل گــرانـی مـی کــشــد نـازک نـهـال مــن | بـه چـنـدین کـوه غـم بـر خـاطـر او بـار چـون گـردم؟ |
| *** | |
| نــمــی کــردم بـــه نــیــرنــگ خــزان تــرک وفــاداری | اگــر روی دلــی از غــنــچــه ایــن بــاغ مــی دیــدم |
| *** | |
| فـضـای چـرخ تــنـگـی مـی کـنـد بــر مـغـز پــرشـورم | قــبــای دار کــوتــاه اســت بــر بــالــای مــنــصــورم |
| چـنـان بــاریـک بــیـن گـردیـده ام از عـاقـبــت بـیـنـی | کـه جـوی شـهـد آیـد در نـظـر چـون نـیـش زنـبــورم |
| ز صــحــرای شــکــرریـز قــنــاعــت گــوشــه ای دارم | کــه آیـد در نـظــر مــلــک ســلــیـمــان دیـده مـورم |
| *** | |
| مـن آن رنـدم کـه راز دل ز لـوح سـیـنـه مـی خــوانـم | خـط جـوهـر ز پــشـت صـفـحـه آیـیـنـه مـی خـوانـم |
| نـمـی سـازد اجـل از گـفـتـگـوی عـشـق خـامـوشـم | من آن طـفلم که درس خـویش در آدینه می خـوانم |
| *** | |
| بـــر ســر خــوان امــل دســت هــوس مــی بـــنــدم | در شـــکـــرزار، پـــر و بـــال مــگـــس مــی بـــنــدم |
| شـــوق در هــیــچ مـــقـــامــی نــکـــنــد آســـایــش | در گــلــســتــانــم و احــرام قــفــس مــی بـــنــدم |
| *** | |
| نـــتــــوان کـــرد بــــه زنـــدان بــــدن مـــحــــصــــورم | شـــیــشـــه را مــی شـــکـــنــد زور مــی پـــرزورم |
| در نــمــکــدان ز نـمــکــزار چــه خــواهـد گــنــجــیـد؟ | چــه کــنــد حــوصــلــه تــنــگ فــلــک بــا شــورم؟ |
| بـــس کــه آمــیــخــتــه نــیــش بــود نــوش جــهــان | دیـــدن شــــهـــد فـــزون مـــی گـــزد از زنـــبــــورم |
| *** | |
| جــذبـــه ای کــو کــه ازیــن نــشأه بـــه پــرواز آیــم؟ | ســــبــــک از پــــلــــه انـــجــــام بــــه آغــــاز آیـــم |
| صــبــح مــحــشــر نـفــس بــیـهـده ای مــی ســوزد | نــه چــنــان رفــتــه ام از خــود کــه دگــر بـــاز آیــم |
| *** | |
| گــر چــه خــاکــیـم پــذیــرای دل و جــان شــده ایـم | چــون زمــیـن آیـنــه حــســن بــهــاران شــده ایــم |
| در ســر کـوی خــرابــات ســبــکـدســتــی نـیـســت | ورنه عـمری اسـت که از تـوبـه پـشـیمان شـده ایم |
| *** | |
| اگـــــر ســـــیـــــاه دلـــــم داغ لـــــالـــــه زار تـــــوام | اگـــر گـــشـــاده جـــبـــیــنـــم گـــل بـــهـــار تـــوام |
| اگــر چــه چــون ورق لــالــه نـامــه ام ســیـه اســت | بــه ایـن خــوشــم کــه جــگــرگـوشــه بــهـار تــوام |
| چـــرا عــزیــز نــبـــاشــم، نــه خــار ایــن چــمــنــم؟ | ســرم بـــه عــرش نــســایــد چـــرا، غــبـــار تـــوام |
| *** | |
| دلــی گـــرفـــتـــه تـــر از غـــنــچـــه در بـــغـــل دارم | بـــه چـــشـــم آبـــلـــه بـــا خـــار بـــن جـــدل دارم |
| ز بــس کـه سـیـنـه ام از کـیـنـه جـهـان صـاف اسـت | گـــمـــان بــــرنـــد کـــه آیـــیـــنـــه در بـــغـــل دارم |
| *** | |
| خـــدنــگ او نــظــری دوخـــتـــه اســـت بـــر بـــالــم | امــیــد هــســت گــشــادی ز شــســت اقــبــالــم |
| در آشـــیـــان بــــه خـــیـــال تـــو آنـــقـــدر مـــانـــدم | کــه غـــنــچـــه شـــد گــل پـــرواز در پـــر و بـــالــم |
| *** | |
| شـــکـــار جـــذبـــه تـــوفـــیــق شـــد گـــریــبـــانـــم | دگـــر چــــه خــــار تــــوانـــد گـــرفـــت دامـــانـــم؟ |
| بـــه کـــوی دوســـت رســـیــدم ز راه ســـاده دلــی | ز جـــیـــب کـــعـــبـــه بـــرآورد ســـر بـــیـــابـــانـــم |
| مـــرا بـــه رد و قـــبـــول زمـــانــه کـــاری نــیــســـت | چــو چــشــم آیــنــه در خــوب و زشــت حــیــرانــم |
| *** | |
| ســتــم بــه خــویــش ز کــوتــاهــی زبـــان کــردیــم | بــه هــر چــه شــکــر نــکــردیــم، یــاد آن کــردیــم |
| بــنــای خــانـه بــه دوشــی بــلــنــدکــرده مــاســت | قــفــس نــبـــود کــه مــا تـــرک آشـــیــان کــردیــم |
| *** | |
| بـــرون ز شــیــشــه افــلــاک هــمــچــو رنــگ زدیــم | بــه عـالـمـی کـه در او رنـگ نـیـسـت چــنـگ زدیـم |
| شـــکـــســـت بــــر دل مـــا آن زمـــان گـــوارا شـــد | کــه مــومــیــایــی احــبـــاب را بـــه ســنــگ زدیــم |
| *** | |
| کــمــنــد زلــف تــرا چــون بــه خــویـش رام کــنـیـم؟ | بـــه راه دام تـــو در خـــاک چـــنـــد دام کـــنـــیــم؟ |
| ســپــهـر تــیـغ مـکــافــات بــر کـف اســتــاده اســت | چــه لـازم اســت کــه مـا فــکــر انـتــقــام کــنـیـم؟ |
| اگــر چـــه پـــخـــتـــگــیــی نــیــســت کــارفــرمــا را | چــه لـازم اسـت کـه مـا کـار خـویـش خـام کـنـیـم؟ |
| *** | |
| بـــه هــفـــت آب، دهــن از شـــراب مـــی شـــویــم | دگــر ز تــوبــه بــه مـشــک و گــلــاب مـی شــویـم |
| شـکـســتــه بــالـی عـصـیـان کـلـیـد فـردوس اسـت | ز نـــامـــه عـــمـــل خـــود ثــــواب مـــی شـــویـــم |
| *** | |
| فـــرهــادم و ثـــبـــات قــدم هــســـت پـــیــشـــه ام | نــاخـــن دوانــده در جـــگــر ســـنــگ تـــیــشــه ام |
| از بـــخــت شــور در نــمــک آبـــم چــو مــغــز تـــلــخ | مــی روتــرش کــنــد چــو درآیــد بــه شــیـشــه ام |
| از نــــاخـــــن آب دشـــــنــــه الــــمــــاس بـــــرده ام | فــرهـاد را بــه کــوه جــهـانــده اســت تــیـشــه ام |
| *** | |
| صــد خــنــده واکــشــم ز تــو تــا تــرک جــان کــنــم | در خــــون صـــد بــــهـــار روم تــــا خــــزان کـــنـــم |
| تــیـغــش ز ســخــت جــانـی مــن کــنـد اگــر شــود | لــوح مــزار خـــویــش ز ســـنــگ فـــســـان کــنــم |
| *** | |
| در کــار عــشــق ســعــی چــو فــرهـاد مــی کــنــم | مــشــق جــنـون بــه خــامــه فــولــاد مــی کــنــم |
| تـــا فــکــر کــرده اســـت مــرا بـــر ســـخـــن ســوار | در کـــوه قــــاف صــــیـــد پــــریـــزاد مـــی کــــنـــم |
| *** | |
| گــاهــی بـــه کــوه و گــاه بـــه صــحـــرا نــمــی روم | چــون سـیـل بــی حـجــاب بــه هـر جــا نـمـی روم |
| در کـــوهـــســـار ســـنـــگ مـــلـــامـــت مـــجـــاورم | مــجــنـون صــفــت بــه دامــن صــحــرا نــمــی روم |
| نـــقــــش فــــنــــا در آیـــنـــه خــــشــــت دیـــده ام | هـــرگــــز پــــی عــــمــــارت دنـــیـــا نـــمــــی روم |
| *** | |
| کـــو مـــی کـــه اخـــتـــیــار خـــرد را بـــه او دهـــم؟ | مـسـتـانـه دسـت خـویـش بـه دسـت سـبــو دهـم |
| بــر هــر طــرف کــه مــی نــگــرم حــشــر آرزوســت | زلــــف تـــــرا بـــــه دســـــت کـــــدام آرزو دهــــم؟ |
| *** | |
| دل را بـــه زلــف حــســن شــمــایــل نــمــی دهــم | تـــا دل نـــمـــی دهــنـــد مـــرا دل نـــمـــی دهــم |
| ایــن گــردن ضـــعـــیــف ســـزاوار تـــیــغ نــیــســـت | در قــتــل خــویـش زحــمــت قــاتــل نــمــی دهــم |
| *** | |
| حــاشــا کــه دل بــه نــاز و نــعــیــم جــهــان نــهــم | مــرغــی نــیـم کــه بــیـضــه دریـن آشــیـان نــهــم |
| چــون صـبــح بــس کـه پــرده دری دیـده ام ز خــلـق | تـــرســـم کــه راز بـــا دل شـــب در مــیــان نــهــم |
| خــاکــم کــه ســیـنـه ام هـدف تــیـر عــالــم اســت | گــردون نـیـم کــه بــا هـمـه کــس در کــمـان نـهـم |
| *** | |
| از شــرم عــشــق دیــده خــونــبـــار بـــســتــه ایــم | ســـدی مـــیـــان دیـــده و دیـــدار بـــســـتـــه ایــم |
| جــز آه، تــخــم ســوخــتــه را نـیـســت خــوشـه ای | مــا دل عــبـــث بــه خــال لــب یــار بــســتــه ایــم |
| *** | |
| پــیــش قــضــا طــلــســم ز تــدبــیــر بــســتــه ایــم | ســد شــکــر بــه رهــگــذر شــیــر بـــســتــه ایــم |
| مـــجـــنـــون خـــانــه زاد بـــیــابـــان وحـــشـــتـــیــم | دیـوانـگـی بــه خــود نـه بــه زنـجــیـر بــسـتــه ایـم |
| حـــاشـــا کــه زخـــم مــا دهــن شـــکــوه وا کـــنــد | خــود بــر مـیـان نـاز تــو شــمـشـیـر بــســتــه ایـم |
| *** | |
| دام امـــــیـــــد در ره ایـــــام بــــــســـــتــــــه ایـــــم | در رهــگــذار ســیــل ز خـــس دام بـــســتـــه ایــم |
| بــــر دســــت روزگــــار روان اســــت حــــکــــم مــــا | تــا لـب ز گــفــتــگــو چــو لـب جــام بــســتــه ایـم |
| عـشــق آن حــریـف نـیـســت کـه صـیـد زبــون کـنـد | خــود را بــه زور بـــر قــفــس و دام بـــســتــه ایــم |
| *** | |
| راه نـــشـــاط بــــر دل دیـــوانـــه بــــســــتــــه ایـــم | مـــا راه آشـــنــایــی بـــیــگـــانــه بـــســـتـــه ایــم |
| از چــشــم زخــم تــوبـــه مــبـــادا شــکــســتــه دل | عـهـدی کـه مـا بـه شـیشـه و پـیمـانـه بـسـتـه ایم |
| غــیـرت شــهــیـد بــی ادبــی هــای طــرز مــاســت | از مــوم، نــخــل مــاتـــم پـــروانــه بـــســتـــه ایــم |
| *** | |
| از خـــط بـــه مــهــربـــانــی مــا بـــدگــمــان مــشــو | مــا بــا لــبــت نـمــک بــه حــرامــی نــخــورده ایـم |
| *** | |
| رفــتـــیــم و کــوی او بـــه رقــیــبـــان گــذاشــتــیــم | خـوش کـعـبــه ای بــه خــار مـغـیـلـان گـذاشـتــیـم |
| آب نــمــک شـــنــاســـی و رنــگ حـــیــا نــداشـــت | لــعـــل لــب تـــرا بـــه رقـــیــبـــان گـــذاشـــتـــیــم |
| *** | |
| گــــرم نــــصــــیــــحــــت دل دیــــوانــــه خــــودیــــم | ســنــگــیـم و در کــمــیـنــگــه پــیـمــانــه خــودیـم |
| هــمـــت بـــلـــنــد مـــرتـــبـــه از آبـــروی مـــاســـت | مــا خــوشــه چــیـن خــرمــن بــی دانــه خــودیــم |
| *** | |
| چـــون گــل پـــی رنــگــیــنــی دســتـــار نــبـــاشــم | چـــون آب روان تــــشـــنـــه رفـــتــــار نـــبــــاشـــم |
| اشــکــم کــه بــه هـر تــنـگ نـظــر گــرم نـجــوشــم | آهــم کــه بـــه هــر ســـردنــفــس یــار نــبـــاشــم |
| نــــاقــــوس غــــریـــبــــانــــه بــــه فــــریـــاد درآیـــد | آن روز کــــه در حــــلــــقــــه زنــــار نــــبـــــاشــــم |
| زیــن شـــهـــر چـــرا روی بـــه صـــحـــرا نـــگـــذارم؟ | دیــوانــه شـــدم، چـــنــد گـــرفـــتـــار نــبـــاشـــم؟ |
| *** | |
| مــا را بـــه تـــو شـــد راهــنــمــا راهــبـــر چـــشـــم | چــون اشــک نــگــردیـم چــرا گــرد ســر چــشــم؟ |
| فــریــاد مــن از دســت پــریـشــان نــظــریـهــاســت | چـــون نــای بـــود نــالــه ام از رهــگـــذر چـــشـــم |
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| مــا حــســرت دیـدار تــو در ســیـنـه شــکــســتــیـم | ایــن خــار هــوس در دل آیــیــنــه شــکــســتـــیــم |
| زهـــاد شـــکـــســـتـــنـــد اگـــر شـــیــشـــه مـــا را | مــا نــیـز طــلــســم شــب آدیـنــه شــکــســتــیـم |
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| دلــبـــســتـــگــیــی بـــا دل بـــی کــیــنــه نــداریــم | آن روز دل از مــاســـت کـــه در ســـیــنــه نــداریــم |
| ای صـــافـــدلـــان عـــیــب مــرا فـــاش بـــگـــویــیــد | مـــــا روی دل امـــــیــــد ز آیــــیــــنــــه نــــداریــــم |
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| مـــا داغ جـــنـــون را بـــه ســـویــدا نـــفـــروشـــیــم | یــک نــالـــه زنــجـــیــر بـــه دنــیــا نــفـــروشـــیــم |
| تــــنـــگ اســــت ســــواد نـــظــــر مـــردم عــــالـــم | تـــا جـــنــس فــراوان نــشـــود مــا نــفــروشـــیــم |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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