گـــر چـــنــیــن ابـــروی او ره مــی زنــد اصـــحـــاب رارفــتــه رفــتــه طــاق نـســیـان مـی کـنـد مـحــراب رااز شــبــیـخــون حــوادث عــشــقــبــ…
| گـــر چـــنــیــن ابـــروی او ره مــی زنــد اصـــحـــاب را | رفــتــه رفــتــه طــاق نـســیـان مـی کـنـد مـحــراب را |
| از شــبــیـخــون حــوادث عــشــقــبــازان غــافــلــنــد | مــی کــنــد خــون در جــگــر صــیـد حــرم قــصــاب را |
| ســیـر چــشــمـان خــیـال از فـکـر وصـل آســوده انـد | مــی گــزد مــی شــیــرمــســت پــرتــو مــهــتــاب را |
| *** | |
| ســـرگـــرانــی مـــانــع اســـت از آمـــدن تـــیــر تـــرا | انــتـــظــار تـــیــر خــواهــد کــشــت نــخــجــیــر تـــرا |
| تــرک خــونـریـزی نـمـی گـویـی، هـمـانـا عــاشــقـان | داده انـــد از دیـــده خــــود آب، شـــمـــشـــیـــر تــــرا |
| *** | |
| تــا نــگــیــرم بـــوســه از لــب گــلــعــذار خــویــش را | نــشــکــنـم از چــشــمــه کــوثــر خــمــار خــویـش را |
| چــون کـنـد بــرق تــجــلـی پــای شــوخــی در رکـاب | کــــوه نـــتــــوانـــد نـــگــــه دارد وقــــار خــــویـــش را |
| *** | |
| آتـــش افـــروز جـــنــون شـــد دامـــن صـــحـــرا مـــرا | طــشــت آتــش ریـخــت بــر ســر لــالــه حــمــرا مـرا |
| هــر ســر راهــی بــه آگــاهــی حــوالــت کــرده انــد | نـــالـــه نـــی شــــد دلـــیـــل عــــالـــم بــــالـــا مـــرا |
| نـیـسـت در بــزم تــو جــایـم، ورنـه در هـر مـحــفـلـی | مــی جــهـد از جــا ســپــنـد و مـی نـمــایـد جــا مــرا |
| *** | |
| چـــنــد دارم در بـــغـــل پـــنــهــان دل افــســـرده را؟ | چــــنـــد در فــــانـــوس دارم ایـــن چــــراغ مـــرده را؟ |
| ســیـر گـلـشـن بــی دمـاغـان را نـمـی آرد بــه حــال | ســـایـــه گـــل مـــی کـــشـــد در خــــون دل آزرده را |
| *** | |
| پـیـش رویـش چـون کـنـم مـنـع از گـرسـتـن دیـده را؟ | چـون کـنـم در شـیـشـه این سـیـمـاب آتـش دیـده را؟ |
| در ســر آن زلــف بــی بــخــت رســا نــتــوان رســیـد | چــاره شــبــگــیـر بــلــنــدســت ایـن ره خــوابــیـده را |
| *** | |
| بــی نـگـاه مـن نـشـد در عـشـق مـعـشـوقـی تـمـام | صـــحـــبــــت فـــرهـــاد آدم کـــرد ســـنـــگ خـــاره را |
| *** | |
| نــیــســت ظــرف راز عــشــق او حــریـم ســیـنــه را | آب ایـن گـوهـر بــه طــوفــان مـی دهـد گــنـجــیـنـه را |
| در دل مـن نـقـش چـون گـیـرد، کـه بــا خـود مـی بـرد | شـــوخـــی عـــکـــس تـــو دام جـــوهـــر آیــیــنـــه را |
| *** | |
| ســـر بـــه دیــوار نــدامــت مــی زنــد تـــدبـــیــر مـــا | راه بـــیـــرون شـــد نـــدارد کـــوچـــه زنـــجـــیـــر مـــا |
| گــریــه هــای تــلــخ مــا را چــاشــنــی دیــگــر بـــود | از شــکـر پــیـوســتــه لـبــریـزســت جــوی شــیـر مـا |
| *** | |
| کــام خـــود از کــوشــش امــیــد مــی گــیــریــم مــا | بــخــت اگــر بــاشــد نـبــات از بــیـد مـی گــیـریـم مـا |
| خــون مــا افــتـــادگــان را کــی تــوان پـــامــال کــرد؟ | خــونـبــهـای شــبــنـم از خــورشـیـد مـی گـیـریـم مـا |
| *** | |
| تـــا ز زیــر ســنــگ مــی آیــد بـــرون مــجـــنــون مــا | مـحــمـل لــیـلـی بــرون رفــتــه اســت از هـامـون مـا |
| عــارفــان را کــنــج تـــنــهــایــی بـــود بـــاغ و بـــهــار | در خـم خــالـی چــو مـی مـی جــوشـد افـلـاطـون مـا |
| *** | |
| ازان پــیـوســتــه مــی لــرزد دل از پــاس قــدم مــا را | که ناموس سـپـاهی هسـت بـر سـر چـون عـلم ما را |
| شـکسـت دشـمن عـاجـز دلی از سـنگ می خـواهد | وگــرنـه نـیـســت از خــار مــلــامــت پــای کــم مــا را |
| *** | |
| (ســپــنـدی شــد عــقـیـق صــبــر در زیـر زبــان مـا را | بـه داغ تـشـنـگـی تـا چـنـد سـوزی زان لـبـان مـا را؟) |
| (کـمـان بــیـکـار گـردد چـون هـدف از پـای بــنـشـیـنـد | نـه از رحــم اســت اگـر بــر پــای دارد آسـمـان مـا را) |
| *** | |
| یکـی صـد شـد ز گلچـین بـرگ عـشـرت گلشـن ما را | حـــمــایــت کــرد مــور از بـــرق آفــت خـــرمــن مــا را |
| ز صـرصـر گـر چـه می پـاشـد ز هم جـمـعـیت خـرمـن | حــصــار عــافــیـت شــد بــاد دســتــی خــرمـن مـا را |
| *** | |
| فــروغ عــارضــت پــروانــه ســازد شــمــع بــالــیـن را | پــر پــرواز گـردد چـشـم شـوخـت خـواب سـنـگـیـن را |
| ز تــاراج هــوســنــاکــان بــود ایـمــن گــلــســتــانــت | کـه شـرمت پـای خـواب آلود سـازد دسـت گـلچـین را |
| *** | |
| بـه خـودسـازی بـدل کن ای سیه دل خـانه سـازی را | کـه جــز گـرد کـدورت نـیـسـت حــاصـل خــاکـبــازی را |
| هــدف از تــیــر بـــاران ســیــنــه پــر رخــنــه ای دارد | خــطــر بــســیـار بــاشــد در کـمـیـن گـردن فــرازی را |
| مرا بـا حـسـن روزافزون او عـیشـی اسـت بـی پـایان | کـه در هـر دیـدنـی مـی گـیرم از سـر عـشـقـبـازی را |
| *** | |
| ز هـجــران کــه دارد لــالــه داغــی دلــســیـاهـی را؟ | غـزال دشـت از چــشـم کـه دارد خــوش نـگـاهـی را؟ |
| مــکــن در عــشــق مــنــع دیــده بــیـدار مــا نــاصــح | بــه خــواب از دســت نـتــوان داد ذوق پــادشـاهـی را |
| ز شـوق خـال مشـکـینش بـه گـرد کـعـبـه می گـردم | کـه ره گم کـرده خـضـری می شـمارد هر سـیاهی را |
| اگـر فـردای مـحــشـر عـفـو مـیـر عـدل خــواهـد شــد | کـه ثـابــت مـی کـنـد بــر خـود گـنـاه بـی گـنـاهـی را |
| *** | |
| نــگــه دارد خـــدا آن ســـیــمــتـــن را از گـــزنــد مــا! | کــه اخــگــر در گــریــبــان دارد آتــش از ســپــنــد مــا |
| ز گــیــرودار مــا آســوده بــاش ای آهــوی وحــشــی | کـه از بـس نـارسـایـی چـیـن نـمـی گـیـرد کـمـنـد مـا |
| *** | |
| بـــزم عــشـــق اســـت مــیــا از در عــادت بـــه درون | شــیــوه مــردم بـــیــگــانــه ســلــام اســت ایــنــجــا |
| طـــالــعـــی کـــو کـــه گـــشـــایــم در گـــلــزار تـــرا؟ | مــغـــرب بـــوســـه کــنــم مــشـــرق گــفـــتـــار تـــرا |
| نـیـســت مـمـکـن کـه بــه تــدبــیـر تــوان کـرد عـلـاج | دل بــــیـــمـــار مـــن (و) نـــرگــــس بــــیـــمـــار تــــرا |
| *** | |
| جــان مــن رفــتــن ازیـن ســیـنـه بــی کــیـنـه چــرا؟ | روی گـــردان شـــدن از صـــحـــبـــت آیــیــنـــه چـــرا؟ |
| مـیـفــروشــان بــه خــدا عــالـم درویـشــی هـاســت | نــگــرفــتــن بـــه گــرو خــرقــه پـــشــمــیــنــه چــرا؟ |
| *** | |
| گــل روی تــو چــو شــبــنــم نــگــران ســاخــت مــرا | خـــار در پـــیـــرهـــن چـــشـــم تـــر انـــداخـــت مـــرا |
| ســرکـشــی از نـمـد فــقــر نـکــردم، بــه چــه جــرم | ســـایــه بـــال هــمـــا در قـــفـــس انــداخـــت مـــرا؟ |
| *** | |
| نــه چــنــان تــنــگ گــرفــتــه اســت دل تــنــگ مــرا | کــــه بـــــرآرد ز کــــدورت مــــی گــــلــــرنــــگ مــــرا |
| نـیـســت در عــالـم افــســرده جــگــرســوخــتــه ای | بـــه چـــه امـــیــد بـــرآیــد شـــرر از ســـنـــگ مـــرا؟ |
| *** | |
| تـــا بـــه کـــی دور بـــود ســـایـــه ابـــراز ســـر مـــا؟ | خــشــک بــاشــد لــب مــا چــون جــگــر ســاغــر مـا |
| شــعــلـه پــیـش جــگــر ســوخــتــه مـا خــام اســت | بـــــال پــــروانــــه بــــود یــــک ورق از دفــــتــــر مــــا |
| *** | |
| رخـــنــه در ســـنــگ کــنــد نــاخـــن انــدیــشــه مــا | پـــنــجــه در پـــنــجــه الــمــاس کــنــد تــیــشــه مــا |
| بـــــاده روح در او نــــشأه مــــاتـــــم بـــــخـــــشـــــد | مــگــر از ســـنــگ مــزارســـت گــل شـــیــشـــه مــا |
| *** | |
| صــیـقــلــی مــی شــود از زخــم زبــان ســیـنــه مــا | دم شـــمـــشـــیـــر بـــود صـــیـــقـــل آیـــیـــنـــه مـــا |
| بـــی قـــدح راه بـــه غـــیــب دهــن خـــود نــبـــریــم | عـــــالـــــم آب بـــــود خـــــلـــــوت آیــــیــــنــــه مـــــا |
| هــر کــه نــاخــن بـــه جــگــرکــاوی مــا تــیــز کــنــد | مــاه عــیــدســت بــه چــشــم دل بــی کــیــنــه مــا |
| *** | |
| رنـــــگ بــــــر روی گــــــل آیـــــد ز وفــــــاداری مـــــا | ســـرو بــــر خــــویـــش بــــبــــالـــد ز هـــواداری مـــا |
| بــــه دم عــــیـــســــی اگـــر نـــاز کـــنـــد جــــا دارد | نـســخــه از چــشــم تــو بــرداشــتــه بــیـمــاری مــا |
| (آنـــقـــدر در دهـــن تـــیـــغ تـــغـــافـــل بـــاشـــیـــم | کآورد خــــوی تــــو ایــــمــــان بـــــه وفــــاداری مــــا) |
| *** | |
| زهـــی رخ تــــو نـــمــــوداری از بــــهـــشــــت خــــدا | نــــهــــال قــــد تـــــو بـــــرهــــان عــــالــــم بـــــالــــا |
| گـرفــتــه راهـی عــشــق از مـلـال خــاطــر مـاســت | حــــبــــاب در گــــره افــــکــــنــــده کــــار ایـــن دریـــا |
| خــوشــا کـســی کـه ازیـن تــنـگـنـای بــی حــاصــل | بـــه خــاک بـــرد دلــی هــمــچـــو ســیــنــه صــحــرا |
| ســــیـــاه روز چــــو فــــانــــوس بــــی چــــراغ بــــود | درون پـــرده چـــشــمــی کــه نــیــســت نــور حـــیــا |
| *** | |
| (مـــده ز دســـت دریــن فـــصـــل جـــام صـــهــبـــا را | کــه مـوج لــالــه بــه مـی شــســت روی صــحــرا را) |
| (جــنــون مــا بــه نــســیـم بــهــانــه ای بــنــدســت | بـــس اســـت آتـــش گـــل دیــگـــجـــوش ســـودا را) |
| *** | |
| اســیــر ســـاخـــت بـــه یــک خـــنــده نــهــان مــا را | گـــشــــاده رویـــی گـــل کــــرد بــــاغــــبــــان مـــا را |
| وصـــال او بـــه نـــســـیــم مـــلـــامـــت ارزان اســـت | تــــفـــاوتــــی نـــکـــنـــد حـــرف بــــاغـــبــــان مـــا را |
| *** | |
| در زیــر بـــار مـــهـــره گـــل نـــیــســـت دســـت مـــا | ز اشــک تــاک ســبـــحــه کــنــد مــی پـــرســت مــا |
| نــه گــوشـــه کــلــاه و نــه زلــف و نــه تـــوبـــه ایــم | خــوبــان چــه بــســتــه انـد کـمـر در شـکـســت مـا؟ |
| *** | |
| غـــافـــل مـــشـــو ز رتـــبـــه شـــوق بــــلـــنـــد مـــا | از ســـاق عـــرش (حـــلــقـــه) ربـــایــد کــمــنــد مــا |
| بـــی طـــاقـــتـــان شـــوق، هــلـــاک بـــهــانــه انـــد | از مـــاهــتـــاب ســـوخـــتـــه گـــردد ســـپـــنـــد مـــا |
| *** | |
| قــانــع بــه جــرعــه نــیـســت لــب مــیـگــســار مــا | مـــیـــخــــانـــه را بــــه آب رســــانـــد خــــمــــار مـــا |
| ای جــلــوه نــســیـم تــرحــم چــه کــوتــهـی اســت | در غـــنـــچـــه زنــگ بـــســـت گـــل اعـــتـــبـــار مـــا |
| از نـخــل مـوم صــد گـل رنـگـیـن شــکـفـت و ریـخــت | یــک بـــرگ ســـبـــز ســـر نــزد از شـــاخـــســـار مــا |
| امـشــب کـه آمـده اســت بــه کـف ســیـب آن ذقــن | خــالــی اســت جــای شــیـشــه مــی در کــنــار مــا |
| *** | |
| تـــا کــی بـــه شــعــلــه ای نــزنــد جــوش داغ مــا؟ | پـــیــش از فــتـــیــلــه چـــنــد بـــســوزد چـــراغ مــا؟ |
| ای مـحــتــســب بــه تــوبــه قــســم مـی دهـم تــرا | کـــایــن مـــوســـم بـــهـــار مـــخـــور بـــر دمـــاغ مـــا |
| (حـــســـرت بـــه نــور ذره و عـــمــر شـــرر کـــشـــد | یــــارب کــــســــی مــــبـــــاد بــــه روز چــــراغ مــــا) |
| *** | |
| (مــــردانـــه ازیـــن خــــرقــــه ســــالــــوس بــــرون آ | زن نـــیـــســــتــــی، از پــــرده نــــامــــوس بــــرون آ) |
| (پـــر در پـــر هـــم بــــافـــتـــه پـــروانـــه و بـــلـــبـــل | ای شــــمــــع گــــل انــــدام ز فــــانــــوس بــــرون آ) |
| *** | |
| از نـــغـــمـــه عـــشـــاق چـــه ذوق اهــل هــوس را؟ | از نــالــه بـــلــبـــل چـــه خـــبـــر چـــوب قــفـــس را؟ |
| بــــربــــنــــد بــــه نــــرمــــی دهـــن هـــرزه درایـــان | از پــــنـــبــــه تــــوان کـــرد زبــــان بــــنـــد جـــرس را |
| *** | |
| بـــلــبـــل بـــه ثــنــای تــو گــشــوده اســت زبـــان را | گـل غــنـچــه بــه پــابــوس تــو کـرده اســت دهـان را |
| در بـــنــدگــی قــامــت مــوزون تــو بـــســتــه اســت | هـــر فــــاخــــتــــه از طــــوق کـــمـــر ســــرو روان را |
| هــــر شــــاخ گــــل آمــــاده بــــه نــــظــــاره رویــــت | از غــنــچـــه و شـــبـــنــم دل و چـــشـــم نــگــران را |
| *** | |
| هـــر نـــگـــه صــــد کـــاســــه خــــون مـــی خــــورد | تــــا بــــه مــــژگــــان مـــی رســــانـــد خــــویـــش را |
| هــــر ســــر خــــاری کــــه گــــل کــــرد از زمــــیـــن | در رگ مــــــــن مــــــــی دوانــــــــد نــــــــیـــــــش را |
| *** | |
| چــه غـم از کـشـمـکـش مـاســت جــهـان گـذران را؟ | خــــار مـــانـــع نـــشــــود قــــافــــلــــه ریـــگ روان را |
| نــکــنــنــد اهــل دل از کــجـــروی چـــرخ شــکــایــت | کـــجــــی تــــیـــر بــــود بــــاعــــث آرام نـــشــــان را |
| نــغــمــه در زاهــد پــوســیــده ســرایــت نــنــمــایــد | این نـسـیمـی اسـت کـه از جـای کـنـد سـرو جـوان را |
| *** | |
| لـعــل از کــان بــدخــشــان، گـوهـر از عــمـان طــلـب | گــنــج از ویــران، حـــضـــور دل ز درویــشـــان طــلــب |
| نـیـسـت نـعـمـت را دریـن دریـای بـی پـایـان حـسـاب | چــون صــدف از عــالـم بــالــا هـمـیـن دنـدان طــلــب |
| مـی کــنـد کــار نـمـک درمـی، تــکــلــف در ســلـوک | خــانـه را پــاک از تــکــلـف کــن دگــر مـهـمـان طــلـب |
| *** | |
| چـــنــان ز ســـاده دلـــی هــا رمــیــده ام ز کـــتـــاب | کـه بـوی خـون بـه مـشـامـم رسـیـد ز سـرخـی بـاب! |
| تــمــام شــب بـــه خــیــال تــو عــشــق مــی بـــازم | ز ســادگــی بــه کــتــان صــاف مـی کــنـم مــهـتــاب |
| *** | |
| گــــــر ز روی خـــــــود بـــــــرانــــــدازی نــــــقـــــــاب | پــــــشــــــت بــــــر دیـــــوار مـــــانـــــد آفــــــتــــــاب |
| ای رســـــــانــــــده کـــــــاوش مــــــژگـــــــان تـــــــو | خــــــانـــــه چــــــشـــــم اســــــیـــــران را بــــــه آب |
| *** | |
| گـــــــــل رخـــــــــســـــــــار او در عـــــــــالــــــــم آب | زنــــد تـــــرخـــــنــــده بـــــر یــــاقـــــوت ســـــیــــراب |
| نــــــبــــــرد تــــــلــــــخــــــی بــــــادام را قــــــنــــــد | نــشـــد کـــم زهــر چـــشـــمــش از شـــکـــرخـــواب |
| *** | |
| (ای لـعـل تــو جـان بــخـش تــرا ز عـیـسـی مـشـرب | چــشــم تـــو فــریــبـــنــده تـــر از لــولــی مــشــرب) |
| (در خــار و گــل دهــر بـــه یــک چــشــم نــظــر کــن | ســرچــشــمـه خــورشـیـد شـو از مـعـنـی مـشــرب) |
| (چــون ابــر شــب جــمـعـه گـران اســت بــه خــاطـر | از خــــشــــک مـــزاجــــان ریـــا دعـــوی مـــشــــرب) |
| *** | |
| (حـــاجـــت از خـــاک مــراد در مــیــخـــانــه طـــلـــب | دم هــمــت ز لـــب خـــامــش پـــیــمـــانــه طـــلـــب) |
| (مــشـــرق گـــوهــر جـــودســـت کـــف ابـــر بـــهــار | هـر چــه خــواهـد دلـت از گـریـه مـســتــانـه طــلـب) |
| *** | |
| هر کـه از بـی طـاقـتـی نـالـید تـمـکـینـش سـزاسـت | هـر کـه از فـتـراک سـرپــیـچـیـد بــالـیـنـش سـزاسـت |
| از پــریـشــان اخــتــلــاطــی رنـگ بــر رویـت نـمــانــد | هر کـه بـا گـلـچـین مـدارا مـی کـنـد اینش سـزاسـت |
| *** | |
| سـجـده گـاه بــوسـه مـن نـقـش پـای او بــس اسـت | دسـت پــیـچ حــسـرتــم زلـف رســای او بــس اسـت |
| از لـب شـیـریـن چــه مـی خـواهـنـد خـون کـوهـکـن؟ | زخــم دنــدان تأســف خــونــبـــهــای او بـــس اســت |
| *** | |
| شــیـوه مـا گـرد جــانـان بــی خــبــر گـردیـدن اســت | گــرد دل گــردیــدن مــا گــرد ســـر گــردیــدن اســـت |
| در مــحـــرم تـــا چـــه خـــونــهــا در دل مــردم کــنــد | مـحــنـت آبــادی کـه عــیـدش دربــدر گـردیـدن اســت |
| *** | |
| خــاکـســاری مـشـرب و افـتــادگـی دیـن مـن اســت | بــالـش خــارای مـن از خــواب ســنـگـیـن مـن اســت |
| *** | |
| چــه حـاجــت اسـت بــه مـی لـعـل سـیـر رنـگ تــرا؟ | نــظــر بـــه پـــرتــو خــورشــیــد نــیــســت رنــگ تــرا |
| دم از ثــــبــــات قــــدم مـــی زنـــد ز ســــاده دلــــی | ز دور دیــــده هـــــدف جـــــلـــــوه خـــــدنـــــگ تـــــرا |
| *** | |
| خـوش آن شـبــی کـه کـنـم مـسـت دیـده بــانـش را | بـــه دســـت بـــوســه دهــم خـــاک آســـتـــانــش را |
| حـــدیــثـــی از گــل رخـــســـار او کــه مــی گــویــد؟ | کــه هـمــچــو غــنــچــه پــر از زر کــنــم دهــانــش را |
| گــلــی کــه نـیـســت بــه فــرمـان او، چــو نـافــرمـان | بــــــرآورم ز پــــــس ســــــر بــــــرون زبــــــانـــــش را |
| شــهــیــد بـــاده چـــو خـــواهــیــد جـــان نــو یــابـــد | بـــه چـــوب تـــاک بـــســـوزیــد اســـتـــخـــوانـــش را |
| *** | |
| ســـرشــتـــه انــد بـــه دیــوانــگــی ســـرشــت مــرا | نــمــی تـــوان بـــه قـــلــم داد خـــوب و زشـــت مــرا |
| مـــرا بـــه ریــزش ابـــر بـــهــار حـــاجـــت نــیــســـت | رگ بـــریــده تـــاکـــی بـــس اســـت کـــشـــت مـــرا |
| *** | |
| ز نـــاز بــــوســــه لــــب دلــــســــتــــان نـــداد مــــرا | بـــه لـــب رســـیـــد مـــرا جـــان و جـــان نـــداد مـــرا |
| بــه صــبــر گـفــتــم ازان لـب، دهـن شــود شــیـریـن | خــــط از کــــمـــیـــن بــــدر آمـــد امــــان نـــداد مـــرا |
| *** | |
| نـمـی کــشــد دل غــمـگــیـن بــه صــبــحــگــاه مــرا | کـــه دل ز چـــهـــره خـــنـــدان شـــود ســـیـــاه مـــرا |
| ز هــرزه خـــنـــدی گـــل پـــاکـــشـــیــدم از گـــلـــزار | در گــــشــــاده نــــهــــد چــــوب پـــــیــــش راه مــــرا |
| *** | |
| ســـلـــاح جـــوهــر ذاتـــی اســـت شـــیــرمـــردان را | چـه حـاجــت اسـت بــه شـمـشـیـر تــیـزدسـتــان را؟ |
| ز خـون هر دو جـهان دسـت عشق مسـتـغنی اسـت | چـــه احـــتـــیــاج نــگــارســـت دســـت مــرجـــان را؟ |
| بــــر آن گـــروه حــــلـــال اســــت دعــــوی هـــمـــت | کــه چـــیــن جـــبـــهــه شــمــارنــد مــد احــســان را |
| *** | |
| ز جـــلــوه تـــو حـــیــاتـــی اســـت خـــاکــســـاران را | کــــه خــــون مــــرده شــــمــــارنـــد آب حــــیـــوان را |
| چـــو بـــرق بـــگــذر ازیــن خــاکــدان کــه در یــک دم | ســـفـــال تــــشـــنـــه کـــنـــد آه گـــرم، ریـــحـــان را |
| *** | |
| بــــهـــار مــــایـــه غــــفــــلــــت بــــود گــــرانــــان را | شــکــوفــه پـــنــبـــه گــوش اســت بـــاغــبـــانــان را |
| چــراغ گــل بـــه نــســیــم بــهــانــه ای بـــنــدســت | مــبـــر بـــه ســیــر چــمــن آســتــیــن فــشــانــان را |
| *** | |
| بـــه دســت شــانــه مــده زلــف عــنــبـــریــن بـــو را | بـــــه خـــــود دراز مــــگـــــردان زبـــــان بـــــدگـــــو را |
| بـــه روی او ســـخـــنـــان درشـــت خـــط مـــزنـــیـــد | شـــکـــســـتـــه دل مـــپـــســـنـــدیــد رنــگ آن رو را |
| گـــرفـــتــــه اوج بــــه نـــوعــــی کـــســــاد بــــازاری | کـــــه آفـــــتـــــاب زنـــــد بـــــر زمـــــیــــن تـــــرازو را |
| *** | |
| چــه نــســبـــت اســت بـــه روی تــو روی آیــنــه را؟ | کـــه خـــشـــک کـــرد فـــروغ تــــو جــــوی آیـــنـــه را |
| بـه یـاد روی تـو بـا گـل خـوشـم کـه طـوطـی مـسـت | بـــه یــک نـــظـــر نـــگـــرد پـــشـــت و روی آیــنـــه را |
| *** | |
| چـــو آفـــتـــاب بـــکــش جـــام صـــبـــحـــگــاهــی را | بـــه خـــاکـــیــان بـــچـــشـــان رحـــمـــت الـــهــی را |
| نــمــاز اگـــر نــکـــنــی اخـــتـــیــار آن بـــا تـــوســـت | مـــبــــاد فــــوت کـــنـــی آه صــــبــــحــــگـــاهـــی را |
| *** | |
| گــذشــت عــمــر و نــگــردیـد پــخــتــه طــیـنــت مــا | بــــه آفــــتــــاب قـــیـــامـــت فــــتــــاد نـــوبــــت مـــا |
| صـــــــدای آب روان خــــــــواب را گـــــــران ســـــــازد | ز خــوش عــنـانـی عــمـرســت خــواب غــفــلــت مــا |
| مـقـام نـشـو و نـمـا نـیـسـت ایـن نـشـیـمـن پــسـت | مــگــر بـــه ریــشـــه کــنــد زور، نــخـــل هــمــت مــا |
| کـــبــــاب پـــرتـــو مـــنـــت نـــمـــی تـــوان گـــردیـــد | بـــس اســـت دیــده بـــیــدار، شـــمــع خـــلــوت مــا |
| *** | |
| بــاقــی بــه حــق، ز خــویـش فــنــا مــی کــنــد تــرا | از عــشـــق غــافــلــی کــه چـــهــا مــی کــنــد تـــرا |
| ایـن گــردنــی کــه هـمــچــو هـدف بــرکــشــیـده ای | آمـــاجــــگــــاه تــــیـــر قــــضــــا مـــی کــــنـــد تــــرا |
| بـــگــذر ز فـــکـــر پـــوچ تـــعـــیــن کــه ایــن خـــیــال | از بـــحـــر چـــون حـــبــــاب جـــدا مـــی کـــنـــد تـــرا |
| *** | |
| کــو بـــاده تـــا بـــه ســـنــگ زنــم جـــام عـــقــل را؟ | از خـــط جــــام، حـــلـــقـــه کـــنـــم نـــام عـــقـــل را |
| عــمــری کــه در مــلــال رود در حــســاب نــیــســت | چـــون بـــشـــمــرم ز عــمــر خـــود ایــام عـــقــل را؟ |
| تـــفـــســـیــده تـــر ز ریــگ روان اســـت مــغـــز مـــا | ضـــــایــــع مــــســـــاز روغــــن بـــــادام عـــــقــــل را |
| *** | |
| (از رحـــــم بـــــر زمــــیــــن نــــزد آســــمــــان مــــرا | دارد بــــپــــا بــــرای نـــشــــان ایـــن کـــمـــان مـــرا) |
| (چــون سـرو و بــیـد ســایـه مـن دام عـشـرت اسـت | هــر چــنــد مــیـوه نــیـســت دریـن بــوســتــان مــرا) |
| (از وصــل گـل مـرا چــه تــمـتــع، کـه شــرم عـشــق | دارد چــــو بــــیـــضــــه در بــــغــــل آشــــیـــان مـــرا) |
| *** | |
| کــو عــشــق تــا بــه هـم شــکــنـد هـســتــی مـرا؟ | ظـــاهــر کـــنــد بـــه عـــالــمــیــان پـــســـتـــی مــرا |
| تــا آتــش از دلــم نــکــشــد شــعــلــه چــون چــنــار | بــــاور نـــمـــی کـــنـــنـــد تــــهـــیـــدســـتـــی مـــرا |
| *** | |
| عـیـدســت مـرگ دسـت بــه هـسـتــی فـشـانـده را | پــــروای بــــاد نـــیـــســــت چــــراغ نـــشــــانــــده را |
| دل را ز اخـــــتـــــلــــا گــــرانــــان ســــبـــــک بـــــرآر | دریــــــاب زود ایــــــن تــــــه دیــــــوار مــــــانــــــده را |
| *** | |
| مـــجـــنــون کـــنــد فـــریــب نــگـــاهــت غـــزالـــه را | بــــوی خــــوش تــــو تــــازه کــــنــــد داغ لــــالــــه را |
| صـــد زخــــم نـــاف ســــوز خــــورد آهـــوی خــــتــــا | بـــر هــم زنــی چـــو طــره مــشـــکــیــن کــلــالــه را |
| *** | |
| غـــم روزی نـــخـــورد هــر کـــه دلـــش آزاده اســـت | روزی اهـــل تــــو کـــل هـــمـــه جــــا آمـــاده اســـت |
| جــان روشــن نــدهــد تــن بـــه کــدورت، چــه کــنــد | تـــیـــرگـــی لـــازمـــه آب حـــیـــات افـــتـــاده اســـت |
| *** | |
| آن که صد شـیوه بـه آن چـشـم سـخـنگو داده اسـت | چـــه اداهــا کــه بـــه آن گــوشــه ابـــرو داده اســـت |
| آفـــتـــابـــی اســـت دگـــر چـــهــره رنــگـــت امـــروز | ســــفــــر آیـــنـــه ای بــــاز مـــگـــر رو داده اســــت؟ |
| *** | |
| لـعـل سـیـراب تــو تــرخــنـده بــه صـهـبــا زده اســت | نـگــهـت زهـر بــه ســرچــشــمــه مــیـنــا زده اســت |
| گــوهــر جـــرات مــن در صــدف طــوفــان نــیــســـت | بـــارهـــا قـــطـــره مـــن بـــر صـــف دریــا زده اســـت |
| *** | |
| ســـــبـــــزه خـــــط تـــــو راه دل آگــــاه زده اســـــت | ایـن چــه خــضـرســت نـدانـم کـه مـرا راه زده اســت |
| راهــزن نــیــســـت در آن دشــت کــه مــن ســیــارم | تــــا بــــرون رفــــتــــه ام از راه، مـــرا راه زده اســــت |
| دامــن پـــاک بـــود شــرط هــم آغــوشــی حـــســن | گــل شــبــنــم زده را ره بــه گــریــبــانــش نــیـســت |
| گـر چـنـیـن افـسـون غـفـلـت پـنـبــه در گـوشـم نـهـد | کـاسـه سـر را خــطـر از خــواب سـنـگـیـن مـن اسـت |
| (داغ دارد بــــلــــبــــلــــان را شــــعــــلــــه آواز مــــن | شـاخ گـل در خـون ز مـصـرع های رنـگـین مـن اسـت) |
| (گـر چـه مـرجـان پـنـجـه بـا دریـای خـونـیـن مـی زنـد | کــی حــریـف پــنـجــه دریـای خــونـیـن مـن اســت؟) |
| *** | |
| داغ مـشـکـینـم کـه نـاف لـالـه ها را سـوخـتـه اسـت | از تــب غــیـرت گـل خــورشــیـد را افـروخــتــه اســت |
| آنـچــه بــر رخــســاره او مـی نـمـایـد خــال نـیـســت | شـبــنـم نـازک دلـی در آتــش گـل سـوخــتــه اســت |
| *** | |
| در غــلــط مــی افــکــنــد هــر دم ســپـــنــد بـــزم را | عـکـس رخـسـارت ز بــس آیـیـنـه را افـروخـتــه اسـت |
| *** | |
| دل بــه دام زلـف آن مـشـکـیـن کـمـنـد افـتـاده اسـت | مـرغ بــی بــال و پــری در کـوچـه بــنـد افـتـاده اسـت |
| در حــریـم خــاکـســاری سـرکـشـی را بــار نـیـسـت | شــعــلـه ایـن بــزم در پــای ســپــنـد افـتــاده اســت |
| *** | |
| بـخـت مـا چـون بـیدمـجـنون سـرنـگـون افـتـاده اسـت | هـمـچــو داغ لـالـه نـان مـا بــه خــون افــتــاده اســت |
| هـر چــه مـی گـیـریـم صــرف بــیـنـوانـان مـی کـنـیـم | کــاســـه دریــوزه مــا ســـرنــگــون افـــتـــاده اســـت |
| *** | |
| تـــا خـــیــال عــارضـــش در دیــده مأوا کــرده اســـت | گریه خـونها خـورده تـا در چـشـم من جـا کـرده اسـت |
| مـژده بــاد ای اخــتــر طـالـع کـه چــشــم مـســت او | گـوشـه چـشـمی بـه حـال سـرمـه پـیدا کـرده اسـت |
| *** | |
| بــر سـر گـردون گـل انـجــم سـرشـک مـا زده اســت | بــاده گــلــرنـگ مــا گــل بــر ســر مــیـنــا زده اســت |
| کـیـسـت مـجـنـون تـا بـود در نـاتـوانـی هـمـچـو مـن؟ | ســایـه دامـن مـکــرر تــیـشــه ام بــر پــا زده اســت! |
| *** | |
| از خـمـار خـواب خـوش یوسـف بـه زندان آمـده اسـت | بــد نـبــیـنـد هـر کـه خـواب او پــریـشـان آمـده اسـت |
| ز آشــنــایـانـی کــه بــر گــرد تــوانـد ایـمــن مــبــاش | بــارهـا بــر ســنـگ، پــای مـن ز دامــان آمــده اســت |
| *** | |
| گل ز تـیغ غمزه اش در خـاک و خـون غـلطـیده اسـت | چــشـم خـورشـیـد از غـبــار خـط او تــرسـیـده اسـت |
| اشــک مـا در چــشـم دارد گـرد غـربــت بــر جــبــیـن | گــوهــر مــا در صــدف داغ یــتـــیــمــی دیــده اســت |
| *** | |
| آنـچــه مـی دانـیـش روی بــه خـون انـدوده ای اسـت | آنچـه سـروش می شـمـاری تـیغ زهرآلـوده ای اسـت |
| آنـچــه بــرگ عـیـش مـی دانـی دریـن بــسـتــانـسـرا | پیش چشم اهل بینش دست بر هم سوده ای است |
| عشق پـنهانی خـنک چـون ناز حـسن خـانگی اسـت | شـیـوه هـای دلـفـریـب عـشــق در دیـوانـگـی اســت |
| نــغـــمــه لـــبـــیــک، غـــمـــازســـت در راه طـــلـــب | جــامــه احــرام ایــنــجــا پــرده بــیــگــانــگــی اســت |
| *** | |
| هـر کـه چــشــم رغـبــت از نـظـاره مـرغـوب بــســت | بـــر دل آســـوده راه یــک جـــهــان آشــوب بـــســـت |
| از زلــیــخـــای هــوس بـــگـــریــز کـــایــن بـــی آبـــرو | تــهــمــت آلــودگــی بـــر دامــن مــحــبــوب بـــســت |
| گــفــتــم از دنـیـا فــشــانـم دســت در پــایـان عــمـر | حـرص پــیـری از عـصـا دسـت مـرا بــر چــوب بــسـت |
| *** | |
| چـشـم مـا طـرفـی کـز آن رخـسـار آتـشـنـاک بـسـت | کـی سـمـنـدر از وصـال شـعـلـه بــی بــاک بــســت؟ |
| طـــالـــع از خـــوبـــان نـــدارد چـــهــره خـــنــدان مـــا | ورنـه قــمـری ســرو را از طــوق بــر فــتــراک بــســت |
| *** | |
| بـس که تـند و تـلخ و خـشم آلود آن بـدخـو نشـسـت | چـین چـو جـوهـر عـاقـبـت بـر تـیـغ آن ابـرو نـشـسـت |
| رو بــــه دیـــوار آورد هـــر کـــس بــــه مـــن آورد روی | بــس کـه گـرد کـلـفـت از دوران مـرا بــر رو نـشـسـت |
| *** | |
| بـس کـه بـر رویم غـبـار کـلـفـت از هر سـو نشـسـت | گــرد از تــمــثــال مــن آیــیــنــه را بــر رو نــشــســت |
| تـــیــر آه خـــاکــســـاران را نــمــی بـــاشـــد خـــطــا | بــرحــذر بــاش از کـمـانـداری کـه بــر زانـو نـشـســت |
| از تـــپـــیــدن دور کـــرد از خـــود دل بـــی تـــاب مــن | غـیـر تــیـر او مـرا هـر کـس کـه در پــهـلـو نـشــســت |
| *** | |
| خوشدلی فرش است در هر جا شراب و ساز هست | غـم نـگـردد گـرد آن مـحــفـل کـه غـم پــرداز هـســت |
| در صـــدف گــوهــر جـــدا بـــاشـــد ز آغــوش صـــدف | وصـل هـجــران اســت هـر جــا دوربــاش نـاز هـسـت |
| *** | |
| در مـحـبـت جـز تـهـیـدسـتـی مـتـاعـی بـاب نـیـسـت | هـر کـه را دل هـسـت اینـجـا از اولـوالـالـبـاب نـیـسـت |
| در مــیــان چـــشـــم مــا و دولــت بـــیــدار عــشـــق | پــرده بــیـگــانـگـی جــز پــرده هـای خــواب نـیـســت |
| *** | |
| (آتـشـیـن جـانـی چـو مـن بــر صـفـحـه ایـام نـیـسـت | بــخـیـه را بـر خـرقـه مـن چـون سـپـنـد آرام نـیـسـت) |
| (دل چــه گـسـتــاخـانـه بــا آن زلـف بــازی مـی کـنـد | مــرغ نــوپـــرواز را انــدیــشـــه ای از دام نــیــســـت) |
| *** | |
| ذوقـی از حـرف مـحـبـت بـی صـفـای سـینـه نـیسـت | طـوطـیـان را تــخـتـه مـشـقـی بــه از آیـیـنـه نـیـسـت |
| هر طرف چـشم افکنی داغی بـه خون غلطیده است | هـیـچ بــاغ دلـگـشـایـی بــه ز چـاک سـیـنـه نـیـسـت |
| *** | |
| تــــا خــــیـــال زلـــف او ره در دل دیـــوانـــه داشــــت | از پـــر و بـــال پـــری جـــاروب ایــن ویــرانـــه داشـــت |
| شــیــشــه نــامــوس مــن تــا بــر کــنــار طــاق بــود | هـر کـه سـنـگـی داشـت از بـهـر مـن دیـوانـه داشـت |
| مـی شـکـسـت از خـون مـن دایـم خــمـار خـویـش را | چـشم مخـموری که در هر گوشه صد میخـانه داشت |
| *** | |
| در مـحــبــت کـام نـتــوان بــی دل خــونـخـواره یـافـت | غـنـچـه خـونـها خـورد تـا چـون گـل دل صـدپـاره یافـت |
| لــنــگــر آســودگــی دســت مــرا بــر چــوب بــســت | تـا بــه دسـت بــسـتـه روزی طـفـل در گـهـواره یـافـت |
| گــریــه شــادی حـــجـــاب چـــهــره مــقــصــود شــد | بــعـد ایـامـی کـه چــشــمـم رخــصــت نـظـاره یـافـت |
| *** | |
| پــنــجــه غــیــرت دل پــرویــز را در هــم شــکــســت | هـر کـجــا حــرفــی ز شــیـریـن کــاری فــرهـاد رفــت |
| *** | |
| بــه ایـن عــنـوان اگـر قــامـت کـشــد ســرو دلـارایـت | نـمــایـد طــوق قــمــری جــلــوه خــلــخــال در پــایـت |
| نــخــواهـی از گــزیـدن مــانـع دنـدان مــن گــشــتــن | اگــر دانـی چــه خــونــهـا در جــگــر دارم ز لــبــهـایـت |
| *** | |
| هــر کــجــا قــامــت دلــدار بــه دعــوی بـــرخــاســت | ســرو چـــون زنــگ ز آیــیــنــه قــمــری بـــرخــاســت |
| عـشـق ازان بــرق کـه در خـرمـن مـجــنـون انـداخــت | دود اول ز ســـیــه خـــانـــه لـــیــلـــی بـــرخـــاســـت |
| *** | |
| تـــار و پـــود فــلــک از نــالــه پـــیــچـــیــده مــاســت | پـــیــلــه اطـــلــس گــردون دل غــم دیــده مــاســـت |
| نــــظــــر هــــمــــت مــــا وســــعــــت دیـــگــــر دارد | آســمــان مــردمـک چــشــم جــهـان دیـده مــاســت |
| *** | |
| پـــیــش اربـــاب خــرد رســم تـــکــلــف بـــاب اســت | در خـــــرابـــــات مــــغــــان تـــــرک ادب آداب اســــت |
| عـــاشـــق صـــادق و پـــروای مــلــامــت، هــیــهــات | صـبــح در سـیـنـه خــود چــاک زدن بــی تــاب اســت |
| هـر کـه گـیـرد ز جــهـان گـوشـه عـزلـت طـاق اســت | هـر کــه زیـن خــلـق بــه دیـوار خــزد مـحــراب اســت |
| *** | |
| پـیـش اشـکـم کـه خـروشـنـده تـر از سـیـلـاب اسـت | بــحــر را مـهـر خــمـوشــی بــه لـب از گـرداب اســت |
| تـــا ازان حــســن ربـــایــنــده نــظــر یــافــتــه اســت | آب آیــیــنـــه ربـــایــنـــده تـــر از ســـیـــلـــاب اســـت |
| *** | |
| چــشــمـت از گـوشــه مـیـخــانـه بــلـاخــیـزتــرســت | پــســتــه تــنــگ تــو از بــوســه شــکــرریــزتــرســت |
| در لــطــافــت تــن ســیــمــیـن تــو بــا خــرمــن گــل | یـک قــمــاش اســت، ولــی از تــو بــانـگــیـزتــرســت |
| *** | |
| در شــکــســت دل مـا ســعــی نـه از تــدبــیـرســت | پــشــت ایـن لــشــکــر آگــاه، دم شــمــشــیـرســت |
| خـــبـــر از صـــورت احـــوال جـــهــان نــیــســـت مــرا | چـــشـــم حـــیــرت زدگـــان آیــنــه تـــصـــویــرســـت |
| عــافــیــت مــی طــلــبـــی تـــرک بـــرومــنــدی کــن | کـه ســر ســبــز در ایـنـجــا عـلـف شــمـشــیـرســت |
| *** | |
| فــکــر دنــیــای دنــی کــار خـــدانــشــنــاس اســـت | هــر چـــه در دل گــذرد غــیــر خــدا وســواس اســت |
| لــب بـــبـــنــد از ســخــن پــوچ کــه صــد پــیــراهــن | لـــاغـــری خـــوبـــتـــر از فـــربـــهــی آمـــاس اســـت |
| *** | |
| چــاره خــاک نـشـیـنـان بــه قـضـا ســاخــتــن اســت | پــیـش شـمـشـیـر حــوادث ســپــر انـداخــتــن اسـت |
| دامـن از خـلـق کـشـیدن گـل شـهرت طـلـبـی اسـت | این بـسـاطـی اسـت که بـر چـیدنش انداخـتـن اسـت |
| *** | |
| تــا بــه کـام اســت فـلـک، خــار گـل پــیـرهـن اسـت | بــخـت تـا سـبــز بــود سـاحـت گـلـخـن چـمـن اسـت |
| یـوسـف از خــواری اخــوان سـر کـنـعـانـش نـیـســت | هـر کـجــا بــخــت عــزیـزی دهـد آنـجــا وطــن اســت |
| جــوی شـیـر از جــگـر سـنـگ بــریـدن سـهـل اســت | هـر کـه بــر پـای هـوس تـیـشـه زنـد کـوهـکـن اسـت |
| *** | |
| شــور دریــای وجـــود از ســر پـــرشــور مــن اســـت | رقــص مــیــنــای فــلــک از مــی پـــرزور مــن اســـت |
| مـی زنـد مـور خــطــش مـلــک ســلــیـمــان بــر هـم | ایــن پــریــزاد قــبــاپــوش کــه مــنــظــور مــن اســت |
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| اشـــک از گـــرمــی آه دل مـــن گـــلـــگـــون اســـت | طـــره آه مــن از ســـلـــســـلـــه مـــجـــنــون اســـت |
| ســــرو آورده خــــطـــی ســــبــــز ز دیـــوان قـــضــــا | کـز جـهـان دسـت تـهـی قـسـمـت هـر مـوزون اسـت |
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| نــامــه لــالــه کــه داغ جـــگــرش مــضــمــون اســت | چـــشـــم بـــر راه قــبـــول نــظــر مــجـــنــون اســـت |
| در ســـــواد ورق لـــــالـــــه اگـــــر غـــــور کـــــنــــی | گـــرده دامــن لـــیــلـــی و ســـر مـــجـــنــون اســـت |
| رتــبــه چــیـن جــبــیـن اهـل هـوس نــشــنــاســنــد | ســکـتــه در مـشــرب ایـن طــایـفــه نـامـوزون اســت |
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| یـک سـر زلـف تــو در چــیـن و یـکـی مـاچــیـن اسـت | چــشــم بــد دور ازان مـلــک کــه حــدش ایـن اســت |
| تــرســم از دور بــه چــشـمـش بــخــورنـد اهـل نـظـر | بــس کـه چـون خـواب بـهـاران لـب او شـیـریـن اسـت |
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| روزگــاری اســت کــه پــایـم ز چــمـن کــوتــاه اســت | دســـت امــیــدم ازان ســیــب ذقــن کــوتـــاه اســت |
| بـی حـجـابــانـه بـه بــزم آمـد و مـسـتـانـه نـشـسـت | گــل بــچــیــنــیــد کــه دیــوار چــمــن کــوتــاه اســت |
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| اشــک خــالـی کــن دلـهـای غــم انـدوخــتــه اســت | ســخــن ســرد نــســیــم جــگــر ســوخــتــه اســت |
| در بـــیــابـــان تـــمـــنـــا اثـــر از مـــنـــزل نـــیــســـت | مـی کـنـد آنـچـه سـیـاهـی، نـفـس سـوخـتــه اسـت |
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| راحــت و مـحــنـت عـالـم بــه هـم آمـیـخــتــه اســت | گــوهــر تــجــربــه در خــاک ســفــر ریــخــتــه اســت |
| هـر کــجــا خــار و گـلـی دســت و گــریـبــان بــیـنـی | حـسـن و عـشـق اسـت که بـا یکدگر آمیخـتـه اسـت |
| بــرگــرفــتــه اســت ز خــاکــســتــر دوزخ مــشــتــی | نــقــش پــرداز جــهـان رنـگ ســفــر ریـخــتــه اســت |
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| دل هـر کـس کـه مـسـلـم ز عـلـایـق رســتــه اســت | چون سپـندی است که از آتـش سوزان جستـه است |
| چــشــم احــســان ز بـــخــیــلــان تـــرشــروی مــدار | چـه زنی حـلقـه بـر آن در که ز بـیرون بـسـتـه اسـت؟ |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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