بـاید سـاقـی آن شـیر شـنـگـرف گـونکـه عـکـسـش درآرد بـه سـیـمـاب خـونبـه من ده که سیماب خـون گشتـه امبــه سـیـمـاب خـون نـاخـنـی رشـتــه ام***بــرآنـم…
| بـاید سـاقـی آن شـیر شـنـگـرف گـون | کـه عـکـسـش درآرد بـه سـیـمـاب خـون |
| بـه من ده که سیماب خـون گشتـه ام | بــه سـیـمـاب خـون نـاخـنـی رشـتــه ام |
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| بــرآنـم مــن ای هـمــت صــبــح خــیـز | کــه مــوج ســـخـــن را کــنــم ریــز ریــز |
| بـه زریـن سـخـن گـوهـر آرم بـه چـنـگ | ســر زیــر دســتــان درآرم بـــه ســنــگ |
| زر آن زور و زهـره کــی آرد بــه دســت | کـــه دارای دیــن را کـــنـــد زیــردســـت |
| زر از بـــهـــر مـــقـــصـــود زیـــور بــــود | چــو بــنــدش کــنــی بــنــدی از زر بــود |
| تــوانـگـر کــه بــاشــد زرش زیـر خــاک | ز دزدان بـــود روز وشـــب تـــرســـنـــاک |
| تــهـی دســت کــانــدیـشــه زر کــنــد | تـــمــنــای گــنــجــش تـــوانــگــر کــنــد |
| چـــو از زر تـــمـــنــای زر بـــیــشـــتـــر | تــوانــگــرتـــر آنــکــس کــه درویــش تــر |
| جهان آن جهان شد که درویش راست | که هم خویشتن را و هم خویش راست |
| شب و روز خـوش میخـورد بـی هراس | نـه از شــحــنـه بــیـم و نـه از دزد پــاس |
| فــراوان خــزیـنــه فــراوان غــمــســت | کـمـسـت انـده آن را کـه دنـیا کـمـسـت |
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| گـــزارنــده عـــقـــد گــوهــر کـــشـــان | خـــبـــر داد از آن گـــوهـــر زر فـــشـــان |
| کـه چـون کـرد سـالار جـمشـید هوش | مــیـی چــنــد بــر یـاد نــوشــابــه نـوش |
| بـــه ریــحـــان و ریــحـــانــی دل فــروز | بــســر بـــرد بـــا خــســروان چــنــد روز |
| یـکـی روز بــنـشــســت بــر عــزم کـار | بــســاطــی بــرآراســت چــون نـوبــهـار |
| حـصـاری چـنـان ز انـجـمـن بـرکـشـیـد | کــه انــجــم در آن بـــرج شــد نــاپــدیــد |
| گــرانــمــایــگــان ســپــه را بــخــوانــد | گــرامــی کــنـان هـر یـکــی را نـشــانـد |
| شـــدنــد انــجـــمــن کــاردانــان دهــر | ز فــرهـنــگ شــه بــرگــرفــتــنــد بــهــر |
| شـــه از قـــصـــه آرزوهــای خـــویــش | ســخــنــهـا ز هـر دســتــی آورد پــیـش |
| کـه دوشــم چــنـان در دل آمـد هـوس | کــه جــز بــا شــمــا بــرنــیــارم نــفــس |
| بـــه نــیــروی رای شــمــا مــهــتـــران | جـــهــان را نــبـــیــنــم کــران تـــا کــران |
| سـوی روم ازیـن پـیـش بـودم بــسـیـچ | عـــنـــان مـــرا داد از آن چــــرخ پــــیـــچ |
| بــر آنـم کــه تــا جــمــلــه مــرز و بــوم | نـــگـــردم نـــگـــردد ســـرم ســـوی روم |
| در آبــــاد و ویـــران نـــشـــســـت آورم | هـمــه مــلــک عــالــم بــه دســت آورم |
| کـنـم دسـت پـیـچـی بـه سـنـجـابـیـان | زنـم ســکــه بــر ســیـم ســقــلــابــیـان |
| بـه هر بـوم و هر کشوری گر زمیسـت | بـبـیـنـم کـه خـوشـدل کـدام آدمـیـسـت |
| از آن خــوشــدلـی بــهـره یـابــم مـگــر | کـــه آهـــن بـــر آهـــن شـــود کـــارگـــر |
| نـخـسـتـین خـرامـش در این کـوچـگـاه | بـــه الـــبـــرز خـــواهــم بـــرون بـــرد راه |
| وزان کـــوچ فـــرخ درآیــم بـــه دشـــت | ز صــحــرا بــه دریــا کــنــم بــازگــشــت |
| تـــمـــاشـــای دریــای خـــزران کـــنــم | ز جــرعــه بــر او گـوهـر افــشــان کــنـم |
| چـــو مــوکـــب درآرم بـــه دریــا کــنــار | کـنـم هـفـتـه ای مـرغ و مـاهـی شـکـار |
| بـــبــیــنــم کــه تــا عــزم چــون آیــدم | زمـــانـــه کــــجــــا رهـــنـــمـــون آیـــدم |
| چـه گـوئیـد هـر یـک بــر ایـن داسـتـان | کــه دولــت نـپــیـچــد ســر از راســتــان |
| زمـیـن بــوسـه دادنـد یـکـسـر ســپــاه | کـه تــدبــیـر مـا هـســت تــدبــیـر شــاه |
| کــجــا او نــهـد پــای مــا ســر نــهـیـم | ز فــرمــان او بــر ســر افــســر نــهــیــم |
| اگـــر آب و آتــــش کـــنـــد جـــای مـــا | نـــــگـــــردد ز فــــــرمـــــان او رای مـــــا |
| گــر انــدازد از کـــوه مــا را بـــه خـــاک | بـــیـــفـــتـــیــم و در دل نـــداریــم بـــاک |
| ز شـــاه جـــهـــان راه بــــرداشـــتــــن | ز مــا خـــدمــت شـــاه بـــگــذاشـــتـــن |
| شـه آســوده دل شـد ز گـفـتــارشــان | نــوازشـــگــری کـــرد بـــســـیــارشـــان |
| بــســیـچــیـد ره را بــه آهــســتــگــی | گــشــاد از خـــزیــنــه در بـــســتـــگــی |
| غــنـی کــرد گــردنـکــشــان را ز گـنـج | ز گـوهـر کـشــی لـشــگـر آمـد بــه رنـج |
| جــهــانــدار چــون دیـد کــز گــنــج و زر | غـنـیـمـت کـشـان را گـران گـشـت سـر |
| در آن پـیـش بـیـنـی خـرد پـیـشـه کـرد | کـه لـخـتـی ز چـشـم بـد انـدیشـه کـرد |
| ز بـس گـنج و گـوهر کـه دربـار داشـت | بــهـر جــا کـه شــد راه دشــوار داشــت |
| بـه کوه و بـه صـحـرا و سـخـتـی و رنج | سـپـاهـش بـه گـردون کـشـیـدنـد گـنـج |
| چــو در خــاطــر آمــد جــهـانــجــوی را | کـــه در چـــنــبـــر آرد گــلــیــن گــوی را |
| زمـین را شـود مـیـل و مـنـزل شـنـاس | بــه تــری و خــشــگـی رســانـد قـیـاس |
| بــدانـد زمـیـن را کـه پــســت و بــلـنـد | درازاش چــنـد اســت و پــهـنـاش چــنـد |
| ز هـــر داد و بــــیـــدادی آگـــه شــــود | بــــــه راه آرد آن را کـــــه از ره شــــــود |
| فـــــرو شـــــویــــد از دور بـــــیــــداد را | رهــــانـــــد ز خـــــون خـــــلـــــق آزاد را |
| بــهــر بــیـم گــاهـی حــصــاری کــنــد | ز بـــهـــر ســـرانـــجـــام کـــاری کـــنـــد |
| ز دوری در آن ره شـــد انــدیــشــنــاک | کـــــــه دارد ره دور درد و هـــــــلـــــــاک |
| نــبـــایــد کــه ضـــایــع شـــود رنــج او | شــــود روزی دشــــمـــنـــان گـــنـــج او |
| ســپــاه از غــنــیـمــت گــرانــبــار دیـد | بــتــرســیـد چــون گــنــج بــســیـار دیـد |
| یکـی آنکـه سـیران نکـوشـنـد سـخـت | کـه تـرسـنـد از ایـشـان سـتـانـنـد رخـت |
| دگـر آنـکــه نـاســیـری آیـد بــه جــنـگ | دو دســتــی زنــد تــیــغ بــر بــوی رنــگ |
| ز فــــرزانــــگــــان الــــهــــی پــــنــــاه | صـــد و ســــیـــزده بــــود بــــا او بــــراه |
| همـه انـجـمـن سـاز و انـجـم شـنـاس | بــه تـدبــیـر هـر شـغـل صـاحـب قـیـاس |
| از آن جــمــلــه در حــضــرت شــهـریـار | بـــلــیــنــاس فـــرزانــه بـــود اخـــتـــیــار |
| بـــهــر کــار ازو چــاره درخــواســتـــی | کـــزو کـــردن چـــاره بــــرخـــاســـتــــی |
| ز دشـــواری راه و گــنــجـــی چـــنــان | ســخــن رانـد بــا کـارســنـجــی چــنـان |
| جــوابــش چــنـان آمـد از پــیـش بــیـن | کـه شــه گـنـج پــنـهـان کــنـد در زمـیـن |
| ســپــه نـیـز بــا شــاه فــرمـان کــنـنـد | بــه ویـرانــهــا گــنــج پــنــهــان کــنــنــد |
| ز بـــهــر گــواهــی بـــهــر گــنــجـــدان | طـلـسـمـی کـنـد هریک از خـود نـشـان |
| بـــــدان تـــــا چــــو آیــــنــــد از راه دور | ز هــر تـــیــره چـــاهــی بـــرآرنـــد نـــور |
| گـواهـی کــه بــر گـنـج خــویـش آورنـد | نــمــودار پـــیــشـــیــنــه پـــیــش آورنــد |
| شـــه ایــن رای را عـــالـــم آرای دیـــد | ســـپـــه را مــلــامــت در ایــن رای دیــد |
| بــه زیــر زمــیــن گــنــج را جــای کــرد | طـلـســمـی بــر آن گـنـج بــر پــای کـرد |
| بـــفــرمــود تـــا هــر کــرا گــنــج بـــود | نــهــان کـــرد کــز بـــردنــش رنــج بـــود |
| پــراکـنـده هـر یـک در آن کـوه و دشـت | بـه گـل گـنج پـوشـید و خـود بـازگـشـت |
| جــدا هـر یـکـی بــرسـر مـال خــویـش | بـرانـگـیخـت شـکـلـی ز تـمـثـال خـویش |
| چـــنـــان بـــود شـــب بــــازی روزگـــار | کــه شــه را دگــرگــون شـــد آمــوزگــار |
| ز هــنـــجـــار دیــگـــر درآمـــد بـــه روم | فــرو مــانــد گــنــج انــدران مــرز و بــوم |
| همان لشـگرش را ز بـس بـرگ و سـاز | بـــدان گــنــج پــنــهــان نــیــامــد نــیــاز |
| ز بــس گــنــج پــیـدا کــه دریـافــتــنــد | ســوی گـنـج پــوشـیـده نـشــتــافـتــنـد |
| چـــو در خـــانــه روم کـــردنـــد جـــای | ز شــغــل جــهـان در کــشــیـدنــد پــای |
| یـکـی دیـگـر سـنـگـیـن بــرافـراخـتــنـد | بــه جـمـهـور طـاعـتــگـهـش سـاخـتـنـد |
| هـمـه نـسـخــت گـنـج نـامـه کـه بــود | بـــــــه دارنـــــــده دیــــــر دادنـــــــد زود |
| کـه تــا هـرکـه اوبــاشـد ایـزد پــرسـت | از آن نـامـه هـا گـنـجــی آرد بــه دســت |
| هــنــوز انــدران دیــر دیــریــنــه ســـال | بـسـی گنجـنامه اسـت از آن گنج و مال |
| کــســانــی کــه از راه خــدمــتــگــری | کــنــنــد آن صــنــم خــانــه را چــاکــری |
| از آن گــنــج نــامــه دهــنــدش یـکــی | اگـــر بـــیــش بـــاشـــد وگـــر انــدکـــی |
| بــیـایـنـد و آن گـنـجــدان بــشــکــنـنـد | وزان گــنــج پـــارنــج خـــود بـــرکــنــنــد |
| مـــگـــر داد دولـــت مـــرا پــــای رنـــج | کـه پـایـم فـرو رفـت ازیـنـسـان بـه گـنـج |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
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