ای چـــارده ســالــه قــرة الــعــیــنبـــالــغ نــظــر عــلــوم کــونــیــنآن روز کــه هـفــت ســالــه بــودیچـون گل بـه چـمن حواله بـودیو اکـنـون کـ…
| ای چـــارده ســالــه قــرة الــعــیــن | بـــالــغ نــظــر عــلــوم کــونــیــن |
| آن روز کــه هـفــت ســالــه بــودی | چـون گل بـه چـمن حواله بـودی |
| و اکـنـون کـه بــه چــارده رســیـدی | چـون سـرو بـر اوج سـرکشـیدی |
| غـافـل مـنشـین نه وقـت بـازیسـت | وقت هنر اسـت و سـرفرازیسـت |
| دانــش طـــلــب و بـــزرگـــی آمــوز | تـــا بــــه نـــگـــرنـــد روزت از روز |
| نام و نسبـت بـه خـردسـالی است | نسل از شجر بزرگ خالی است |
| جـــائی کــه بـــزرگ بـــایــدت بـــود | فـــرزنـــدی مـــن نــدارت ســـود |
| چون شیر به خود سپه شکن باش | فـرزنـد خـصـال خـویشـتـن بـاش |
| دولـت طــلـبــی ســبــب نـگــه دار | بـــا خــلــق خــدا ادب نــگــه دار |
| آنـجــا کـه فــســانـه ای ســکـالـی | از تــرس خــدا مــبــاش خــالــی |
| وان شــغــل طــلـب ز روی حــالـت | کـز کـرده نـبــاشــدت خــجــالـت |
| گـر دل دهـی ای پـسـر بـدیـن پـنـد | از پــنــد پــدر شــوی بـــرومــنــد |
| گــرچــه ســر ســروریــت بـــیــنــم | و آیـیــن ســخــنــوریــت بــیـنــم |
| در شـــعـــر مـــپـــیــچ و در فـــن او | چــون اکـذب اوسـت احــسـن او |
| زیـن فــن مــطــلــب بــلــنـد نـامـی | کان خـتـم شد اسـت بـر نظامی |
| نظـم ارچـه بـه مرتـبـت بـلند اسـت | آن علم طلب که سودمند اسـت |
| در جـــدول ایــن خـــط قــیــاســـی | میکوش بـه خـویشتـن شناسی |
| تـــشـــریــح نــهــاد خـــود درآمـــوز | کاین معرفتـی است خـاطر افروز |
| پــیـغــمـبــر گـفـت عــلـم عــلـمـان | عــلـم الـادیـان و عــلـم الـابــدان |
| در نـاف دو عـلـم بـوی طـیب اسـت | وان هر دو فقیه یا طـبـیب اسـت |
| مـی بـاش طـبـیب عـیسـوی هـش | امــا نــه طــبــیـب آدمــی کــش |
| مـی بــاش فــقـیـه طــاعــت انـدوز | امــا نـه فــقــیـه حــیـلــت آمــوز |
| گــر هــردو شــوی بـــلــنــد گــردی | پــیـش هـمـه ارجــمــنـد گــردی |
| صــاحــب طــرفـیـن عـهـد بــاشــی | صـاحـب طـرف دو مـهـد بـاشـی |
| می کـوش بـه هر ورق کـه خـوانی | کـــان دانـــش را تـــمـــام دانــی |
| پــالــان گــریــی بــه غــایــت خــود | بــــهـــتـــر ز کـــلـــاه دوزی بــــد |
| گـفـتــن ز مـن از تــو کـار بــسـتــن | بـی کـار نمـی تـوان نـشـسـتـن |
| بـا اینکـه سـخـن بـه لطـف آبـسـت | کم گفتـن هر سخـن صوابـسـت |
| آب ارچـــه هـــمـــه زلـــال خـــیــزد | از خـــوردن پـــر مــلــال خـــیــزد |
| کــم گـوی و گـزیـده گـوی چــون در | تــا ز انـدک تــو جـهـان شـود پــر |
| لــاف از ســخــن چـــو در تـــوان زد | آن خـشـت بــود کـه پــر تـوان زد |
| مــرواریــدی کــز اصــل پــاکــســت | آرایـش بــخـش آب و خــاکـسـت |
| تـا هسـت درست گنج و کانهاست | چون خرد شود دوای جـانهاست |
| یــک دســـتـــه گـــل دمـــاغ پـــرور | از صــد خــرمــن گــیــاه بــهــتــر |
| گـر بــاشـد صـد سـتــاره در پــیـش | تـعـظـیـم یـک آفـتــاب ازو بــیـش |
| گـرچـه همه کـوکـبـی بـه تـابـسـت | افــروخــتــگـی در آفــتــابــســت |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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