گــویـنـده داســتــان چــنـیـن گــفــتآن لحـظه که در این سـخـن سـفتکــــز مـــلـــک عــــرب بــــزرگــــواریبـــود اســت بـــه خــوب تــر دیــاریبــــ…
| گــویـنـده داســتــان چــنـیـن گــفــت | آن لحـظه که در این سـخـن سـفت |
| کــــز مـــلـــک عــــرب بــــزرگــــواری | بـــود اســت بـــه خــوب تــر دیــاری |
| بــــر عــــامـــریـــان کـــفـــایـــت او را | مـــعـــمـــورتــــریـــن ولـــایـــت او را |
| خـــاک عـــرب از نــســـیــم نــامــش | خـوش بـودی تـر از رحـیـق جـامـش |
| صــاحــب هـنـری بــه مـردمـی طـاق | شــایـســتــه تــریـن جــمـلـه آفـاق |
| ســـلــطــان عــرب بـــه کــامــگــاری | قـــارون عــــجــــم بــــه مـــال داری |
| درویـش نــواز و مــیـهــمــان دوســت | اقــبــال درو چــو مـغــز در پــوســت |
| مــی بــود خــلــیـفــه وار مــشــهــور | وز پـی خـلـفـی چـو شـمـع بـی نور |
| مــحــتــاج تــر از صــدف بـــه فــرزنــد | چـــون خــوشــه بـــدانــه آرزومــنــد |
| در حــسـرت آنـکـه دسـت بــخــتــش | شـــاخـــی بـــدر آرد از درخـــتـــش |
| یـعــنــی کــه چــو ســرو بــن بــریـزد | ســـوری دگــرش ز بـــن بـــخـــیــزد |
| تــا چــون بــه چــمــن رســد تــذروی | ســروی بــیـنــد بــه جــای ســروی |
| گـــر ســـرو بـــن کـــهــن نــبـــیــنــد | در ســـایــه ســـرو نــو نــشـــیــنــد |
| زنـده اســت کــســی کـه در دیـارش | مــانــد خـــلــفـــی بـــه یــادگــارش |
| مــی کــرد بــدیــن طــمــع کــرمــهــا | مـــی داد بـــه ســـائلـــان درمـــهــا |
| بــدی بــه هـزار بــدره مـی جــســت | می کاشت سمن ولی نمی رسـت |
| در مـی طــلـبــیـد و در نـمـی یـافــت | وز درطــلـبــی عـنـان نـمـی تــافـت |
| و آگــه نــه کــه در جــهــان درنــگــی | پـــوشــیــده بـــود صــلــاح رنــگــی |
| هــرچ آن طــلــبـــی اگــر نــبـــاشـــد | از مــصــلــحــتــی بــه در نـبــاشــد |
| هـر نـیـک و بـدی کـه در شـمـارسـت | چــون در نـگــری صــلـاح کــارســت |
| بــس یـافـتــه کـان بــه سـاز بــیـنـی | نــایــافــتــه بـــه چــو بـــاز بــیــنــی |
| بــســیـار غــرض کــه در نــورداســت | پــوشــیـدن او صــلــاح مــرد اســت |
| هرکس به تکیست بیست در بیست | واگه نه کسی که مصلحت چـیست |
| ســررشــتــه غــیــب نــاپــدیـدســت | پـس قـفـل کـه بـنـگـری کـلـیدسـت |
| چـــون در طـــلــب از بـــرای فـــرزنــد | مـی بـود چـو کـان بـه لـعـل دربــنـد |
| ایــزد بـــه تـــضــرعــی کــه شـــایــد | دادش پــســری چــنــانــکــه بــایــد |
| نـو رســتــه گــلــی چــو نـار خــنـدان | چــه نــار و چــه گــل هـزار چــنـدان |
| روشـــن گـــهـــری ز تـــابــــنـــاکـــی | شـــب روز کـــن ســـرای خـــاکــی |
| چـــون دیــد پـــدر جـــمـــال فـــرزنــد | بـــگـــشـــاد در خـــزیــنــه را بـــنــد |
| از شـــادی آن خـــزیـــنـــه خـــیـــزی | مـی کــرد چــو گــل خــزیـنـه ریـزی |
| فــــــرمــــــود ورا بــــــه دایـــــه دادن | تـــا رســـتـــه شــود ز مــایــه دادن |
| دورانـــش بـــه حـــکـــم دایــگـــانــی | پـــرورد بـــه شـــیــر مـــهــربـــانــی |
| هـر شـیـر کـه در دلـش ســرشـتــنـد | حــرفــی ز وفــا بـــر او نــوشــتــنــد |
| هــر مـــایــه کـــه از غـــذاش دادنـــد | دل دوســـتـــیــی در او نـــهـــادنـــد |
| هـر نـیـل کـه بــر رخــش کـشــیـدنـد | افـــســـون دلــی بـــر او دمــیــدنــد |
| چـون لـاله دهن بـه شـیر میشـسـت | چون برگ سمن به شیر می رست |
| گـفـتـی کـه بــه شـیـر بــود شـهـدی | یــا بـــود مـــهــی مــیــان مـــهــدی |
| از مــه چــو دو هــفــتــه بــود رفــتــه | شـد مـاه دو هـفـتــه بــر دو هـفـتـه |
| شـــرط هــنـــرش تـــمـــام کـــردنـــد | قـــیــس هــنــریــش نـــام کـــردنــد |
| چــون بــر سـر ایـن گـذشـت سـالـی | بــــفـــزود جـــمـــال را کـــمـــالـــی |
| عشـقش بـه دو دسـتـی آب می داد | زو گــوهــر عــشــق تــاب مــی داد |
| ســالـی دو ســه در نـشـاط و بــازی | مــی رســـت بـــه بـــاغ دل نــوازی |
| چـون شـد بــه قـیـاس هـفـت سـالـه | آمـــود بـــنــفـــشـــه کـــرد لـــالـــه |
| کــز هـفــت بــه ده رســیـد ســالـش | افــســانـه خــلـق شــد جــمـالــش |
| هــرکـــس کــه رخـــش ز دور دیــدی | بــــادی ز دعــــا بــــر او دمــــیـــدی |
| شــد چــشـم پــدر بــه روی او شــاد | از خـانـه بــه مـکـتــبــش فـرسـتــاد |
| دادش بــــه دبــــیـــر دانــــش آمــــوز | تـــا رنـــج بــــر او بـــرد شـــب و روز |
| جـــمــع آمــده از ســـر شــکــوهــی | بـــا او بـــه مــوافـــقـــت گـــروهــی |
| هــر کـــودکـــی از امــیــد و از بـــیــم | مـشـغـول شـده بـه درس و تـعـلـیم |
| بــــا آن پــــســـران خـــرد پـــیـــونـــد | هـم لـوح نـشـسـتـه دخـتـری چـنـد |
| هــر یــک ز قـــبـــیــلــه ای و جـــائی | جــــمــــع آمــــده در ادب ســــرائی |
| قــیـس هـنـری بــه عــلــم خــوانــدن | یـاقــوت لــبــش بــه در فــشــانــدن |
| بــــود از صــــدف دگـــر قـــبــــیـــلـــه | نــاســفــتــه دریـش هــم طــویـلــه |
| آفــت نــرســیــده دخـــتـــری خـــوب | چـون عـقـل بـه نـام نـیک مـنـسـوب |
| آراســتــه لــعــبـــتــی چــو مــاهــی | چــون سـرو سـهـی نـظـاره گـاهـی |
| شـوخـی کـه بـه غـمـزه ای کـمـیـنـه | ســفـتــی نـه یـکـی هـزار ســیـنـه |
| آهــو چــشــمــی کــه هــر زمــانــی | کـشـتـی بـه کـرشـمـه ای جـهانی |
| مــــاه عــــربــــی بــــه رخ نـــمـــودن | تـــرک عــجـــمــی بـــه دل ربـــودن |
| زلـفـش چـو شـبــی رخـش چـراغـی | یـا مـشـعـلـه ای بــه چــنـگ زاغـی |
| کـــوچـــک دهــنــی بـــزرگ ســـایــه | چــون تـــنــگ شــکــر فــراخ مــایــه |
| شـکـر شـکـنـی بـه هر چـه خـواهی | لشـگرشـکن از شـکـر چـه خـواهی |
| تـــعــویــذ مــیــان هــم نــشـــیــنــان | در خــــورد کــــنــــار نـــازنـــیـــنـــان |
| مـــحـــجـــوبـــه بـــیــت زنــدگـــانــی | شـــه بـــیــت قــصــیــده جـــوانــی |
| عــقــد زنــخ از خـــوی جـــبـــیــنــش | وز حـــلــقــه زلــف عــنــبـــریــنــش |
| گــلــگــونــه ز خـــون شـــیــر پـــرورد | ســـــرمــــه ز ســـــواد مـــــادر آورد |
| بــر رشــتــه زلــف و عــقــد خــالــش | افــــزوده جــــواهـــر جــــمـــالـــش |
| در هـــر دلـــی از هــواش مـــیــلـــی | گـیـســوش چــو لـیـل و نـام لـیـلـی |
| از دلـــداری کــــه قــــیـــس دیـــدش | دلــداد و بـــه مــهــر دل خـــریــدش |
| او نـیـز هـوای قــیـس مـی جــســت | در سـیـنـه هـردو مـهـر مـی رســت |
| عــشـــق آمــد و جـــام خـــام در داد | جـــامــی بـــه دو خـــوی رام در داد |
| مستـی بـه نخست بـاده سخـتـست | افــتــادن نــافــتــاده ســخــتــســت |
| چــون از گــل مــهــر بـــو گــرفــتــنــد | بــا خــود هـمـه روزه خــو گـرفـتــنـد |
| ایــن جــان بــه جــمــال آن ســپــرده | دل بـــرده ولـــیـــک جـــان نـــبـــرده |
| وان بــــر رخ ایـــن نــــظــــر نـــهـــاده | دل داده و کــــــــــام دل نـــــــــداده |
| یـاران بــه حــســاب عــلــم خــوانـی | ایـشــان بــه حــســاب مـهـربــانـی |
| یـاران ســخــن از لـغـت ســرشـتــنـد | ایـشــان لـغــتــی دگــر نـوشــتــنـد |
| یــاران ورقـــی ز عـــلــم خـــوانــدنــد | ایشـان نفـسـی بـه عـشـق رانـدند |
| یــاران صـــفـــت فــعـــال گــفــتـــنــد | ایشـان همـه حـسـب حـال گـفـتـند |
| یــاران بـــه شــمــار پــیــش بـــودنــد | و ایشـان بـه شـمـار خـویش بـودنـد |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
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