سـاقـی بـه کجـا که می پـرسـتـمتــا ســاغــر مــی دهــد بــه دســتــمآن می که چـو اشک من زلالسـتدر مـذهـب عــاشــقــان حــلــالـســتدر مــی بــه امــیـ…
| سـاقـی بـه کجـا که می پـرسـتـم | تــا ســاغــر مــی دهــد بــه دســتــم |
| آن می که چـو اشک من زلالسـت | در مـذهـب عــاشــقــان حــلــالـســت |
| در مــی بــه امــیـد آن زنـم چــنـگ | تـــا بـــاز گـــشـــایــد ایــن دل تـــنــگ |
| شـیریسـت نشـسـتـه بـر گـذرگـاه | خــواهـم کــه ز شــیـر گــم کــنــم راه |
| زیــن پــیــش نــشــاطــی آزمــودم | امـــروز نـــه آنـــکـــســـم کـــه بـــودم |
| ایـن نــیـز چــو بــگــذرد ز دســتــم | عـاجــزتــر از ایـن شـوم کـه هـسـتــم |
| سـاقـی بــه مـن آور آن مـی لـعـل | کــافــکـنـد ســخــن در آتــشــم نـعــل |
| آن می کـه گـره گـشـای کـارسـت | بــــا روح چــــو روح ســــازگـــارســـت |
| *** | |
| گــر شــد پــدرم بــه ســنــت جــد | یـــوســــف پــــســــر زکـــی مـــویـــد |
| بـــا دور بـــه داوری چـــه کــوشــم | دورســت نــه جـــور چــون خــروشــم |
| چـــون در پــــدران رفـــتـــه دیـــدم | عــــــرق پــــــدری ز دل بـــــــریــــــدم |
| تــا هـرچـه رسـر ز نـیـش آن نـوش | دارم بـــه فـــریــضـــه تـــن فــرامــوش |
| سـاقی منشین بـه من ده آن می | کـز خــون فــســرده بــرکـشــد خــوی |
| آن می کـه چـو گنگ از آن بـنوشـد | نــطــقــش بـــه مــزاج در بـــجــوشــد |
| *** | |
| گـــر مـــادر مـــن رئیـــســـه کـــرد | مــادر صــفــتــانــه پـــیــش مــن مــرد |
| از لــابـــه گـــری کـــرا کـــنــم یــاد | تـــا پـــیــش مـــن آردش بـــه فـــریــاد |
| غـم بـیشـتـر از قـیاس خـورداسـت | گـــردابـــه فـــزون ز قـــد مــرد اســـت |
| زان بـیـشـتـر اسـت کـاس این درد | کـــانـــرا بـــه هـــزار دم تـــوان خـــورد |
| بـــا ایــن غــم و درد بـــی کــنــاره | داروی فـــرامـــشــــیـــســــت چــــاره |
| سـاقـی پـی بـار گـیم ریش اسـت | مـی ده کــه ره رحــیـل پــیـش اســت |
| آن مـی کـه چــو شــور در ســرآرد | از پـــــــای هــــــزار ســـــــر بـــــــرآرد |
| *** | |
| گر خـواجـه عـمر کـه خـال من بـود | خـــالــی شــدنــش وبـــال مــن بـــود |
| از تـــــلــــخ گــــواری نــــوالــــه ام | درنــای گــلــو شـــکــســـت نــالــه ام |
| مـی تـرسـم از ایـن کـبــود زنـجـیـر | کــافــغــان کــنـم او شــود گــلــوگــیـر |
| ســـاقــی ز خـــم شــراب خـــانــه | پــــیـــش آرمـــیـــی چــــو نـــار دانـــه |
| آن می که محیط بـخش کشتست | هـمـشــیـره شــیـره بــهـشــتــســت |
| *** | |
| تـــا کـــی دم اهــل اهــل دم کـــو | هـــمـــراه کـــجـــا و هـــم قـــدم کـــو |
| نحـلـی کـه بـه شـهد خـرمی کـرد | آن شـــهــد ز روی هــمـــدمــی کـــرد |
| پـیلـه کـه بـریشـمـین کـلـاهـسـت | از یـــاری هـــمـــدمــــان راهـــســــت |
| از شــادی هـمـدمـان کــشــد مـور | آنــــــرا کــــــه ازو فــــــزون بــــــود زور |
| بــا هــر کــه دریـن رهـی هــم آواز | در پـــــرده او نــــوا هــــمــــی ســـــاز |
| در پــــرده ایـــن تــــرانـــه تــــنـــگ | خــــارج بــــود ار نــــدانـــی آهـــنــــگ |
| در چــیـن نـه هـمـه حـریـر بــافـنـد | گــه حــلــه گــهـی حــصــیـر بــافــنــد |
| در هـر چــه از اعـتــدال یـاریـســت | انــجــامــش آن بــه ســازگــاریــســت |
| هــر رود کــه بـــا غـــنــا نــســـازد | بـــــرد چــــو غــــنــــا گــــرش نــــوازد |
| ســاقـی مـی مـشــکـبــوی بــردار | بــــنـــداز مـــن چـــاره جــــوی بــــردار |
| آن مـی کـه عـصـاره حــیـاتــســت | بــــاکــــوره کــــوزه نــــبــــاتــــســــت |
| *** | |
| زیـن خــانـه خــاک پــوش تــا کــی | زان خـــوردن زهــر و نـــوش تـــا کـــی |
| آن خـــانــه عــنــکــوبـــت بـــاشــد | کـــو بـــنــدد زخـــم و گــه خـــراشـــد |
| گـه بـر مـگـسـی کـنـد شـبـیـخـون | گــه دســت کــســی رهـانـد از خــون |
| چــون پــیـلــه بــبــنــد خــانـه را در | تــا در شـبــخــواب خــوش نـهـی سـر |
| ایـن خـانـه کـه خـانـه وبــال اسـت | پـیداسـت کـه وقـف چـند سـال اسـت |
| سـاقـی ز مـی و نـشـاط مـنشـین | مــی تـــلــخ ده و نــشــاط شــیــریــن |
| آن می که چنان که جال مرداست | ظــاهــر کــنــد آنــچــه در نــورداســت |
| چـون مار مکن بـه سـرکشـی میل | کـایـنـجــا ز قـفـا هـمـی رســد سـیـل |
| گر هفـت سـرت چـو اژدها هسـت | هـر هـفــت ســرت نـهـنـد بــر دســت |
| بـه گـر خـطـری چـنـان نـسـنـجـی | کـز وی چــو بــیـوفـتــی و بــه رنـجــی |
| در وقـــت فـــرو فـــتــــادن از بــــام | صــد گــز نـبــود چــنــانـکــه یـک کــام |
| خـاکـی شـو و از خـطـر مـینـدیـش | خـاک از سـه گـهر بـه سـاکـنی پـیش |
| هـر گـوهـری ارچـه تــابــنـاکـسـت | مـنـظــورتــریـن جــمــلــه خــاکــســت |
| او هـسـت پـدیـد در سـه هـم کـار | وان هــر ســه در اوســت نــاپـــدیــدار |
| ســاقــی مـی لـالـه رنـگ بــرگــیـر | نــصــفــی بــه نـوای چــنــگ بــرگــیـر |
| آن مـی کـه مـنـادی صـبــوحـسـت | آبـــــاد کــــن ســــرای روحـــــســــت |
| تــا کــی غــم نـارســیـده خــوردن | دانــســـتـــن و نـــاشـــنــیــده کـــردن |
| بـــه گــر ســخــنــم بــه یــاد داری | وز عـــمـــر گـــذشـــتــــه یـــاد نـــاری |
| آن عمر شده که پـیش خـوردسـت | پــــنــــدار هــــنــــوز در نــــوردســــت |
| هــم بــر ورق گــذشــتــه گــیـرش | واکــــرده و در نـــبــــشــــه گـــیـــرش |
| انـگـار کـه هـفـت سـبــع خـوانـدی | یــا هـــفـــت هـــزار ســـال مـــانـــدی |
| آخـر نه چـو مدت اسـپـری گـشـت | آن هــفــت هــزار ســال بــگــذشــت؟ |
| چــون قـامـت مـا بــرای غـرقـسـت | کـــوتـــاه و دراز را چـــه فـــرقـــســـت |
| ســاقــی بــه صــبـــوح بـــامــدادم | مــی ده کـــه نــخـــورده نــوش بـــادم |
| آن مــی کــه چــو آفــتــاب گــیــرد | زو چـــشـــمــه خـــشـــک آب گــیــرد |
| تــا چــنـد چــو یـخ فـسـرده بــودن | در آب چـــــو مــــوش مــــرده بـــــودن |
| چـــون گــل بـــگــذار نــرم خـــوئی | بـــگــذر چـــو بـــنــفــشـــه از دوروئی |
| جـــائی بـــاشــد کــه خــار بـــایــد | دیـــوانـــگــــیـــی بــــه کــــار بــــایـــد |
| *** | |
| کـردی خـرکـی بـه کـعـبـه گم کـرد | در کــعـــبـــه دویــد واشـــتـــلــم کــرد |
| کــایــن بــادیـه را رهــی درازســت | گـم گـشـتــن خــر زمـن چــه رازسـت |
| این گفـت و چـو گفت بـاز پـس دید | خــر دیــد و چــو دیــد خــر بــخــنــدیـد |
| گــفــتــا خــرم از مـیـانـه گــم بــود | وایــافــتـــنــش بـــه اشـــتـــلــم بـــود |
| گـر اشــتــلـمـی نـمـی زد آن کـرد | خــر مــی شــد و بــار نــیـز مــی بــرد |
| ایـن ده کـه حـصـار بـیهـشـانـسـت | اقـــطـــاع ده زبـــون کـــشـــانــســـت |
| بــی شــیـر دلــی بــســر نــیــایـد | وز گــــاو دلــــان هــــنــــر نــــیــــایـــد |
| ســاقــی مــی نــاب در قــدح ریــز | آبـــی بـــزن آتـــشـــی بـــرانـــگـــیـــز |
| آن می کـه چـو روی سـنگ شـوید | یــــاقـــــوت ز روی ســـــنــــگ رویــــد |
| *** | |
| پـائین طـلـب خـسـان چـه بـاشـی | دسـت خـوش نـاکـسـان چـه بــاشـی |
| گـردن چــه نـهـی بــه هـر قـفـائی | راضــی چــه شــوی بــه هـر جــفـائی |
| چـون کـوه بــلـنـد پــشـتــیـی کـن | بـــا نــرم جـــهــان درشـــتـــیــی کــن |
| چــون سـوسـن اگـر حـریـر بــافـی | دردی خــــوری از زمـــیـــن صــــافـــی |
| خـــــواری خـــــلـــــل درونــــی آرد | بـــــیــــدادکــــشــــی زبـــــونــــی آرد |
| می بـاش چـو خار حـربـه بـر دوش | تــا خــرمــن گــل کــشــی در آغــوش |
| نـیـرو شـکـن اسـت حـیف و بـیـداد | از حــــیـــف بــــمــــیــــرد آدمــــیــــزاد |
| سـاقـی مـنشـین کـه روز دیرسـت | می ده کـه سـرم ز شـغـل سـیرسـت |
| آن مــی کــه چــراغ رهـروان شــد | هـر پــیـر کــه خــورد از او جــوان شــد |
| بـــا یــک دو ســه رنــد لــاابــالــی | راهـــی طـــلـــب از غـــرور خــــالـــی |
| *** | |
| بـا ذره نـشـیـن چـو نـور خـورشـیـد | تــو کــی و نـشــاطــگــاه جــمـشــیـد |
| بـــگــذار مــعـــاش پـــادشـــاهــی | کـــــاوارگـــــی آورد ســـــپـــــاهـــــی |
| از صـحــبــت پــادشـه بــه پــرهـیـز | چــون پــنـبــه خــشــک از آتــش تــیـز |
| زان آتــش اگـرچــه پــر ز نـورســت | ایـمـن بــود آن کــســی کـه دورســت |
| پـروانه کـه نور شـمعـش افـروخـت | چـون بـزم نشین شمع شـد سـوخـت |
| سـاقـی نفـسـم ز غـم فـروبـسـت | می که ده که به می زغم توان رست |
| آن مـی کــه صــفــای ســیـم دارد | در دل اثــــــری عــــــظــــــیــــــم دارد |
| *** | |
| دل نـه بـه نـصـیـب خـاصـه خـویش | خـــائیــدن رزق کـــس مـــیــنـــدیــش |
| بــر گـردد بــخـت از آن سـبـک رای | کــافــزون ز گـلـیـم خــود کـشــد پــای |
| مـرغـی کـه نـه اوج خـویـش گـیـرد | هــنـــجـــار هــلـــاک پـــیــش گـــیــرد |
| مـاری کـه نـه راه خـود بــسـیـچــد | از پـــیــچــش کــار خــود بـــپـــیــچـــد |
| زاهـد کــه کــنـد ســلـاج پــوشــی | ســیــلــی خـــورد از زیــاده کــوشــی |
| روبــه کـه زنـد تـپــانـچـه بــا شـیـر | دانی که بـه دسـت کیسـت شـمشیر |
| ســاقــی مـی مــغــز جــوش درده | جـــامـــی بـــه صـــلـــای نـــوش درده |
| آن می کـه کـلید گـنج شـادیسـت | جــان داروی گــنـج کــیـقــبــادیـســت |
| *** | |
| خــرسـنـدی را بــه طـبــع در بــنـد | مـی بـاش بـدانـچـه هسـت خـرسـنـد |
| جــز آدمـیـان هـرآنـچــه هـسـتــنـد | بــر شــقــه قــانـعــی نــشــســتــنــد |
| در جـسـتــن رزق خـود شـتــابــنـد | ســـازنـــد بـــدان قـــدر کـــه یــابـــنــد |
| چــون وجــه کــفــایــتــی نــدارنــد | یـــارای شــــکــــایـــتــــی نــــدارنــــد |
| آن آدمـــی اســـت کـــز دلـــیـــری | کـــفـــر آرد وقـــت نـــیـــم ســــیـــری |
| گــر فــوت شــود یـکــی نـوالـه ش | بـــر چــرخ رســد نــفــیــر و نــالــه ش |
| گـرتـر شـودش بــه قـطـره ای بــام | در ابـــر زبـــان کــشـــد بـــه دشــنــام |
| ور یــک جــو ســنــگ تــاب گــیــرد | خــــرســــنـــگ در آفـــتــــاب گـــیـــرد |
| شـرط روش آن بــود کـه چــون نـور | زالـــایـــش نـــیــک و بـــد شـــوی دور |
| چــــون آب ز روی جـــــان نــــوازی | بـــا جـــمـــلـــه رنــگـــهــا بـــســـازی |
| ســاقــی زره بـــهــانــه بـــرخــیــز | پـــیــش آرمــی مـــغـــانــه بـــرخـــیــز |
| آن مـی کـه بـه بــزم نـاز بــخـشـد | در رزم ســـلـــاح و ســـاز بـــخـــشـــد |
| افـسـرده مـبـاش اگـر نه سـنـگـی | رهـــوارتــــر آی اگــــرنـــه لـــنـــگــــی |
| گــرد از ســر ایـن نــمــد فــرو روب | پـــائی بـــه ســـر نـــمـــد فـــروکـــوب |
| در رقـص رونـده چــون فـلـک بــاش | گــو جــمــلــه راه پــر خــســک بــاش |
| مــرکـــب بـــده و پـــیــادگــی کــن | ســیـلـی خــور و روگــشــادگــی کــن |
| بــار هــمــه مــیــکــش ار تــوانــی | بـــهــتـــر چـــه ز بـــار کــش رهــانــی |
| تــا چـون تــو بــیـفـتـی از سـر کـار | ســفــت هـمـه کـس تــرا کـشــد بــار |
| ســـاقـــی مـــی ارغـــوانـــیــم ده | یـــــاری ده زنــــــدگــــــانــــــیـــــم ده |
| آن مـی کــه چــو بــا مــزاج ســازد | جــــان تــــازه کـــنـــد جــــگـــر نـــوازد |
| *** | |
| زیـن دامـگـه اعـتــکـاف بــگـشــای | بـــر عــجــز خــود اعــتــراف بــنــمــای |
| در راه تـــلــی بـــدیــن بـــلـــنــدی | گــســـتـــاخ مــشـــو بـــه زرومــنــدی |
| بــا یـک ســپــر دریــده چــون گــل | تــا چــنـد شــغـب کـنـی چــو بــلـبــل |
| ره پــر شـکـن اسـت پــر بــیـفـکـن | تــیـغ اســت قــوی ســپــر بــیـفــکــن |
| تـــا بـــارگـــی تـــو پـــیـــش تـــازد | ســـربـــار تـــو چـــرخ بـــیــش ســـازد |
| یــکــبــاره بــیــفــت ازیـن ســواری | تـــــا یــــابـــــی راه رســــتـــــگــــاری |
| بـینی که چـو مه شـکـسـتـه گردد | از عـــقـــده رخــــم رســــتــــه گـــردد |
| سـاقـی بــه نـفـس رسـیـد جـانـم | تـــر کـــن بـــه زلـــال مـــی دهـــانـــم |
| آن می که نخـورده جـای جـانست | چــون خــورده شـود دوای جــانـســت |
| *** | |
| فـارغ منشـین که وقت کوچ اسـت | در خـود مـنگـر کـه چـشـم لـوچ اسـت |
| تـــو آبــــلـــه پــــای و راه دشـــوار | ای پـــــاره کــــار چـــــون بـــــود کــــار |
| یـا رخــت خــود از مــیـانـه بــربــنـد | یـــا در بــــه رخ زمــــانــــه در بــــنــــد |
| صـحـبـت چـو غـلـه نـمـی دهد بـاز | جـــان در غـــلـــه دان خـــلـــوت انــداز |
| بـی نقـش صـحـیفـه چـنـد خـوانی | بـــی آب ســـفـــیــنــه چـــنـــد رانــی |
| آن بــه کــه نــظــامــیــا در ایـن راه | بــر چــشـمـه زنـی چـو خـضـر خـرگـاه |
| ســیـراب شــوی چــو در مـکــنـون | از آب زلـــال عــــشــــق مـــجــــنـــون |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
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