چــون تــربــت دوســت در بــرآوردای دوسـت بـگفت و جـان بـرآورداو نـیـز گــذشــت از ایـن گـذرگــاهوان کـیسـت کـه نگـذرد بـر اینراهراهیست عدم که هر چه ه…
| چــون تــربــت دوســت در بــرآورد | ای دوسـت بـگفت و جـان بـرآورد |
| او نـیـز گــذشــت از ایـن گـذرگــاه | وان کـیسـت کـه نگـذرد بـر اینراه |
| راهیست عدم که هر چه هستند | از آفــت قــطـــع او نــرســـتـــنــد |
| ریشـی نه که غورگاه غـم نیسـت | خــاریـده نـاخـن سـتــم نـیـسـت |
| ای چــون خــر آسـیـا کـهـن لـنـگ | کــهـتــاب نـو روی کــهـربــا رنــگ |
| دوری کــن از ایـن خــراس گــردان | کــو دور شــد از خــلــاص مـردان |
| در خــانـه ســیـل ریـز مــنـشــیـن | سـیل آمد، سـیل، خـیز، منشین |
| تـا پـل نـشـکـسـت بــر تـو گـردون | زین پـل بـه جـهان جـمـازه بـیرون |
| در خـاک مـپــیـچ کـو غـبــاریـسـت | بـا طـبـع مـسـاز کـو شـراریسـت |
| بــر تــارک قــدر خــویـش نـه پــای | تـا بــر سـر آسـمـان کـنـی جـای |
| دایـم بــه تــو بــر جــهـان نـمــانــد | آنــرا مــپـــرســت کــان نــمــانــد |
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| مجنون ز جهان چو رخت بـر بست | از ســرزنــش جــهـانـیـان رســت |
| بــر مــهــد عــروس خــوابــنــیــده | خـوابــش بــربـود و بــسـت دیـده |
| نــاســـود دریــن ســـرای پـــر دود | چـون خـفـت مـع الـغـرامـه آسـود |
| افـتــاده بــمـانـد هـم بــر آن حــال | یک ماه و شنیده ام که یک سال |
| وان یـــاوگـــیـــان رایـــگـــان گـــرد | پـــیــرامـــن او گـــرفـــتـــه نــاورد |
| او خــفـتــه چــو شـاه در عـمـاری | وایـشــان هـمــه در یـتــاق داری |
| بــر گــرد حــظــیـره خــانـه گـردنـد | زان گــور گــه آشــیـانــه گــردنــد |
| از بــیـم درنـدگـان چــپ و راســت | آمد شد خـلق جـمله بـرخـاسـت |
| نــظـــارگــیــی کـــه دیــدی از دور | شــوریــدن آن ددان چــو زنــبـــور |
| پــنـداشـتـی آن غـریـب خـسـتــه | آنجاست بـه رسم خود نشستـه |
| وان تــیـغ زنــان بــه قــهـرمــانــی | بــر شــاه کــنــنــد پــاســبــانـی |
| آگـاه نـه زانـکـه شــاه مـرد اســت | بــادش کـمـر و کـلـاه بــرداســت |
| وان جــیـفـه خـون بــه خـرج کـرده | دری بــــه غــــبـــــار درج کــــرده |
| از زلــــزلــــهــــای دور افـــــلــــاک | شـد ریخـتـه و فشـانده بـر خـاک |
| در هــیئت او ز هـــر نـــشـــانـــی | نـامـانده بـه جـا جـز اسـتـخـوانی |
| زان گـرگ سـگـان اسـتـخـوانـخـوار | کـسـرا نـه بـه اسـتـخـوان او کـار |
| چـنـدان کـه ددان بــدنـد بــر جـای | نـنـهـاد در آن حـرم کـسـی پــای |
| مـردم ز حـفـاظ بــا نـصـیـب اسـت | این مردمی از ددان غـریب اسـت |
| شـد سـال گـذشـتـه وان دد و دام | آواره شـــدنـــد کـــام و نـــاکـــام |
| دوران چــو طـلـسـم گـنـج بــربــود | وان قـفـل خـزیـنـه بــنـد فـرسـود |
| گـــســــتــــاخ روان آن گـــذرگـــاه | کـــــردنـــــد درون آن حــــــرم راه |
| دیــدنـــد فـــتـــاده مـــهــربـــانــی | مغـزی شـده مـانده اسـتـخـوانی |
| چـون مـحـرم دیـده سـاخـتــنـدش | از راه وفـــا شـــنـــاخـــتـــنـــدش |
| آوازه روانــه شـــد بـــه هــر بـــوم | شـد در عـرب این فسـانه معـلوم |
| خــویـشــان و گـزیـدگـان و پــاکـان | جــمـع آمـده جــمـلــه دردنـاکــان |
| رفــتــنــد و در او نــظــاره کــردنــد | تـن خـسـتـه و جـامه پـاره کـردند |
| وان کــالــبـــد گــهــر فــشـــانــده | هـمـچـون صـدف سـپــیـد مـانـده |
| گــرد صـــدفـــش چـــو در زدودنــد | بـازش چـو صـدف عـبـیر سـودنـد |
| او خود چـو غبـار مشگوش داشت | از نافه عشق بـوی خوش داشت |
| در گــریــه شـــدنــد ســـوکــواران | کــردنــد بــر او ســرشــک بــاران |
| شـسـتــنـد بــه آب دیـده پــاکـش | دادنـد ز خــاک هـم بــه خــاکـش |
| پــهـلــوگــه دخــمـه را گــشــادنـد | در پــهـلــوی لــیـلــیـش نـهـادنـد |
| خــفــتــنــد بــه نــاز تــا قــیـامــت | بــرخـاسـت ز راهـشـان مـلـامـت |
| بـودنـد در این جـهـان بـه یک عـهد | خـفتـند در آن جـهان بـه یک مهد |
| کـردنـد چــنـانـکـه داشــت راهـی | بــر تــربــت هـردو روضـه گـاهـی |
| آن روضه که رشـک بـوسـتـان بـود | حـاجـتـگـه جـمـلـه دوسـتـان بـود |
| هـرکـه آمـدی از غـریـب و رنـجــور | در حــال شـدی ز رنـج و غـم دور |
| زان روضـه کـسـی جـدا نگشـتـی | تـــا حــاجــت او روا نــگــشــتــی |
| انـگـشـت کـش سـخــن سـرایـان | ایـن قـصـه چـنـیـن بـرد بـه پـایـان |
| کــان ســوخــتــه خــرمـن زمــانـه | شـد خـرمـنـی از سـرشـک دانـه |
| دسـتـاس فلک شـکسـت خـردش | چـون خـرد شـکسـت بـاز بـردش |
| زانـحــال کــه بــود زارتــر گــشــت | بـــی زورتـــر و نــزارتـــر گــشــت |
| جــانـی ز قــدم رســیـده تــا لــب | روزی بـه سـتـم رسـیده تـا شب |
| نــــالــــنـــده ز روی دردنــــاکــــی | آمـد ســوی آن عــروس خــاکــی |
| در حــلــقــه آن حــظــیـره افــتــاد | کـشــتــیـش در آب تــیـره افـتــاد |
| غـلـطـیـد چـو مـور خـسـتــه کـرده | پــیـچــیـد چــو مـار زخــم خـورده |
| بــیـتــی دو سـه زارزار بــرخــوانـد | اشکی دو سه تـلخ تلخ بـفشاند |
| بـرداشت بـسـوی آسـمان دسـت | انگشـت گشـاد و دیده بـربـسـت |
| کـای خـالـق هـرچـه آفـریـد اسـت | سـوگند بـه هرچـه بـرگـزیداسـت |
| کــز مــحــنــت خــویـش وارهـانــم | در حــضــرت یــار خــود رســانــم |
| آزاد کـــنــم ز ســـخـــت جـــانــی | وابــاد کــنــم بــه ســخــت رانـی |
| ایـن گـفـت و نـهـاد بـر زمـیـن سـر | وان تـــربـــت را گـــرفـــت در بـــر |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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