گـنـجــیـنـه گـشـای ایـن خــزیـنـهســربــاز کــنــد ز گــنــج ســیــنــهکـانـروز کـه نـوفـل آن سـپــه رانـدبــیـنـنـده بــدو شــگـفــت درمـانـداز زلــ…
| گـنـجــیـنـه گـشـای ایـن خــزیـنـه | ســربــاز کــنــد ز گــنــج ســیــنــه |
| کـانـروز کـه نـوفـل آن سـپــه رانـد | بــیـنـنـده بــدو شــگـفــت درمـانـد |
| از زلـــزلـــه مـــصـــاف خــــیـــزان | شــد قــلــه بـــوقــبـــیــس ریــزان |
| خـصـمـان چـو خـروش او شـنیدند | در حـرب شـدنـد وصـف کـشـیـدنـد |
| ســالـار قــبــیـلـه بــا ســپــاهـی | بــر شــد بــه ســر نـظـاره گـاهـی |
| صـحـرا هـمـه نـیزه دیـد و خـنـجـر | وافــاق گــرفــتـــه مــوج لــشــگــر |
| از نــعـــره کـــوس و نــالـــه نــای | دل در تـن مـرده می شـد از جـای |
| رایـی نـه کـه جـنـگ را بـسـیـچـد | رویـی نـه کـه روی از آن بــپــیـچـد |
| زانـگـونـه کـه بــود پـای بــفـشـرد | سـیـل آمـد و رخـت بــخـت را بــرد |
| قـلـب دو سـپــه بــهـم بــر افـتـاد | هـر تـیـغ کـه رفـت بــر سـر افـتــاد |
| از خون روان که ریگ می شست | از ریـگ روان عــقـیـق مـی رســت |
| دل مـانـده شــد از جــگــر دریـدن | شـمـشـیـر خــجــل ز سـر بــریـدن |
| شــمـشــیـر کـشـیـد نـوفـل گـرد | مـی کـرد بــه حـمـلـه کـوه را خـرد |
| مـی سـاخـت چـو اژدهـا نـبــردی | زخــمــی و دمــی دمـی و مــردی |
| بـــرهــر کــه زدی کــدیــنــه گــرز | بـشـکـسـتـی اگـرچـه بـودی البـرز |
| بــر هـر ورقــی کــه تــیـغ رانــدی | در دفــــتــــر او ورق نـــمــــانـــدی |
| کـردنـد نـبــردی آنـچـنـان سـخـت | کـز اره تــیـغ تــخــتــه شـد تــخـت |
| یـاران چــو کــنـنـد هـمــعــنــانـی | از ســـنـــگ بــــرآورنـــد خــــانـــی |
| پــر کــنــدگــی از نــفــاق خــیـزد | پــــیـــروزی از اتــــفـــاق خــــیـــزد |
| بـر نـوفـلـیـان خـجـسـتـه شـد روز | گـشـتــنـد بــه فـال ســعـد فـیـروز |
| بـر خـصـم زدنـد و بـرشـکـسـتـنـد | کـشـتـنـد و بـریخـتـنـد و خـسـتـند |
| جز خستـه نبـود هر که جـان بـرد | وان نیز کـه خـسـتـه بـود می مـرد |
| پــیـران قــبــیـلــه خــاک بــر ســر | رفــتـــنــد بـــه خــاکــبـــوس آن در |
| کــردنــد بـــی خـــروش و فــریــاد | کـــــــــی داور داد ده بـــــــــده داد |
| ای پــیـش تــو دشـمـن تــو مـرده | مـا را هـمـه کـشـتــه گـیـر و بــرده |
| بـا ما دو سـه خـسـتـه نیزه و تـیر | بـر دسـت مـگـیـر و دسـت مـا گـیر |
| یک ره بـنـه این قـیامـت از دسـت | کاخـر بـه جـز این قـیامتـی هسـت |
| تــا دشـمـن تــو ســلـیـح پــوشـد | شـمـشـیـر تـو بـه کـه بـاز کـوشـد |
| مـا کـز پــی تــو سـپــر فـکـنـدیـم | گــر عــفــو کــنــی نــیــازمــنــدیـم |
| پــیـغـام بــه تـیـر و نـیـزه تـا چـنـد | بــا بـی سـپـران سـتـیـزه تـا چـنـد |
| یــابــنــده فــتــح کــان جــزع دیـد | بـخـشـود و گـنـاه رفـتـه بـخـشـیـد |
| گــفــتــا کــه عــروس بــایـدم زود | تـا گـردم از این قـبـیـلـه خـوشـنـود |
| آمـــد پـــدر عـــروس غـــمـــنــاک | چــون خـاک نـهـاده روی بــر خـاک |
| کـــای در عــــرب از بــــزرگـــواری | در خـــورد ســـری و تــــاجــــداری |
| مجـروحـم و پـیر و دل شـکـسـتـه | دور از تــو بــه روز بــد نـشـســتــه |
| در ســــرزنـــش عـــرب فـــتــــاده | خــود را عــجــمــی لــقــب نـهـاده |
| این خـون کـه ز شـرح بـیش بـینم | در کــردن بــخــت خــویـش بــیـنـم |
| خــواهـم کـه در ایـن گـنـاهـکـاری | ســیـمـاب شــوم ز شــرمـســاری |
| گــر دخــت مــرا بــیــاوری پــیـش | بـخـشـی بـه کـمینه بـنده خـویش |
| راضــی شــوم و ســـپـــاس دارم | وز حــکــم تــو ســر بــرون نــیــارم |
| ور آتــــش تــــیــــز بــــر فــــروزی | و او را بــه مـثــل چـو عـود سـوزی |
| ور زآنـکـه درافـکـنـی بـه چـاهـش | یـا تــیـغ کـشـی کـنـی تــبــاهـش |
| از بـــنــدگــی تــو ســر نــتــابـــم | روی از ســخــن تــو بـــر نــتــابـــم |
| امـــا نـــدهــم بـــه دیــو فـــرزنــد | دیـوانـه بــه بــنـد بــه کــه در بــنـد |
| سرسامی و نور چون بـود خوش! | خــاشــاک و نـعـوذ بــالـلـه آتــش! |
| ایـن شــیـفـتــه رای نـاجــوانـمـرد | بـی عـاقـبـت اسـت و رایگـان گـرد |
| خـو کرده بـه کوه و دشت گشتـن | جــولـان زدن و جــهـان نـبــشـتــن |
| بـا نـام شـکـسـتـگـان نشـسـتـن | نـام مـن و نـام خــود شـکـســتــن |
| در اهـل هـنـر شـکـسـتـه کـامـی | بـه زانـکـه بــود شـکـسـتـه نـامـی |
| در خـــاک عــرب نــمــانــد بـــادی | کـــز دخـــتـــر مــن نــکـــرد یــادی |
| نــایـافــتــه در زبــانــش افــکــنــد | در ســرزنـش جــهـانـش افــکــنــد |
| گـــر در کـــف او نــهــی زمــامــم | بــا نـنـگ بــود هـمــیـشــه نـامــم |
| آنـــکـــس کـــه دم نــهــنــگ دارد | بــه زانــکــه بــمــانــد و نـنـگ دارد |
| گـر هـیـچ رســی مـرا بــه فــریـاد | آزاد کـــــنــــی کـــــه بـــــادی آزاد |
| ورنــه بـــه خـــدا کــه بـــاز گــردم | وز نـــاز تــــو بــــی نـــیـــاز گـــردم |
| بــرم ســر آن عــروس چــون مـاه | در پـیـش سـگ افـکـنـم در این راه |
| تـــا بـــاز رهــم زنــام و نــنــگــش | آزاد شــوم ز صــلــح و جـــنــگــش |
| فـــرزنــد مــرا در ایــن تـــحـــکـــم | سـگ بـه کـه خـورد کـه دیـو مـردم |
| آنـرا کــه گــزد ســگ خــطــرنـاک | چـون مرهم هست نیستـش بـاک |
| وآنـرا کــه دهـان آدمـی خــســت | نـتـوان بـه هـزار مـرهمـش بـسـت |
| چـون او ورقـی چـنـین فـروخـوانـد | نــوفــل بــه جــواب او فــرو مــانــد |
| زان چــیـره زبــان رحــمـت انـگـیـز | بـخـشـایـش کـرد و گـفـت بـرخـیـز |
| مـن گـرچــه ســرآمـد ســپــاهـم | دخـتـر بـه دل خـوش از تـو خـواهم |
| چــون مــی نــدهـی دل تــو دانـد | از تــو بــسـتــم کـه مـی سـتــانـد |
| هر زن که بـه دسـت زور خـواهند | نان خـشک و عصیده شور خواهند |
| مــن کـــامـــدم از پـــی دعـــاهــا | مـسـتــغـنـیـم از چــنـیـن جــفـاهـا |
| آنــان کــه نــدیــم خــاص بــودنــد | بـــا پــیــر در آن خــلــاص بـــودنــد |
| کـان شـیفـتـه خـاطـر هـوسـنـاک | دارد مــنــشــی عــظــیـم نــاپــاک |
| شــوریـده دلــی چــنـیـن هـوائی | تــن در نــدهــدت بــه کــدخــدائی |
| بـر هر چـه دهیش اگر نجـاتـسـت | ثـابــت نـبــود کـه بــی ثـبــاتـسـت |
| مــــا دی ز بـــــرای او بـــــنــــاورد | او روی بـــه فــتـــح دشــمــن آورد |
| مـــا از پـــی او نـــشـــانــه تـــیــر | او در رخ مــا کــشــیــده تــکــبــیـر |
| این نیسـت نـشـان هوشـمـنـدان | او خــواه بــه گـریـه خــواه خــنـدان |
| ایـن وصــلـت اگـر فــراهـم افــتــد | هــم قــرعــه فــال بــرغــم افــتــد |
| نــیــکـــو نــبـــود ز روی حـــالـــت | او بــا خــلــل و تــو بــا خــجــالــت |
| آن بـه کـه چـو نـام و نـنـگ داریـم | زیـن کــار نــمــونــه چــنــگ داریـم |
| خواهشگر از این حدیث بـگذشت | بـا لشـگر خـویش بـاز پـس گشـت |
| مجـنون شـکـسـتـه دل در آن کـار | دلـخـسـتــه شـد از گـزنـد آن خــار |
| آمــد بـــر نــوفــل آب در چـــشــم | جـوشنده چـو کوه آتـش از خـشـم |
| کـی پـای بــه دوسـتـی فـشـرده | پــذرفــتــه خــود بــه ســر نــبــرده |
| در صـبــحـدمـی بــدان سـپــیـدی | دادیــــم بــــه روز نــــا امــــیــــدی |
| از دسـت تـو صـیـد مـن چـرا رفـت | وان دسـت گـرفـتــنـت کـجــا رفـت |
| تــشـنـه ام بــه لـب فـرات بــردی | نــاخــورده بــه دوزخــم ســپــردی |
| شــکــر ز قــمـطــر بــرگــشــادی | شـــربـــت کـــردی ولـــی نـــدادی |
| بــرخــوان طــبــرزدم نــشــانــدی | بــازم چــو مـگـس ز پــیـش رانـدی |
| چــون آخـر رشـتــه ایـن گـره بــود | این رشـتـه نرشـتـه پـنـبـه بـه بـود |
| این گـفـت و عـنـان از او بـگـردانـد | یک اسبه شد و دو اسپه می راند |
| گــم کــرد پــی از مـیـان ایـشــان | مـی رفـت چــو ابــر دل پــریـشــان |
| مـی ریـخـت زدیـده آب بــر خــاک | بــر زهـر کـشـنـده ریـخـت تــریـاک |
| نوفل چو بـه ملک خویش پیوست | بـا هم نفسـان خـویش بـنشسـت |
| مـجـنون سـتـم رسـیده را خـوانـد | تــا دل دهـدش کــز او دلـش مـانـد |
| جـسـتـند بـسـی در آن مقـامـش | افــتــاده بـــد از جــریــده نــامــش |
| گــم گــشــتــن او کــه نـاروا بــود | آگــاه شـــدنــد کـــز کـــجـــا بـــود |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
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