کـی پــرده عـاشــقـی شــود ســازبــی زخــمـه عـیـبــجــوی غـمـازنــادیــده خــراش رشــتـــه چـــنــگاز چــنــگ کــجــا بــرآیـد آهـنــگاز قــصـــه قــ…
| کـی پــرده عـاشــقـی شــود ســاز | بــی زخــمـه عـیـبــجــوی غـمـاز |
| نــادیــده خــراش رشــتـــه چـــنــگ | از چــنــگ کــجــا بــرآیـد آهـنــگ |
| از قــصـــه قــیــس و دخـــتـــر عـــم | در مـجــلـس دوســتــان مـحــرم |
| چــون یـافــت وقــوف هـرزه گــویـی | بـر قـیس شـکسـتـه عـیبـجـویی |
| فـی الـحـال بـه لـیلی این خـبـر بـرد | کز عشق تـو قیس را دل افسـرد |
| در دل شرری که داشت بـنشسـت | بـا تـو نظری که داشت بـربـست |
| خـــاطـــر بـــه هــوای دیــگـــری داد | بــاشـد بـه لـقـای دیـگـری شـاد |
| آمـــد پـــدر و گـــرفـــت دســـتـــش | بــا دخـتــر عـم نـکـاح بــسـتـش |
| امــروز وی اســـت و دخـــتـــر عـــم | آســوده جــگــر ز نــشــتــر غــم |
| تـــو نـــیـــز نـــظـــر ازو فـــروبـــنـــد | یــاری بــگــزیـن و دل در او بــنــد |
| بــا اهــل جــفــا وفــا روا نــیــســت | پـاداش جـفا بـه جـز جـفا نیست |
| لـیـلـی چــو شــنـیـد ایـن حــکـایـت | کردش غـم جـان بـه دل سـرایت |
| کـاری افــتــاد و ســخــتــش افـتــاد | خـر مـرد بـه راه و رخـتـش افـتـاد |
| کـرد از غــم و درد دســت و پــا گـم | دردی نـــوشــــیـــد از اول خــــم |
| بــــا قــــیـــس ز گــــردش زمـــانـــه | بــرداشــت خــطــاب غــایـبــانــه |
| کــای دلــبــر بــی وفــا چــه کــردی | بــا عـاشـق مـبــتـلـا چـه کـردی |
| بـا آنکه بـه جـان غم تـو خورده ست | کردی کاری که کس نکرده ست |
| راهــش بـــزدی و گــشــتـــی از راه | احـسـنـت احـسـنت بـارک الـلـه |
| بــا هـم نــه چــنـیـن کــنــنــد یـاران | این نـیـسـت طـریق دوسـتـداران |
| گــنــدم بــنــمــودی از نــخــســتــم | چـون عـقـد امـیـد شـد درسـتـم |
| کـــردم پـــی گــنــدمــت تـــک و دو | هـیـچـم نـفـروخـتــی بــجــز جـو |
| اول ز وفــــــا نــــــهــــــادیــــــم دام | وان دم کـه ز مـن گـرفــتــی آرام |
| دامـــن نـــکـــوتــــری گـــرفــــتــــی | وآرام بـــه دیــگـــری گــرفـــتـــی |
| چــون بــا دگـریـت دل خـوش افـتــد | غم نیست که در من آتـش افتـد |
| بــــاد از تـــو بـــلـــنـــد آتـــش مـــن | زان مجـلس عـشـرت تـو روشـن |
| لـیـلـی بــه چـنـیـن غـم جــگـرسـوز | چـون کـرد شـب سـیـاه خـود روز |
| نـــاگـــه مـــجــــنـــون درآمـــد از راه | از لــیــلــی و حـــال او نــه آگــاه |
| شـد یـار طـلـب بــه رســم هـر بــار | لـیـلـی بــه عـتــاب گـفـت زنـهـار |
| نــدهــنــد ره انــدر آن حـــریــمـــش | وز تـیـغ و سـنـان کـنـنـد بـیمـش |
| او مـرد حــرمـســرای مــا نـیـســت | او شـیـفـتــه لـقـای مـا نـیـسـت |
| گــو دامــن یــار خــویـشــتــن گــیــر | دنـبــالـه کــار خــویـشــتــن گـیـر |
| شــــب بــــا دگـــران و روز بــــا مـــا | یــکـــدل نــبـــود هــنــوز بـــا مــا |
| مـسـکـین مـجـنون چـو آن جـفـا دید | بــســیـار بــه ایـن و آن بــنـالـیـد |
| آن نــالـــش او نــداشـــت ســـودی | بــنـهـاد بــه ره ســر ســجــودی |
| گــریــان گــریــان ز دور بـــرگــشــت | غمگین ز سـرای سـور بـرگشـت |
| نــادیــده ز یــار خـــود نــصـــیــبـــی | مـی گـفـت بـه زیر لـب نسـیبـی |
| دردا کـــه عــــظــــیـــم دردنـــاکـــم | در راه امــیــد و بـــیــم خـــاکـــم |
| هــر لــحــظــه فــرو روم بــه راهــی | خــود را نـبــرم گــمـان گــنـاهـی |
| هــمــراه ســـرشــک مــن رو ای آه | وز جــرم نـکـرده عـذر مـن خــواه |
| پـــاکـــم ز گـــنــاه پـــیــچ در پـــیــچ | عشـق اسـت گناه من دگر هیچ |
| آن را کــه بــود هـمــیـن گــنــاهـش | بـر بـیگـنـهی بـس این گـواهـش |
| حــاشــا کـه اگـر فـلـک شــود مـیـغ | بــاران گـردد بــه فـرق مـن تــیـغ |
| از یـــــار تــــــوانــــــدم بــــــریـــــدن | ســر بــر در دیـگــری کــشــیـدن |
| روزی کــه بــه زیــر خــاک بـــاشــم | زآلـایـش جــســم پــاک بــاشــم |
| جــان مـن خـسـتــه پــیـش جــانـان | بــاشـد نـغـمـات شـوق خــوانـان |
| بــر قــالـب خــود کـفــن زنـم چــاک | فــریــادکــنــان بـــرآیــم از خــاک |
| تــــا حــــشـــر ره وفـــاش گـــیـــرم | هر لـحـظـه بـه خـاک پـاش میرم |
| بـا خـویـش هـمـی سـرود مـجـنـون | زان نـکـتــه هـمـچــو در مـکـنـون |
| وز دور هـــمـــی شـــنـــیـــد یـــاری | از آتــــش عـــشــــق داغـــداری |
| بـرگـشـت و بـه لـیلـی اش رسـانید | لـیلـی ز دو دیـده خـون چـکـانـید |
| شـد بــاز بــه عـشـق تـازه پــیـمـان | وز کــرده خــویــش پــشــیـمــان |
| از شــعـر لـطــیـف و نـظــم دلـکـش | او نــیــز زد ایــن تـــرانــه خــوش |
| کان کس که بـه حاسدان نهد گوش | آیــیــن وفـــا کـــنــد فـــرامـــوش |
| حــاســد بــبــرد ز جــان شــیــریــن | شــیــریـنــی دوســتــان دیــریـن |
| یــا رب کــه مــبــاد هــیـچ حــاســد | جــز بـــار گــران و نــرخ کــاســد |
| حــــاســــد ز مـــیـــانـــه دور بــــادا | وز زخــــم زمـــانـــه کــــور بــــادا |
| بــــــادا رگ جــــــان او بــــــریـــــده | کـــز روی تـــوام بــــریـــد دیـــده |
| گـفـتــم بــی تـو بــه صـبــر کـوشـم | وز جـــام فـــراق زهــر نـــوشـــم |
| چون شوق آمد چه جای صبر است | صبـرم بـی تـو چو تیره ابـر است |
| کـــز وی هـــمـــه بـــرق آه خـــیــزد | بــــاران ســــرشــــک درد ریـــزد |
| بـــرخــیــز و بـــیــا کــه بــی قــرارم | وز کـرده خــویـش شــرمـســارم |
| تــا دل دهـمــت بــه بــی گــنـاهـی | دسـتـت بـوسـم بـه عذرخـواهی |
| چـون ایـن در نـاب گـشـت سـفـتــه | ویـن غـنـچــه درد دل شـکـفـتــه |
| در خـــــون دل از مــــژه قــــلــــم زد | بــــر پــــاره کـــاغـــذی رقـــم زد |
| پــیـچـیـد و بــه دسـت قـاصـدی داد | سـوی سـر عـاشـقـان فـرسـتـاد |
| مــجــنـون چــو بــخــوانــد نــامــه او | پــا سـاخـت ز سـر چـو خـامـه او |
| احــرام حــریـم خـیـمـه اش بــسـت | دیگر چو ستـون ز پـای ننشست |
| زان وسـوسـه مـی طـپــیـد تـا بــود | وان مـرحـلـه مـی بــریـد تـا بــود |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
منبع : درج











