غــــواص جــــواهـــر مــــعــــانـــیکـرد از لـب خـود شـکـر فـشـانـیکـانـروز کـه نـوفـل آن ظــفـر یـافـتلـیـلـی بـه وقـایـه در خـبــر یـافـتآمـــد پـ…
| غــــواص جــــواهـــر مــــعــــانـــی | کـرد از لـب خـود شـکـر فـشـانـی |
| کـانـروز کـه نـوفـل آن ظــفـر یـافـت | لـیـلـی بـه وقـایـه در خـبــر یـافـت |
| آمـــد پــــدرش زبــــان گـــشــــاده | بــر فــرق عــمــامــه کــج نــهـاده |
| بـــر گــفــت ز راه تـــیــزهــوشـــی | افــســـانــه آن زبـــان فــروشـــی |
| کـامـروز چـه حـیلـه نقـش بـسـتـم | تـــازافـــت آن رمـــیــده رســـتـــم |
| بــســتــم سـخــنـش بــه آب دادم | یـــگـــبــــارگـــیـــش جـــواب دادم |
| نــوفــل کــه خـــدا جـــزا دهــادش | کــــرد از در مـــا خــــدا دهـــادش |
| و او نیز بـه هجـر گـشـت خـرسـند | دنــدان طــمــع ز وصــل بــر کــنـد |
| لــیــلــی ز پــدر بــدیـن حــکــایــت | رنـجــیـد چــنـانـکــه بــی نـهـایـت |
| در پــرده نـهـفـتــه آه مـی داشــت | پــرده ز پــدر نـگــاه مــی داشــت |
| چــون رفــت پــدر ز پــرده بـــیــرون | شــد نـرگـس او ز گــریـه گـلـگـون |
| چــنــدان زره دو دیــده خــون رانــد | کـز راه خــود آن غـبــار بــنـشـانـد |
| داد آب ز نـــــرگـــــس ارغـــــوان را | در حــوضــه کــشــیـد خــیـزران را |
| اهـلـی نـه کــه قــصــه بــاز گــویـد | یــاری نــه کــه چــاره بــاز جــویـد |
| در ســـلـــه بــــام و در گـــرفـــتـــه | مـی زیسـت چـو مـار سـرگـرفـتـه |
| وز هـر طــرفــی نـســیـم کــویـش | مـی داد خــبــر ز لــطــف بــویـش |
| بـــر صـــحـــبــــت او ز نـــامـــداران | دلــگــرم شــدنــد خــواســتـــاران |
| هـرکــس بــه ولــایـتــی و مــالــی | می جـسـت ز حـسـن او وصـالی |
| از در طــــلــــبـــــان آن خـــــزانــــه | دلــــالــــه هــــزار در مــــیـــانــــه |
| ایـن دسـت کـشـیـده تـا بـرد مـهـد | آن سـینه گشـاده تـا خـورد شـهد |
| او را پــــــــدر از بــــــــزرگـــــــواری | مـی داشـت چـو در در اسـتـواری |
| وان سـیـم تــن از کـمـال فـرهـنـگ | آن شیشـه نگاهداشـت از سـنگ |
| مـی خــورد ولــی بــه صــد مــدارا | پــنـهـان جــگــر و مــی آشــکــارا |
| چون شمع بـه خنده رخ بـرافروخت | خندید و به زیر خنده می سوخت |
| چـون گل کـمر دو رویه می بـسـت | زوبـین در پـای و شـمع بـر دسـت |
| مــــی بــــرد ز روی ســــازگــــاری | آن لـــنـــگــــی را بــــه راهـــواری |
| از مـــشـــتـــریـــان بــــرج آن مـــاه | صـد زهره نـشـسـت گـرد خـرگـاه |
| چـون ابــن سـلـام آن خـبــر یـافـت | بـر وعـده شـرط کـرده بـشـتـافـت |
| آمـــد ز پـــی عـــروس خـــواهـــی | بــا طــاق و طـرنـب پــادشــاهـی |
| آورد خـــزیــنـــه هـــای بـــســـیــار | عـنـبـر بـه مـن و شـکـر بـه خـروار |
| وز نـافــه مـشــک و لــعــل کــانـی | آراســـتــــه بــــرگ ارمـــغـــانـــی |
| از بـــهـــر فـــریــشـــهـــای زیــبـــا | چـنـدیـن شـتــرش بــه زیـر دیـبــا |
| وز بــــخـــتـــی و تــــازی تـــکـــاور | چــنـدانـکـه نـداشــت عـقـل بــاور |
| زان زر کـه بـه یک جـوش سـتـیزنـد | مـی ریـخـت چـنـانـکـه ریگ ریزنـد |
| آن زر نه که او چـو ریگ می بـیخت | بـر کشتـن خصم ریگ می ریخـت |
| کـرده بــه چـنـان مـروتــی چـسـت | آن خــانـه ریـگ بــوم را ســســت |
| روزی دو ز رنـــــج ره بـــــرآســـــود | قـاصـد طـلـبــیـد و شـغـل فـرمـود |
| جـادو سـخـنی که کـردی از شـرم | هـنــگــام فــریـب ســنـگ را نــرم |
| جـان زنـده کـنـی کـه از فـصـیحـی | شــد مــرده او دم مــســیــحـــی |
| بــا پــیـش کـشــی ز هـر طــوایـف | آورده ز روم و چـــیـــن و طـــایـــف |
| قــاصــد بــشــد و خــزیـنــه را بــرد | یـک یـک بـه خـزیـنـه دار بـسـپـرد |
| وانـگـه بــه کــلـیـد خــوش زبــانـی | بـــگــشـــاد خـــزیــنــه نــهــانــی |
| کـیـن شــاهـســوار شــیـر پــیـکــر | روی عـربـسـت و پـشـت لـشـگـر |
| صـاحــب تــبــع و بــلـنـدنـام اسـت | اسـبــاب بــزرگـیـش تـمـام اسـت |
| گــر خــون طــلــبــی چــو آب ریـزد | ور زر گـــوئی چـــو خـــاک بـــیــزد |
| هــم زو بـــرســی بــه یــاوری هــا | هــــم بــــاز رهـــی ز داوریـــهــــا |
| قاصد چـو بـسی سـخـن درین راند | مـســکـیـن پــدر عـروس در مـانـد |
| چـنـدانـکـه بـه گـرد کـار بــرگـشـت | اقــرارش ازیــن قــرار نــگــذشــت |
| بــــر کـــردن آن عـــمـــل رضـــا داد | مــــه را بــــه دهــــان اژدهـــا داد |
| چـون روز دیـگـر عـروس خـورشـیـد | بـگرفت بـه دسـت جـام جـمشـید |
| بــر ســفـت عــرب غـلـام روســی | افــکــنــد مــصـــلــی عــروســـی |
| آمـــــد پــــــدر عـــــروس در کـــــار | آراســت بــه گــنـج کــوی و بــازار |
| دامــاد و دیــگـــر گــروه را خـــوانــد | بــر پــیـش گـه نـشـاط بــنـشـانـد |
| آئیـــن ســــرور و شـــاد کـــامـــی | بــر سـاخـت بــه غـایـت تـمـامـی |
| بـر رسـم عـرب بـه هم نشـسـتـند | عقدی که شـکسـتـه بـازبـسـتـند |
| طــوفــان درم بـــر آســمــان رفــت | در شیر بـها سخـن بـه جـان رفت |
| بـــر حـــجـــلـــه آن بـــت دلـــاویــز | کــردنــد بــه تــنـگــهـا شــکــرریـز |
| وآن تـــنـــگ دهـــان تـــنـــگ روزی | چـون عود و شکر بـه عطر سوزی |
| عـطـری ز بــخــار دل بــرانـگـیـخـت | واشگی چو گلاب تـلخ می ریخت |
| لـعـل آتـش و جـزعـش آب می داد | ایـن غــالـیـه وان گــلـاب مـی داد |
| چـون سـاخـتـه شـد بـسـیچ یارش | نــاســاخــتــه بــود هـیـچ کــارش |
| نزدیک دهن شـکـسـتـه شـد جـام | پـالـوده کـه پـخـتـه بـود شـد خـام |
| بـــر خـــار قـــدم نـــهـــی بــــدوزد | وآتــش بــه دهـن بــری بــســوزد |
| عــضــوی کــه مـخــالـفــت پــذیـرد | فــرمــان تــرا بـــه خــود نــگــیــرد |
| هر چـه آن ز قبـیله گشـت عاصـی | بــیـرون فـتــد از قـبــیـلـه خـاصـی |
| چــون مـار گـزیـده گـردد انـگـشــت | واجـب شـودش بـریدن از مـشـت |
| جـان داروی طـبــع سـازگـاریـسـت | مـردن سـبــب خـلـاف کـاریـسـت |
| لـــیــلــی کـــه مــفـــرح روان بـــود | در مـخـتــلـفـی هـلـاک جـان بــود |
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| چــون صــبــحــدم آفـتــاب روشــن | زد خـیـمـه بـر این کـبـود گـلـشـن |
| ســیــاره شــب پــر از عــوان شــد | بــر دجــلـه نـیـلــگــون روان شــد |
| دامــاد نـشــاط مــنـد بــرخــاســت | از بــهـر عـروس مـحــمـل آراسـت |
| چـــون رفــت عــروس در عــمــاری | بـــردش بــه بــســی بــزرگــواری |
| اورنــگ و ســـریــر خـــود بـــدو داد | حـکـم هـمـه نـیـک و بــد بـدو داد |
| روزی دو ســـه بـــر طـــریـــق آزرم | مـی کــرد بــه رفــق مــوم را نـرم |
| بـا نخـل رطب چـو گشـت گسـتـاخ | دسـتـی بـه رطب کشید بـر شاخ |
| زان نــخـــل رونــده خـــورد خـــاری | کــــز درد نـــخــــفــــت روزگـــاری |
| لـیـلـیـش طـپــانـچـه ای چــنـان زد | کـافـتـاد چـو مـرده مـرد بــی خـود |
| گـفــت ار دگـر ایـن عــمـل نـمـائی | از خــویــشــتـــن و زمــن بـــرائی |
| ســــوگـــنـــد بــــه آفـــریـــدگـــارم | کـار اسـت بــه صـنـع خـود نـگـارم |
| کــز مــن غــرض تــو بــر نــخــیــزد | ور تــیــغ تـــو خــون مــن بـــریــزد |
| چــون ابــن ســلـام دیـد ســوگـنـد | زان بـت بـه سلام گشت خـرسند |
| دانـــــســـــت کـــــزو فـــــراغ دارد | جــــز وی دیـــگـــری چــــراغ دارد |
| لـیـکـن بــه طـریـق سـر کـشـیـدن | مــی نــتــوانــســت از او بــریــدن |
| کـــز دیــدن آن مـــه دو هـــفـــتـــه | دل داده بــــدو ز دســـت رفـــتـــه |
| گــفــتــا چــو ز مــهـر او چــنــیـنــم | آن بــــه کـــه درو ز دور بـــیـــنـــم |
| خــرســنـد شــدن بــه یـک نـظـاره | زان بــه کــه کــنـد ز مــن کــنــاره |
| وانـــگـــه ز ســـر گـــنـــاهــکـــاری | پـــوزش بـــنـــمـــود و کـــرد زاری |
| کــز تـــو بـــه نــظـــاره دل نــهــادم | گــــر زیـــن گــــذرم حــــرامـــزادم |
| زان پـس کـه جـهان گذاشـت بـا او | بــیـش از نـظـری نـداشــت بــا او |
| وان زیـنــت بــاغ و زیـب گــلــشــن | بـــر راه نــهــاده چــشــم روشــن |
| تــــا بـــــاد کــــی آورد غــــبــــاری | از دامـــــن غـــــار یـــــار غـــــاری |
| هـر لـحـظـه بـه نـوحـه بـر گـذرگـاه | بــی خـود بــه در آمـدی ز خـرگـاه |
| گامی دو سه تـاختـی چو مستـان | نــالــنــده تــرت از هـزار دســتــان |
| جــسـتــی خــبــری زیـار مـهـجــور | دادی اثـــری بـــه جـــان رنــجـــور |
| چــنــدان بــه طــریـق نــاصــبــوری | نــــــالــــــیـــــد ز درد و داغ دوری |
| کـان عـشـق نـهـفـتـه شـد هـویـدا | وان راز چـــو روز گــشـــت پـــیــدا |
| بــرداشــتــه رنــج نــاشــکــیـبــش | از شــوهــر و از پــدر نــهــیــبــش |
| چون عشق سرشته شد به گوهر | چـه بــاک پــدر چـه بــیـم شـوهـر |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
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