ای ســرو بــلــنــد قــامــت دوســتوه وه کـه شـمایلـت چـه نیکـوسـتدر پـــای لـــطـــافـــت تـــو مـــیـــرادهر سـرو سهی که بـر لب جـوسـتنــازک بــدنـی…
| ای ســرو بــلــنــد قــامــت دوســت | وه وه کـه شـمایلـت چـه نیکـوسـت |
| در پـــای لـــطـــافـــت تـــو مـــیـــراد | هر سـرو سهی که بـر لب جـوسـت |
| نــازک بــدنـی کــه مــی نـگــنــجــد | در زیـر قـبــا چـو غـنـچـه در پـوسـت |
| مـــه پـــاره بـــه بـــام اگـــر بـــرآیــد | کـه فـرق کـنـد کـه مـاه یـا اوســت؟ |
| آن خـرمن گـل نه گل کـه بـاغـسـت | نـه بــاغ ارم کــه بــاغ مــیـنــوســت |
| آن گــوی مــعــنـبــرســت در جــیـب | یـا بــوی دهـان عـنـبــریـن بــوســت |
| در حـــلــقــه صـــولــجـــان زلــفــش | بـیـچـاره دل اوفـتـاده چـون گـوسـت |
| مــی ســوزد و هـمــچــنــان هـوادار | مـی مـیرد و همـچـنان دعـاگـوسـت |
| خـــون دل عــاشــقــان مــشــتـــاق | در گـــردن دیـــده بـــلـــاجـــوســـت |
| مــن بــنـده لــعــبــتــان ســیـمــیـن | کـــاخـــر دل آدمــی نــه از روســـت |
| بـــســـیــار مــلــامــتـــم بـــکــردنــد | کـانـدر پــی او مـرو کـه بــدخـوسـت |
| ای سـخـت دلـان سـسـت پــیـمـان | این شـرط وفـا بـود کـه بـی دوسـت |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| در عـــهــد تـــو ای نــگــار دلــبـــنــد | بـس عـهد کـه بـشـکـنند و سـوگـند |
| دیـگــر نــرود بــه هــیــچ مــطــلــوب | خــاطــر کـه گـرفــت بــا تــو پــیـونـد |
| از پــیـش تــو راه رفــتــنـم نـیـســت | هـمــچــون مــگــس از بــرابــر قــنـد |
| عـشـق آمد و رسـم عقل بـرداشـت | شــوق آمـد و بــیـخ صــبــر بــرکــنـد |
| در هــیــچ زمـــانــه ای نـــزادســـت | مــادر بــه جــمـال چــون تــو فــرزنـد |
| بــا دســت نــصــیــحــت رفــیــقــان | و انــــدوه فـــــراق کــــوه الــــونــــد |
| من نیسـتـم ار کـسـی دگـر هسـت | از دوسـت بـه یاد دوسـت خـرسـنـد |
| ایـن جــور کـه مـی بــریـم تــا کـی؟ | وین صـبـر کـه مـی کـنـیم تـا چـنـد؟ |
| چــون مــرغ بــه طــمـع دانـه در دام | چـون گـرگ بـه بــوی دنـبـه در بــنـد |
| افـتــادم و مـصـلـحــت چــنـیـن بــود | بـــی بـــنــد نــگــیــرد آدمــی پــنــد |
| مــســتــوجــب ایـن و بــیـش ازیـنـم | بــاشــد کــه چــو مــردم خــردمــنـد |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| امــروز جـــفـــا نــمــی کــنــد کــس | در شـهـر مـگـر تـو مـی کـنـی بــس |
| در دام تـــو عــاشـــقــان گــرفــتـــار | در بــنــد تــو دوســتــان مــحــبـــس |
| یـــا مـــحــــرقـــتــــی بــــنـــار خـــد | مـن جــمـرتــهـا الـســراج تــقـبــس |
| صـبـحـی کـه مـشـام جـان عـشـاق | خـــوشــبـــوی کــنــد اذا تـــنــفــس |
| اســــتــــقــــبــــلـــه و ان تــــولـــی | اســــتأنـــســــه و ان تــــعــــبــــس |
| انـدام تــو خــود حــریـر چــیـنـســت | دیـگـر چــه کـنـی قــبــای اطــلـس؟ |
| مــن در هـمـه قــولــهـا فــصــیـحــم | در وصــف شـــمــایــل تـــو آخـــرس |
| جـــان در قــدمــت کــنــم ولــیــکــن | تــرسـم نـنـهـی تــو پــای بــر خـس |
| ای صـاحــب حــســن در وفـا کـوش | کـایـن حــســن وفــا نـکـرد بــا کـس |
| آخـــر بـــه زکـــات تـــنـــدرســـتـــی | فــریــاد دل شـــکــســـتـــگــان رس |
| مـن بـعـد مـکـن چـنـان کـزین پـیـش | ورنـه بــه خــدا کــه مـن ازیـن پــس |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| گــفــتــار خــوش و لــبـــان بــاریــک | مـــا أطـــیــب فـــاک جـــل بـــاریــک |
| از روی تـــــو مـــــاه آســـــمـــــان را | شــرم آمــد و شــد هــلــال بــاریـک |
| یــا قــاتـــلــتـــی بـــســیــف لــحــظ | والــلــه قــتـــلــتــنــی بـــهــاتــیــک |
| از بــهـر خــدا، کــه مـالــکــان، جــور | چــنــدیـن نـکــنـنـد بــر مــمــالــیـک |
| شــایـد کـه بــه پــادشــه بــگـویـنـد | تــرک تــو بــریـخــت خـون تــاجــیـک |
| دانی که چـه شـب گذشت بـر من؟ | لـــایأت بــــمـــثـــلـــهـــا اعـــادیـــک |
| بــا ایـنــهــمــه گــر حــیـات بــاشــد | هــم روز شـــود شـــبـــان تـــاریــک |
| فـی الـجــمـلـه نـمـانـد صـبــر و آرام | کـــم تـــزجـــرنـــی و کـــم اداریـــک |
| دردا کـه بـه خـیـره عـمـر بـگـذشـت | ای دل تـــو مـــرا نــمــی گـــذاریــک |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| چــشــمــی کــه نـظــر نـگــه نـدارد | بــس فــتــنــه کــه بـــا ســر دل آرد |
| آهــوی کـــمـــنـــد زلـــف خـــوبـــان | خــود را بــه هـلــاک مــی ســپــارد |
| فـــریــاد ز دســـت نــقــش، فــریــاد | و آن دســت کـه نـقـش مـی نـگـارد |
| هـرجــا کــه مــولــهـی چــو فــرهـاد | شــیــریــن صــفــتــی بــرو گــمــارد |
| کــس بــار مــشــاهــدت نــچــیـنــد | تـــا تـــخـــم مـــجـــاهــدت نــکـــارد |
| نــالــیــدن عـــاشـــقـــان دلــســـوز | نــاپـــخــتــه مــجــاز مــی شــمــارد |
| عــیـبــش مــکــنـیـد هـوشــمـنـدان | گــر ســوخــتـــه خــرمــنــی بـــزارد |
| خـاری چـه بــود بـه پـای مـشـتـاق؟ | تــیـغــیـش بــران کــه ســر نــخــارد |
| حــاجــت بــه در کـسـیـســت مـا را | کــاو حــاجــت کــس نــمــی گــزارد |
| گـــویــنـــد بـــرو ز پـــیــش جـــورش | مـــن مـــی روم او نـــمـــی گـــذارد |
| مـن خـود نـه بــه اخـتـیـار خـویـشـم | گــــر دســــت ز دامــــنــــم بــــدارد |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| بـعـد از طـلـب تـو در سـرم نـیـسـت | غـیر از تـو بـه خـاطـر انـدرم نـیسـت |
| ره مـی نـدهـی کــه پــیـشــت آیـم | وز پـیش تـو ره کـه بـگـذرم نـیـسـت |
| مــــن مــــرغ زبــــون دام انـــســــم | هرچـند که می کشـی پـرم نیسـت |
| گـــر چـــون تـــو پـــری در آدمــیــزاد | گـویـنـد کـه هـسـت بـاورم نـیـسـت |
| مـهـر از هـمـه خــلــق بــرگــرفــتــم | جــز یــاد تــو در تــصــورم نــیـســت |
| گــویــنــد بـــکـــوش تـــا بـــیــابـــی | مـی کـوشـم و بـخـت یاورم نـیسـت |
| قــســمــی کــه مــرا نــیـافــریـدنــد | گـر جــهـد کـنـم مـیـسـرم نـیـســت |
| ای کـــاش مـــرا نـــظـــر نـــبــــودی | چــون حــظ نـظـر بــرابــرم نـیـســت |
| فــکـرم بــه هـمـه جــهـان بــگـردیـد | وز گـوشـه صـبــر بــهـتــرم نـیـسـت |
| بــا بــخــت جــدل نـمـی تــوان کــرد | اکـنـون کـه طـریـق دیـگـرم نـیـسـت |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| ای دل نـــه هـــزار عـــهـــد کـــردی | کـــانـــدر طـــلـــب هــوا نــگـــردی؟ |
| کـس را چـه گـنـه تـو خـویـشـتــن را | بــــر تـــیـــغ زدی و زخـــم خـــوردی |
| دیـدی کــه چــگــونـه حــاصــل آمــد | از دعــــوی عــــشـــــق روی زردی؟ |
| یــا دل بــنــهــی بــه جــور و بــیـداد | یـــا قـــصــــه عـــشــــق درنـــوردی |
| ای ســیــم تـــن ســیــاه گــیــســو | کــز فــکــر ســرم ســپـــیــد کــردی |
| بــسـیـار سـیـه، سـپــیـد کـردسـت | دوران ســـــپـــــهــــر لــــاجـــــوردی |
| صـلـحــســت مـیـان کـفـر و اسـلـام | بــــا مـــا تـــو هـــنـــوز در نـــبـــردی |
| سـر بـیـش گـران مـکـن، کـه کـردیم | اقـــرار بـــه بــــنـــدگـــی و خـــردی |
| بــا درد تــوام خــوشــســت ازیــراک | هـــــــم دردی و هــــــم دوای دردی |
| گـفـتـی کـه صـبـور بــاش، هـیـهـات | دل مــوضــع صـــبـــر بـــود و بـــردی |
| هـم چـاره تـحـمـلـسـت و تـسـلـیـم | ورنــه بـــه کـــدام جـــهــد و مــردی |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| بــگــذشــت و نــگــه کــرد بـــا مــن | در پـــای کــشـــان، ز کــبـــر دامــن |
| دو نـرگـس مـســت نـیـم خــوابــش | در پـیـش و بـه حـسـرت از قـفـا مـن |
| ای قــبــلــه دوســتــان مــشــتــاق | گـر بــا هـمـه آن کــنـی کـه بــا مـن |
| بـسـیـار کـسـان کـه جـان شـیـریـن | در پـــــای تـــــو ریــــزد اولــــا مــــن |
| گـفـتــم کـه شــکـایـتــی بــخــوانـم | از دســت تــو پــیـش پــادشــا مــن |
| کاین سـخـت دلی و سسـت مهری | جـــرم از طــرف تـــو بـــود یــا مــن؟ |
| دیـدم کـه نـه شـرط مـهـربـانـیسـت | گـــر بـــانــگ بـــرآرم از جـــفـــا مــن |
| گـــر ســـر بــــرود فـــدای پــــایـــت | دســت از تــو نـمـی کـنـم رهـا مـن |
| جــــز وصــــل تــــوام حــــرام بـــــادا | حــاجــت کـه بــخـواهـم از خـدا مـن |
| گـــویــنــدم ازو نــظـــر بـــپـــرهــیــز | پـــرهــیــز نـــدانــم از قـــضـــا مـــن |
| هــرگــز نــشــنــیـده ای کــه یــاری | بـــی یـــار صـــبــــور بـــود تـــا مـــن |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| ای روی تـــــو آفــــتـــــاب عــــالــــم | انــــگـــــشـــــت نــــمـــــای آل آدم |
| احــــــیـــــای روان مـــــردگــــــان را | بـــویــت نــفــس مــســیــح مــریــم |
| بـــر جـــان عـــزیـــزت آفـــریــن بـــاد | بــر جـسـم شـریـفـت اسـم اعـظـم |
| مـحــبــوب مـنـی چــو دیـده راسـت | ای ســـرو روان بــــه ابــــروی خـــم |
| دســتــان کــه تــو داری از پــریـروی | بـس دل بــبــری بـه کـف و مـعـصـم |
| تــنـهـا نـه مـنـم اســیـر عــشــقــت | خــلـقـی مـتــعـشــقـنـد و مـن هـم |
| شـیـرین جـهـان تـویی بـه تـحـقـیـق | بــــگـــذار حــــدیـــث مـــا تــــقـــدم |
| خــوبــیـت مـســلــمـســت و مــا را | صـبــر از تــو نـمـی شــود مـســلـم |
| تــو عـهـد وفـای خــود شـکـسـتــی | وز جـــانــب مـــا هــنــوز مــحـــکـــم |
| مـگـذار کــه خــســتــگـان بــمـیـرنـد | دور از تـــو بـــه انــتـــظـــار مــرهــم |
| بـی مـا تـو بـه سـر بـری همه عـمـر | مـن بـی تـو گـمـان مـبــر کـه یـکـدم |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| گــل را مــبـــریــد پــیــش مــن نــام | بـــا حــســن وجـــود آن گــل انــدام |
| انــگــشــت نـمــای خــلــق بــودیـم | مـــانــنـــد هــلـــال از آن مـــه تـــام |
| بــر مـا هـمـه عـیـب هـا بــگـفـتــنـد | یــا قـــوم الــی مــتـــی و حـــتـــام؟ |
| مـا خــود زده ایـم جــام بــر ســنـگ | دیــگــر مــزنــیــد ســنــگ بــر جــام |
| آخــر نــگــهـی بــه ســوی مــا کــن | ای دولــت خــاص و حــســرت عــام |
| بـــس در طــلــب تـــو دیــگ ســـودا | پــخــتــیــم و هــنــوز کــار مــا خــام |
| درمـان اســیـر عـشــق صـبــرســت | تــا خـود بــه کـجـا رسـد سـرانـجـام |
| مـــن در قــــدم تــــو خــــاک بــــادم | بــاشـد کـه تـو بـر سـرم نـهـی گـام |
| دور از تــو شـکـیـب چــنـد بــاشــد؟ | مــمــکــن نــشـــود بـــر آتـــش آرام |
| در دام غــمـت چــو مـرغ وحــشــی | می پـیچـم و سـخـت می شود دام |
| مــن بــی تــو نـه راضــیـم ولــیـکــن | چــون کــام نـمـی دهـی بــه نـاکـام |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| ای زلــف تــو هـر خــمـی کــمـنـدی | چـشـمت بـه کرشمه چـشم بـندی |
| مــحـــرام بـــدیــن صــفــت مــبـــادا | کــز چــشــم بــدت رســد گــزنــدی |
| ای آیــنــه ایــمـــنــی کـــه نـــاگـــاه | در تــــــو رســـــد آه دردمـــــنـــــدی |
| یــا چــهــره بـــپــوش یــا بــســوزان | بــر روی چـو آتــشـسـت سـپــنـدی |
| دیــوانــه عــشـــقــت ای پـــریــروی | عــاقــل نــشــود بــه هـیـچ پــنــدی |
| تـلـخـسـت دهـان عـیـشـم از صـبــر | ای تـــنــگ شـــکــر بـــیــار قــنــدی |
| ای سـرو بــه قـامـتـش چـه مـانـی؟ | زیـبــاســت ولــی نـه هـر بــلــنــدی |
| گــریــم بــه امــیــد و دشــمــنــانــم | بـــر گــریــه زنــنــد ریــشــخـــنــدی |
| کـــاجـــی ز درم درآمـــدی دوســـت | تـــا دیــده دشـــمــنــان بـــکـــنــدی |
| یـارب چــه شــدی اگـر بــه رحــمـت | بــاری ســوی مــا نـظــر فــکــنـدی؟ |
| یکـچـنـد بـه خـیـره عـمـر بـگـذشـت | مـن بــعـد بــر آن سـرم کـه چــنـدی |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| آیــا کــه بـــه لــب رســیــد جـــانــم | آوخ کــه ز دســـت شـــد عـــنــانــم |
| کـس دیـد چــو مـن ضــعـیـف هـرگـز | کـز هـســتــی خــویـش درگـمـانـم؟ |
| پــــروانـــه ام اوفـــتـــان و خـــیـــزان | یـــکـــبـــاره بـــســـوز و وارهـــانـــم |
| گــر لــطــف کــنــی بــجــای ایــنــم | ور جــــور کــــنــــی ســــزای آنــــم |
| جـز نـقـش تـو نـیـسـت در ضـمـیـرم | جــز نــام تــو نــیـســت بــر زبــانــم |
| گـر تــلـخ کــنـی بــه دوریـم عــیـش | یــادت چـــو شــکــر کــنــد دهــانــم |
| اســرار تــو پــیــش کــس نــگــویــم | اوصــاف تــو پــیـش کــس نـخــوانـم |
| بــــــا درد تــــــو یــــــاوری نــــــدارم | وز دســت تــو مــخــلــصــی نــدانـم |
| عـاقـل بــجـهـد ز پـیـش شـمـشـیـر | مــن کــشــتــه ســر بــر آســتــانـم |
| چــون در تــو نـمـی تــوان رســیـدن | بـــه زان نـــبـــود کـــه تـــا تـــوانـــم |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| آن بــرگ گــلــســت یــا بــنــاگــوش | یـا سـبــزه بــه گـرد چـشـمـه نـوش |
| دســت چــو مـنـی قـیـامـه بــاشــد | بــا قـامـت چــون تــویـی در آغــوش |
| مـــن مـــاه نـــدیـــده ام کـــلـــه دار | مــن ســرو نــدیــده ام قــبـــاپــوش |
| وز رفـــتـــن و آمــدن چـــه گـــویــم؟ | مــی آرد و جــد و مــی بــرد هــوش |
| روزی دهـنـی بــه خــنـده بــگـشــاد | پــسـتـه، دهـن تــو گـفـت خـامـوش |
| خـاطـر پـی زهـد و تـوبــه مـی رفـت | عـشـق آمـد و گـفـت زرق مـفـروش |
| مــســتـــغــرق یــادت آنــچـــنــانــم | کم هسـتـی خـویش شـد فـراموش |
| یـاران بــه نـصـیـحــتــم چــه گـویـنـد | بـنـشـین و صـبـور بـاش و مـخـروش |
| ای خــام مـن ایـنـچــنـیـن بــر آتــش | عــیــبـــم مــکــن ار بـــرآورم جــوش |
| تــا جــهـد بــود بــه جــان بــکـوشـم | وانــگــه بــه ضــرورت از بـــن گــوش |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| طــاقـت بــرســیـد و هـم بــگـفـتــم | عـشـقـت کـه ز خـلـق مـی نهفـتـم |
| طـــاقـــم ز فـــراق و صـــبــــر و آرام | زآن روز کــه بـــا غــم تــو جــفــتـــم |
| آهــنـــگ دراز شـــب ز مـــن پـــرس | کــز فــرقــت تــو دمــی نــخــفــتــم |
| بــر هـر مـژه قـطـره ای چـو الـمـاس | دارم کـه بــه گـریـه سـنـگ سـفـتـم |
| گـر کـشـتــه شـوم عـجــب مـداریـد | مـن خــود ز حــیـات در شــگــفــتــم |
| تــقــدیــر دریـن مــیــانــم انــداخــت | چــنـدانـکــه کــنـاره مــی گــرفــتــم |
| دی بــر سـر کـوی دوسـت لـخـتــی | خــاک قــدمــش بـــه دیــده رفــتــم |
| نـــه خـــوارتـــرم ز خـــاک بــــگـــذار | تــــا در قـــدم عــــزیـــزش افـــتــــم |
| زانــگــه کــه بـــرفـــتـــی از کــنــارم | صــبـــر از دل ریــش گــفــت رفــتــم |
| می رفـت و بـه کـبـر و ناز می گفـت | بـی مـا چـه کـنی؟ بـه لـابـه گـفـتـم |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| بــــاری بــــگـــذر کـــه در فـــراقـــت | خـون شـد دل ریـش از اشـتــیـاقـت |
| بــگـشـای دهـن کـه پــاســخ تــلـخ | گــویــی شــکــرســـت در مــذاقــت |
| در کـشــتــه خــویـشـتــن نـگـه کـن | روزی اگـــر افــــتــــد اتــــفــــاقــــت |
| تـو خـنده زنان چـو شـمع و خـلـقـی | پـــروانــه صـــفـــت در احـــتـــراقــت |
| مــا خــود ز کــدام خــیــل بــاشــیـم | تـــا خـــیــمــه زنــیــم در وثـــاقــت؟ |
| مــا اخــتــرت صــبـــابــتــی ولــکــن | عــیــنــی نــظـــرت و مــا اطـــاقــت |
| بــس دیـده کـه شــد در انـتــظــارت | دریــا و نــمــی رســد بــه ســاقــت |
| تــو مـسـت شـراب و خــواب و مـا را | بــیـخــوابــی کــشــت در تــیــاقــت |
| نـه قــدرت بــا تــو بــودنــم هـســت | نــه طـــاقـــت آنــکـــه در فـــراقـــت |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| آوخ کـــه چـــو روزگــار بـــرگــشـــت | از مـن دل و صـبــر و یـار بــرگـشــت |
| بـــرگــشــتــن مــا ضــرورتــی بـــود | وآن شـوخ بــه اخــتــیـار بــرگـشــت |
| پـــــرورده بـــــدم بـــــه روزگـــــارش | خــو کــرد و چــو روزگــار بــرگـشــت |
| غــم نــیــز چــه بــودی ار بــرفــتــی | آن روز کــه غــمـگـســار بــرگـشــت |
| رحــمـت کـن اگـر شـکـسـتــه ای را | صــبـــر از دل بــیــقــرار بــرگــشــت |
| عــذرش بــنـه ار بــه زیـر ســنـگــی | سـر کـوفـتـه ای چـو مـار بــرگـشـت |
| زیـن بــحـر عـمـیـق جـان بـه در بـرد | آنـکـس کـه هـم از کـنـار بــرگـشـت |
| مـن ســاکـن خــاک پــاک عـشــقـم | نــتـــوانــم ازیــن دیــار بـــرگــشـــت |
| بــیــچــارگــیـســت چــاره عــشــق | دانـی چـه کـنـم چـو یـار بـرگـشـت؟ |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| هر دل که بـه عاشقی زبـون نیست | دسـت خــوش روزگـار دون نـیـسـت |
| جـــز دیــده شـــوخ عـــاشـــقــان را | بـر چهره دوان سرشک خون نیست |
| کـوتــه نـظــری بــه خــلـوتــم گـفـت | سـودا مـکـن آخـرت جـنـون نـیـسـت |
| گـفــتــم ز تــو کــی بــرآیـد ایـن دود | کـت آتـش غـم در انـدرون نـیـسـت؟ |
| عــــاقــــل دانـــد کــــه نــــالــــه زار | از سـوزش سـینـه ای بـرون نیسـت |
| تــســلـیـم قـضـا شــود کـزیـن قـیـد | کـس را بـه خـلـاص رهنمون نیسـت |
| صـبــر ار نـکـنـم چــه چــاره ســازم؟ | آرام دل از یــکــی فــزون نــیــســت |
| گــر بـــکــشـــد و گــر مــعـــاف دارد | در قـبـضـه او چـو مـن زبـون نـیسـت |
| دانـی بــه چـه مـانـد آب چـشـمـم؟ | سیماب، که یکدمش سکون نیست |
| در دهــــر وفــــا نــــبــــود هـــرگــــز | یا بـود و بـه بـخـت مـا کـنون نیسـت |
| جــــان بــــرخـــی روی یـــار کـــردم | گفتـم مگرش وفاسـت چـون نیست |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| در پــای تــو هـرکـه سـر نـیـنـداخـت | از روی تــو پـــرده بـــر نــیــنــداخــت |
| در تــو نـرســیـد و پــی غــلــط کــرد | آن مـرغ کــه بــال و پــر نـیـنـداخــت |
| کـس بــا رخ تــو نـبــاخــت اســبــی | تــا جــان چــو پــیـاده در نـیـنـداخـت |
| نـــفـــزود غـــم تــــو روشـــنـــایـــی | آن را کـه چـو شـمـع سـر نینـداخـت |
| بــارت بــکــشــم کــه مـرد مـعــنـی | در بــاخـت سـر و سـپــر نـیـنـداخـت |
| جــان داد و درون بــه خـلـق نـنـمـود | خون خورد و سخـن بـه در نینداخـت |
| روزی گفـتـم کـسـی چـون من جـان | از بــهـر تــو در خــطــر نــیـنــداخــت |
| گـفـتـا نـه کـه تـیـر چـشـم مـسـتـم | صـیـد از تــو ضـعـیـفـتــر نـیـنـداخــت |
| بـــا آنــکـــه هــمــه نــظـــر در اویــم | روزی ســوی مــا نـظــر نـیـنـداخــت |
| نـومـیـد نـیـم کـه چــشــم لـطــفـی | بــر مـن فــکــنـد، و گــر نـیـنـداخــت |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| ای بــر تــو قـبــای حــسـن چــالـاک | صــد پــیـرهـن از مـحــبــتــت چــاک |
| پــیـشـت بــه تــواضـعـسـت گـویـی | افــــتــــادن آفــــتــــاب بــــر خــــاک |
| مــا خــاک شــویــم و هــم نــگــردد | خـــاک درت از جـــبـــیــن مــا پـــاک |
| مــهـر از تــو تــوان بــریـد؟ هـیـهــات | کـس بــر تــو تـوان گـزیـد؟ حـاشـاک |
| اول دل بـــــــرده بـــــــاز پــــــس ده | تـــا دســـت بـــدارمــت ز فـــتـــراک |
| بــعــد از تــو بــه هـیـچ کــس نـدارم | امـــیــد و ز کـــس نـــیــایــدم بـــاک |
| درد از جــهــت تــو عــیـن داروســت | زهــر از قــبــل تــو مــحــض تــریـاک |
| ســودای تــو آتــشـی جــهـانـســوز | هـجــران تــو ورطــه ای خــطــرنـاک |
| روی تــو چــه جــای سـحـر بــابــل؟ | مـوی تــو چــه جــای مـار ضـحــاک؟ |
| سعدی بس ازین سخن که وصفش | دامـــن نـــدهــد بـــه دســـت ادراک |
| گــرد ارچــه بــســی هــوا بــگــیــرد | هــرگــز نــرســد بـــه گــرد افــلــاک |
| پـــای طـــلــب از روش فـــرو مــانــد | مـی بـیـنـم و حـیـلـه نـیـسـت الـاک |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| ای چــون لـب لـعـل تــو شــکـر نـی | بــادام چـو چـشـمـت ای پـسـر نـی |
| جــز ســوی تــو مــیـل خــاطــرم نـه | جـــز در رخ تــــو مـــرا نـــظـــر نـــی |
| خــوبـــان جــهــان هــمــه بـــدیــدم | مـثــل تــو بــه چــابــکــی دگــر نـی |
| پـــیــران جـــهــان نــشــان نــدادنــد | چــون تــو دگــری بــه هـیـچ قــرنـی |
| ای آنــکـــه بـــه بـــاغ دلــبـــری بـــر | چـون قـد خـوش تـو یـک سـجـر نـی |
| چــنــدیـن شــجــر وفــا نــشــانــدم | و ز وصـــل تـــو ذره ای ثـــمـــر نــی |
| آوازه مـــن ز عـــرش بــــگـــذشـــت | و ز درد دلـــم تــــو را خــــبــــر نـــی |
| از رفــتـــن مــن غــمــت نــبـــاشــد | از آمــــدن تـــــو خــــود اثـــــر نــــی |
| بــــاز آیــــم اگــــر دهــــی اجــــازت | ای راحـــت جـــان مــن، و گـــر نــی |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| شــد مـوســم ســبــزه و تــمــاشــا | بــرخــیـز و بــیـا بــه ســوی صـحــرا |
| کــان فــتـــنــه کــه روی خــوب دارد | هرجـا که نشـسـت خـاسـت غـوغـا |
| صــاحــبــنــظــری کــه دیــد رویــش | دیـوانـه عــشــق گـشــت و شــیـدا |
| دانــی نـــکـــنـــد قـــبـــول هــرگـــز | دیـــوانــــه حــــدیــــث مــــرد دانــــا |
| چـــشـــم از پــــی دیـــدن تـــو دارم | مــن بــی تــو خــســم کــنــار دریــا |
| از جــــور رقــــیـــب تــــو نـــنـــالـــم | خــارســت نــخــســت بـــار خــرمــا |
| ســعـدی غـم دل نـهـفـتــه مـی دار | تـــا مــی نــشــوی ز غــیــر رســـوا |
| گـفــتــســت مـگـر حــســود بــا تــو | زنـــهـــار مـــرو ازیــن پـــس آنـــجـــا |
| مــن نــیــز اگــرچــه نــاشــکــیــبــم | روزی دو بــــرای مـــصـــلـــحــــت را |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
| بـــربـــود جـــمـــالـــت ای مـــه نـــو | از مــــاه شــــب چــــهــــارده ضــــو |
| چـون مـی گـذری بــگـو بــه طـاوس | گــر جــلــوه کــنــان روی چــنـیـن رو |
| گــر لــاف زنــی کــه مــن صــبـــورم | بـعـد از تـو، حـکـایـتـسـت و مـشـنـو |
| دســتــی ز غــمــت نــهــاده بــر دل | چــشــمـی ز پــیـت فــتــاده در گــو |
| یــــا از در عــــاشـــــقــــان درون آی | یـــا از دل طـــالـــبـــان بـــرون شـــو |
| زین جـور و تـحکمت غرض چـیست؟ | بــــنـــیـــاد وجــــود مــــا کــــن و رو |
| یـا مـتــلـف مـهـجــتــی و نـفـســی | الــلــه یــقــیــک مــحـــضــر الــســو |
| بــا مـن چـو جــوی نـدیـد مـعـشـوق | نـگـرفــت حــدیـث مـن بــه یـک جــو |
| گـفــتــم کــهـنـم مـبــیـن کــه روزی | بــیـنـی کـه شـود بــه خـلـعـتـی نـو |
| در ســـایــه شـــاه آســـمــان قـــدر | مـــه طـــلـــعـــت آفـــتـــاب پـــرتـــو |
| وز لـطـف مـن ایـن حـدیـث شـیـریـن | گـر مـی نـرسـد بــه گـوش خــسـرو |
| بــنـشــیـنـم و صــبــر پــیـش گـیـرم | دنــبـــالـــه کـــار خـــویــش گـــیــرم |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
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