روزی ز قـضـا بــه وقـت شــبــگـیـرمـی رفـت شـکـاریی بـه نخـجـیربــر نـجـد نـشـسـتـه بـود مـجـنـونچــون بــر ســر تــاج در مـکــنـونصــیــاد چــو دیــد…
| روزی ز قـضـا بــه وقـت شــبــگـیـر | مـی رفـت شـکـاریی بـه نخـجـیر |
| بــر نـجـد نـشـسـتـه بـود مـجـنـون | چــون بــر ســر تــاج در مـکــنـون |
| صــیــاد چــو دیــد بــر گــذر شــیـر | بـگشـاد در او زبـان چـو شمشیر |
| پـــرســـیــد ورا چـــو ســـوکــواران | کــای دور از اهــل بــیـت و یـاران |
| فارغ که ز پـیش تـو پـسی هسـت | یا جـز لـیلی تـرا کـسـی هسـت |
| نـــز مـــادر و نـــز پــــدر بــــیـــادت | بـی شرم کسـی که شرم بـادت |
| چـون تـو خـلـفـی بــه خـاک بـهـتـر | کــز نــاخـــلــفــی بـــراوری ســر |
| گـــیــرم ز پـــدر بـــه زنـــدگـــانــی | دوری طــلــبـــیــدی از جـــوانــی |
| چــون مــرد پـــدر تـــرا بـــقــا بـــاد | آخـــر کـــم ازآنــکـــه آریــش یــاد |
| آیـــی بــــه زیـــارتـــش زمـــانـــی | واری ز تـــرحـــمــش نــشــانــی |
| در پـــوزش تــربـــتــش پـــنــاهــی | عـــذری ز روان او بــــخـــواهـــی |
| مــجــنـون ز نـوای آن کــج آهـنــگ | نالید و خـمید راست چـون چـنگ |
| خـــود را ز دریـــغ بــــر زمـــیـــن زد | بـسـیـار طـپـانـچـه بـر جـبـیـن زد |
| ز آرام و قـــرا گـــشـــت خــــالـــی | تــــاگـــور پــــدر دویـــد حـــالـــی |
| چــون شــوشــه تــربــت پــدر دیـد | الـماس شـکـسـتـه در جـگـر دید |
| بــر تــربــتـش اوفـتــاد بــی هـوش | بـگـرفـتـش چـون جـگر در آغـوش |
| از دوســـــتـــــی روان پـــــاکــــش | تــر کــرد بــه آب دیـده خــاکــش |
| گـــه خــــاک ورا گـــرفـــت در بــــر | گــه کــرد ز درد خـــاک بـــر ســر |
| زنــــدانــــی روز را شـــــب آمـــــد | بــیــمــار شــبــانــه را تــب آمــد |
| او خـود همـه سـالـه درسـتـم بـود | کـز گـام نخـسـت اسـیر غـم بـود |
| آنــکــس کــه اســیــر بــیـم گــردد | چـون بــاشـد چـون یـتــیـم گـردد |
| نــومــیــد شــده ز دســتــگــیــری | بـــا ذل یــتـــیــمــی و اســیــری |
| غــلــطــیـد بــران زمــیـن زمــانــی | می جست ز هم نشین نشانی |
| چون غم خور خویش را نمی یافت | از غـم خـوردن عـنان نمی تـافـت |
| چـندان ز مژه سرشک خون ریخـت | کـاندام زمین بـه خـون بـرآمیخـت |
| گـفــت ای پــدر ای پــدر کــجــائی | کـافـسـر بـه پـسـر نمـی نمـائی |
| ای غـم خــور مـن کـجــات جــویـم | تــیـمـار غــم تــو بــا کــه گــویـم |
| تــو بــی پــســری صــلــاح دیــدی | زان روی بــه خــاک درکـشـیـدی |
| مــن بـــی پـــدری نــدیــده بـــودم | تــلـخــســت کــنـون کـه آزمـودم |
| ســر کـوفــت دوریـم مـکـن بــیـش | من خـود خـجـلم ز کـرده خـویش |
| فــــریــــاد بــــرآیــــد از نــــهــــادم | کــایــد ز نــصــیــحــت تـــو یــادم |
| تــو رایـض مــن بــکــش خــرامــی | مـن تـوسـن تـو بـه بــد لـگـامـی |
| تـــو گــوش مــرا چـــو حــلــقــه زر | مـن دور ز تــو چــو حـلـقـه بــر در |
| مـن کـرده درشــتــی و تــو نـرمـی | از من همه سـردی از تـو گـرمی |
| تــو در غـم جــان مـن بــه صـد درد | مـن گـرد جــهـان گـرفــتــه نـاورد |
| تــو بـــســتـــر مــن ز گــرد رفــتــه | من رفـتـه بـه تـرک خـواب گفـتـه |
| تـــو بـــزم نــشـــاط مـــن نــهــاده | مـن بــر ســر سـنـگـی اوفـتــاده |
| تـــو گــفــتـــه دعــا و اثــر نــکــرده | من کشـتـه درخـت و بـر نخـورده |
| جــان دوســتـــی تـــرا بـــه مــردم | یـــاد آرم و جـــان بـــرآرم از غـــم |
| بــر جــامــه ز دیـده نــیـل پــاشــم | تــا کـور و کـبــود هـر دو بــاشــم |
| آه ای پــــدر آه از آنـــچــــه کـــردم | یـــک درد نــــه بــــا هــــزار دردم |
| آزردمـــت ای پـــدر نــه بـــر جـــای | وای ار بـه حـلـم نمی کـنی وای |
| آزار تـــــو راه مـــــا مـــــگـــــیــــراد | مــا را بــه گــنــاه مــا مــگــیــراد |
| ای نـــــور ده ســـــتــــــاره مـــــن | خــوشـنـودی تــسـت چــاره مـن |
| تـــرســم کــنــدم خـــدای مأخــوذ | گـر تـو نشـوی ز بـنـده خـوشـنود |
| گـفـتــی جـگـر مـنـی بــه تــقـدیـر | وانـگــاه بــدیـن جــگـر زنـی تــیـر |
| گــر مــن جـــگــر تـــوام مــنــابـــم | چـون بـی نمـکـان مـکـن کـبـابـم |
| زینسـان جـگرت بـه خـون گشـائی | تـــو در جـــگــر زمــیــن چـــرائی |
| خــون جــگــرم خــوری بــدیــن روز | خـوانی جـگـرم زهی جـگـر سـوز |
| بــا مـن جـگـرت جـگـر خـور افـتــاد | کـاتـش بـه چـنین جـگر در افـتـاد |
| گــر در حــق تــو شــدم گـنـه کــار | گـشـتـم بــه گـنـاه خـود گـرفـتـار |
| گــر پــنــد بـــه گــوش در نــکــردم | از زخــم تــو گـوشــمـال خــوردم |
| زیــنــگــونــه دریــغ و آه مــی کــرد | روزی بـه شـبـی سـیاه می کـرد |
| تــا شــب عــلــم ســیـاه نـنــمــود | نـالــه اش ز دهـل زدن نـیـاســود |
| چــون هــاتــف صــبـــح دم بــرآورد | وز کــوه شــفــق عــلــم بـــرآورد |
| اکــســیــری صــبــح کــیـمــیــاگــر | کــرد از دم خــویــش خــاک را زر |
| آن خـــــاک روان ز روی آن خـــــاک | بــر پـشـتـه نـجـد رفـت غـمـنـاک |
| مـی کـرد هـمـان سـرشـک بــاری | امــا بـــه طـــریــق ســـوکـــواری |
| می زد نفـسـی بـه شـور بـخـتـی | می زیست بـه صد هزار سختی |
| مـــی بــــرد ز بـــهـــر دلـــفـــروزی | روزی بـه شبـی شبـی بـه روزی |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
منبع : درج











