فــرزانــه ســـخـــن ســـرای بـــغـــداداز سـر سـخـن چــنـیـن خــبــر دادکـــان شـــیــفـــتـــه رســـن بـــریــدهدیــــوانــــه مــــاه نــــو نــــد…
| فــرزانــه ســـخـــن ســـرای بـــغـــداد | از سـر سـخـن چــنـیـن خــبــر داد |
| کـــان شـــیــفـــتـــه رســـن بـــریــده | دیــــوانــــه مــــاه نــــو نــــدیــــده |
| مــجــنــون جــگــر کــبـــاب گــشــتــه | دهــقـــان ده خـــراب گـــشـــتـــه |
| مـی گـشـت بـه هـر بـسـیـچ گـاهـی | مـونـس نـه بــه جــز دریـغ و آهـی |
| بــــوئی کـــه ز ســـوی یـــارش آمـــد | خــوشــبــوی تــر از بــهـارش آمــد |
| زان بـــــوی خـــــوش دمـــــاغ پـــــرور | اعــضــاش گـرفــتــه رنـگ عــنـبــر |
| آن عــــنـــبــــرتــــر ز بــــهـــر ســــودا | مــی کـــرد مــفـــرحـــی مــهــیــا |
| بـــر خــاک فــتـــاده چـــون ذلــیــلــان | در زیــر درخـــتـــی از مــغـــیــلــان |
| زانــروی کــه روی کــار نــشــنــاخــت | خـار از گـل و گل ز خـار نشـناخـت |
| نــاگــه ســـیــهــی شــتـــر ســـواری | بــگـذشـت بــر او چـو گـرزه مـاری |
| چــون دیــد در آن اســیــر بــی رخــت | بــگـرفــت زمـام نـاقـه را ســخــت |
| غـــریـــد بــــه شـــکـــل نـــره دیـــوی | بــرداشــت چــو غـافـلـان غـریـوی |
| کـی بـی خـبــر از حـسـاب هـسـتـی | مـشـغـول بــه کـار بــت پـرسـتـی |
| بـــه گــرز بـــتـــان عــنــان بـــتــابـــی | کــز هــیــچ بــتــی وفــا نــیــابــی |
| ایـن کـار کـه هـسـت نـیـسـت بـا نـور | وان یار که نیست هست ازین دور |
| بــیـکــار کـســی تــو بــا چــنـیـن کـار | بــی یـار بــهـی تــو از چــنـیـن یـار |
| آن دوســت کــه دل بـــدو ســپـــردی | بــر دشــمـنـیـش گــمـان نـبــردی |
| شـــد دشـــمــن تـــو ز بـــی وفـــائی | خـــود بـــاز بـــریــد از آشـــنـــائی |
| چـــون خــرمــن خــود بـــه بـــاد دادت | بـــد عــهــد شــد و نــکــرد یــادت |
| دادنـــد بــــه شـــوهـــری جـــوانـــش | کـــردنـــد عــــروس در زمـــانـــش |
| و او خــدمــت شــوی را بــســیـچــیـد | پـیـچـید در اوی و سـر نـه پـیـچـید |
| بــاشــد هـمــه روزه گــوش در گــوش | بـا شـوهـر خـویشـتـن هم آغـوش |
| کـارش هـمـه بــوســه و کـنـار اســت | تـو در غم کارش این چه کار است |
| چــون او ز تــو دور شـد بــه فـرسـنـگ | تــو نـیـز بــزن قــرابــه بــر ســنـگ |
| چـــون نـــاوردت بـــه ســـالـــهــا یــاد | زو یـاد مــکــن چــه کــارت افــتــاد |
| *** | |
| زن گـــر نـــه یــکـــی هــزار بـــاشـــد | در عــهــد کــم اســتــوار بـــاشــد |
| چــون نـقـش وفـا و عـهـد بــســتــنـد | بــر نـام زنـان قـلـم شــکـســتــنـد |
| زن دوســــت بــــود ولــــی زمـــانـــی | تــا جــز تــو نــیـافــت مــهـربــانـی |
| چـــون در بـــر دیــگـــری نــشـــیــنــد | خــواهـد کــه دگــر تــرا نـه بــیـنـد |
| زن مــــیــــل ز مـــــرد بـــــیــــش دارد | لـیـکـن ســوی کــام خــویـش دارد |
| زن راســـت نـــبــــازد آنـــچـــه بــــازد | جـــز زرق نــســازد آنــچــه ســازد |
| بـــســیــار جـــفــای زن کــشــیــدنــد | وز هــیــچ زنـــی وفـــا نـــدیــدنـــد |
| مــــردی کــــه کـــــنــــد زن آزمــــائی | زن بـــهــتــر از او بــه بــی وفــائی |
| زن چــیـســت نـشــانـه گــاه نـیـرنـگ | در ظـاهر صـلـح و در نـهـان جـنـگ |
| در دشــمــنــی آفــت جـــهــانــســت | چون دوست شود هلاک جـانست |
| گــوئی کــه بــکــن نــمــی نــیـوشــد | گـوئی کـه مـکـن دو مـرده کـوشـد |
| چــون غــم خــوری او نــشــاط گــیـرد | چــون شـاد شـوی ز غـم بــمـیـرد |
| ایــن کــار زنــان راســـت بـــاز اســـت | افــســوس زنــان بـــد دراز اســت |
| *** | |
| مــجــنــون ز گــزاف آن ســیـه کــوش | بــرزد ز دل آتــشـی جــگـر جـوش |
| از درد دلــــش کــــه در بــــرافــــتــــاد | از پــای چــو مـرغ در ســر افــتــاد |
| چـنـدان سـر خـود بـکـوفـت بـر سـنگ | کـز خـون همه کـوه گشـت گلرنگ |
| افــــتــــاد مـــیـــان ســــنـــگ خــــاره | جــان پـــاره و جــامــه پـــاره پــاره |
| آن دیـو کـه آن فـســون بــر او خــوانـد | از گـفـتـه خـویشـتـن خـجـل مـانـد |
| چــنــدان نــگــذشــت از آن بــلــنــدی | کـان دل شـده یافـت هوشـمـندی |
| آمـــد بــــه هـــزار عــــذر در پــــیـــش | کای من خـجـل از حـکایت خـویش |
| گـفــتــم ســخــنـی دروغ و بــد رفــت | عـفوم کن کانچـه رفـت خـود رفـت |
| گـــر بــــا تـــو یـــکـــی مـــزاح کـــردم | بــر عــذر تــو جــان مــبــاح کــردم |
| آن پـــرده نــشـــیــن روی بـــســـتـــه | هـسـت از قـبـل تـو دلـشـکـسـتـه |
| شـویـش کـه ورا حـریف و جـفـتـسـت | سر بـا سر او شبـی نخـفت سـت |
| گــرچـــه دگــری نــکــاح بـــســتـــش | ار عـهـد تـو دور نـیـسـت دسـتـش |
| جــــز نـــام تــــو بــــر زبــــان نـــیـــارد | غــیـر تــو کــس از جــهــان نــدارد |
| یـــکــــدم نـــبــــود کـــه آن پــــریـــزاد | صــــد بــــار نــــیــــاورد تــــرا یـــاد |
| سالیست که شد عروس و بیشست | بـا مهر تـو و بـه مهر خـویشـسـت |
| گــر بـــی تـــو هــزار ســـال بـــاشـــد | بــر خــوردن از او مــحــال بــاشــد |
| مــجـــنــون کـــه در آن دروغـــگـــوئی | دیــــد آیـــنــــه ای بــــدان دوروئی |
| انــدک تــر از آنــچــه بــود غــم خــورد | کـم مـایـه از آنـچــه کــرد کـم کـرد |
| مـی بــود چــو مـراغ پــر شـکـســتــه | زان ضربـه که خـورد سرشکسـتـه |
| از جــزع پــر آب لــعــل مــی ســفــت | بـر عهد شکسـتـه بـیت می گفت |
| ســامــان و ســری نـداشــت کــارش | کــز وی خــبــری نـداشــت یـارش |
| *** | |
| مــشـــاطــه ایــن عــروس نــو عــهــد | در جـلـوه چـنان کـشـیدش از مهد |
| کـان مـهـدنـشــیـن عــروس جــمـاش | رشــــگ قـــلـــم هـــزار نـــقـــاش |
| چـون گـشـت بـه شـوی پـای بـسـتـه | بـود از پـی دوسـت دل شـکسـتـه |
| غــمــخــواره او غــمــی دگــر یــافــت | کـز کـردن شــوی او خــبــر یـافــت |
| گــشــتــه خــرد فــرشــتــه فــامــش | مـجـنـون تــر از آنـکـه بــود نـامـش |
| افــتـــاده چـــو مــرغ پـــر فــشـــانــده | بــیـش از نـفـســی در او نـمـانـده |
| در جــــســــتــــن آب زنــــدگــــانــــی | بـرجـسـت بـه حـالـتـی کـه دانـی |
| شــــد ســــوی دیــــار آن پــــریـــروی | بــاریـک شـده ز مـویـه چـون مـوی |
| بـــا او بـــه زبـــان بـــاد مــی گــفـــت | کی جـفت نشاط گشتـه بـا جـفت |
| کــو آن دو بــه دو بــهـم نـشــســتــن | عـهـدی بـه هـزار عـهـده بــسـتـن |
| کــــو آن بــــه وصــــال امــــیــــد دادن | ســر بــر خــط خــاضــعـی نـهـادن |
| دعــــوی کـــردن بــــه دوســــتــــاری | دادن بـــــه وفـــــا امـــــیـــــدواری |
| و امــروز بـــه تـــرک عــهــد گــفــتـــن | رخ بــی گــنـهـی ز مـن نـهـفــتــن |
| گـــیـــرم دلـــت از ســــر وفـــا شــــد | آن دعــوی دوســتــی کـجــا شــد |
| مـن بــا تــو بــه کـار جــان فــروشــی | کــار تــو هــمــه زبــان فــروشــی |
| مــن مــهــر تـــرا بـــه جـــان خــریــده | تــو مــهــر کــســی دگــر گــزیـده |
| کـس عــهـد کـســی چــنـیـن گـذارد؟ | کــو را نــفــســی بـــه یــاد نــارد؟ |
| بـــا یــار نــو آنــچــنــان شــدی شــاد | کــــز یـــار قــــدیـــم نـــاوری یـــاد |
| گــر بـــا دگــری شــدی هــم آغــوش | مــا را بــه زبــان مـکــن فــرامـوش |
| شـــد در ســـر بـــاغ تـــو جـــوانـــیــم | آوخ هــمــه رنــج بـــاغـــبـــانــیــم |
| ایـــن فـــاخـــتـــه رنـــج بـــرد در بـــاغ | چـون مـیوه رسـیـد مـی خـورد زاغ |
| خــرمـای تــو گـرچــه ســازگـار اسـت | بـا هر که به جز منست خار است |
| بــــا آه چـــو مـــن ســـمـــوم داغـــی | کـس بـر نخـورد ز چـون تـو بـاغـی |
| چـــون ســرو روانــی ای ســمــنــبـــر | از سـرو نـخــورده هـیـچــکـس بــر |
| بــــرداشــــتــــی اولــــم بــــه یـــاری | بــگـذاشــتــی آخــرم بــه خــواری |
| آن روز کـــه دل بــــه تـــو ســـپــــردم | هـرگـز بــه تــو ایـن گـمـان نـبــردم |
| بــفـریـفــتــیـم بــه عــهـد و ســوگـنـد | کـان تـو شـوم بــه مـهـر و پــیـونـد |
| سـوگـنـد نـگـر چــه راســت خــوردی! | پــیـونـد نـگـر چــه راســت کـردی! |
| کــردی دل خـــود بـــه دیــگــری گــرم | وز دیــده مــن نــیــامـــدت شـــرم |
| تـــنـــهــا نـــه مـــن و تـــوئیــم در دور | کــازرم یــکــی کــنــیــم بـــا جــور |
| دیـــگـــر مـــتـــعـــرفـــان بــــکـــارنـــد | کـایـشـان بـد و نـیـکـهـا شـمـارنـد |
| بـــیــنــنــد کــه تـــا غــم تـــو خــوردم | بــا مـن تـو و بـا تـو مـن چـه کـردم |
| گــیـرم کــه مــرا دو دیـده بــســتــنــد | آخــر دگــران نــظــاره هـســتــنــد |
| چــون عــهــده عــهــد بـــاز جــویــنــد | جـز عـهـد شـکـن تـرا چـه گـویـنـد |
| فــرخ نــبـــود شـــکــســـتـــن عــهــد | انـدیشـه کـن از شـکـسـتـن مـهد |
| گــل تــا نـشــکــســت عــهـد گــلــزار | نـشـکـسـت زمـانـه در دلـش خـار |
| مــی تــا نــشــکــســت روی اوبــاش | در نـام شـکـسـتـگـی نشـد فـاش |
| شــب تــا نـشــکــســت مـاه را جــام | بــا روی سـیـه نـشـد ســرانـجــام |
| در تـــو بـــه چـــه دل امـــیــد بـــنــدم | وز تــو بــه چــه روی بـــاز خــنــدم |
| کـان وعــده کـه پــی در او فــشــردی | عـمـرم شـد و هم بـه سـر نبـردی |
| تــو آن نـکــنـی کـه مـن شــوم شــاد | وانـکـس نـه مـنـم کـه نـارمـت یـاد |
| بــا ایـنـهـمــه رنــج کــز تــو ســنـجــم | رنـجــیـده شــوم گـر از تــو رنـجــم |
| غــم در دل مــن چــنــان نــشــانــدی | کـــازرم در آن مـــیــان نــمـــانــدی |
| آن روی نـــه کـــاشـــنـــات خــــوانـــم | وان دل نـه کــه بــی وفــات دانــم |
| عــاجـــز شــده ام ز خـــوی خـــامــت | تــا خــود چــه تــوان نـهـاد نـامــت |
| بـــا ایــنــهــمــه جـــورهــا کــه رانــی | هـم قـوت جــسـم و قـوت جــانـی |
| بــیـداد تــو گـر چــه عـمـر کـاهـســت | زیـبــائی چـهـره عـذر خـواهـسـت |
| آنــرا کــه چـــنــان جـــمــال بـــاشـــد | خــون هـمـه کـس حــلـال بــاشـد |
| روزی تــــو و مـــن چــــراغ دل ریـــش | بـه زان نـبـود کـه مـی رمـت پـیش |
| مــه گــر شــکــریـن بــود تــو مــاهـی | شـه گر بـه دو رخ بـود تـو شـاهی |
| گــل در قـــصـــبـــی و لــالــه در خـــز | شــیــریــن ورزیـن چــو شــیــره رز |
| گـــر آتـــش بــــیـــنـــدت بــــدان نـــور | آبــــش بـــه دهـــان درآیـــد از دور |
| بـــاغ ارچــه گــل و گــلــالــه دارســت | از عـکـس رخـت نـوالـه خـوارسـت |
| اطـلـس کـه قـبـای لـعـل شـاهیسـت | بــا قــرمــزی رخ تــو کــاهـیـســت |
| ز ابــروی تـو هـر خـمـی خـیـالـیـسـت | هـر یک شـب عـید را هلـالـیسـت |
| گـر عـود نـه صــنـدل ســپــیـد اســت | بـا سـرخ گـل تـو سـرخ بـید اسـت |
| سـلـطـان رخـت بــه چـتــر مـشـگـیـن | هم ملک حبـش گرفت و هم چین |
| از خـــوبـــی چـــهـــره چـــنـــیــن یــار | دشـــوار تــــوان بــــریـــد دشـــوار |
| تـــدبـــیـــر دگـــر جـــز ایـــن نـــدانـــم | کـین جـان بـه سـر تـو بـرفـشـانـم |
| آزرم وفــــــای تــــــو گــــــزیـــــنــــــم | در جــور و جــفــای تــو نــبــیــنــم |
| هــم بــا تــو شــکــیـب را دهـم ســاز | تــا عـمـر کـجــا عـنـان کـشـد بــاز |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
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