زلــیــخــا داشــت از دل بـــر جــگــر داغز نــــومــــیـــدی فــــزودش داغ بــــر داغبــــود هــــر روز را رو در ســــپــــیـــدیبـــــجــــز روز ســ…
| زلــیــخــا داشــت از دل بـــر جــگــر داغ | ز نــــومــــیـــدی فــــزودش داغ بــــر داغ |
| بــــود هــــر روز را رو در ســــپــــیـــدی | بـــــجــــز روز ســــیــــاه نــــاامــــیــــدی |
| پـدر چون بـهر مصرش خستـه جـان دید | عـلـاج خــسـتــه جــانـیـش انـدر آن دیـد |
| کـــه دانــایــی بـــه راه مــصـــر پـــویــد | عــلــاجـــش از عـــزیــز مــصـــر جـــویــد |
| بـــرد از وی پـــیـــامـــی چـــنـــد بـــا او | زلـــیـــخــــا را دهـــد پــــیـــونـــد بــــا او |
| ز نــزدیــکــان یــکــی دانــا گــزیـن کــرد | بـــه دانـــایــی هـــزارش آفـــریــن کـــرد |
| بــداد از تــحـفـه هـا صـدگـونـه چـیـزش | بـــه رفــتـــن رای زد ســـوی عـــزیــزش |
| پــــیـــامـــش داد کــــای دور زمــــانـــه | تـــو را بـــوســـیــده خـــاک آســـتـــانــه |
| بـــه هــر روز از نــوازش هــای گـــردون | عـــزیــزی بـــر عـــزیــزی بـــادت افـــزون |
| مـرا در بــرج عــصــمـت آفـتــابــیـســت | کـه مـه را در جـگـر افـکـنـده تـابــیـسـت |
| ز اوج مــــــاه بــــــرتــــــر پــــــایــــــه او | نــــدیــــده دیــــده خـــــور ســـــایــــه او |
| ز گــوهــر در صــدف صــافــی بــدن تــر | ز اخــتـــر در شــرف پـــرتـــو فــکــن تـــر |
| کــنــد پـــوشـــیــده رخ مــه را نــظـــاره | کـه تــرسـد بــیـنـدش چــشـم ســتــاره |
| جــز آیـیـنـه کــســی کــم دیـده رویـش | بــجـز شـانـه کـسـی نـبـسـوده مـویـش |
| نــبــاشــد غــیــر زلــفــش را مــیــســر | کــه گــاهــی افــکــنــد در پــای او ســر |
| بــه صـحـن خـانـه چــون گـردد خـرامـان | نــیــارد پـــایــبـــوســـش غـــیــر دامـــان |
| نـدیـده ســیـب او مـشـاطـه در مـشـت | نـسـوده بــر لـبــش نـیـشـکـر انـگـشـت |
| جـــمــال او ز گـــل دامــن کـــشـــیــده | کــه پــیــراهــن بـــه بـــدنــامــی دریــده |
| ز نـرگـس حـسـن او پـوشـیـده رخـسـار | که نرگس خیره چشم است و قدح خوار |
| نـــپـــویـــد در فـــروغ مـــهـــر یـــا مـــاه | کــه تــا بــا او نــگــردد ســایــه هــمــراه |
| گـذر بــر چــشـمـه و جــویـش نـیـفـتــد | کـه چــشـم عـکـس بــر رویـش نـیـفـتــد |
| درون پـــــرده مــــنــــزلــــگــــاه کــــرده | ولـــی صـــد شـــور ازو بــــیـــرون پـــرده |
| هـمــه شــاهــان هـواخــواهــان اویـنــد | خـــراب لـــطـــف نـــاگـــاهـــان اویـــنـــد |
| ســــرافـــرازان ز حــــد روم تــــا شـــام | هـــمـــه از شـــوق او خـــون دل آشـــام |
| ولــی وی در نـیـارد ســر بــه هـر کــس | هـــوای مـــصـــر در ســــر دارد و بــــس |
| نــــگــــردد خـــــاطـــــر او رام بـــــا روم | شـــمــارد آب و خـــاک شـــام را شـــوم |
| بــه راه مـصـر چـشـم او سـبـیـل اسـت | بــرای مـصــر اشــکـش رود نـیـل اســت |
| ندانم سوی مصرش این شعف چیست | هـواانـگـیـز طـبــعـش آن طـرف کـیـسـت |
| هـمــانـا خــاک او زانـجــا ســرشــتــنـد | بــــرات رزق او آنـــجــــا نـــوشــــتــــنـــد |
| اگـــر افـــتــــد قـــبــــول رای عــــالـــی | فـرسـتــیـمـش بــه آن دلـکـش حــوالـی |
| اگــر نــبــود بــه صــدر خــانــه خــوبــی | بـــود خــدمــتـــگــری را خـــانــه روبـــی |
| عـزیـز مـصـر چــون ایـن قـصـه بــشـنـود | کـــلــاه فـــخـــر بـــر اوج فـــلــک ســـود |
| تــواضـع کـرد و گـفـتــا مـن کـه بــاشـم | کـه در دل تــخــم ایـن انـدیـشـه پــاشـم |
| ولـی چـون شـه مـرا بـرداشـت از خـاک | ســـزد گــر بـــگــذرانــم ســـر ز افــلــاک |
| مــن آن خــاکــم کــه ابـــر نــوبـــهــاری | کــنـد از لــطــف بــر مــن قــطــره بــاری |
| اگـــر بـــر رویـــد از تـــن صـــد زبـــانـــم | چـو سـبـزه شـکـر لـطـفـش چـون تـوانـم |
| بـدین لطفی که شـه کرده سـت اظهار | کـنـد واجــب کـه گـر بــخــتــم شـود یـار |
| کــنـم از فــرق پــای از دیـده نــعــلــیـن | شــوم ســویـش روان بــالـرأس والـعـیـن |
| ولـی بــا شــاه مـصـر آن کـان فـرهـنـگ | چــنـانـم در گــرفــتــه خــدمــتــی تــنـگ |
| کــه گـر یـک ســاعــت از وی دور گـردم | ز تـــیــغ ســـطـــوتـــش رنــجـــور گــردم |
| دریـــن خــــدمـــت مـــرا مـــعـــذور دارد | گـــــمــــان نــــخـــــوت از مــــن دور دارد |
| اگــــر گـــویـــد بــــرای حــــق گــــزاری | روان ســـازم دو صـــد زریـــن عـــمـــاری |
| هـــزاران از کـــنـــیـــزان و غـــلـــامـــان | صــنــوبــر قــامــتــان طــوبــی خــرامــان |
| غـلـامـانـی ز بــس نـیـکـو ســرشــتــی | مــصــفــاتـــر ز غــلــمــان بـــهــشــتــی |
| ز شـیـرینـی دهـانـشـان در شـکـرخـنـد | ز لــعــل و زر هـمــه بــر مــو کــمــربــنـد |
| قـبــا بـسـتـه کـلـه گـوشـه شـکـسـتـه | بــه زریـن خــانـه هـای زیـن نـشـسـتــه |
| کـــنــیــزانــی هــمــه در حـــلــه حـــور | چـــو حـــوران از قـــصـــور آب و گـــل دور |
| مــعــنـبــر طــره هـا بــر گــل گــشــاده | مـــقـــوس طـــاق هــا بـــر مــه نــهــاده |
| ز هـر گـوهـر بــه خـود بــربــسـتـه زیـور | نــشــســتـــه جـــلــوه گــر در هــودج زر |
| ز اربـــاب کــیــاســـت هــر کـــه بـــایــد | ز ارکـــان ریــاســـت هـــر کـــه شـــایــد |
| فــرســتــم تــا بــه صــد اعــزازش آرنـد | بـــدیــن خـــلـــوتـــســـرای نــازش آرنــد |
| چـو دانـا قـصـد ایـن انـدیـشـه بـشـنـیـد | بـه سـجـده سـر نـهـاد و خـاک بــوسـیـد |
| کـه ای مـصـر از تــو دیـده صــد عـزیـزی | ز تـــو کــشـــت کـــرم را تـــازه خـــیــزی |
| شـه مـا را سـر خـیل و حـشـم نیسـت | بـه پیشش زانچه گفتی هیچ کم نیست |
| غـــلـــامـــان و کـــنــیــزانــی کـــه دارد | نــگــنــجـــد در شـــمــاره گــر شــمــارد |
| بـه بــزمـش خـلـعـت فـرخـنـده تـخـتـان | بــــود وافــــرتــــر از بـــــرگ درخــــتــــان |
| ز دســتــش بــذل گــوهـرهــای تــابــان | بــــود افـــزون تـــر از ریـــگ بــــیـــابــــان |
| مــراد وی قــبـــول خـــاطـــر تـــوســـت | خوش آن کس کو قبـول خـاطرت جـست |
| چــو آن مـیـوه خــورای خــوانـت افــتــاد | بــه زودی پــیـش تــو خـواهـد فـرسـتــاد |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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