چـیـسـت آن کـاتـشـش زدوده چـو آبچــو گـهـر روشـن و چــو لؤلؤ نـابنـیسـت سـیمـاب و آب و هـسـت دروصــفــوت آب و گــونـه ســیـمــابنـه ســطـرلـاب و خــوب…
| چـیـسـت آن کـاتـشـش زدوده چـو آب | چــو گـهـر روشـن و چــو لؤلؤ نـاب |
| نـیسـت سـیمـاب و آب و هـسـت درو | صــفــوت آب و گــونـه ســیـمــاب |
| نـه ســطـرلـاب و خــوبــی و زشـتــی | بــنـمـایـد تــو را چــو اســطــرلـاب |
| نـه زمـانـه سـت و چـون زمـانه همـی | شـیب پـیدا کـند همـی ز شـبـاب |
| نـیـســت مــحــراب و بــامـداد کــنـنـد | سوی او روی چـون سوی محراب |
| نـیـســت نـقــاش و شــبــه بــنـگــارد | صـورت هـر چـه بـیـنـد از هـر بـاب |
| همـچـو مـشـاطـگـان کـنـد بـر چـشـم | جــلــوه روی خــوب و زلــف بـــتــا |
| صـافـی آبــســت و تــیـره رنـگ شــود | گـــر بـــدو هـــیــچ راه یـــابـــد آب |
| مـاه شـکـل و چــو تــافـت مـهـر بــر او | آیـد از نــور عــکــس او مــهــتــاب |
| چـــون هــوا روشــن و بـــه انــدک دم | پــر شـود روی او ز تـیـره سـحـاب |
| روشـن و راسـت گـو گـویـی نـیـسـت | جــز دل و خــاطــر اولـوالــالــبــاب |
| هـــمـــچـــو رای مـــلـــک پـــدیـــد آرد | کـژی از راسـتــی خــطـا ز صـواب |
| نـام او بــاژگــونـه آن لـفــظــی اســت | کـه بـگـوینـد چـون خـورنـد شـراب |
| شـاه مـحــمـود ســیـف دولـت و دیـن | کـه نبـیند چـو او زمـانه بـه خـواب |
| آنــکـــه انــدر جـــهــان نــمـــانــد دیــو | گر شود خشم او بـه جای شهاب |
| خــســروان پــیـش او کــمــر بــنــدنـد | همچـو در پـیش خسروان حـجـاب |
| چـون زمـین و فـلـک بـه بـزم و بـه رزم | نـشـنـاسـد مـگـر درنگ و شـتـاب |
| نیست معجب به جود خویش و جهان | مـی نـمـایـد بــه جـود او اعـجــاب |
| ای شهنشاه خـسروی که شده ست | زیـــر امـــر تــــو گـــردش دولـــاب |
| نـه عـجــب گـر ز بــنـده مـحــجــوبــی | ســازد از ابـــر آفــتـــاب حــجـــاب |
| هــمــه اعـــدای مــن زمــن گــیــرنــد | آنـچـه سـازنـد بــا مـن از هـر بـاب |
| از عـــقـــاب اســـت پــــر آن تـــیـــری | کـه بــدو مـی بـیـفـکـنـنـد عـقـاب |
| دسـتـهایم بـه رشتـه ای بـسـتـسـت | کش ندادست جز دو دستـم تـاب |
| در ســکــون بــرتــرم ز کــوه کــه مــن | در جـــواب عـــدو نــگــیــرم تـــاب |
| هـر چــه گــویـنـد مـر مـرا بــی شــک | زو نـیـابــنـد خـوب و زشـت جـواب |
| هـــســــت بــــنـــده نــــبــــیـــره آدم | در هـمـه چـیـز اثــر کـنـد انـسـاب |
| گــفــتــه بــدســگــال چــون ابــلـیـس | دور کـردم از آن چـو خـلـد جــنـاب |
| شــهــریــارا مــبـــیــن تـــو دوری مــن | مـدح من بـین چـو لـولؤ خـوشـاب |
| در صــــافـــی نـــزاد هـــیـــچ صــــدف | زر ســـاده نـــزاد هـــیـــچ تــــراب |
| تــا مـن از خــدمـت تــو گـشــتــم دور | کم شـد از محـتـسـب مرا ایجـاب |
| هـمـچـو حـرفـی شـدم نـحـیـف و بـلـا | گـرد من همچـو گرد حـرف اعـراب |
| مــی فــرو بـــاردم چــو بـــاران اشــک | مـی بـرآیـد دمـم بـسـان سـحـاب |
| نــیــســتــم چــون ذبــاب شــوخ چــرا | دلـم از ضـعـف شـد چـو پـر ذبــاب |
| چـــون غـــرابـــم ز دور بـــیــنــی از آن | تـیـره شـد روز مـن چـو پــر غـراب |
| کــافـــری نــعـــمــتـــت نــبـــوده مــرا | دوزخ خـشـمت از چـه کـرد عـذاب |
| بــر بــد و نـیـک از تــو در هـمـه ســال | خـلـق عـالـم مـعـاقـبـنـد و مـثـاب |
| آنـکـه بــی خـدمـتــی ثــواب دهـیـش | دیـد بــایـدش بــی گـنـاه عــقــاب |
| مــن از آن بـــنــدگــانــم ای خـــســرو | کـه نـبــنـدنـد طــمـع در اســبــاب |
| زیـســت دانــنــد بــاســتــام و کــمــر | رفــت دانـنــد بــا عــصــا و جــراب |
| گــر کــمــانــم کــنــد فــلــک نــجــهـد | سـخـنم جـز بـه راسـتـی نـشـاب |
| در شـــوم گـــر مـــرا بـــفـــرمـــایـــی | در دهــان هــژبـــر تـــیــز انـــیــاب |
| بـــــنــــهــــم از بـــــرای نــــام تــــو را | دیــدگـــان زیــر ســـکـــه ضـــراب |
| خــســروا بـــر رهــیــت تــیــز مــشــو | سـیـفـی انـدر بـریـدنـم مـشـتـاب |
| ایـن نــهــال نــشــانــده را مــشــکــن | مـکـن آبــاد کــرد خــویـش خــراب |
| تـا بــپــوشـد زمـیـن ز سـبــزه لـبــاس | تــا بـــبــنــدد هــوا ز ابـــر نــقــاب |
| عـزی و هـمـچــو عـز مـحــبــب بــاش | سیفی و همچو سیف نصرت یاب |
| بــر تــو فــرخــنــده بـــاد مــاه صــیــام | خـــلــد بـــادت ز کــردگــار ثـــواب |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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