جــوش ســودا ز ســرم عــقــل گـرانـبــار گـرفــتایـن چــنـیـن گـل نـتــوان از ســر دســتــار گـرفــتچــمـن آرای مـرا حــاجــت در بــســتــن نـیـسـتجــ…
| جــوش ســودا ز ســرم عــقــل گـرانـبــار گـرفــت | ایـن چــنـیـن گـل نـتــوان از ســر دســتــار گـرفــت |
| چــمـن آرای مـرا حــاجــت در بــســتــن نـیـسـت | جـــوش گــل راه تـــمــاشـــایــی گــلــزار گــرفـــت |
| *** | |
| دل بــه مـنـت ز مـن آن یـار جــفــاکــیـش گـرفــت | گــل بــه رغــبــت نـتــوان از کــف درویـش گــرفــت |
| کــم خــود گــیـر کــه انـگــشــت نـمـا مـی گــردد | هر کـه چـون ماه درین حـلـقـه کـم خـویش گـرفـت |
| *** | |
| (دلــم ز ســیـنـه بــه آن زلــف تــابــدار گــریـخــت | ز چـــارمــوجـــه غـــم در دهــان مــار گـــریــخـــت) |
| (خـوشـا کسـی که ازین سـایه های پـا بـه رکـاب | بـــه زیــر ســـایــه آن ســـرو پـــایــدار گــریــخـــت) |
| *** | |
| مــرا گــشــایــش خــاطــر ز دامــگــاه بــلــاســت | کـــمــنــد وحـــدت مــن چـــارمــوجـــه دریــاســـت |
| گـــره ز کـــار کـــریـــمـــان گـــشـــاده گـــردد زود | حـــبـــاب نــیــم نــفــس بـــار خـــاطــر دریــاســت |
| گـریـخـتــیـم بــه خــاک از سـپــهـر و غـافـل ازیـن | کـه خــاک، تــخــتــه مـشـق مـحــرران قـضـاســت |
| *** | |
| ســیـاه روی کــتــاب از ورق شــمــاری مــاســت | شــبــی کـه صـبــح نـدارد ســیـاهـکـاری مـاســت |
| ز شـوق، جــسـم گـران را چـنـان سـبــک کـردیـم | کــه وقــت فــکــر، ردیـف فــلـک ســواری مـاســت |
| *** | |
| تــرا کـه پــنـبــه گـوش شــعـور ســیـمـاب اســت | نـفـس کـشـیـدن مـحــشـر فـسـانـه خــواب اسـت |
| هــــوای وادی غــــفــــلــــت رطــــوبــــتــــی دارد | کـه پــای ریـگ روان در شــکــنـجــه خــواب اســت |
| *** | |
| زبــــان شـــانـــه درازســــت بــــر ســـر عـــالـــم | بـه ایـن کـه خـدمـت زلـف تـو حـق شـمـشـادسـت |
| جــفــای چــرخ فــلــک را هــم از تـــو مــی دانــم | کـه شـوخ چــشـمـی طـفـلـان گـنـاه اسـتــادسـت |
| *** | |
| دل آرمــیــده بــود گــفــتــگــو چــو هــمــوارســت | چــمــن صــحــیـح بــود تــا نـســیـم بــیـمــارســت |
| ز ســـایــه روی زمـــیــن را کـــبـــود مــی ســـازد | ز نــاز بـــس کــه نــهــال قـــدش گــرانــبـــارســـت |
| *** | |
| ســتــاره ســحــر عـشــق چــشــم بــیـدارســت | غـــبـــار لــشـــکـــر غـــم نــالــه شـــرربـــارســـت |
| دلی که نیسـت در او شور عشـق، ناقوس اسـت | رگــی کــه نــیـســت در او پــیـچ تــاب، زنــارســت |
| قــــدم ز دایـــره خــــود بــــرون مــــنــــه صــــائب | کـه حــصــن عــافــیـت نـقــطــه خــط پــرگـارســت |
| *** | |
| تـــرا کـــه خـــط بـــنــاگــوش ابـــجـــد نــازســـت | چــه وقـت تــوبــه حــسـن کـرشـمـه پــردازســت؟ |
| دو چــشــم والــه قــربــانـیـان پــس از تــســلـیـم | دو شــاهــدســت کــه انــجـــام بـــه ز آغــازســت |
| *** | |
| کــلــام تــلــخ جــبــیــنــان حــلــاوت آمــیــزســت | زمــیـن هـنـد بــه آن تــیـرگــی شــکــرخــیـزســت |
| خــدا غـنـی اســت ز عــصــیـان مـا ســیـه کـاران | طـبــیـب را چــه زیـان از شـکـسـت پــرهـیـزسـت؟ |
| *** | |
| تــبــسـمـی کـه دهـد یـار ازان دهـن جــان اسـت | مـیـی کـه بـوسـه بــر آن لـب زد آب حـیـوان اسـت |
| دمی که بی سخن عاشقی است شمشیرست | دلـی کــه آب ز تــیـغــی نـخــورده پــیـکــان اســت |
| *** | |
| سـخـن بـلـند چـو گـردد بـه وحـی مـقـرون اسـت | اتـــاقــه ســـر مــصــحـــف کــلــام مــوزون اســـت |
| بـــرات وعـــده مـــی کـــهــنــگـــی نــمــی دانــد | کــه وعــده مــی گــلــرنــگ دعــوی خـــون اســت |
| *** | |
| ز نــالــه ام در و بـــام قــفــس نــگــاریــن اســـت | ز گـــریــه ام چـــمـــن روزگـــار رنـــگـــیـــن اســـت |
| خـزان نـسـیـم بـرون رانـده ای اسـت از چـمـنـش | بـــهــار نــســخــه آن پـــنــجـــه نــگــاریــن اســت |
| بـه نـامـه حـسـرت آغـوش خـود چـه بــنـویـسـم؟ | کـه ایـن کـتــاب مـنـاســب بــه خــانـه زیـن اســت |
| چــنــان بــه بــســتــر آســودگــی نـهـم پــهـلــو؟ | مـرا کـه خــواب پــریـشــان بــه زیـر بــالـیـن اســت |
| *** | |
| هـزار گـرگ هـوس در کـمـیـن عـصـمـت تــوســت | چـه وقت رفتـن صـحـرا و سـیر و صحـبـت تـوسـت؟ |
| ز خــــط مـــگـــوی بــــرات مـــســــلـــمـــی دارم | هـــنـــوز اول جــــوش بــــهـــار آفــــت تــــوســــت |
| زبـــان تـــهــمــت یــک شــهــر را ســـخـــن دادن | گـنـاه خــامـشـی شــعـلـه هـای غـیـرت تــوســت |
| *** | |
| حــیـرتــکــده چــشــم مــرا خــواب نـدیـده اســت | افـــتــــادگـــی اشـــک مـــرا آب نـــدیـــده اســــت |
| کـم لـاف ز همـچـشـمی اش ای آهوی وحـشـی | ایـن طـرز نـگـه چـشـم تـو در خـواب نـدیـده اسـت! |
| *** | |
| بـر سـبـزه خـط تـکـیه مـکـن مـوج سـرابـی اسـت | هـر حـلـقـه پــی رفـتـن حـسـن تـو رکـابــی اسـت |
| گـــــر آه بــــــرآرد ز دل هـــــر دو جـــــهـــــان دود | در پــیـش سـیـه مـسـتــی او دود کـبــابــی اسـت |
| *** | |
| اندیشـه ز مـسـتـی نکـند هر کـه شـرابـی اسـت | کآبــادی ایـن طــایــفــه مــوقــوف خــرابــی اســت |
| آن را کــه بــه انـگــشــت تــوان عــیـب شــمـردن | در عــالــم انــصــاف ز مــردان حــســابــی اســت! |
| *** | |
| اربـاب همم را چـه غـم از بـی پـر و بـالی اسـت؟ | بــال و پــر ایـن طــایـفــه از هـمـت عــالــی اســت |
| نــفــریــن بـــود از دســت دعــا رزق بـــخــیــلــان | تــکــبــیـر فــنـا فــاتــحــه ســفــره خــالــی اســت |
| *** | |
| جــز گـوشـه مـیـخــانـه مـرا جــای دگـر نـیـســت | چــون خــم ز خــرابــات مـرا پــای ســفـر نـیـســت |
| بـــا تــلــخــی هــجــران بــســرآریــم کــه نــی را | جــز بــنـد گـران حــاصـلـی از قـرب شـکـر نـیـسـت |
| چــــون آیـــنـــه آب خــــضــــر زنـــگ نـــگـــیـــرد؟ | در دور عــقــیـق لــب او تــشــنـه جــگــر نـیـســت |
| *** | |
| جــز نـام تــو بــر لــوح دلــم هـیـچ رقــم نـیـســت | در نـامـه مـا یـک ســر مـو ســهـو قــلــم نـیـســت |
| مــا خــود ســر طــومـار شــکــایـت نـگــشــایـیـم | خـودگـوی، فـرامـوشـی احـبــاب سـتــم نـیـسـت؟ |
| بـــر نــامــه ســـودازدگـــان نــکـــتـــه نــگــیــرنــد | داریـم جــوابــی کــه بــه دیـوانــه قــلــم نــیـســت |
| *** | |
| اربــاب حــیــا را لــب نــانــی ز جــهــان نــیـســت | روزی ز دل خــود خــورد آن را کــه زبــان نــیــســت |
| (یــاری کـــه نـــگـــیــرد دلـــش از دوری مـــنـــزل | در وادی تــجــریــد بــه جــز ریــگ روان نــیــســت) |
| *** | |
| در چــشــم و دل پــاک ز دنـیـا خــبــری نـیـســت | در عــالــم حــیـرت ز تــمــاشــا خــبــری نــیـســت |
| آســــوده بــــود ســــرو ز بــــی طـــاقـــتــــی آب | ایـن ســر بــه هــوا را ز تــه پــا خــبــری نــیـســت |
| *** | |
| هـر کـس طـمـع روی دل از مـردم خــس داشــت | امـیـد شــکــرخــنـد گـل از چــاک قــفــس داشــت |
| هــر کـــس کـــه دریــن دایــره از نــامــوران شـــد | مـانند نگـین چـشـم بـه دسـت همه کـس داشـت |
| بــرگـشـت ز لـب جـان بــه تــن خـسـتـه دگـربــار | تــا روی تــو آیـیــنــه مــرا پــیــش نــفــس داشــت |
| *** | |
| زاهـــدان را گـــوشـــه خــــلـــوت بــــس اســــت | عـــــارفــــان را نــــشأه وحـــــدت بـــــس اســـــت |
| خــــاکــــســــاران بــــی نـــیـــازنـــد از لـــبــــاس | ســـایـــه را افـــتـــادگـــی زیـــنـــت بـــس اســـت |
| *** | |
| ای دل بـــــــــی درد، آزادی بـــــــــس اســــــــت | ایــــن هـــــمـــــه آزار مـــــا دادی بـــــس اســـــت |
| ســــــرفـــــرازی مـــــیـــــوه آزادگـــــی اســــــت | ســــرو خــــضــــر راه ایــــن وادی بـــــس اســــت |
| *** | |
| در چــشــم پــاکــبـــازان آن دلــنــواز پــیــداســت | آیـیـنـه صـاف چــون شـد آیـیـنـه ســاز پــیـداســت |
| غــیــر از خــدا کــه هــرگــز در فــکــر او نــبـــودی | هـر چــیـز از تــو گـم شــد وقـت نـمـاز پــیـداســت |
| (هـر چـنـد جــلـوه او بــیـرون ازیـن جــهـان اسـت | در آبـــهــای روشـــن آن ســـرونـــاز پـــیــداســـت) |
| *** | |
| ســرکــشــم ز ابـــر بـــهــاری گــذشــتــه اســت | شــراب مــن از خــوشــگــواری گــذشــتــه اســت |
| چـــرا ابـــرویــت چـــون هــلـــالـــی نـــبـــاشـــد؟ | کــه عــمـرش بــه بــیـمـارداری گــذشــتــه اســت |
| *** | |
| غـــم پـــوشـــش بـــرونــم را گـــرفـــتـــه اســـت | خــــیــــال نــــان درونــــم را گــــرفــــتــــه اســــت |
| ز فــــکــــر جــــامــــه و نــــان چــــون بــــرآیــــم؟ | کــــه بــــیـــرون و درونـــم را گـــرفــــتــــه اســــت |
| *** | |
| ای کــــه گــــفــــتــــی نــــگــــاه خــــیــــره تــــو | پــــــرده شــــــرم از مــــــیــــــان بــــــرداشــــــت: |
| روی ازان روی مـــــــی تـــــــوان گـــــــردانـــــــد؟ | چـــشــم ازان چـــشــم مــی تـــوان بـــرداشـــت؟ |
| *** | |
| زهـرســت بــی تــبــسـم شـیـریـن شـراب تــلـخ | بـــا بـــخــت شــور چــنــد تـــوان خــورد آب تـــلــخ |
| بــی مـی نـیـم شــکــفــتــه، هـمـانـا بــریـده انـد | هــمــچــون پــیــالــه نــاف مــرا بـــا شــراب تــلــخ |
| *** | |
| شــــنـــیـــدم آنـــقــــدر از دوســــتــــان تــــلــــخ | کـــه شـــد شـــیــریــنــی جـــان در دهــان تـــلــخ |
| نــبـــاشـــد چـــشــم او بـــی زهــر چـــشــمــی | بـــــود بـــــیــــمـــــار را دایــــم دهـــــان تـــــلـــــخ |
| *** | |
| زلـف مـشـکـیـن تـو سـر در دامـن مـحـشـر نـهـاد | خــط گــســتــاخ تــو لــب را بــر لــب کــوثــر نــهـاد |
| بـرنـمـی خـیـزد ز شـور حـشـر، یـارب بــخـت مـن | در کـدامـین سـاعـت سـنگـین بـه بـالـین سـر نهاد |
| *** | |
| ســرو را از جــلــوه مــســتــانـه از جــا مــی بــرد | خــنــده او تــلــخــکــامــی را ز صــهـبــا مــی بــرد |
| قسـمت سوداگر بـیت الحـزن دسـت تـهی اسـت | صــرفــه ســودای یــوســف را زلــیــخــا مــی بــرد |
| *** | |
| عــقــل را از مــغــز بــیـرون داغ ســودا مــی بــرد | جــذبــه خـورشـیـد شـبــنـم را بــه بــالـا مـی بــرد |
| نـوبــهـار مـغـفـرت از مـشــرب مـا ســرخ روســت | ابـــر رحـــمـــت آب از پـــیــمـــانــه مـــا مــی بـــرد |
| اگـر چـه بــاغ جــهـان از وفـای گـل خـالـی اسـت | بـه تـن مـبــاد سـری کـز هـوای گـل خـالـی اسـت |
| اگــر بـــه کــنــج قــفــس راه بـــاغـــبـــان افــتـــد | نمـی رود بـه زبـانـش کـه جـای گـل خـالـی اسـت |
| *** | |
| قـسـم بـه شـمع تـجـلی که پـرتـوش ازلی اسـت | کـه عـشـق تــازه عـذاران بــهـار زنـده دلـی اســت |
| عــــــــزیـــــــزدار دل پــــــــاره پــــــــاره مــــــــا را | کـه شـمـع را پــر پــروانـه مـصـحـف بــغـلـی اسـت |
| *** | |
| تـرا کـه بـرق بـلـا خـوشـه چـیـن خـرمـن نـیـسـت | خــبــر ز حــال مـن و تــنـگـدســتــی مـن نـیـسـت |
| تــــرا رســــد بــــه غــــزال حــــرم ســــرافـــرازی | کـه در قـلـمـرو چــیـن ایـن بــیـاض گـردن نـیـســت |
| *** | |
| خــــیــــال طــــره او در دل خـــــراب گــــذشــــت | چـه مـوج بــود کـه مـسـتـانـه بــر حـبــاب گـذشـت |
| کـجــایـی ای نـفــس عــقــده ســوز بــاد ســحــر | کــه عــمــر غــنـچــه مــا در تــه نـقــاب گــذشــت |
| *** | |
| مـرا بــه نـیـم تــبــســم خــراب کــرد و گــذشــت | نـگــاه گـرم عــنـان را بــه خــواب کــرد و گــذشــت |
| فـــغـــان کـــه دولـــت پـــا در رکـــاب خـــوبـــی را | دو چــشـم ظـالـم او صـرف خــواب کـرد و گـذشـت |
| *** | |
| تـــرخـــنــده از عـــرق بـــه مـــی نــاب زد رخـــت | بـــاز ایــن چــه نــقــش بــود کــه بـــر آب زد رخــت |
| یــاقـــوت هـــای راز نـــهــان رنـــگ بـــاخـــتـــنـــد | زیـــن آتــــشـــی کـــه در دل احـــبــــاب زد رخـــت |
| *** | |
| هـسـتــی نـمـانـد و در سـر پــوچ آرزو بــجــاسـت | مـی شــد تــمـام و نـکـهـت او در کـدو بــجــاســت |
| دخــل جــهـان ســفــلــه نــگــردد بــه خــرج کــم | چــنـدان کـه مـی بــرنـد بــه خـاک آرزو بــجــاسـت |
| *** | |
| ز اهـل سـخـن مـپـرس مـقـام سـخـن کـجـاسـت | حـسـن غـریـب را کـه شـنـاسـد وطـن کـجـاسـت؟ |
| زان شــعـلـه هـا کـه از دل پــروانـه ســر کـشـیـد | روشـن نشـد کـه شـمـع درین انـجـمـن کـجـاسـت |
| *** | |
| مــا را بــهـشــت نـقــد، تــمـاشــای دلــبــرســت | عـــمـــر دوبـــاره ســـایــه بـــالـــای دلـــبـــرســـت |
| کــج مــی کــنـد نـظــر بــه خــیـابــان بــاغ خــلــد | چــشــمـی کـه مـحــو قـامـت رعـنـای دلـبــرســت |
| مـطــلـوب ازان اوســت کــه درد طــلــب ازوســت | دلــبــر در آن دل اســت کــه جــویـای دلــبــرســت |
| *** | |
| چـون غـنـچـه گـر زبــان تــو بــا دل مـوافـق اسـت | بـــر کـــایــنــات از تـــه ل خـــنــده لـــایــق اســـت |
| در وقـت صــبــح چــرخ نـفــس راســت مـی کـنـد | یـعـنـی کـه غـمـگـســار جــهـان یـار صـادق اســت |
| *** | |
| مــوج خـــطــر ســفــیــنــه اهــل تـــوکــل اســت | در رهــگــذار راســت روان تـــیــغ کــج پـــل اســت |
| ز افـتــادگـی چـو شـبــنـم گـل نـیـسـتـم غـمـیـن | چـــون پــــلـــه تـــرقـــی مـــن در تـــنـــزل اســـت |
| *** | |
| یـعـقـوب بــد نـکـرد کـه در هـجــر چـشـم بــاخـت | در قحـط حـسـن، چـشم گشودن چـه لازم اسـت؟ |
| *** | |
| امــروز حــســن خــط بــه رخ او مـســلــم اســت | یــاقــوت از شــکــســتـــه آن زلــف، درهــم اســت |
| در چـشـم داغ من که بـه ماتـم نشـسـتـه اسـت | هــر نــاخــنــی اشــاره بـــه مــاه مــحـــرم اســت |
| *** | |
| نــرمــی حــصــار عــافــیـت جــان روشــن اســت | از مـــوم پـــشـــت آیــنــه بـــر کـــوه آهــن اســـت |
| قـانـع بــه دسـتـبــوس شـدن زان جـهـان حـسـن | از بــحــر تــشــنـه را بــه قــلـم آب خــوردن اســت |
| *** | |
| نـاخـن بــه سـیـنـه ریـزی حـسـن هـلـال ازوسـت | طـــرز نـــگـــاه کـــردن چـــشـــم غـــزال ازوســـت |
| شـیـرین بـه جـوی شـیـر بـرآمـیـخـت چـون شـکـر | خـسـرو دلش خـوش اسـت که بـزم وصال ازوسـت |
| *** | |
| تــا عــارضــت ز آتــش مـی بــرفــروخــتــه اســت | بــر آسـمـان سـتــاره خـورشـیـد سـوخــتــه اسـت |
| ای آتــش و سـپــنـد دگـر وقـت هـمـرهـی اسـت | چـشـم بـدی بـه زخـم دلـم بــخـیـه دوخـتـه اسـت |
| *** | |
| زلـفـت کـه هـمـچـو شـام غـریبـان گـرفـتـه اسـت | صــبـــح نــشــاط در تـــه دامــان گــرفــتـــه اســت |
| از دســت رســتـــخـــیــز حـــوادث کــجـــا رویــم؟ | مـــا را مــیــان بـــادیــه بـــاران گـــرفـــتـــه اســـت |
| (ایـن سـهـو بــیـن کـه دیـده حـق نـاشـنـاس مـن | روی تــــرا بــــرابــــر قــــرآن گـــرفــــتــــه اســــت) |
| از ابـــر نــوبــهــار چــمــن جــان گــرفــتــه اســت | گــلــزار رنـگ چــهـره مــســتــان گــرفــتــه اســت |
| از بـــس کــه نــوبــهــار بــه تــعــجــیــل مــی رود | شـاخ از شـکـوفـه دسـت بـه دندان گـرفـتـه اسـت |
| *** | |
| از ســرد مـهـری آتــش شــوقـم فـســرده اســت | روغـن تــلـف مـکـن بــه چــراغـی کـه مـرده اسـت |
| بــا مـشـتــری بــه چـیـن جـبــیـن حـرف مـی زنـد | حــسـن تــو گـوشـمـال کـســادی نـخــورده اسـت |
| *** | |
| در جـوش خـلق کـعـبـه حـاجـات گم شـده اسـت | در تــوبــه شـکـســتــه خــرابــات گـم شـده اسـت |
| آن طــفـل مـشــربــیـم کـه در مـشــت خــاک مـا | بــس گــوهــر گــرامــی اوقــات گــم شــده اســت |
| *** | |
| خــال تــو ریـشـه در شـکـرســتــان دوانـده اسـت | در خــط سـبــز، شـهـپــر طـوطـی رســانـده اسـت |
| جــز خــط دل ســیــه کــه مــبــیــنــاد روز خــوش | بــر شــمـع آفــتــاب کـه دامـن فــشــانـده اســت؟ |
| *** | |
| دل بــی خــیــال طــایـر شــهــپــر بــریـده اســت | بــی فــکــر روح پــای بــه دامـن کــشــیـده اســت |
| مــعــیـار آرمــیـدگــی مــجــلــس اســت شــمــع | تــا دل بــجــاســت وضــع جــهــان آرمــیـده اســت |
| *** | |
| از پــســتــه تــو شـور مـلـاحــت چــکـیـده اســت | صــبــح صــبــاحــت از گــل رویــت دمــیــده اســت |
| یــارب ز چـــشـــم زخـــم خـــمـــارش نــگـــاه دار | بـاغ از بـنـفـشـه سـرمـه مـسـتـی کـشـیده اسـت |
| *** | |
| آتــش ز شـرم خـوی تـو تــا سـر کـشـیـده اسـت | خــود را بــه زیـر بــال ســمـنـدر کــشــیـده اســت |
| خــودبــیـن مــبــاش تــا بــه حــیــات ابــد رســی | آیـیـنـه ســد بــه راه ســکــنــدر کــشــیـده اســت |
| *** | |
| دارد سـری بــه کـاکـل او هـر سـری کـه هـســت | دربــنـد اوســت هـر دل غــم پــروری کــه هـســت |
| در حـــلـــقـــه اطـــاعـــت حـــق پـــایـــدار بـــاش | تــا بــر رخــت گـشـاده شـود هـر دری کـه هـسـت |
| دنــیـا کــنــد بــه دل ســیـهــان مــیـل بــیـشــتــر | از شـش جـهـت بـه هنـد رود هـر زری کـه هـسـت |
| *** | |
| (در زیــر آســمــان دل بــی اضــطــراب نــیـســت | در چـشـم مـا غـنـودگـیی هسـت، خـواب نیسـت) |
| (از روی گرم عشـق بـه جـوش اسـت خـون خـاک | هــر چــنــد لــعــل را خــبــر از آفــتــاب نــیــســت) |
| (دســت تــهـی گــره نـگــشــایـد ز کــار خــویـش | در حــق خــود دعـای گـدا مـســتــجــاب نـیـسـت) |
| *** | |
| عــشــق تــرا بــه رونــق مــا احــتــیـاج نـیـســت | ایـن بــرق را بــه مـشــت گـیـا احــتــیـاج نـیـســت |
| در زیـــر بــــار مـــنـــت عــــریـــان تــــنـــی مــــرو | مــلــک تــجــردســت، قــبــا احــتــیــاج نــیــســت |
| *** | |
| بــر حــســن زود سـیـر بــهـار اعـتــمـاد نـیـســت | بــر اعــتــدال لــیـل و نــهــار اعــتــمــاد نــیــســت |
| در چــارســوی جــســم مــزن خــیــمــه ثـــبـــات | بــر ابــر و بــرق و بــاد و غـبــار اعــتــمـاد نـیـســت |
| ایـمــن مــشــو ز فــتــنــه آن حــســن در نــقــاب | بـــر ابـــر و آفــتـــاب بـــهــار اعــتـــمــاد نــیــســت |
| *** | |
| در گــلــشــن وجــود ره بــوالــفــضــول نــیـســت | بـــرگ خـــزان رســیــده او بـــی اصــول نــیــســت |
| داغ اســــت عــــشــــق از دل بــــی آرزوی مـــن | خـون می خـورد کـریم چـو مـهمـان فـضـول نیسـت |
| *** | |
| بــر رنـگ عــصــمـت تــو مـی نـاب دســت یـافــت | صـد حــیـف بــر کـتــان تــو مـهـتــاب دسـت یـافـت |
| نــگــذاشــت آشــنــایـی مــن چــیـن در ابــرویـت | کــافــر بــه طــاق ابــروی مــحــراب دســت یـافــت |
| *** | |
| از مـا بــه گـفـتــگـو دل و جـان مـی تــوان گـرفـت | ایـن مــلــک را بــه تــیـغ زبــان مـی تــوان گــرفــت |
| مــا را بـــس اســت گــوشــه ابـــروی الــتـــفــات | ایـن صــیـد رام را بــه کــمــان مــی تــوان گــرفــت |
| افـتــادگـی اســت چــاره خــصــم ســبــک عـنـان | بـــا خـــاک پـــیــش آب روان مــی تـــوان گــرفـــت |
| *** | |
| تـــا چــنــد ز رســوا شــدن راز تـــوان ســوخــت؟ | از بــی تــهــی اشــک نــظــربـــاز تــوان ســوخــت |
| مــردیــم دریـن خــانــه دلــگــیــر قــفــس، چــنــد | از شــوق هـم آغــوشــی پــرواز تــوان ســوخــت؟ |
| واســوخــتــگــی شــیـوه مــا نــیـســت، وگــرنــه | از یــک ســـخـــن ســرد دل نــاز تـــوان ســوخـــت |
| گــر در گــذری از ســر یــک غــنــچــه تـــبـــســم | از شــعــلــه غــیــرت دل اعــجــاز تــوان ســوخــت |
| *** | |
| رخــســاره گــلـرنـگ تــو گـلـزار بــهـشــت اســت | خــط گــرد گــل روی تــو دیــوار بـــهــشــت اســت |
| طــــاعـــات ریـــایـــی اســــت کـــلـــیـــد در دوزخ | زاهـد بــه چــه سـرمـایـه خـریـدار بــهـشـت اسـت |
| *** | |
| رخـــســار تـــو شــاداب تـــر از لــالــه طــورســت | شــبـــنــم گــل ســیــراب تـــرا دیــده شــورســـت |
| بــســیـار بــه از صــحــبــت ابــنـای زمــان اســت | در مـشــرب مـن، خــلـوت اگــر خــلـوت گــورســت |
| خـــواری ز طــمــع دور نــگــردد کــه عــصـــاکــش | هــر چــنــد کــه در پــیـش بــود پــیــر و کــورســت |
| *** | |
| مـی بــی نـمـک صـحــبــت احـبــاب حـرام اسـت | مـی چــیـسـت، گـر انـصـاف بــود آب حــرام اسـت |
| بـــا ســـاغــر شــبـــگــیــر، ســـراســر مــزه دارد | در خـانـه نـشـسـتــن شـب مـهـتــاب حـرام اسـت |
| در مـــشـــرب مـــا جـــوهـــریـــان گـــهـــر وقـــت | غــیــر از شــب آدیــنــه مــی نــاب حـــرام اســـت |
| *** | |
| آغـاز خــط آن شــوخ بــه عـشــاق رحــیـم اســت | در آخــــر بــــازار، فـــروشـــنـــده کـــریـــم اســــت |
| از جــلــوه بـــیــاســا کــه ز بـــیــداد خــزان ســرو | آزاد ازان اســـت کــه یــک جـــای مــقــیــم اســت |
| *** | |
| از وصـــل، مــلــال دل خـــرم نــمــکـــیــن اســـت | در دامــن گــل گــریـه شــبــنــم نـمــکــیـن اســت |
| بــی چــاشـنـیـی نـیـسـت شـکـرخــنـده شـادی | امـــا روش گـــریــه مـــاتـــم نـــمـــکـــیـــن اســـت |
| *** | |
| روی دل این خـسـتـه بـه آن چـشم سخـنگوست | چـون عـقـده مـرا چـشـم بـه آن گـوشـه ابــروسـت |
| تــا مــهــر خــمــوشــی زده ام بــر لــب گــفــتــار | در چـشـم من این دایره یک چـشـم سـخـنگوسـت |
| *** | |
| (راه ســخــنـم مـعـنـی بــســیـار گـرفـتــه اســت | از جــوش گـل ایـن رخــنـه دیـوار گــرفــتــه اســت) |
| (بــا صـاف ضـمـیـران بــه ادب بــاش کـه بــسـیـار | از آب گـــهــر آیــنـــه زنـــگـــار گـــرفـــتـــه اســـت) |
| (آن رهــرو افـــســـرده اســـاســـم کـــه مــکـــرر | دامـــان مـــرا ســـایــه دیــوار گـــرفـــتـــه اســـت) |
| *** | |
| *** | |
| از خـموشـی هر که سـر در جـیب فکرت می بـرد | در ســخــن از دیـگــران گــوی ســعــادت مـی بــرد |
| آنـچــنـان کـز پــنـبــه مـی سـازنـد پــاک آیـیـنـه را | خــامـشـی از ســیـنـه مـن گـرد کـلـفـت مـی بــرد |
| مـصــرع بــرجــســتــه در هـنـگــامـه دلـمـردگــان | چــون چــراغ روز بــر پــروانــه حــســرت مــی بــرد |
| *** | |
| نــالــه بــلــبــل بــه بــال شــیــون مــا مــی پــرد | چــشـم شــبــنـم در هـوای گـلـشـن مـا مـی پــرد |
| آفـتــابــی هـســت در طــالـع شــبــســتــان مـرا | یـک دو روزی شــد کـه چــشـم روزن مـا مـی پــرد |
| از فــغــان مــا گــلــســتــانــت بــلــنـد آوازه شــد | شــعــلــه حــســنـت بــه بــال دامـن مـا مـی پــرد |
| حـاصـل مـا تـنگـدسـتـان را بـه چـشـم کـم مبـین | چــشـم بــرق از اشــتــیـاق خــرمـن مـا مـی پــرد |
| *** | |
| تــا بــه بــرگ ســبــز، خــط او چــمـن را یـاد کــرد | بـــاغــبـــان از خــرمــی گــل را مــبــارک بــاد کــرد |
| ســخــت جــانـان خــوب مـی دانـنـد قـدر یـکـدگـر | بـــیــســتــون فــریــادهــا در مــاتــم فــرهــاد کــرد |
| *** | |
| کــاوش مـژگـان او از بــس کـه دســت انـداز کــرد | صــفــحــه آیـیـنـه را چــون ســیـنـه شــهـبــاز کـرد |
| چــون نـگـردد آب حــیـوان در مـذاق خـضـر تــلـخ؟ | تـــیــغ او در مــاتـــم مــن زلــف جــوهــر بـــاز کــرد |
| *** | |
| نـالـه مـن بــزم عـشـرت را مـصـیـبــتــخــانـه کـرد | اشــک شــور مــن نـمــک در دیـده پــیـمــانـه کــرد |
| تـــازه شــد زخــم هــواداران، مــگــر بـــاد صــبـــا | زلـف مـشــکـیـن تــرا در دامـن خــود شــانـه کـرد؟ |
| (در گلسـتـانی کـه روید دام چـون سـنبـل ز خـاک | بــلــبــل دون هــمــت مــا مــیــل پــروازی نــکــرد) |
| *** | |
| بـوی خـون از غـنـچـه گـل بــر دمـاغـم مـی خـورد | سـوده مـشـک از خـط ریحـان بـه داغـم مـی خـورد |
| زلف سـنبـل گر چـه شـد سـر حـلقـه آشـفـتـگـان | پــیــچ و تــاب رشــک از دود چــراغــم مــی خــورد |
| روی گــرمــی هـرگــز از داغ نـمــکــســودم نـدیـد | پـنـبــه گـر فـرصـت بــیـابــد خـون داغـم مـی خـورد |
| *** | |
| مــی چــســان مــغــز مــن آتــش روان را پــرورد؟ | روغـــــن بـــــادام چـــــون ریــــگ روان را پـــــرورد؟ |
| زود بــاشـد غـوطـه در بــحــر تــهـیـدســتــی زنـد | چــون صــدف هــر کــس یـتــیـم دیـگــران را پــرورد |
| *** | |
| بـــر گــل رخــســار او تـــا زلــف پـــیــچ و تــاب زد | شــهــپــر پــروانــه ســیــلــی بــر رخ مــهــتــاب زد |
| از شــکــرخــواب خــزان امـیـد بــیـداری نـداشــت | ســـایــه ســرو تـــو بـــر روی گــلــســـتـــان آب زد |
| *** | |
| مـن کـیـم تــا دسـت امـیـدم بــه آن دامـن رسـد؟ | این مرا بـس کـز رهش گردی بـه چـشـم من رسـد |
| نـیسـت هـر گـوشـی حـریف نـالـه جـانـسـوز مـن | آتــشــی کــو تــا بــه فــریـاد ســپــنـد مـن رســد؟ |
| *** | |
| بـی تـو بـر من شش جـهت چـون خانه زنبـور شد | چـــار دیــوار عـــنــاصـــر تـــنــگـــنــای گـــور شـــد |
| از ســر مـشــق جــنـون افــتــاده بــودم ســالـهـا | نـوخــطــی دیـدم کـه داغ کـهـنـه ام نـاســور شــد |
| *** | |
| تـا دل از زلـفـش جـدایـی کـرد از جـان سـیـر شـد | نــافــه تـــا افـــتـــاد دور از نــاف آهــو پـــیــر شـــد |
| روزی لـب تــشـنـگـان را مـی دهـد سـامـان خــدا | دایه هر خونی که خورد از دست طفلان، شیر شد |
| *** | |
| از فضولی چـشم بـسـتـم خـار و گل همرنگ شد | گـوش را کـردم گـران، هـر نـغـمـه سـیرآهنـگ شـد |
| چـون صـدف هر قـطـره آبـی کـه در کـامـم چـکـید | از هــوای خـــاطــر افــســـرده مــن ســنــگ شــد |
| *** | |
| دل فـتــاد از چــشـم مـسـت یـار تــا فـرزانـه شـد | تــا ز جــوش افــتــاد مــی آواره از مــیـخــانـه شــد |
| دل ز تــــرک آرزو بــــر آرزوهـــا دســــت یـــافــــت | مـیـهـمـان تــرک فـضـولـی کـرد صـاحـبــخـانـه شـد |
| هـــیـــچ کــــافــــر را مــــبــــادا آرزو در دل گــــره! | عـاقـبــت مـشـت گـل مـا سـبــحـه صـد دانـه شـد |
| *** | |
| وقـت شـد تـا لـشـکـر خـط مـاه تـا مـاهی کـشـد | مـاجــرای دل بــه زلــف او بــه کــوتــاهـی کــشــد |
| هـر کــجــا حــرفــی ازان چــاک گـریـبــان بــگـذرد | قــصــه پــپــراهـن یـوســف بــه کـوتــاهـی کـشــد |
| *** | |
| هـر قـدر نـقـاش نـقـش او بــه دقـت مـی کـشــد | چـون نـظـر بـر رویـش انـدازد خـجـالـت مـی کـشـد |
| شـعله جـواله یک نقطه اسـت چـون سـاکن شود | سـیـر و دور سـالـکـان آخـر بــه وحـدت مـی کـشـد |
| آبــروی جــرم اگــر ایــن اســت، در دیــوان عــفــو | عاصـی از ناکرده بـیش از کرده خـجـلت می کشـد |
| *** | |
| شـوربـخـتـم، دل بـه آن کـنـج دهانـم مـی کـشـد | مـوشـکـافـم، دل بــه آن مـوی مـیـانـم مـی کـشـد |
| خـــار دیــوارم، وبـــال دامـــن گـــل نـــیــســـتـــم | بـی سـبـب از بــاغ بـیـرون بــاغـبــانـم مـی کـشـد |
| *** | |
| خــط ظـالـم از گـل رخــسـار او کـیـن مـی کـشـد | انـتــقــام بــلـبــلـان از بــاغ گـلـچــیـن مـی کـشــد |
| کـوهـکـن را عـشـق اگـر هـم پـلـه پـرویز سـاخـت | رشک خـسـرو هم شکر بـر روی شیرین می کشد |
| چشم بـند عیبـجـویان چشم خود پـوشیدن است | بـی زبـانی سـرمه در کام سـخـن چـین می کشـد |
| *** | |
| داســتــان عـمـر طـی شــد حــرف او آخــر نـشـد | بــرگــریــزان زبـــان شــد، گــفــتــگــو آخــر نــشــد |
| شـد بــه هـم پــیـچــیـده طـومـار حـیـات جــاودان | داســـتـــان زلـــف بـــی پـــایــان او آخـــر نـــشـــد |
| *** | |
| هـیـچ کــس بــی گــوشــمـال روزگــار آدم نـشــد | غوطـه تـا در خـون نزد شـمشـیر صـاحـب دم نشـد |
| نـیـسـت گـوهـر را بـه از گـرد یـتـیـمـی کـسـوتـی | از غــبـــار خـــط صــفــای چـــهــره او کــم نــشـــد |
| از شـکـسـت خـویش بـالـاتـر نـبـاشـد هـیچ فـتـح | نیسـت اسـتـاد آن کـه از شـاگـرد خـود ملزم نشـد |
| *** | |
| زخـم گـسـتــاخـم لـب تــیـغ شـهـادت مـی مـکـد | شـبــنـم مـن خـون خـورشـیـد قـیـامـت مـی مـکـد |
| نقـش شـیرین شـسـتـه شـد از لـوح خـارا و هنوز | تــیـشــه فــرهـاد انـگــشــت جــلــادت مـی مـکــد |
| از دهـــان خــــضــــر آب زنـــدگــــانـــی مـــی رود | تـیـغ او از بــس لـب خـود را بـه رغـبــت مـی مـکـد |
| *** | |
| از چـمـن رفـتـی و گـل بـا حـسـرت بـسـیـار مـانـد | چــشــم بــلــبــل در پــی آن طــره دســتــار مـانـد |
| روی حـرف طـوطـیـان هـر چــنـد بــا آیـیـنـه اسـت | دیـد تــا آیـیـنــه ات را طــوطــی از گــفــتــار مــانــد |
| مـــی ســـرایـــد زاغ خـــط او بــــه آواز بــــلـــنـــد | کـز گـلـســتــانـش هـمـیـن خــار ســر دیـوار مـانـد |
| پــنــجــه دشــمــن گــریــبــان مــرا از بــخــت بــد | نـوبــت دامـن گـرفــتــن چــون رســیـد از کـار مـانـد |
| *** | |
| شـد بـهار و غـنـچـه مـا همـچـنـان در خـاک مـانـد | ایـن گــره گــلــزار را در رشــتــه خــاشــاک مــانــد |
| لـالـه بــا دسـت نـگـاریـن سـیـنـه خـارا شـکـافـت | دانـه مـا در چــنـیـن فـصــلـی بــه زیـر خــاک مـانـد |
| *** | |
| یــادگــار عــشـــق داغــی در دل دیــوانــه مــانــد | شـمـع رفـت از انـجـمـن، خـاکـسـتـر پــروانـه مـانـد |
| گریه ام در دل گره شـد، ناله ام بـر لب شـکسـت | وای بـر قـفـلـی کـه مـفـتـاحـش درون خـانـه مـانـد |
| زیر سـقـف آسـمـان نـتـوان نـفـس را راسـت کـرد | در دل مـــا آرزوی نـــعـــره مـــســـتـــانـــه مـــانـــد |
| *** | |
| رفــت ایـام جــوانـی، شــوق در جــانــم نــمــانــد | هـایـهـوی عــنـدلــیـبــان در گــلــســتــانـم نـمـانـد |
| از پـشـیـمـانـی سـخـن در عـهـد پـیـری مـی زنـم | لـب بـه دنـدان مـی گـزم اکـنون کـه دنـدانم نمـانـد |
| *** | |
| روز قـسـمـت چـون ادا فـهـمـی بـه ابــرو داده انـد | دلـربــایـی را بــه آن چــشــم ســخــنـگـو داده انـد |
| از کــســی پـــروا نــدارد دیــده گــســـتـــاخ مــن | در دیــار حـــســـن چـــون آیــیــنــه ام رو داده انـــد |
| در تــــمـــنـــای لـــب او بــــوســـه هـــای آبــــدار | مـی پــرسـتــان بــر لـب جــام و لـب جــو داده انـد |
| بـی حـنای بـیعـت گـل نیسـت دسـتـی در چـمن | عــنــدلــیـبــان را مــگــر بــیـهــوشــدارو داده انــد؟ |
| *** | |
| وقت جمعی خوش که تـخمی در تـه گل کرده اند | خــاطــر خــود جــمــع از امـیـد حــاصــل کــرده انـد |
| زاهــدان چــون ســکــه بــهــر رونــق بـــازار خــود | پــشــت بــر زر، روی در دنـیـای بــاطــل کــرده انـد |
| *** | |
| فـتــنـه و آشـوب از هـر سـو بــه مـن رو کـرده انـد | تــا دگـر چـشـمـان پــرکـارش چـه جــادو کـرده انـد |
| چـشم آهو چشم من هرگز بـه این مستـی نبـود | گــویـیـا در ســرمــه اش بــیـهـوشــدارو کــرده انــد |
| *** | |
| زهـر در پــیـمـانـه کـردم انـگـبــیـن پــنـداشــتــنـد | خــون دل خــوردم شـراب آتــشـیـن پــنـداشــتــنـد |
| خـط کـشـیـدم بـر سـر سـوداپـرسـت خـویـشـتـن | سـاده لـوحـان جـهـان چـیـن جـبــیـن پــنـداشـتـنـد |
| بــدگــمــانـی لــازم بــدبــاطــنـان افــتــاده اســت | گـوشـه از خـلـق جـهان کـردم کـمـین پـنـداشـتـنـد |
| *** | |
| نـغــمــه و گــفــتــار خــوش ارواح را بــال و پــرنــد | گـر بــه صـورت رهـزنـنـد امـا بــه مـعـنـی رهـبــرنـد |
| گل ز شبـنم، شبـنم از گل یافت چندین آب و تاب | ســاده لــوحــان جـــهــان آیــیــنــه یــکــدیــگــرنــد |
| *** | |
| پـنـبـه از بـی طـالـعـی نـاخـن بـه داغـم مـی زنـد | پـــرده فــانــوس، دامــن بـــر چـــراغـــم مــی زنــد |
| عـشـقـبــازان را نـسـیـم زلـف مـی آرد بــه رقـص | بــوی گـل بــیـهـوده خــود را بــر دمـاغــم مـی زنـد |
| *** | |
| نـالــه ام نـاخــن بــه داغ عــنـدلــیـبــان مــی زنـد | گــریـه گــرم مــن آتــش در گــلــســتــان مـی زنـد |
| شــمــع پــا در دامــن فــانـوس پــیـچــیـد و هـنـوز | شــوق بــر خــاکــســتــر پــروانـه دامــان مـی زنـد |
| نیسـت در جـیب دو عـالـم خـونـبـهای یک سئوال | هـمـتــم ایـن نـغـمـه بــر گـوش کـریـمـان مـی زنـد |
| عــاشــقــان را جــلــوه گــل درنـمــی آرد ز جــای | لــالـه گــاهـی نـاخــنـی بــر داغ ایـشــان مـی زنـد |
| *** | |
| روز روشــن آه مــا بـــر قــلــب گــردون مــی زنــد | عاجزست آن کس که بـر دشمن شبیخون می زند |
| دسـت گـسـتـاخـم بـه زلف او شـبـیخـون می زند | بـوسـه ام خـود را بـر آن لـبـهـای مـیگـون مـی زنـد |
| ســرکــه ابــروی زاهـد گــر چــنـیـن تــنـدی کــنـد | نشأه مـی همـچـو رنگ از شـیشـه بـیرون می زند |
| *** | |
| اهل دعوی خـط بـه حـرف اهل معنی می کشـند | این سـگـان بـا آهوان گردن بـه دعـوی می کـشـند |
| نیسـت حـسـن و عـشـق را از یکـدگـر بـیگـانگـی | عـاشـقـان از بـید مـجـنون نـاز لـیلـی مـی کـشـنـد |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
منبع : درج











