ز پــــــیـــــری حــــــاصـــــل مـــــن مـــــد آه اســـــتکـــه دود شـــمـــع کـــافـــوری ســـیـــاه اســــت***ظـــــرافـــــت آتـــــش افـــــروز…
| ز پــــــیـــــری حــــــاصـــــل مـــــن مـــــد آه اســـــت | کـــه دود شـــمـــع کـــافـــوری ســـیـــاه اســــت |
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| ظـــــرافـــــت آتـــــش افـــــروز جـــــدایــــی اســـــت | ادب آب حــــــیـــــات آشــــــنـــــایـــــی اســــــت |
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| در چـــمــن روزگــار فــال شــکــفــتـــن خـــطــاســـت | اره نــخـــل حـــیــات خـــنــده دنــدان نــمــاســت |
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| حــــســــن را بــــا عـــشـــق شـــان دیـــگـــرســــت | شـــمـــع بـــی پـــروانـــه تـــیـــر بـــی پـــرســـت |
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| عــشــق هـر چــنــد مــجــازی اســت خــوش اســت | سـلـطـنـت گـر چـه بـه بـازی اسـت خـوش اسـت |
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| حـــســـن در دوســـتـــی یــگـــانـــه خـــوش اســـت | رنــگ مــعــشــوق، عــاشــقــانــه خــوش اســت |
| خــشــکــی زهــد از دمــاغــم ابـــرهــای تـــر نــبـــرد | صــنــدلــی شــد آبــهــا و تــوبــه در ســر نــبـــرد |
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| عــالــمــی را لــعــل او مــســت از شــراب نـاب کــرد | چـشـمـه حـیوان همین یک خـضـر را سـیراب کـرد |
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| از تــراش آن خـط مـشـکـیـن جــلـوه زان رخـسـار کـرد | آب تــیـغ ایـن ســبــزه خــوابــیــده را بــیــدار کــرد |
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| مـنـع مـا کـی مـی تــوان از دســتــبــوس امـروز کـرد؟ | بــوسـه مـا را نـمـی بــایـســت دســت آمـوز کـرد |
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| از حــیــا نــتـــوان بـــه چــشــم او نــگــاه تـــیــز کــرد | دیـگــری بــیـمــار و مـی بــایـد مــرا پــرهـیـز کــرد |
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| ذات حــق را چــون تــوان در ایـن جــهـان ادراک کــرد؟ | در مـکــان چــون لـامـکــانـی را تــوان ادراک کـرد؟ |
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| دانـــه خــــال تــــو خــــون از چــــشـــم صـــیـــاد آورد | ایــن ســپـــنــد شــوخ آتـــش را بـــه فــریــاد آورد |
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| عــالــمــی از مــنــع زیــنــت خـــرم و دلــشـــاد شــد | زیـن مـدد خــرج لـبــاســی مـمـلـکــت آبــاد شــد |
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| خــلـقــی از گـفــتــار بــی کـردار مـن هـشــیـار شــد | گـر چـه خـود در خـواب مـاندم عـالـمی بـیدار شـد |
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| بــی تــائمـل هـر کـه در مـحــفـل سـخــن پــرداز شـد | چــون زبــان آتــشــیـن شــمــع، خــرج گــاز شــد |
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| خـرد دانـسـت آن کـه جــرم خـویـش را بــیـچـاره شـد | آدم از جــــنـــت بــــرای گـــنـــدمـــی آواره شــــد |
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| تـــازه رو زخـــم کـــهـــن از زخـــم هـــای تـــازه شـــد | غـنـچــه را خــمـیـازه گـل بــاعـث خــمـیـازه شــد |
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| داســتـــان عــمــر طــی شــد حــرف او آخــر نــشــد | بــرگــریــزان زبـــان شــد گــفــتــگــو آخــر نــشــد |
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| تـــا مــســیــحـــا رفــت از عــالــم دل خــرم نــمــانــد | ســوزنـی کــز دل بــرآرد خــار در عــالــم نـمــانــد |
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| ســاده لـوحــانـی کــه رو در کــنـج عــزلـت کــرده انـد | وعــده گــاه عــالــمــی را نـام خــلــوت کــرده انـد |
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| تـا نـقـاب از رخ بــرافـکـنـده اسـت در مـشـکـیـن پـرنـد | چــشـم مـجــمـر آب آورده اســت از دود ســپــنـد |
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| غـیـرت خــســرو چــو خــواهـد رشـک فـرمـایـی کـنـد | یـاد شــکــر داغ شــیـریـن را نـمـک ســایـی کـنـد |
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| در دل مــعـــشـــوق جـــای خـــود ادب وا مــی کــنــد | بــهـلـه از کـوتـاه دسـتـی بــر کـمـر جـا مـی کـنـد |
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| آن کـه لـب بــاز از سـر رغـبــت بـه غـیـبـت مـی کـنـد | حــلـقــه ذکــر خــدا را طــوق لــعــنـت مـی کــنـد |
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| مــیـکــشــان را بــاده گــلــرنـگ خــنــدان مــی کــنــد | یک گـلـابـی مـجـلـس مـا را گـلـسـتـان مـی کـنـد |
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| تــکـیـه گـاه خــلـق، لـطــف حــق تــعـالـی بــس بــود | بــســتــر و بــالــیـن مــاهــی آب دریــا بــس بــود |
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| دور ســـاغـــر بــــی هـــوای ابــــر پـــا در گـــل بــــود | بـــادبـــان کـــشـــتـــی مــی ابـــر دریــا دل بـــود |
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| در بـــســاط آســمــان خـــشــک، هــمــت کــم بـــود | آفـــتـــابـــش کـــاســـه دریــوزه شـــبـــنـــم بـــود |
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| حـــاصــل جـــمــعــیــت عــالــم پـــریــشـــانــی بـــود | بــیـشــتــر بــیـمــاری مــردم ز مــهــمــانــی بــود |
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| بـــخــت بـــا مــا بـــر خــلــاف راه مــقــصــد مــی رود | پــای خـواب آلـود هـر راهـی کـه خـواهـد مـی رود |
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| دیــده هــر کــس کــه از اشـــک نــدامــت تـــر شــود | راســت هـر مــژگــان او ســرو لــب کــوثــر شــود |
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| هــر کـــه گـــردانـــد ز دنـــیــا روی، از مـــردان شـــود | آن بــود فـیـروز جــنـگ ایـنـجــا کـه روگـردان شـود |
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| فــیــض روشــن گــوهــران از ارتـــحــال افــزون شــود | ســایـه خــورشــیــد تــابــان از زوال افــزون شــود |
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| از شــراب لــالــه گــون هــمــت دوبـــالــا مــی شــود | هر که نوشـد آب این سـرچـشـمه رعنا می شـود |
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| حـسـن خـط از حـلـقـه گـشـتـن هـا زیادت مـی شـود | خــط ز پــیـچ و تــاب قــلـاب مـحــبــت مـی شــود |
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| در وجـــود مــا شـــراب تـــلـــخ بـــاطـــل مــی شـــود | از زمـیـن شـور مـا افـســوس حــاصـل مـی شـود |
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| عـمـر اهـل دولـت از احــسـان دو چــنـدان مـی شـود | رشـتـه هسـتـی دو تـا از مـد احـسـان مـی شـود |
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| آســمــان افــتــادگــان را غــمــگــســاری مـی شــود | گــردش پــرگــار مــرکــز را حــصــاری مــی شــود |
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| خــون مــی را از عــروق تــاک مــی بــایــد کــشــیــد | انـتــقـام خـون خـلـق از خـاک مـی بــایـد کـشـیـد |
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| ســاغـر مـی را بــه دســت مـی پــرســت مـا دهـیـد | خــونـی خــمــیـازه مــا را بــه دســت مــا دهـیـد! |
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| کـجــا چــشــم بــد از دود ســپــنـدم در گـزنـد افـتــد؟ | بـه بــخـت مـن گـره در کـار آتـش از سـپـنـد افـتـد |
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| بــه جــز دنــدان کــز آب زنـدگــی چــون آســیـا گــردد | کــدامــیـن آســیــا دیـدی کــه از آب بــقــا گــردد؟ |
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| به عادت هر کجا زهری است شیرین چون شکر گردد | بـه جز هجـران که هر دم تـلخی او بـیشتـر گردد؟ |
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| چـنین از مـی گـر آن سـیب زنـخـدان لـالـه گـون گـردد | سرانگشت سهیل از زخـم دندان جـوی خون گردد |
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| طــریــق کــفــر و دیـن در شــاهــراه دل یـکــی گــردد | دو راه اسـت این کـه در نزدیکـی منزل یکـی گردد |
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| ز پــرگــویــی دهــان هــرزه گــویــان بـــاز مــی گــردد | خــمـوشــی ســرمـه کــوه بــلـنـد آواز مـی گـردد |
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| دلــی دارم کــه از یــاد طــرب غــمــنــاک مــی گــردد | ســری دارم کـه بــر گـرد سـر فـتــراک مـی گـردد |
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| بـه هر کـس آسـمـان شـد مهربـان بـیچـاره می گـردد | چـو گـل را بــاغـبــان بــنـدد کـمـر آواره مـی گـردد |
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| غـــم روی زمـــیــن مـــا را غـــبـــار دل نــمــی گـــردد | کــه از گـرد یـتــیـمـی آب گـوهـر گـل نـمـی گـردد |
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| بـه مـی خـشـکـی ز طـبـع زاهـدان زایـل نـمـی گـردد | بــه آب زنـدگـانـی ایـن زمـیـن قــابــل نـمـی گـردد |
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| ز نـخـل خـشـک مـریـم ایـن رطـب بـر خـاک مـی بـارد | کـه فـرزنـد ســعــادتــمـنـد بــا خــود رزق مـی آرد |
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| ز بـــس انــدیــشــه ســرو از قــامــت آن دلــربـــا دارد | ز طـــوق قـــمـــریـــان دایــم ز ره زیــر قـــبـــا دارد |
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| مـرا از شــکـر نـه کـفـران نـعــمـت بــســتــه لـب دارد | کـه شـکـر آشـکـارا بــویـی از حــسـن طـلـب دارد |
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| شـود خـونـریزتـر حـسـنـی کـه عـاشـق بـیشـتـر دارد | کـه از هـر طـوق قـمـری ســر و فـتــراک دگـر دارد |
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| کـه جــز مـن مـی تــوانـد تــا مـرا گـرم ســخــن دارد؟ | کـه در آیینـه طـوطـی گـفـتـگـو بـا خـویشـتـن دارد |
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| بــه ظــاهـر چــیـن در ابــرو گـرچــه آن نـازآفــریـن دارد | بــه قـدر بــنـد نـی تــنـگ شـکـر در آسـتــیـن دارد |
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| نــهــان در پـــرده هــر مــوی مــن آه آتـــشـــیــن دارد | رگ ابــــر بـــهـــاران بـــرق را در آســـتـــیـــن دارد |
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| بـه هر رنگی که بـاشـد دل، همان صـورت جـهان گیرد | بــهــار از زردی آیـیـنــه، ســیـمــای خــزان گــیـرد |
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| کـــه دارم غـــیــر خـــط تـــا از رخ او داد مــن گـــیــرد؟ | بـه جـز گلچـین که خـون عندلیبـان از چـمن گیرد؟ |
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| مـن آن سـیلـم کـه مـنـزل پـیش راه مـن نـمـی گـیـرد | غــبــار از گــرم رفــتــاری مـرا دامـن نـمـی گــیـرد |
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| بـه مـاتـم هر کـه کـام خـود ز افـغـان تـلـخ مـی سـازد | شـکـرخـواب عـدم را بـر عـزیـزان تـلـخ مـی سـازد |
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| سـیه مـسـتـان غـفـلـت را فـلـک هـشـیار مـی سـازد | درشـتـان را بـه گـردش آسـیـا هـمـوار مـی سـازد |
| مـــژگـــان زرد، خـــانـــه بـــرانـــداز ســـیــنــه اســـت | الــمــاس در خــراش جــگــر بــی قــریـنــه اســت |
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| آب حــــیـــات آتــــش رخـــســـاره هـــا مـــی اســـت | بــاد مــراد کــشــتــی مــی نــغــمــه نـی اســت |
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| حــســنـت هـلــال را بــه ســر آســمـان شــکــســت | می خـواسـت چـله (را) بـنشاند، کمان شکسـت |
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| رخـــســـار او مـــقـــیــد زلـــف بـــلـــنـــد نـــیــســـت | ایـن صـیـد پــیـشـه را نـظـری بــا کـمـنـد نـیـسـت |
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| مــا را شــکــایــت از ســخـــن تـــلــخ یــار نــیــســت | ایـن گـوشــمـال هـیـچ کــم از گـوشــوار نـیـســت |
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| مـــا را کـــنـــار و بــــوس تـــوقـــع ز یـــار نـــیـــســـت | دریــای بـــی قـــراری مـــا را کـــنـــار نـــیــســـت |
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| در گــریــه بـــی رخـــت مــژه را اخــتـــیــار نــیــســت | در رشــتــه گــســســتــه گـهـر را قــرار نـیـســت |
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| عـــمـــر عـــزیــز قـــابـــل ســـوز و گـــداز نـــیــســـت | ایـن رشـتــه را مـسـوز کـه چــنـدان دراز نـیـسـت |
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| گــفــتــی نـمــی تــوان ز لــب دلــســتــان گــذشــت | گــر بــگــذری ز وادی جــان مــی تــوان گــذشــت |
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| از داغ تــــازگــــی جــــگــــر پـــــاره پـــــاره یــــافــــت | از آفـــتـــاب، صـــبـــح حـــیـــات دوبـــاره یـــافـــت |
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| از روی عــرقــنــاک تـــو خـــورشــیــد کــبـــاب اســت | آتــش ز تــمـاشـای تـو یـک چـشـم پــر آب اسـت |
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| از پــــرده شــــرم تــــو دلـــم داغ و کـــبــــاب اســــت | بـر روی شـکـر گـر هـمـه شـیرسـت نـقـاب اسـت |
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| تـــنــهــا نــه هــمــیــن بـــا تــو مــرا روی نــیــازســت | هـر کـس کـه تـرا دیـده بــه مـن بــر سـر نـازسـت |
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| صـــد در صـــد آفـــاق، بــــیـــابــــان جـــنـــون اســـت | کـی عـقـل تـنک مـایه بـه سـامـان جـنون اسـت؟ |
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| دایــم دلــم از دخــل نــفــهــمــیــده غــمــیــن اســت | دخـلـی کـه مرا هسـت درین شـهر، همین اسـت |
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| بــا عــشــق تــو انــدیــشــه کــونــیــن گــنــاه اســت | عــشــاق تـــرا تـــرک دو عــالــم دو گــواه اســت |
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| هـر قــطــره شــبــنـم بــه چــمـن دانـه ذکـری اســت | هـر غـنـچــه دریـن بــاغ سـرزانـوی فـکـری اســت |
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| هـر داغ دریـن لــالــه ســتــان خــیـمـه لـیـلـی اســت | هـر خــار بــنـی پــنـجــره شـمـع تــجــلـی اسـت |
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| از رفـتــن گـل صـحــن چــمـن نـوحــه سـرایـی اسـت | هــر بــرگ خــزان آیــنــه مــرگ نــمــایــی اســت |
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| بـــا خــوی ســرکــش او آتــش ســخــن پــذیــرســت | بـــا خـــط تـــازه او ریــحـــان ســیــاه پـــیــرســت |
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| رنــــگ شـــــراب دارد یــــاقـــــوت درفـــــشـــــانـــــت | بــــوی امــــیــــدواری مــــی آیــــد از دهــــانــــت |
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| *** | |
| تــواضــع خــصــم بــالـادســت را بــی زور مـی ســازد | بـه خـم گردیدن از خود سیل را پـل دور می سازد |
| *** | |
| دلـم چـون بـرگ بـیـد از حـرف بـی هـنـگـام مـی لـرزد | چـو عـقـل طـفـل بـیـنـد بــر کـنـار بــام، مـی لـرزد |
| *** | |
| تــبــســم کــن کـه جــان بــاده لـعــلـی قــبــا ســوزد | ز آب آتــشــیــن خــویــشــتــن یــاقــوت وا ســوزد |
| *** | |
| اگـر مـهـر خــمـوشـی زان لـب شـیـریـن بــیـان خـیـزد | سبـک چون پـنبـه سنگینی ز هر گوش گران خیزد |
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| ز بــس گــفــتــار مــن از دل غــبــارآلــود مــی خــیـزد | چــو بــردارم قـلـم خــط غـبــار از کـلـک مـن ریـزد! |
| *** | |
| بــه تـمـکـیـنـی ز جـای خـویـش آن طـنـاز مـی خـیـزد | کـه مـی لـرزد عـرق بـر چـهره اش امـا نـمـی ریزد |
| *** | |
| زخـامـی هـر کـبــابـی اشـک خـونـیـن بـر زمـیـن ریـزد | کـبــاب دل چـو گـردد پـخـتـه اشـک آتـشـیـن ریـزد |
| *** | |
| ز مـاه روزه حــســن آن پــری پــیـکـر دو چــنـدان شـد | ازان مـهـر خـدایی مـاه مـن خـورشـید تـابـان شـد |
| *** | |
| چــه پــروا عـاشـق بــیـتــاب را از سـوخـتــن بــاشـد؟ | کـه چـون پـروانـه در گـیـرد چـراغ انـجـمـن بــاشـد |
| *** | |
| بـزرگـان را بـه تـعـلـیـم کـسـی حـاجـت نـمـی بـاشـد | ادیـبـی اهـل دولـت را بــه از دولـت نـمـی بــاشـد |
| *** | |
| ز شـهـرت نـاقـص از کـامـل عـیـاران بـیـش مـی بــالـد | ز انـگـشـت اشـارت مـاه نـو بـر خـویش مـی بـالـد |
| *** | |
| دلـی کـز خــامـشـی روشـن شـود مـردن نـمـی دانـد | خـموشی آتـش سنگ اسـت، افسردن نمی داند |
| *** | |
| ز بـــی دردی پــر و بـــال طــلــب از کــار مــی مــانــد | ز پــای خــفــتــه دامــن در تــه دیـوار مــی مــانـد |
| *** | |
| مـزن ای ســرو بــا شــمـشــاد او لـاف از خــرام خــود | کـه رسـوایـی نـدارد تــیـغ چـوبــیـن در نـیـام خـود |
| *** | |
| نـگـردم چــون ســبــو غــافــل ز حــفــظ آبــروی خــود | ز غیرت دسـت خـود پـیوسـتـه دارم بـر گلوی خـود |
| *** | |
| گــریـبــان چــاک در گـلـشــن چــو آن طــنـاز مـی آیـد | ز شـــاخ گـــل تـــذرو رنـــگ در پـــرواز مـــی آیـــد |
| *** | |
| ز مـــاه نـــوگـــشـــاد عـــقـــده دلـــهـــا نـــمـــی آیــد | گــره وا کــردن از یـک نــاخــن تــنــهـا نــمــی آیـد |
| *** | |
| بــه قـلـب خــصــم عـاجــز تــاخــتــن از مـا نـمـی آیـد | بــه روی سـایـه تــیـغ افـراخـتــن از مـا نـمـی آیـد |
| *** | |
| بـــه روی نــرم، کـــار از اهــل دنــیــا بـــرنــمـــی آیــد | کـه بـی آهـن شـرار از سـنـگ خـارا بــرنـمـی آیـد |
| *** | |
| نــشـــاط ظـــاهــری دل را گــره از کـــار نــگــشـــایــد | دل پــیـکــان ز شــکـرخــنـده ســوفــار نـگـشــایـد |
| *** | |
| چـــون فـــروزان ز مـــی آن آیــنــه طـــلـــعـــت گـــردد | آب در دیـــده خــــورشــــیـــد قــــیـــامـــت گـــردد |
| *** | |
| ســــر مــــا گــــرم ز زور مــــی بــــی غــــش گــــردد | آســــیـــای پــــر پــــروانــــه بــــه آتــــش گــــردد |
| *** | |
| صـــحـــبـــت مـــردم افـــســـرده ســـکـــون مــی آرد | آب اســـتـــاده، ز پــــا رشـــتـــه بــــرون مـــی آرد |
| *** | |
| صــبــح وصــل اســت و مـرا حــال چــنـیـن مـی گـذرد | شــب آدیــنــه مــســتــان بـــه ازیــن مــی گــذرد |
| *** | |
| طـــفـــل مـــحـــبــــوبــــم اگـــر رخ ز شـــراب افـــروزد | شــــمـــع امـــیـــد مـــن از عــــالـــم آب افــــروزد |
| *** | |
| بـــی تـــائمــل بـــه مــقــامــی دل غـــافــل نــرســـد | هـر کــه نـشــمـرده نـهـد گـام بــه مـنـزل نـرســد |
| *** | |
| از ســــفــــر بــــا رخ افــــروخــــتــــه جــــانـــان آمـــد | رفـت چــون مـاه و چــو خـورشـیـد درخـشـان آمـد |
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| اهــــل بـــــازار ز زهــــاد بـــــه انــــصــــافــــتـــــرنــــد | بــیـشـتـر دسـت و دهـن آب کـشـان، پـاک بــرنـد |
| *** | |
| پــیـش ســایـل چــه ضــرورســت بــپــا بــرخــیــزنــد؟ | از ســر مــال بـــه تـــعــظــیــم گــدا بـــرخــیــزنــد |
| *** | |
| گـــر مـــصـــور قـــلـــم از مـــوی مـــیـــان تـــو کـــنـــد | چــه خــیـال اســت کـه تــصـویـر دهـان تــو کـنـد؟ |
| *** | |
| اول و آخـــــــــــر الـــــــــــلـــــــــــه ازان آه بــــــــــــود | کــــــه ازو آه نــــــصــــــیـــــب دل آگــــــاه بــــــود |
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| از حـــیــات آنــچـــه تـــرا صــرف بـــه طــاعــات شــود | چــون رســد وقـت، شــفــیـع هـمـه اوقـات شــود |
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| حــــســــن اگـــر بــــدرقـــه شــــعــــلـــه آواز شــــود | طـــایــر حـــوصـــلـــه شـــیــدایــی پـــرواز شـــود |
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| گــر چــنـیـن جــلــوه گــر آن ســرو قــبــاپــوش شــود | طــوق هــر فــاخـــتـــه خــمــیــازه آغــوش شــود |
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| زود از خـــنــده بـــی مــغــز دهــن بـــســـتـــه شــود | رخـنـه بــرق بــه یـک چـشـم زدن بــسـتــه شـود |
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| یــوســف از دیــدن رخــســار تــو خــودبــیــن نــشــود | کـافـرسـت آن کـه تـرا بــیـنـد و بــی دیـن نـشـود! |
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| دل ســــودازده داغ تـــــو بـــــه افــــســــر نــــدهــــد | رشــتــه مــا گــره خــویــش بـــه گــوهــر نــدهــد |
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| گـــــریــــه امــــروز بـــــه رنــــگ دگــــرم مــــی آیــــد | (دل) ســوخــتـــگــی از جــگــرم مــی آیــد بـــوی |
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| کـیـسـت آن کـس کـه نـه بــر حــال مـســافـر گـریـد؟ | چــشــم آیــیــنــه بــه دنــبــال مــســافــر گــریــد |
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| مــدار خـــویــش بـــزرگـــی کـــه بـــر شـــراب نــهــاد | بــــنـــای دولــــت خــــود را بــــه روی آب نـــهـــاد |
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| خــســیـس بــاده چــو نـوشــد خــســیـس تــر گــردد | کــه بــســتــگــیــش فــزایــد گــره چــو تــر گــردد |
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| مــــــی مــــــدام دل لــــــالــــــه را ســـــــیــــــه دارد | خــــدا ز عــــافــــیــــت دایـــمــــی نــــگــــه دارد! |
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| اگـــر نـــه اشـــک مـــرادســـت بــــر گـــلـــو گـــیـــرد | غــــبــــار خــــاطــــر مـــن مـــاه را فــــرو گـــیـــرد |
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| هــمــیــن ز مــی نــه رخ بـــزم هــا نــگـــاریــن شـــد | کـز ایـن ســهـیـل، لـب بــام هـم عـقـیـقـیـن شـد |
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| ز آفــتـــاب شــود خـــشــک خـــط چـــو تـــر بـــاشـــد | خـــط عـــذار تــــو هـــر روز تــــازه تــــر بــــاشـــد |
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| خـــدنــگ بـــی غــرضــان را خـــطــا نــمــی بـــاشــد | ز تـــرک داعــیــه بـــهــتـــر دعــا نــمــی بـــاشــد |
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| ز پــــیــــچ و تــــاب در دل بــــه مــــا فــــراز نــــشــــد | چـه حـلـقـه هـا کـه بـر ایـن در زدیـم و بــاز نـشـد |
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| بــه روی لــالــه و گــل هـر کــه مــی نــمــی نـوشــد | فسرده ای است که خونش بـه خون نمی جوشد |
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| پـــیــالـــه ای بـــه لـــبـــم چـــرخ آشـــنـــا نـــکـــنـــد | کــه بــخــت شــور نـمــک در شــراب مــا نـکــنــد |
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| دلـــی کـــه آب شــــد از عـــشــــق بــــرقـــرار بــــود | کـــه گـــل گـــلـــاب چـــو گـــردیــد پـــایــدار بـــود |
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| دل از رفـــیــق گـــرانــجـــان ز عـــمــر ســـیــر شـــود | ســفـر بــه پــای شــتــر هـر کـه کـرد پــیـر شــود |
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| بــــه دســـت مـــن کـــمـــر نـــازک تـــو چـــون آیـــد؟ | مـــگـــر مـــرا ز کــــف دســــت مـــو بــــرون آیـــد |
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| اگــــر ز دســــت تــــهـــی، کــــام بــــرنـــمــــی آیـــد | چــگــونــه بــهـلــه بــرون زان کــمــر نــمــی آیـد؟ |
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| نــخــلــی کــه ســرکــشــی نــکــنــد پــایـمــال بــاد! | خــون گــل پــیــاده بــه گــلــچــیــن حــلــال بــاد! |
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| ســـیــر شـــکــوفـــه عـــقــل مــرا زیــر دســـت کــرد | ایــن مــاهــتـــاب روز، مــرا شــیــرمــســـت کــرد |
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| در گـلـشــنـی کـه حــســن تــو عــارض جــمـال کــرد | گـــل آب و رنــگ خـــود عـــرق انـــفـــعـــال کـــرد |
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| حــسـن از حــجــاب، غـصـه و تــشـویـش مـی خــورد | شـهـبــاز چـشـم بـسـتـه دل خـویـش مـی خـورد |
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| بـــا جــســم کــس بــه عــالــم بـــالــا نــمــی رســد | دجــال خــرســوار بـــه عــیــســی نــمــی رســد |
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| دل از ســـفـــیــد گـــشـــتـــن مـــو نـــاامـــیــد شـــد | عـالـم سـیه بـه چـشـمـم ازین پـی سـفـیـد شـد |
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| حـــســـن تـــو زیــردســـت خـــط مــشــکــبـــار شــد | ایـن مـور رفــتــه رفـتــه ســلـیـمـان شــکـار شــد |
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| غــــلــــیــــان ز دودمــــان وجـــــود آشــــکــــار شــــد | عـــالـــم پــــر از ســـتـــاره دنـــبــــالـــه دار شـــد |
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| از اخــــــتــــــیـــــار دم دل گـــــمـــــراه مـــــی زنـــــد | ایـن قــلــب، زر بــه نــام شــهـنــشــاه مــی زنــد |
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| گــر چـــه در ظــاهــر بـــه زه دارم کــمــان اخـــتـــیــار | چـون رگ سـنـگ اسـت در دسـتـم عـنـان اخـتـیار |
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| تــیــشــه مــن چــون زنــد دامــان جــرائت بــر کــمــر | هـر رگ ســنـگــی شــود انـگــشــت زنـهـار دگــر |
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| گــــر بــــاغــــبــــان زکــــات زر گــــل بــــرون کــــنـــد | بـــاد خـــزان طـــراوت گـــلـــشـــن فـــزون کـــنــد |
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| اشــکــم هـمــیـشــه خــون بــه دل آســتــیـن کــنــد | هـر طــفــل را کــه روی دهـی ایـن چــنـیـن کــنـد |
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| خـــــوبـــــان اگـــــر چـــــه زبـــــده اولــــاد آدمــــنــــد | چـــون خـــط بــــرآورنـــد پـــریـــزاد عـــالـــمـــنـــد |
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| روشـــنــدلــان کـــه قـــبـــلــه خـــود روی او کـــنــنــد | در هـــر نـــظـــر دو عـــیــد ز ابـــروی او کـــنـــنـــد |
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| در حــفــظ آن کــســی کــه ز مـی بــی خــبــر شــود | هـــر بـــرگ تـــاک، دســـت دعـــای دگـــر شـــود |
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| بـــیــداد آســـمــان چـــه خـــیــال اســـت کــم شــود | زور کــمــان حــلــقــه مــحــال اســت کــم شــود |
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| از بـــاده چـــون عــقــیــق تـــو ســیــراب مــی شــود | گــوهــر در آب خــود چـــو شــکــر آب مــی شــود |
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| از خــود گــســســتــه، بــار بــه دنــیــا نــمــی شــود | مــریـم گــران ز حــمــل مــســیـحــا نـمـی شــود |
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| از بـــانــگ نــی دلــی کــه جـــراحـــت نــمــی شــود | بـــیــدار از نــســـیــم قـــیــامـــت نــمـــی شـــود |
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| از تــــاج بــــاج خــــواه فــــریـــدون حــــذر کــــنــــیـــد | از کــــاســــه گـــدایـــی وارون حــــذر کــــنـــیـــد |
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| تــــقـــصـــیـــر مـــیـــانـــش ز خـــم و پــــیـــچ نـــدارد | حــرفــی اســت کــه گــویـنــد الــف هــیـچ نــدارد |
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| حــــاشــــا کـــه طـــلـــبــــکـــار حــــق آرام پــــذیـــرد | ایــن راه نــه راهــی اســت کــه انــجــام پـــذیــرد |
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| جـــز ســـرکـــشـــی از آدم بـــی درد چـــه خـــیــزد؟ | از خــاک فــرومــایــه بـــه جــز گــرد چــه خــیــزد؟ |
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| از شـهـد جــهـان جــز غـم و تــشـویـش چــه خـیـزد؟ | از زاده زنـــبـــور بـــه جـــز نــیــش چـــه خـــیــزد؟ |
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| از مـــوی چــــو کـــافـــور دلـــم بــــیـــت حـــزن شـــد | ســررشــتــه خــوشـحــالـی مـن تــار کـفـن شـد |
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| تــــا گـــوهـــر ذات تـــو نـــهـــان زیـــر زمـــیـــن شـــد | گــردون چــو نـگـیـن خــانـه افــتــاده نـگـیـن شــد |
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| مـــی خــــورد و فـــروزان شـــد و از شـــرم بــــرآمـــد | یـــاقــــوت لــــب یـــار عــــجــــب نـــرم بــــرآمـــد |
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| کـــــی در تـــــن خـــــاکـــــی دل آگــــاه گــــذارنــــد؟ | یـوســف نـه عــزیـزی اســت کـه در چــاه گـذارنـد |
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| طـــول امـــر از دل چــــه خــــیـــال اســـت بــــرآیـــد؟ | ایـن ریــشــه ازیـن خــاک مــحــال اســت بــرآیــد |
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| زنــــگ از دل مــــا آن خـــــط شـــــبـــــرنــــگ زدایــــد | زنـــگـــار کـــه دیـــده اســـت ز دل زنـــگ زدایـــد؟ |
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| خــــط در دل روشــــن گــــهــــران مــــهــــر فــــزایـــد | در آیــنــه هــا نــقــش نــگــیــن راســت نــمــایــد |
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| در کــســـوت فـــقــر آن رخ چـــون مــاه بـــبـــیــنــیــد | در زیـــر کـــلـــاه نـــمـــدی مـــاه بــــبــــیـــنـــیـــد |
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| در صـــیــدگـــاه دنـــیــا هـــر کـــس کـــه هــوش دارد | جــز عـبــرت آنـچــه بــاشــد صـیـد حــرم شـمـارد |
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| تــا خــط دمــیــد بـــا مــن دلــدار هــم ســخــن شــد | خـــط غـــبـــار جـــانــان خـــاک مـــراد مــن شـــد |
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| دل ز مـــــــن خــــــــال یـــــــار مـــــــی گـــــــیـــــــرد | حـــــق بـــــه مــــرکـــــز قـــــرار مــــی گــــیــــرد |
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| هـــیـــچ شـــریــفـــی خـــســـیــس رای نـــبـــاشـــد | آتــــــش یـــــاقـــــوت ژاژخـــــای نـــــبــــــاشـــــد |
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| خـــســیــس از هــنــرپـــیــشــگــان عــیــب بـــیــنــد | مــگــس بـــیــشــتـــر بـــر جــراحــت نــشــیــنــد |
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| از نـــمـــدپــــوشـــان زبــــان طـــعـــن را کـــوتــــاه دار | کــز نـمــد ســالــم نـمــی آیـد بــرون دنــدان مــار |
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| گـل گـلـاب از هـرزه خـنـدی شـد دریـن نـیـلـی حـصـار | خــنـده بــیـجــاســت بــرق گــریـه بــی اخــتــیـار |
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| شـــد فــزون در دور خـــط کــیــفــیــت لــبـــهــای یــار | نشائه می بخشد دو بالا، می چو گردد پشت دار |
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| پــوچ گــو را بـــر ســر گــفــتــار بـــی حــاصــل مــیــار | پــنـبــه زنـهـار از ســر مــیـنـای خــالــی بــرمــدار |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
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