لـــیــلـــی پـــس پـــرده عـــمــاریدر پـــــــــــرده دری ز پـــــــــــرده داریاز پــــرده نـــام و نـــنـــگ رفـــتـــهدر پــــرده نـــای و چــــن…
| لـــیــلـــی پـــس پـــرده عـــمــاری | در پـــــــــــرده دری ز پـــــــــــرده داری |
| از پــــرده نـــام و نـــنـــگ رفـــتـــه | در پــــرده نـــای و چــــنـــگ رفــــتــــه |
| نـــقـــل دهـــن غـــزل ســــرایـــان | ریــحـــانــی مــغــز عـــطـــر ســـایــان |
| در پـــرده عـــاشـــقــان خـــنــیــده | زخـــم دف مـــطـــربـــان چـــشـــیـــده |
| افـتــاده چــو زلـف خـویـش درتــاب | بــی مــونــس و بــیـقــرار و بــیـخــواب |
| مــجــنــون رمــیـده نـیـز در دشــت | سرگشته چو بخت خویش می گشت |
| بـــی عـــذر هــمــی دویــد عـــذرا | در مـــوکـــب وحـــشـــیـــان صـــحــــرا |
| بـــوری بـــه هــزار زور مـــی رانـــد | بــیــتــی بــه هــزار درد مــی خــوانــد |
| بــر نــجــد شــدی ز تــیــر وجــدی | شــیـخــانـه ولــی نـه شــیـخ نـجــدی |
| بــر زخـمـه عـشـق کـوفـتـی پــای | وز صــــدمــــه آه روفــــتـــــی جـــــای |
| هـر عــاشــق کــاه وی شــنـیـدی | هــر جـــامــه کــه داشــتـــی دریــدی |
| از نـــرم دلــــان مـــلـــک آن بــــوم | بــــود آهـــنـــی آب داده چـــون مـــوم |
| نـوفــل نـامـی کــه از شــجــاعــت | بـــود آنــطـــرفــش بـــه زیــر طـــاعــت |
| لشـگر شـکنی بـه زخـم شـمشیر | در مــهــر غــزال و در غــضــب شـــیــر |
| هم حـشـمت گیر و هم حـشم دار | هـــم دولــــتــــمـــنـــد و هـــم درم دار |
| روزی ز ســـر قـــوی ســـلــاحـــی | آمــــد بــــه شــــکــــار آن نــــواحــــی |
| در رخـــنـــه غـــارهــای دلـــگـــیــر | مـی گـشـت بـه جـسـتـجـوی نخـجـیر |
| دیـــد آبــــلـــه پـــای دردمـــنـــدی | بـــر هـــر مـــوئی ز مـــویـــه بـــنـــدی |
| مــحــنــت زده غــریــب و رنــجـــور | دشـــمــن کـــامــی ز دوســـتـــان دور |
| وحــشــی شــده از مــیـان مــردم | وحـــشـــی دو ســـه اوفـــتـــاده دردم |
| پــرســیـد ز خــوی و از خــصـالـش | گــفــتــنــد چــنــانــکــه بــود حــالــش |
| کــز مــهـر زنــی بــدیـن حــزیـنــی | دیـوانـه شـد ایـن چــنـیـن کـه بــیـنـی |
| گــردد شــب و روز بــیــت گــویــان | آن غـــــالــــیــــه را زیــــاد جـــــویــــان |
| هــر بـــاد کـــه بـــوی او رســـانــد | صــد بـــیــت و غــزل بـــدو بـــخـــوانــد |
| هــــر ابــــر کــــزان دیـــار پــــویـــد | شــعــری چــو شــکــر بـــدو بــگــویــد |
| آیــنـــد مـــســـافـــران زهــر بـــوم | بــیــنــنــد در ایــن غــریــب مــظــلــوم |
| آرنـــد شــــراب یـــا طــــعــــامـــی | بـــاشـــد کــه بـــدو دهــنــد جـــامــی |
| گــیـرد بــه هـزار جــهــد یـک جــام | وان نـــــیــــز بـــــه یـــــاد آن دلـــــارام |
| در کـار هـمـه شـمـارش ایـنـســت | ایـنــســت شــمــار کــارش ایـنـســت |
| نـوفـل چــو شـنـیـد حـال مـجــنـون | گـفــتــا کـه ز مـردمـی اســت اکــنـون |
| کـایـن دل شـده را چــنـانـکـه دانـم | کــوشــم کــه بـــه کــام دل رســـانــم |
| از پـشـت سـمـنـد خـیـزران دسـت | ران بــازگـشــاد و بــر زمـیـن جــســت |
| آنـگـاه ورا بــه پــیـش خــود خـوانـد | بـا خـویشـتـنـش بـه سـفـره بـنشـانـد |
| مـی گـفــت فـســانـهـای گـرمـش | چــنــدانـکــه چــو مــوم کــرد نــرمــش |
| گــویـنـده چــو دیـدگــان جــوانـمـرد | بــی دوســت نـوالــه ای نـمـی خــورد |
| هرچـه آن نه حـدیث دوست بـودی | گـر خــود هـمـه مـغـز پــوســت بــودی |
| از هر نمطـی که قـصـه می خـواند | جــز در لــیـلــی ســخــن نـمــی رانــد |
| وان شــــیـــفـــتــــه زره رمـــیـــده | زآنـــهـــا کـــه شــــنـــیـــده آرمـــیـــده |
| خــوشــدل شــد و آرمــیــده بــا او | هــم خـــورد و هــم آشـــمــیــد بـــا او |
| بــا او بــه بــدیـهــه خــوش درآمــد | چـــون دیــد حـــریــف خــوش بـــرآمــد |
| می زد جـگـرش چـو مغـز بـرجـوش | مـی خـوانـد قـصـیـدهـای چــون نـوش |
| بـر هر سـخـنـی بـه خـنـده خـوش | مــی گــفــت بــدیـهــه ای چــو آتــش |
| وان چرب سخن بـه خوش جـوابـی | مــــی کــــرد عــــمــــارت خــــرابــــی |
| کـــــز دوری آن چـــــراغ پـــــرنــــور | هـان تــا نـشـوی چــو شــمـع رنـجــور |
| کــــورا بـــــه زر و بـــــه زور بـــــازو | گــــردانــــم بـــــا تـــــو هــــم تـــــرازو |
| گـــر مــرغ شـــود هــوا بـــگـــیــرد | هــم چــنــگ مــنــش قــفــا بــگــیــرد |
| گـر بــاشـد چــو شـراره در سـنـگ | از آهــــنـــــش آورم فـــــرا چـــــنـــــگ |
| تــا هـمــســر تــو نـگــردد آن مــاه | از وی نـــکـــنـــم کـــمـــنـــد کـــوتـــاه |
| مـــجــــنـــون ز ســـر امـــیـــدواری | مـی کــرد بــه ســجــده حــق گــزاری |
| کاین قصه که عطر سـای مغزست | گـر رنـگ و فـریـب نـیـســت نـغـزســت |
| او را بــه چــو مــن رمــیـده خــوئی | مــــادر نــــدهــــد بــــه هـــیـــچ روئی |
| گـــل را نـــتــــوان بــــه بــــاد دادن | مــــــــه زاده بــــــــه دیــــــــو زاد دادن |
| او را ســوی مـا کـجــا طـوافـســت | دیـــوانـــه و مـــاه نـــو گـــزافـــســــت |
| شسـتـند بـسی بـه چـاره سـازی | پــــیـــراهـــن مـــا نـــشـــد نـــمـــازی |
| کـردنـد بــسـی سـپــیـد سـیـمـی | از مــا نــشــد ایـن ســیـه گــلــیـمــی |
| گـر دسـت تــرا کـرامـتــی هـسـت | آن دســتــرسـی بــود نـه زیـن دســت |
| انــدیـشــه کــنـم کــه وقــت یـاری | در نــــیــــمــــه رهــــم فــــروگــــذاری |
| نـاآمـده ایـن شــکــار در شــســت | داری زمــــن وز کـــــار مــــن دســـــت |
| آن بـــاد کـــه ایــن دهــل زبـــانــی | بـــاشــد تـــهــی از تــهــی مــیــانــی |
| گـر عـهـد کـنـی بــدانـچـه گـفـتـی | مـــزدت بــــاشــــد کـــه راه رفـــتــــی |
| ور چـشمه این سخـن سرابـسـت | بــــگــــذار مـــرا تــــرا ثــــوابــــســــت |
| تـا پــیـشـه خـویـش پــیـش گـیـرم | خـــیــزم پـــی کـــار خـــویــش گــیــرم |
| نـــــوفـــــل ز نـــــفـــــیــــر زاری او | شـــد تــــیـــز عـــنـــان بــــه یـــاری او |
| بـخـشـود بـر آن غـریـب هـمـسـال | هـم سـال تـهـی نـه بـلـکـه هـم حـال |
| مـیـثــاق نـمـود و خــورد ســوگـنـد | اول بـــــــه خـــــــدائی خــــــداونــــــد |
| وانــگــه بــه رســالــت رســولــش | کــایـمــان ده عــقــل شــد قــبــولــش |
| کـز راه وفـا بــه گـنـج و شـمـشـیـر | کـوشـم نه چـو گرگ بـلکـه چـون شـیر |
| نـه صـبــر بــود نـه خـورد و خـوابــم | تـــا آنــچـــه طــلــب کــنــم بـــیــابـــم |
| لـیـکـن بــه تـوام تـوقـعـی هـسـت | کــز شــیـفــتــگـی رهـا کـنـی دســت |
| بــنـشـیـنـی و ســاکـنـی پــذیـری | روزی دو ســه دل بــه دســت گــیـری |
| از تــــو دل آتــــشـــیـــن نـــهـــادن | وز مــــن در آهـــنــــیـــن گــــشــــادن |
| چـون شیفتـه شـربـتـی چـنان دید | در خـــوردن آن نـــجــــات جــــان دیـــد |
| آســـود و رمــیــدگـــی رهــا کـــرد | بــــا وعـــده آن ســـخــــن وفـــا کـــرد |
| مـی بــود بــه صـبــر پـای بــسـتـه | آبــــی زده آتـــشـــی نـــشـــســـتـــه |
| بـــا او بـــه قــرار گــاه او تـــاخـــت | در ســـایـــه او قـــرارگـــه ســـاخــــت |
| گــرمــابــه زد و لــبــاس پــوشــیـد | آرام گــــرفــــت و بــــاده نـــوشــــیـــد |
| بـر رسـم عـرب عـمـامه در بـسـت | بــا او بــه شــراب و رود بــنـشــســت |
| چــنــدیـن غــزل لــطــیـف پــیـونــد | گــفــت از جــهــت جـــمــال دلــبـــنــد |
| نـوفــل بــه ســرش ز مــهـربــانـی | مـــی کـــرد چـــو ابـــر درفـــشـــانــی |
| چون راحت پوشش و خورش یافت | آراســتـــه شــد کــه پـــرورش یــافــت |
| شـــد چـــهــره زردش ارغـــوانـــی | بــــالـــای خــــمـــیـــده خـــیـــزرانـــی |
| وآن غـالـیـه گـون خــط ســیـاهـش | پـــرگـــار کـــشـــیــد کـــرد مـــاهـــش |
| زان گـل کــه لـطــافــت نـفــس داد | بــــاد آنـــچـــه ربــــود بــــاز پــــس داد |
| شــد صــبــح مــنـیـر بــاز خــنــدان | خــــورشـــیـــد نـــمـــود بــــاز دنـــدان |
| زنـجــیـری دشــت شـد خــردمـنـد | از بـــنـــدی خـــانــه دور شـــد بـــنـــد |
| در بــــاغ گـــرفـــت ســــبــــزه آرام | دادنــد بـــدســـت ســـرخ گـــل جـــام |
| مـجــنـون بــه سـکـونـت و گـرانـی | شـــد عـــاقــل مــجـــلــس مــعــانــی |
| وان مــهــتــر مــیــهــمــان نــوازش | مــی داشـــت بـــه صــد هــزار نــازش |
| بــی طـلـعـت او طــرب نـمـی کـرد | مـی جــز بــه جــمــال او نـمـی خــورد |
| مـاهـی دو ســه در نـشــاط کـاری | کـــردنـــد بـــه هـــم شـــراب خـــواری |
| *** | |
| روزی دو بــدو نـشـســتــه بــودنـد | شـــادی و نـــشـــاط مـــی فـــزودنـــد |
| مــجـــنــون ز شـــکــایــت زمــانــه | بــیـتــی دو ســه گـفــت عــاشــقـانـه |
| کـــــای فـــــارغ از آه دودنــــاکــــم | بــــر بـــــاد فــــریــــب داده خــــاکــــم |
| صــد وعــده مــهــر داده بــیـشــی | بـــا نــیــم وفــا نــکــرده خـــویــشـــی |
| پــذرفـتـه کـه پــیـشـت آورم نـوش | پـــذرفــتــه خــویــش کــرده فــرمــوش |
| آورده مـــرا بــــه دلـــفــــریـــبــــی | وا داده بـــدســـت نـــاشـــکـــیـــبـــی |
| دادیــم زبــان بــه مــهــر و پــیـونــد | و امــروز هــمــی کــنــی زبـــان بــنــد |
| صــد زخــم زبــان شــنــیـدم از تــو | یـــک مــــرهـــم دل نــــدیـــدم از تــــو |
| صبـرم شد و عقل رخـت بـربـسـت | دریــاب و گـــرنـــه رفـــتـــم از دســـت |
| دلــــداری بــــی دلـــی نـــمـــودن | وانـــگـــه بـــه خـــلـــاف قـــول بــــودن |
| دور اوفـــــتـــــد از بــــــزرگـــــواری | یـــاران بــــه از ایـــن کـــنـــنـــد یـــاری |
| قــولــی کــه در او وفــا نـه بــیـنــم | از چــون تــو کــســی روا نــه بــیــنــم |
| بــی یـار مـنـم ضــعــیـف و رنـجــور | چـــون تـــشـــنــه ز آب زنـــدگـــی دور |
| شـرطـسـت بــه تــشـنـه آب دادن | گــــنــــجـــــی بـــــه ده خــــراب دادن |
| گــر ســلـســلـه مـرا کــنـی ســاز | ورنـه شــده گــیـر شــیـفــتــه ای بــاز |
| گــر لــیـلــی را بــه مــن رســانـی | ورنـــه نـــه مـــن و نـــه زنـــدگـــانـــی |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
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