پــس از پــیـری و عـجــز و نـاتــوانـیچــو بــازش تــازه شــد عـهـد جــوانـیبــجــز راه وفـا و عــشــق نـســپــردبـــر آن زاد و بــر آن بــود و بــر آ…
| پــس از پــیـری و عـجــز و نـاتــوانـی | چــو بــازش تــازه شــد عـهـد جــوانـی |
| بــجــز راه وفـا و عــشــق نـســپــرد | بـــر آن زاد و بــر آن بــود و بــر آن مــرد |
| دریـن نـامـه سـخــن رانـم ز هـر یـک | بــه خـامـه گـوهـر افـشـانـم ز هـر یـک |
| بـه هر نقدی کز ایشـان خـرج سـازم | ز حــکـمـت تــازه گـنـجــی درج ســازم |
| طـمـع دارم کـه گـر نـاگـه شـگـرفـی | بــخـوانـد زیـن مـحــبــت نـامـه حـرفـی |
| نتـابـد نامه سـان بـر روی من پـشت | نسـاید خـامه وش بـر حـرفـم انگشـت |
| بــه دورادور اگــر بــیــنــد خــطــایـی | نـــیــارد بـــر ســـر مـــن مـــاجـــرایــی |
| بــه قــدر وســع در اصــلـاح کـوشــد | وگـــر اصـــلــاح نــتـــوانــد بـــپـــوشـــد |
| سـخـن دیبـاچـه دیوان عشق اسـت | سـخـت نوبـاوه بـسـتـان عشق اسـت |
| خرد را کار و بـاری جـز سخن نیست | جـهان را یادگـاری جـز سـخـن نـیسـت |
| بـه عـالـم هر چـه از نوی و کـهن زاد | چـنین گـوید سـخـنـدان کـز سـخـن زاد |
| سـخـن از کـاف و نون دم بـر قـلم زد | قـلـم بــر صـفـحــه هـســتــی قـدم زد |
| چـو شـد قـاف قـلم زان کاف موجـود | گـشــاد از چــشــمـه اش فــواره جــود |
| جـهان بـاشـان که در بـالا و پـسـتـند | ز جــوشـش هـای آن فـواره مـسـتــنـد |
| چو زان جـوشش کند لب نکتـه رانی | گــلــی بـــاشـــد ز گــلــزار مــعـــانــی |
| زنـد بــاد نـفـس دسـتـش بـه دامـان | بــــرون آرد ز گــــلــــزارش خــــرامـــان |
| کـــــنــــد ره بـــــر در دروازه گــــوش | فــتــد از مــقــدم او هــوش مــدهـوش |
| کـند خـاطـر بـه اسـتـقـبـالـش آهنگ | درآرد دل بـه بـر چـون غـنچـه اش تـنگ |
| گــهــی لــب را نــشــاط خــنــده آرد | گـــــه از دیــــده نــــم انـــــدوه بـــــارد |
| ازو خـــنـــدد لـــب انــدوهــمـــنــدان | و زو گــریــان شــود دلــهــای خــنــدان |
| چــو ایـن شأن الــهـی بــیـنـم از وی | مـعــاذالــلــه کــه دامـن چــیـنـم از وی |
| بـدین می شغل گیری ساخت پـیرم | بـه پـیرافـشـانـی اکـنـون شـغـل گـیرم |
| دهـــم از دل بــــرون راز نــــهــــان را | بـــخــنــدانــم بـــگــریــانــم جــهــان را |
| کـهن شـد دولـت شـیرین و خـسـرو | بــه شـیـریـنـی نـشــانـم خــســرو نـو |
| ســرآمـد نـوبــت لـیـلـی و مـجــنـون | کـسـی دیـگـر سـرآمـد ســازم اکـنـون |
| چـو طوطی طـبـع را سـازم شـکرخـا | ز حــســن یـوســف و عـشـق زلـیـخــا |
| خدا از قصه ها چـون احسنش خواند | به احسن وجه ازان خواهم سخن راند |
| چـو بــاشـد شـاهـد آن وحـی مـنـزل | نــبـــاشــد کــذب را امــکــان مــدخــل |
| نـگـردد خـاطـر از نـاراسـت خـرسـنـد | وگـر خــود گـویـی آن را راسـت مـانـنـد |
| سخن را زیوری چون راستی نیست | جـمـال مـه بـجـز نـاکـاسـتـی نـیـسـت |
| ازان صبـح نخستـین بـی فروغ است | کـه لـاف روشــنـی از وی دروغ اســت |
| چـو صـبـح راسـتـیـن از صـدق دم زد | ز خــور بـــر آســمــان زریــن عــلــم زد |
| بــه صــنـعـت گـر بــیـارایـی دروغـی | نـــگـــیـــرد زان چـــراغ وی فـــروغـــی |
| چـــرا دوزی بـــه قــد زشــت دیــبـــا | چـــو از دیــبـــا نــگــردد زشــت زیــبـــا |
| ز دیــبـــا زشــت زیــبــایــی نــیــابــد | ولـی دیـبــا ســوی زشـتــی شـتــابــد |
| رخ گــلــرنــگ را گــلــگــونــه بـــایــد | کــش از گــلـگــونـه گــلـرنـگـی فــزایـد |
| چـو گـلـگـونـه بــه روی تـیـره مـالـی | نــبــیـنـد دیـده زان جــز تــیـره حــالــی |
| ز معشـوقان چـو یوسـف کس نبـوده | جــمــالــش از هـمــه خــوبــان فــزوده |
| ز خـوبــان هـر کـه را ثــانـی نـدانـنـد | ز اول یــوســف ثـــانــیــش خـــوانــنــد |
| نبـود از عـاشـقـان کـس چـون زلیخـا | بـه عـشـق از جـمله بـود افـزون زلیخـا |
| ز طـفـلی تـا بـه پـیری عـشـق ورزید | بـه شـاهـی و اسـیـری عـشـق ورزیـد |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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