جــــل مــــن لــــاالــــه الــــا هــــولـا تــقــل کــیـف هـو و لـا مـا هـوکــل فــی نـعــت ذاتــه الــالـســنحــار فــی نــور و جــهـه الأعــیـنلـ…
| جــــل مــــن لــــاالــــه الــــا هــــو | لـا تــقــل کــیـف هـو و لـا مـا هـو |
| کــل فــی نـعــت ذاتــه الــالـســن | حــار فــی نــور و جــهـه الأعــیـن |
| لـــمـــعـــات جـــمـــال او ظـــاهــر | ســـبـــحـــات جـــلــال او قــاهــر |
| فـیض لـطـفـش چـو نورپـاش شـود | تـف قـهـرش چـو دور بــاش شـود |
| هر چه مفهوم عقل و ادراک است | سـاحـت قدس او ازان پـاک شـود |
| قدس ذاتش چو بـرتر از کیف است | کیف هو گفتن اندر او حیف است |
| چـون نه نوع آمـد و نه جـنـس او را | پـس چـه معـنی سئوال ما هو را |
| ما و هو چـیست لا و هو می گوی | راه ازین لـا و هـو بـدو مـی جـوی |
| لـا و هـو هـر دو نـفـی و اثـبــاتــنـد | نــافــی غــیـر و مــثــبــت ذاتــنـد |
| چـنـد از این غـافـلـی و گـمـراهـی | لـا و هـو ورد خـود کـن ای لـاهی |
| تــا دهـد لــا و هـوت قــوت و قــوت | بـــبـــرد تـــا ســـرادق لـــاهـــوت |
| بــه هــوا و هــوس در او نــرســی | تــا ز لـا نـگـذری بــه هـو نـرسـی |
| هـو کـفـایت ز غـیـب ذات شـنـاس | مـکــنـش بــر دگــر ذوات قــیـاس |
| هــیــچ ذاتــی بــه ذات او نــرســد | عــقـل کـل در صــفـات او نـرســد |
| این چـه مجـد و بـهاست سبـحانه | ویـن چــه عـز مـا اعـز سـلـطـانـه |
| ای هـمــه قــدســیـان قــدوســی | گـرد کـوی تـو در زمـیـن بــوسـی |
| دو جــهـان جــلـوه گـاه وحـدت تــو | شــهــد الــلــه گــواه وحــدت تــو |
| هم مقـر گـفـتـه بـا تـو هم جـاحـد | لــمـن الــمــلــک لــلــه الــواحــد |
| پــرتــو روی تـوسـت از هـمـه سـو | همـه را رو بـه تـوسـت از همه رو |
| هـمــه در راه و راه مــی جــویـنــد | از غـــمـــت آه آه مــی گـــویــنــد |
| مــبــتــدی در ره تــو مـویـه کــنـان | نــعـــره اهــدنـــاالـــصـــراط زنــان |
| مـنـتـهـی در سـجـود بـیـن یـدیـک | گـفـتـه کـیـف الـطـریـق رب الـیک |
| بـــنــمــا ره کــه طــالــب راهــیــم | ره بـه سوی تو از تو می خواهیم |
| قــطــع ایـن ره بــه راه پــیـمــایـی | کـی تـوان کـرد دگـر تـو نـنـمـایی |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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