ای ظـهـور تــو بــا بــطـون دمـســازوی بــروز تــو بـــا کــمــون هــمــرازاحـــدی لـــیـــک مـــرجـــع اعـــدادواحـــدی لــیــک مــجـــمــع اضــداداو…
| ای ظـهـور تــو بــا بــطـون دمـســاز | وی بــروز تــو بـــا کــمــون هــمــراز |
| احـــدی لـــیـــک مـــرجـــع اعـــداد | واحـــدی لــیــک مــجـــمــع اضــداد |
| اولــــی و تــــو را بــــدایـــت نــــی | آخـــری و تــــو را نـــهـــایـــت نـــی |
| ظــاهــری بــا کــمــال یــکــتــایــی | بـــاطـــنــی بـــا وفـــور پـــیــدایــی |
| ایــمــنــی از تـــغــیــر و تـــبـــدیــل | فــارغــی از تـــحــیــز و تـــحـــویــل |
| ذات تـــو در ســـرادقـــات جـــلـــال | از ازل تـــا ابـــد بـــه یــک مـــنـــوال |
| بـر تـو کـس نـیـسـت آمـر و نـاهـی | همه آن می کـنی که می خـواهی |
| نــه عــطــای تــو را خــطــا مــانــع | نـــه بــــلــــای تــــو را ولــــادافــــع |
| بـر خـطـا پـیشـگان عـطـای تـو دام | بــا ولــاشــیـوگــان بــلـای تــو کــام |
| دام چـه بــود فـریـب جـاه و جـمـال | کـام چــه بــود نـویـد قـرب و وصــال |
| ای جــهــانــی بـــه کــام از در تـــو | کـــام خـــواهــم نـــه دام از در تـــو |
| دمـــبـــدم در رهــم مـــنــه دامــی | تـــا پـــی کــام خــود زنــم گــامــی |
| بــه جــوار خــودم رهـی بــنــمــای | در حـــریــم دلــم دری بـــگــشــای |
| غـایب از مـن مـرا حـضـوری بـخـش | بـه سـروری رسـان و نـوری بـخـش |
| ای بـس آتش پرست بـاد به دست | کرده عمری بـه خـاک دیر نشسـت |
| بـوده بـا هیمـه سـالـها همـپـشـت | تــــا بــــرافـــروزد آتــــش زردشـــت |
| کــرده در خــدمــت مــغــان هـر دم | قـد چـو عـودالـصـلـیـب تــرسـا خـم |
| رویـش از آتــش کــنـشــت ســیـاه | خـویـش از فـعـلـهـای زشـت تــبــاه |
| نــه هــمــیـن روی و رای تــیـره ازو | پــای تــا ســر بــه یــک وتــیــره ازو |
| نـاگـهـان بــرق رحـمـتـی جـسـتــه | دلـش از کـفــر و تــیـرگـی رســتــه |
| گـشـتـه بــا جـذبـه عـنـایـت خـاص | مـرغ جــانـش ز دام شـرک خـلـاص |
| گر چه هستم بـه قید هستی بـند | هم بـه تـو بـر تـو می دهم سـوگند |
| کــه مــرا آنــچــنــان یـکــی انــگــار | در دلـم ظــلـمـت شــکــی مـگــذار |
| رخـــت در دار مـــلـــک دیــنــم نــه | جـــای در کـــشـــور یــقـــیــنــم ده |
| هـر چـه غـیر از تـو زان نـفـورم کـن | پـــای تـــا فــرق غـــرق نــورم کــن |
| دیـــــده ای ده ســـــزای دیــــدارت | جـــــانــــی آرام جــــای اســــرارت |
| چند بـاشم ز خود پـرستـی خویش | بـنـد در تـنـگـنـای هسـتـی خـویش |
| وارهــانــم ز نــنــگ ایــن تــنــگــی | بـــرســانــم بــه رنــگ بــیــرنــگــی |
| مـی پــرد مـرغ هـمـتــم گـسـتــاخ | در ریــاض امــیــد شــاخ بــه شــاخ |
| کــه ز بـــام تــو دانــه ای چــیــنــم | یـا ز نــامــت نــشــانــه ای بــیـنــم |
| پـیـش ازان کـز جـهـان بـبـنـدم بــار | ز افــســر فــقــر ســربـــلــنــدم دار |
| ســوی تــو بــارهـا شــتــافــتــه ام | بـــار جـــز بـــار دل نـــیــافـــتـــه ام |
| چـون شـد از بـار دل گـرانم پـشـت | حـلقه شد چـون دم سگانم پـشت |
| خـود گـرفـتـم کـه از سـگـان بــتـرم | مـکــن از حــلــقــه ســگــان بــدرم |
| من که بـاشـم که بـا تـو در بـن غار | هـمـچـو اصـحـاب کـهـف بـاشـم یار |
| کـی خـورم بـاک اگـر نـشـینم پـس | از صــف دوســتــان نـه ایـنــم بــس |
| که چو سگ گر چه پر شر و شینم | بـــر درت بـــاســـط الـــذراعـــیــنــم |
| بــود عــمــرم ســفــیـد طــومــاری | در کـف هـمـچــو مـن ســیـه کـاری |
| از بــــــرای ســـــواد آن نـــــامـــــه | دل مــن مــحـــبـــره زبـــان خــامــه |
| روزگـــــاری در آن قـــــلـــــم زده ام | از خــــطـــا و خـــلـــل رقـــم زده ام |
| کـس نـیابـد در او نـبـشـتـه خـطـی | کـه نه در ضـمـن آن بـود سـخـطـی |
| نیسـت حـرفی در او مصـون ز عوج | چـون الف بـلکه کـاف وش همه کج |
| ای کــه پــیـش تــو راز پــنــهــانــم | آشـکـار اسـت تــا بــه کـی خـوانـم |
| بــر تــو ایــن نــامــه پــریــشــانــی | چـون تـو حـرفـا بـه حـرف می دانی |
| چــون کـنـد دسـت قـهـرمـان اجــل | طــی ایـن نــامــه خــطــا و خــلــل |
| ز آب عفوش ورق بـشوی نخـسـت | پس به کلک کرم که در کف توست |
| بــــهـــر آزادیـــم بــــرات نـــویـــس | وز خــطــاهـا خــط نــجــات نــویـس |
| مـپــسـنـدم ازان صـحـیـفـه خـجــل | یوم نطـوی الـسـمـا کـطـی سـجـل |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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