تـا چـرخ مـرا بـه چـنگ عـشـق تـو سـپـردشـــمـــع طـــربــــم ز بــــاد انـــدوه بـــمـــردای گــردن رامــش مــرا کــوفــتـــه خـــورددر حـسـرت تــو عـ…
| تـا چـرخ مـرا بـه چـنگ عـشـق تـو سـپـرد | شـــمـــع طـــربــــم ز بــــاد انـــدوه بـــمـــرد |
| ای گــردن رامــش مــرا کــوفــتـــه خـــورد | در حـسـرت تــو عـمـر بــه سـر خـواهـم بــرد |
| *** | |
| هـنـگــام گــل ار بــه بــاغ بــلــبــل نــبــود | مـل را بــه جــهـای شـفـیـع چـون گـل نـبــود |
| گــل را مــلــکــا رفــیـق چــون مــل نـبــود | در بـــزم ز لــهــو بـــانــگ غـــلــغـــل نــبـــود |
| *** | |
| هـر گــه کــه فــلــک دل مــرا ریـش کــنـد | تـــنــهــا فـــکـــنــد مــرا و فـــرویــش کـــنــد |
| در ســمــج کــنــد مــرا و در پــیـش کــنـد | پــس هـر ســاعــت عـذاب مـن بــیـش کـنـد |
| *** | |
| گـــردون هــمـــه در بـــنـــد گـــرانـــم دارد | از بـــهـــر چـــه را هـــمـــی چـــنـــانـــم دارد |
| از چــشــم جــهـان هـمــی نــهـانــم دارد | در آرزوی روی جــــــــــهــــــــــانــــــــــم دارد |
| *** | |
| شــاهـا مــلــکــا هـمــه ثــنـاگــوی تــوانـد | خـوشـخـو مـلـکـی فـتـنه خـوشـخـوی تـوانـد |
| یک شـهـر بـه جـان و دل هوا جـوی تـوانـد | بــــــاز آی کــــــه در آرزوی روی تــــــوانــــــد |
| *** | |
| گـردون شـرف و جـاه در انـگـشـت تـو دیـد | کآن خــاتــم نــاگــاه در انــگــشــت تــو دیــد |
| صـد مـشـتـری و مـاه در انـگـشـت تـو دید | کـانـگـشــتــری شــاه در انـگـشــت تــو دیـد |
| *** | |
| شـاهـا مـلـکـا جـهـان بــه فـرمـان تــو بــاد | مـلـک تـو شـکـفـتـه بــاغ و بــسـتـان تـو بــاد |
| شـمـشـیر تـو در دسـت تـو بـرهان تـو بـاد | رحـمـت هـمـه بــر دل و تــن و جـان تــو بــاد |
| *** | |
| آنـی کــه جــهـانـی ز تــو ســامـان گــیـرد | اقـــبـــال تـــو را ســـپـــهــر در جـــان گــیــرد |
| بــس زود مـلـک جــهـان خــراســان گـیـرد | وایــران مـــلـــک تـــو مــلـــک ایــران گـــیــرد |
| *** | |
| بـــورشـــد رشـــیــد کــز فــلــک مــاه آورد | جــــــان اعـــــدا ز گـــــنـــــاه در چــــــاه آورد |
| آورد بــــــرای هـــــر کـــــســــــی راه آورد | از بـــهــر مــلــک مــلــک مــلــکـــشـــاه آورد |
| *** | |
| آن کــــوه گــــذار آهـــوی دشــــت نــــورد | انـدر تــگ گـرم شـد بــه تــگ بــهـر تـو سـرد |
| تـیـری کـه هـمـیشـه جـگـر شـیران خـورد | آلـــوده بــــه آهـــویـــی چـــرا بــــایـــد کـــرد |
| *** | |
| چــون مــوج ســیـاه روی هــامــون گــیـرد | از خـــنــجـــر تـــو روی زمــیــن خــون گــیــرد |
| بـس شـیـر نـگـر کـه شـیـر پـرخـون گـیـرد | شـــیــر عـــلــم تـــو شـــیــر گــردون گــیــرد |
| *** | |
| خـــاک از رخـــم ار بـــرو نــهــم زرد شــود | آتـــش ز دمـــم گـــر بـــدمـــم ســـرد شـــود |
| روز مـــن اگـــر ز مـــرگ پـــر گـــرد شـــود | والــلـه کــه جــهـان فــضــل بــی مـرد شــود |
| *** | |
| تـــا دعــوت دولــت تـــو در گــوشــم شــد | هــر زهـر کــه داد بــخــت بــدنــوشــم شــد |
| آن روز کــه گــفــتــه تــو در گـوشــم شــد | از نــغــمــت پـــاک خــود فــرامــوشــم شــد |
| *** | |
| اول گــــردون ز رنــــج در تـــــابـــــم کــــرد | در اشـــک دو دیـــده زیــر غـــرقـــابـــم کـــرد |
| پـس بـخـشـش نوسـاخـتـه اسـبـابـم کرد | وانـــدر زنـــدان بـــه نـــاز در خـــوابــــم کـــرد |
| *** | |
| بــر هـم زده بـود عـشـقـت اسـبــاب خـرد | در دفــــتــــر بــــاز یـــافـــتــــم بــــاب خــــرد |
| بــنـشـسـتـم مـعـتـکـف بــه مـحـراب خـرد | بــــر آتــــش عــــاشــــقــــی زدم آب خــــرد |
| *** | |
| مـن شــاهـم و شـاعـران ســواران مـنـنـد | پــس چـون کـه هـمـه ز دوسـتــداران مـنـنـد |
| هـر چــنـد بــه بــاب شــعــر یـاران مــنـنـد | والــلــه والــلــه کـــه نــیــم کـــاران مــنــنــد |
| *** | |
| گـــر زر گـــردی جـــفـــا عـــیــار تـــو بـــود | ور گـــل گـــردی بــــرگ تـــو خـــار تـــو بـــود |
| ای دشــمــن آنــکــه دوســتــدار تــو بــود | بـــی یــار بـــود هـــر آنـــکـــه یــار تـــو بـــود |
| *** | |
| چـون در چـشـمـم ز حـسـن تـو زیـبــی زد | آن تـــافــتـــه زلــف بـــر دلــم شـــیــبـــی زد |
| انــدیـشــه چــو بــاروی تــو آســیــبــی زد | از دور زنــــخــــدان تــــوام ســــیــــبـــــی زد |
| *** | |
| رویـی کــه چــو او چــرخ فــلــک نـنــگــارد | قـــدی کـــه چـــو او زمـــانــه بـــیــرون نـــارد |
| بـــا ایــن هــمــه داد ســخــت انــدک دارد | خــوی گــردد اگــر چــشــم بــریــن بــگــذارد |
| *** | |
| چــون روی هـوا دوش بــه قــیـر انــدودنــد | تـــا روز هـــمـــه تـــپـــان و لـــرزان بـــودنـــد |
| بـــر تــارک مــن ســتــارگــان نــغــنــودنــد | گـویـی کـه هـمـه بــر تــن مـن بــخـشـودنـد |
| *** | |
| گـر خــون نـشــود قــوت جــانـم کــه دهـد | ده ســـال بـــه اطـــلــاق زبـــانــم کــه دهــد |
| در زنـــدان نــهــان رایــگـــانــم کـــه دهــد | آبـــم مـــتـــعـــذرســـت نـــانـــم کـــه دهــد |
| *** | |
| انـدر ریـشـم هـمـه خــســک پــاک بــریـد | گـوریـش خــسـک گـفـت مـرا هـر کـه بــدیـد |
| این محنت بـین که بـر من از حبـس رسید | کـز ریـش هـمـه شـبـم خـسـک بــایـد چـیـد |
| *** | |
| تــرسـم مـا را سـتــارگـان چــشـم کـنـنـد | تـــــا زود رســـــد ز دور در وصــــل گــــزنــــد |
| خـواهـی تـو کـه روز نـایـد ای سـرو بـلـنـد | زلــــف ســــیـــه دراز در شــــب پــــیـــونــــد |
| *** | |
| چــرخ فــلــک از قــضــا یـکــی پــیـکــان زد | زانـــو بـــه زمـــیـــن زد و مـــرا بـــر جـــان زد |
| گــفــتــم چــه زنـی بــیـوفــتــادم کــان زد | والــلــه کــه چــنــیـن زخــم دگــر نــتــوان زد |
| *** | |
| در هــنــد کـــمـــال جـــود مــوجـــود آمــد | صــد کــوکــبـــه شـــجـــاعــت و جـــود آمــد |
| بــر چــرخ ســتــاره ای کـه مـســعـود آمـد | در طـــالـــع شــــیـــرزاد مـــســــعـــود آمـــد |
| *** | |
| چـون بـنـشـیـنـنـد و مـطـربـان بـنـشـانـنـد | انــصـــاف طـــرب ز آدمـــی بـــســـتـــانــنـــد |
| ســوزنــد ســپــنــد و نــام ایـزد خــوانـنــد | بـــر مـــرکـــب شـــیــرزاد در افـــشـــانـــنـــد |
| *** | |
| آن را کــه ز بــخــت دســتــیــاری بــاشــد | بـــایــد کــه ز طـــبـــع در بـــهــاری بـــاشـــد |
| بــاشـد زیـنـسـان کـه گـفـتـم آری بــاشـد | آنــجـــا بـــاشـــد کــه اخـــتـــیــاری بـــاشــد |
| *** | |
| در عــشــق تــو جــانـم انــده نــاب خــورد | وز دیـــده مـــن فـــراق تــــو خــــواب خـــورد |
| چــون ز آتــش هـجــر تــو دلـم تــاب خـورد | غــمــهـات چــنـان خــورد کــه یـک آب خــورد |
| *** | |
| آنــان کـــه ســـر نــشـــاط عـــالــم دارنــد | پـــیــوســتـــه بـــنــای طــبـــع خـــرم دارنــد |
| ای نــای ز تــو هـمــه جــهـان غــم دارنــد | تـــو آن نـــایـــی کـــز پــــی مـــاتـــم دارنـــد |
| *** | |
| خـون در تـن من کـه اصـل نیروسـت نماند | وان اصـل کـه طـبـع و دیده را خـوسـت نماند |
| بـر مـن بـجـز از نـام تـو ای دوسـت نمـانـد | چون چـنگ تـوام بـه جـز رنگ و پـوست نماند |
| *** | |
| تــا خــط چــو دود تــو دل از مــن بـــربـــود | گــر روی چــو آتــشــت بــه مــن روی نـمــود |
| از ریــخــتـــن آب دو چـــشــمــم نــاســود | آری نــه عـــجـــب کــه آب چـــشـــم آرد دود |
| *** | |
| آن بـــت کـــه دل مـــرا فـــرا چـــنــگ آورد | شـد مـسـت و بـه سـوی رفـتـن آهـنـگ آورد |
| گـفـتــم مـسـتــی مـرو سـیـه جـنـگ آورد | چـــون گـــل بـــدریـــد جـــامـــه و رنـــگ آورد |
| *** | |
| بــا مـن فـلـک از خـشـم هـمـی دنـدان زد | هـر زخــم کـه زد چــو پــتــک بــر سـنـدان زد |
| تــیـری ز قــضــا راســت مــرا بــر جــان زد | دشــوار آمــد مــرا کــه ســخـــت آســـان زد |
| *** | |
| ای شــاه فــلــک مــتــابــع کــام تــو بـــاد | اقـــبـــال جـــهـــان دولـــت پـــدرام تـــو بـــاد |
| آرایــش مــمــلــکـــت بـــه ایــام تـــو بـــاد | مــســعــودی و ایـام تــو چــون نــام تــو بــاد |
| *** | |
| در بــاغ هـنــر تــخــم وفــا کــاشــت خــرد | تــن را بــه هـوای خـویـش بــگـذاشـت خــرد |
| رنــج از دل رنــج دیــده بـــرداشــت خـــرد | نــــاآمــــده را آمــــده پــــنـــداشــــت خــــرد |
| *** | |
| صـالـح تـن مـن ز عـشـق دامـن بـفـشـاند | تــا مـرگ قـضـای خـویـشـتــن بــر تــو بــرانـد |
| دل تــخــتــه درد و نــاامــیـدی بــرخــوانــد | شــادی و غـمـم تــو بــودی و هـر دو نـمـانـد |
| *** | |
| در مـحـنت شـو خـوش و مکـن نعـمـت یاد | شـــوتـــن در ده کــه داد کـــس چـــرخ نــداد |
| بــر بــار بــلـایـی کــه قــضــا بــر تــو نـهـاد | تـن دار چـو کـوه بــاش و بــی بــاک چـو بــاد |
| *** | |
| دیـدار تــو از نـعـمـت دو جــهـان خـوشـتــر | وز عـــمــر وصـــال تـــو فــراوان خـــوشـــتـــر |
| من عشق تو ای عشق تو از جان خوشتر | پــنـهـان دارم کـه عـشـق پــنـهـان خـوشـتــر |
| *** | |
| یـک بـوسـه زدم بـر لـب و بـر چـشـم دگـر | گــفــت ایـن چــه فــراق آوری حــیــلــت گــر |
| گـفـتـم بــه هـمـه حـال بــیـایـد خـوشـتــر | چـون شـد بـه هـم آمـیـخـتـه بــادام و شـکـر |
| *** | |
| ز اول بــه مــیـان مــا بــه هـنــگــام کــنــار | گـــر تـــار قـــصـــب بــــودی بـــودی دشـــوار |
| اکــنـون بــه مـیـان مـا دو ای یـک دلــه یـار | فـرسـنـگ دویـسـت گـشـت فـرسـنـگ هـزار |
| *** | |
| هـر ابــر کـه بــنـگـرم غـبــاری شــده گـیـر | گـر گـل گـیـرم بــه دسـت خـاری شـده گـیـر |
| هـر روز مـرا خــانـه حــصــاری شــده گـیـر | عــمـری شــده دان و روزگــاری شــده گــیـر |
| *** | |
| خـورشـیـد رخ تـو تــافـت بــر سـایـه عـمـر | آمــد بــه کــفــم گــمـشــده پــیـرایـه عــمــر |
| ای اول وصـــلــت آخـــریــن مــایــه عــمــر | در جــســتــن ســود وصـل شـد مـایـه عـمـر |
| *** | |
| تـعـریـف مـرا عـشـق تـو ای سـاده شـکـر | بـــس راز دلــم کــرد بــه هــر جــای ســمــر |
| عـشـقـت چـو همی نگه کند جـان و جـگر | غــمــاز چـــو مــشـــک آمــد و طــرار چـــو زر |
| *** | |
| سـلـطـان ملک اسـت در دل سـلـطـان نور | هـر روز کــنــد بــه روی او ســلــطــان ســور |
| هــرگــز نــدود بـــرود بـــر ســـلــطــان زور | چـــشــم بـــد خـــلــق آرد از ســلــطــان دور |
| *** | |
| چــــاه ز نــــخ تــــو ای دلــــارام پــــســــر | بــر آب مــلــاحــتــســت و جــویــی تــا ســر |
| سـیـبـت ز نـخ و چـهـی بـدان سـیب انـدر | در سـیـب شـگـفـت نـیـسـت چـاه ای دلـبــر |
| *** | |
| یک چـشـم تـو گـر تـبـاه گـشـت ای دلـبـر | دلــتــنــگ مــشــو انــده بـــیــهــوده مــخــور |
| بــسـیـار دو نـرگـس اســت ای جــان پــدر | بــشـکـفـتــه یـکـی از دو و نـشـکـفـتــه دگـر |
| *** | |
| ای روی تـــو آفـــتـــاب و مــن نــیــلــوفـــر | چـــون نـــیـــلـــوفـــر در آبــــم از دیـــده تــــر |
| تــا تــو نــتــابــی چــو آفــتــاب ای دلــبـــر | نـــگـــشـــایــم دیــدگـــان و بـــرنـــارم ســـر |
| *** | |
| آمـــد بــــه وداعــــم آن نـــگــــار دلــــبــــر | گــریــان و زنــان دو دســـت بـــر یــکــدیــگــر |
| پـر خون رخـش از زخم و رخ از گریه چـو زر | بــــر لـــالـــه کــــامـــگـــار و بــــر لؤلؤی تــــر |
| *** | |
| ز انــدیــشــه هــجـــران و ز نــادیــدن یــار | دل خـون شـد و دیـده خـون هـمـی گـرید زار |
| گـــویـــم ز غـــم فـــراق روزی صــــد بــــار | کـایـن عـشـق چــه آفـت اسـت یـارب زنـهـار |
| *** | |
| در عـشـق تـو هـمـچـو ابـر مـی گـریـم زار | وز درد چـــــو بــــــرگ زرد دارم رخـــــســـــار |
| از زردی روی و گــریــه ای طـــرفــه نــگــار | در روی خـــــزان دارم و در دیــــده بـــــهـــــار |
| *** | |
| ای پــیـل ســوار خــســرو شــیـر شــکــار | شــیـر فــلــک از نــهــیــب تــیـغــت تــیـمــار |
| ز آن بـــازوی کــار و پـــنــجــه تـــیــغ گــزار | یـک زخــم تــو مــرد و شــیـر را کــرد چــهــار |
| *** | |
| پــیـوســت فــلــک بــا مــن پــیــکــار دگــر | از یـــک غــــارم کـــشــــیـــد در غــــار دگـــر |
| ای بـــر طـــاعـــت ز خـــلــق در کــار دگــر | بـــنــمــای مــرا جــهــان بــه یــک بـــار دگــر |
| *** | |
| این ابـر چـراسـت روز وشـب چـشم تـو تـر | وی فــاخــتــه زار چــنـد نــالــی بــه ســحــر |
| ای لـــالـــه چـــرا جـــامــه دریــدی در بـــر | از یــار جـــدایــیــد چـــو مــســـعـــود مــگـــر |
| *** | |
| اکـنون کـه شـدی بـه بـتـکـده عـاشـق زار | پـــیــش آر صـــلـــیــب و زود بـــربـــنــد زنـــار |
| اکـنـون کـه هـمـی قــلـنـدری جــویـی یـار | مـــردانــه بـــزی و از کـــســـی بـــاک مـــدار |
| *** | |
| مشـکـین کـله تـو گـر شـبـسـت ای دلدار | خــورشــیـد در او چــرا گـرفــتــه ســت قــرار |
| خــیـره ســت در آن کــلــه خــرد را دیــدار | دیــدار بـــلــی خـــیــره بـــود در شـــب تـــار |
| *** | |
| نـا رفــتــه هـنـوز بــوی شــیـرت ز شــکــر | خــط را کــه بـــه ســوی عــارضــت داد گــذر |
| هـمـچــون روش مـورچــه بــر طــرف قـمـر | بـــــر روی نــــگــــار مــــن خـــــط آورد اثـــــر |
| *** | |
| تــا دیـده ام آن روی چــو خــورشــیـد انـور | در آبـــم از ایــن دو دیــده چـــون نــیــلــوفـــر |
| بـــرداشــتـــه از آب چـــو نــیــلــوفــر ســر | بـــر دیـــدن تـــو گـــشـــاده ایــن دیـــده تـــر |
| *** | |
| انـدیـشــه مـکـن بــه کــارهـا در بــســیـار | کــانــدیــشــه بــســیــار بـــپــیــچــانــد کــار |
| کــاری کــه بــه رویــت آیـد آســان بــگــزار | ور نـــتـــوانــی بـــه کـــاردانـــان بـــســـپـــار |
| *** | |
| ای مـهـر تــو چـون چـهـار طـبــع انـدر خـور | وز پـــنـــج نــمـــاز شـــکـــر تـــو واجـــب تـــر |
| ای دشــمـن تــو بــمـانـده انـدر شــشــدر | زیــر قـــدمـــت بـــاد ســـر هــفـــت اخـــتـــر |
| *** | |
| انــــدک اثـــــر آبـــــلــــه بـــــر دو رخ یــــار | گـویی کـه بـه سـوزنـیـسـت گـل کـرده نـگـار |
| یــا هــمــچــو نــم ســحــر در ایـام بــهــار | خــردک خــردک چــکــیـده بــر گــل هــمــوار |
| *** | |
| در زنـــدان تـــا کـــرد مـــرا گـــردون پـــیــر | آن مـوی چـو شـیـر گـشـت و آن رخ چـو زریـر |
| از پــــــای درآورد مـــــرا چـــــرخ اثـــــیـــــر | ای دولــت طــاهــر عــلــی دســـتـــم گــیــر |
| *** | |
| ســلــطــان مـلـک ای عــزیـز فــرزنـد پــدر | ای شـــاه پـــدر شـــیــر کـــمـــربـــنــد پـــدر |
| شـایـســتــه و هـشـیـار و هـنـرمـنـد پــدر | ای نــازش و فــخــر نــســل و پــیــونــد پــدر |
| *** | |
| چـون پــیـرهـنـت گـرفـتـه ام تـنـگ بــه بــر | بــر نــارم هــمــچــو دامــن از پــای تــو ســر |
| در گـردن تــو خــورده دو دســتــم چــنـبــر | انــگــشـــت چـــو خـــط روی در یــکـــدیــگــر |
| *** | |
| از ســنــگــم یـا ز چــیـســتــم جــان پــدر | خــود دانـد کــس کـه کـیـســتــم جــان پــدر |
| تــو مــردی و مـن بــزیـســتــم جــان پــدر | بــر مـرگ تــو خــون گــریـســتــم جــان پــدر |
| *** | |
| بــر مـرگ تــو چـون نـمـویـم ای جـان پــدر | رخـسـاره بــه خـون بــشـویـم ای جــان پــدر |
| سـامـان خـود از کـه جـویـم ای جــان پــدر | تــیــمــار تــو بـــا کــه گــویــم ای جــان پــدر |
| *** | |
| مـی گـویمـت ای سـعـادت ای نیک پـسـر | در بـــاب هــنـــر کـــوش تـــو ای جـــان پـــدر |
| ویـن مــایـه بــیـنـدیـش کــه از بــهـر هـنـر | بــر تــیـغ گــهـی بــیـنــی و بــر نـیـزه کــمــر |
| *** | |
| در غـور فـلک تـعـبـیه ای سـاخـت چـو ابـر | بـر هر شخ و که بـه حمله بـر تـاخت چـو ابـر |
| در چـنگ چـو آتـشی سـرافراخـت چـو ابـر | هـر کـوه کـه بــود پــاک بــگـداخــت چــو ابــر |
| *** | |
| گـویـی کــه هـوا بــه زیـر گـردســت امـروز | بـــا ســرمــا خـــلــق را نــبـــردســت امــروز |
| دسـت مـن و پـای من بـه دردسـت امـروز | بــفـروز آتــش کـه سـخـت سـردسـت امـروز |
| *** | |
| عشقت کشتـم که غم درودم شـب و روز | جــان کــاســتــم و رنــج فــزودم شــب و روز |
| دل را بـــه هــوا بـــیــازمــودم شـــب و روز | بـی دل بــودم کـه بـی تـو بــودم شـب و روز |
| *** | |
| ای فــقــر بــخــاســت روز بــازار تــو خــیـز | در کــــوکــــبــــه ســــپــــاه ســــالـــار آویـــز |
| ای نـصـرت دیـن بــخـیـر بــگـشـای نـخـیـز | ای کــفــر زریــر بـــوحـــلــیــم اســت گــریــز |
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| ای شـــاه عـــلـــاء دولـــت مــلــک افـــروز | امـــروز نـــه پــــیـــداســـت خـــزان از نـــوروز |
| بـــاز آمــد تـــاریــک شـــب از روشـــن روز | بــر دشــمــن مــلــک بــاد بــخــتــت فــیــروز |
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| چـــرخ از دم کــون بـــرنــمــی گــردد بـــاز | گـــاهــیــم بـــه نـــاز دارد و گـــه بـــه نـــیــاز |
| کـس نـیسـت کـه از مـنـش فـرو گـویـد راز | کـــز مـــا بـــدگـــر کـــنــده بـــروتـــی پـــرداز |
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| خـورشـیـد رخـا وصـل تـو جـویم هـمـه روز | چـون سـایـه از آن در تـک و پــویـم هـمـه روز |
| از بــس کـه دعـای وصـل گـویـم هـمـه روز | بــر خــاک بــود چــو ســایـه رویـم هـمــه روز |
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| ای سـود و زیـان عـمـر فـرسـوده بــتــرس | در کــار بـــدرمــان تـــو بـــیــهــوده بـــتـــرس |
| تــا بــوده شــدی ز جــان آلــوده بـــتــرس | از بـــوده بــیــنــدیــش وز نــابـــوده بـــتــرس |
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| ای یـار چــو صـبــر هـیـچ یـاری مـشـنـاس | بـــا فــایــده تـــر ز رفــق کــاری مــشــنــاس |
| دلـجـوی تـر از شـکـر شـکـاری مـشـنـاس | بــهـتــر ز ســخــن تــو یـادگــاری مـشــنـاس |
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| از بـخـشش دسـت من ز سیم و زر پـرس | وز خـوی خـوشـم ز مـشـک و از عـنبـر پـرس |
| وز قــوت بـــازوی مــن از خــنــجــر پـــرس | وز هــیــبـــت مـــن ز راه چـــالـــنـــدر پـــرس |
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| مسـعـود کـه بـود سـعـد سـلـمـان پـدرش | انـدر ســمـجــی اســت چــون سـنـگ درش |
| در حــبــس بــیـفـزود بــر آتــش خــطــرش | عـودی اسـت کـه پـیدا شـد از آتـش هنـرش |
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| مسـعـود کـه بـود سـعـد سـلـمـان پـدرش | جـاییسـت که از چـرخ گذشتـه اسـت سرش |
| آن بـاد چـه گـویـی کـه سـعـادت پـسـرش | دارد خـــبـــرش کـــه گــویــد او را خـــبـــرش |
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| تــا از مــن مـی جــهـی چــو دود از آتــش | چــون دود بــر آتــشــم مـن ای دلــبــر کــش |
| بـــا آن رخ دلـــفـــروز و زلـــف ســـرکـــش | خوش نیستی ای چو جهان ناخوش و خوش |
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| معشوقه دلم بـه آتـش انبـاشت چو شمع | بـر رویم زرد گـل بـسـی کـاشـت چـو شـمـع |
| او خـفـت و مراز دور بـگـذاشـت چـو شـمع | تـا روز بـه یک سـوخـتـنم داشـت چـو شـمـع |
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| آتـش بــه سـرم هـمـی فـرو ریـزد عـشـق | دود از دل مــن هـمـی بــرانـگــیـزد عــشــق |
| بــا دلـجــویـان هـمـی نـیـامـیـزد عــشــق | گـویی کـه ز جـان مـن هـمـی خـیزد عـشـق |
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| ای چـــرخ مــدور خــســیــس بـــی بـــاک | صـــد پـــیــرهــن وفــای مــن کــردی چـــاک |
| آزاده هـر آنــچــه بــود کــردی تــو هـلــاک | از گردش تـو کنون چـه تـرسست و چـه بـاک |
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| گـردون نـکـشــد کـمـال مـســعــود مـلـک | شــاهـی نـبــود بــســان مــســعــود مـلــک |
| شــد دولــت قــهـرمـان مـســعــود مـلــک | ســوگـنـد خــورم بــه جــان مـســعـود مـلـک |
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| مــن هــمــت بـــاز دارم و کــبـــر پــلــنــگ | ز آن روی مـرا نـشــســت کــوه آمـد و تــنـگ |
| روزی روزی گــــردهـــدم چــــرخ دو رنـــگ | بـــر پـــر تـــذرو غــلــطــم و ســـیــنــه رنــگ |
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| من چـون دل لاله ام تـو چون رنگ بـه رنگ | از مــن تــو چــرا بـــاز هــمــی داری چــنــگ |
| مــانـنــده بــرگ لــالــه زود ای ســرهـنـگ | هـمــچــون دل لــالــه در بــرم گــیـری تــنـگ |
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| ای بــدر شــده مـن از غــمـان تــو هـلــال | ای صـورت حـسـن مـن ز عـشـق تــو خـیـال |
| گـر هـیـچ مـدار دسـت دهـد بــا تـو وصـال | بــر فــرق فــلـک نـشــیـنـم از عــز و جــلــال |
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| ای کـلک ملک وصـف تـو گـویم همه سـال | وز طــبــع گــل مـدح تــو بــویـم هـمـه ســال |
| سرخ اسـت بـه دولت تـو رویم همه سـال | روزی ز خــدای وز تــو جــویـم هــمــه ســال |
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| عـیبـم کـه ز من زمانی ای مشـکین خـال | عـارم کـه نـخـواهـی کـه کـنـم بــا تــو وصـال |
| عـودم کـه کـنـی مـرا بــه آتـش بــی هـال | عـیدم که بـه من قـصـد کنی سـال بـه سـال |
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| دل مــی نــدهــد کـــه از تـــو بـــردارم دل | یـا تــا بــه کــســی کــم از تــو بــگــذارم دل |
| دانـی چــه کــنـم گــم شــده انـگــارم دل | بـــگــریــزم و در پــیــش تــو بـــســپـــارم دل |
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| آن دل که نخـواسـتـت چـه نامست آن دل | نــه از در پــرســش و ســلــامــســت آن دل |
| دیــوانــه و ابـــلـــه تـــمــامــســـت آن دل | بــــیـــزارم از آن دل و کـــدامـــســــت آن دل |
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| سـرما چـون شـد ز دسـت صحـرا شد گل | در چـــادر ســـبـــز کـــار پـــیـــدا شـــد گـــل |
| بــســیـار هـمـی خــنـدد رعــنـا شــد گـل | نـه نـه کـه چــو روی دوسـت زیـبــا شـد گـل |
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| رویـت بــر مـن چـنـان کـه گـل بــر بــلـبــل | مـن بــر رویـت چــنـان کــه بــلــبــل بــر گــل |
| عـشـقت بـر من چـنان که غل بـر صـلصـل | من بـر عـشـقـت چـنان کـه صـلـصـل بـر غـل |
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| نامد بـه کـف آن زلـف سـمن مـال بـه مـال | مـی رقـص کـنـد بــر آن رخ از خــال بــه خـال |
| ای چـون گل نو که بـینمت سـال بـه سال | گـــردیــده چـــو روزگـــار از حـــال بـــه حـــال |
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| بـنگـر کـه ز شـاخ مـی چـه گـوید صـلـصـل | بــفــســردمـی و گـشــت بــه بــاغ انـدر گـل |
| بــنـگـر کــه چــه پــاســخ آرد او را بــلـبــل | بــگـداخـت گـل و گـشـت بــه جـام انـدر مـل |
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| چـون روی بـتـان گـشـت بـه بـاغ انـدر گـل | چــون آب حــیـات شــد بــه جــام انــدر مــل |
| در هـر چـمـنـی خـاسـت ز بـلـبـل غـلـغـل | بـــر گـــل مــی نــوش بـــر نــوای بـــلـــبـــل |
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| خـامـش نـشـود هـمـی ز غـلـغـل بــلـبــل | بــشـنـو کـه خــوش آیـدت ز بــلـبــل غـلـغـل |
| ای دو لـب تــو گـل و دو رخــسـار تــو گـل | مـل ده بــر گـل کـه خـوش بــود بــر گـل مـل |
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| مــن ادهــمــم از خــون دل ابـــرش گــردم | پــس طــرفــه نـمــانـم کــه مـنـقــش گــردم |
| در آتـــش از آب دیــدگـــان خـــوش گــردم | مــن انــگــشــتـــم بـــدم کــه آتـــش گــردم |
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| در دولــت شـــاه چـــون قــوی شــد رایــم | گـــفـــتــــم کـــه رکـــاب را ز زر فـــرمـــایـــم |
| زر گـفـت مـرا کـه مـن تــو را کـی شــایـم | آمــــد آهــــن گــــرفــــت هــــر دو پـــــایــــم |
| *** | |
| غــمــهــای تـــو از رانــدن خــونــهــا کــارم | خــود نــیـســت چــرا رانــدن خــونــهـا کــارم |
| در دیــده مــن از مــرگ تــو خــونــهــا دارم | بــر مــرگ تــو بــا بــه مــرگ خــونــهــا بــارم |
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| هـر چــنـد کـه ایـن بــنـد ز پــای افــکـنـدم | دانــم کــه بــود بــنــد چــنــیـن یـک چــنــدم |
| دربــنـد هـر آنـچــه مـی دهـد خــرسـنـدم | کــایـن نـعــمــت هـا نــبــود پــیـش از بــنـدم |
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| مـن در عــدم از جــود تــو مـوجــود شــدم | در دولــت تـــو بـــر ســـر مــقــصــود شـــدم |
| مـســعـود نـبــودم از تــو مـســعـود شـدم | در حـبـس چـنان شـدم کـه مـحـسـود شـدم |
| *** | |
| ای طــبــع بـــده ور نــدهــی بــســتــانــم | آن مـــایــه کـــه گـــرد کـــرده ای مــن دانــم |
| ای آتــش انــدیــشــه چــو مــن درمــانــم | انـــدر تـــو زنـــم گـــر نـــبــــری فـــرمـــانـــم |
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| ای غــمـزه تــو کــشــفــتــه بــنـیـاد دلــم | کــم زادی و مــهــر تـــســـت هــمــزاد دلــم |
| از تــو بـــه فــلــک رســیــده فــریــاد دلــم | بـــیــچـــاره دلـــم گـــر نــکـــنــی یــاد دلـــم |
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| ای طـبـع چـو آتـش از تـو بـس خـوشـنودم | کـــانــدر فـــکـــرت هــمــی نــمـــایــی دودم |
| چــون نـیـســت زمــانـه تــمـامـت ســودم | ارجـــو کـــه بــــه کـــام دل رســـانـــی زودم |
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| گــر مــن بـــرم از مــردم بـــد ســازم بــرم | فـــرجـــام بــــبـــیـــنـــم و بــــه آغـــاز بــــرم |
| هـر کــس کــه بــه مـن دژم دژم پــیـونـدد | بـــنــگــر کــه چــه پـــاره پـــاره زو بـــاز بـــرم |
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| جـان و دل و دین بـه وصـلت ای مهر صـنم | عـهدی بـسـتـه سـت و اینت عـهدی محـکم |
| هجـرت چـو بـه صـافـی کـشـد اندر عـالـم | دانی چه زنند این دو سه هم مشت بـه هم |
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| ای زریــن نــام لـــعـــبـــت ســـیــم انــدام | زر تـو و سـیم تـو نـه پـخـتـه سـت و نـه خـام |
| در کــس مـنـگـر بــه بــی نـیـازی بــخــرام | زیــرا کــه تــوانــگــری بـــه انــدام و بــه نــام |
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| تــن کـوبــم و سـرپــیـچــم و بــر روی زنـم | آمــــــاده درد و رنـــــج و انـــــدوه مــــــنـــــم |
| نــه ریــزم و نــه گــدازم و نــه شـــکـــنــم | فـــولـــاد رخ و ســـنـــگ ســـر و روی تـــنــم |
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| جـــان هــر ســـاعــت ز کــار زاری دهــدم | هـــر روز زمـــانـــه بــــیـــش کـــاری دهـــدم |
| از بــخــت گـلـی خـواهـم و خــاری دهـدم | بـــــاشـــــد روزی کـــــه روزگــــاری دهــــدم |
| *** | |
| مـن دوش کـه از هـجـر تــو در تــاب شـدم | جـان تــو کـه گـر چـو شـمـع در خـواب شـدم |
| از دیـــــده و دل در آتــــــش و آب شـــــدم | بــر جــام چــو بــر آیــنــه ســیــمــاب شــدم |
| *** | |
| تــا کــی غــم یــار و درد فــرزنــد کــشــم | بــیـمــار فــراق خــویــش و پــیـونــد کــشــم |
| تـا چـشـم گـشـاده ام همـی بـنـد کـشـم | ای چــرخ فــلـک مـحــنـت تــو چــنـد کـشــم |
| *** | |
| هـر روز هـمــی فــلــک بــه تــیـری زنــدم | پــــیـــراهـــن در ســــیـــاه قــــیـــری زنـــدم |
| وین بـخـت هـمـی هـمـچـو اسـیری زنـدم | از وی ســـپـــری خـــواهـــم تـــیــری زنـــدم |
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| گـفـتــم کـه تــو بــی وفــایـی ای نـامـردم | مــن مـــردم و تـــو کـــجـــایــی ای نــامــردم |
| خـس دوسـت چـو کـهـربـایـی ای نـامـردم | زان بـــا چــو مــنــی نــپـــایــی ای نــامــردم |
| *** | |
| ای فـاخـتــه دل چـو مـن بــه رویـت نـگـرم | زیـــبـــایــی طـــاوس بـــه بـــازی شـــمـــرم |
| بـــا خــنــده کــبـــک چـــون درایــی ز درم | دل هــمـــچـــو کـــبـــوتـــری بـــپـــرد ز بـــرم |
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| بـر بـسـتـه شـد از بـسـتـن ماتـم دسـتـم | امــروز نــگــویـنــد کــه مــن خــود هـســتــم |
| از بــیـم و امــیــد شــادی و غــم رســتــم | بــرداشــتــم از جــهـان دل و بــنـشــســتــم |
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| ســـروی خـــواهـــم ز چـــرخ داری زنـــدم | گـــر گـــویــم کـــایــن مــراســـت آری زنــدم |
| خــواهـم کـه گـلـی چــیـنـم خــاری زنـدم | از آهـــــن مــــــار کــــــرده بــــــاری زنـــــدم |
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| همـچـون قـلـمـم ز بـیخ کـنـدی بـه سـتـم | کـــــردیــــم نـــــوان و لـــــاغـــــر و زرد و دژم |
| وانــگــاه فــرو بــردیـم ای شــهـره صــنــم | در آب ســـیـــاه و گـــل تـــیــره چـــو قـــلـــم |
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| چـون پـیش دل از هجـر تـو هنـگـامـه نـهم | پــرویـن ســرشــک دیـده بــر خــامــه نــهــم |
| بــرنـامـه تــو چــو دسـت بــر خـامـه نـهـم | خــواهـم کــه دل انـدر شــکــن نــامــه نـهـم |
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| ای سـرو سـپــاه خـسـرو ای مـاه حـشـم | یـک جــرعـه اگـر از مـی وصــلـت بــچــشــم |
| از خـط تـو چـون قـلـم همـی سـرنـکـشـم | بــر آتــش تــیـمـار تــو چــون عــود خــوشــم |
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| ای کـرده مـرا بــه عــشــق گـمـراه تــمـام | بـــر نــایــدم از ضـــعـــف هــمــی آه تـــمــام |
| ای ســرو گــل انـدام مـن ای مــاه تــمــام | پــیـرم کــردی نــگــشــتــه یـک مــاه تــمــام |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
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