بـــســوی حـــضــرت رســول الــلــهمـی روم بــا دل شــفــاعــت خــواهنــخــورم غــم از آتــش، ار بـــرســدآب چـــشــمــم بـــخــاک آن درگــاههــیــچ خ…
| بـــســوی حـــضــرت رســول الــلــه | مـی روم بــا دل شــفــاعــت خــواه |
| نــخــورم غــم از آتــش، ار بـــرســد | آب چـــشــمــم بـــخــاک آن درگــاه |
| هــیــچ خــیـری نــدیـدم انــدر خــود | شــکــر کـز شــر خــود شــدم آگـاه |
| گشـت در معـصـیت سـیاه و سـپـید | دل و مـویم کـه بـد سـپـید و سـیـاه |
| ره بــســی رفــتــه ام فـزون از حــد | خــر بــســی رانــده ام بــرون از راه |
| هـیـچ ذکـری نـگـفـتـه بــی غـفـلـت | هـیـچ طــاعــت نـکــرده بــی اکــراه |
| مـاه خــود کـرده ام سـیـه بــفـسـاد | روز خــود کــرده ام تــبـــه بـــگــنــاه |
| خـود چـنـین مـاه چـون بـود از سـال | خــود چــنـیـن روز کــی بــود از مـاه |
| شب سیاهست و چشم من تاریک | ره درازســــت و روز مـــن کـــوتــــاه |
| بــیــژن عــقــل بــا مــن انــدر بــنــد | یــوســـف روح بـــا مــن انــدر چـــاه |
| هــم بـــدعــوی گــرانــتـــرم از کــوه | هـم بــمـعــنـی ســبــکـتــرم از کـاه |
| گـاه بــر نـطـع شـهـوتـم چـون پــیـل | گـاه بــر نـیـل نـخــوتــم چــون شـاه |
| گرگ طـبـعم بـحـمله همچـون شـیر | سـگ سـرشتـم بـحـیله چـون روبـاه |
| دیـن فــروشــم بــخــلـق و در قــرآن | خـــوانـــم: الـــدیــن کـــلـــه لـــلـــه |
| نــفــس مــن طــالــبــســت دنـیـا را | چــه عــجــب الـتــفـات خــر بــگـیـاه |
| ای مـرقـع شـعـار کـرده، چــه سـود | خـرقـه ده تـو، چـو نیسـت دل یکتـاه |
| نـه فـقـیـری نـه صـوفـی ار چـه بـود | کـسـوتـت دلق و مسـکـنت خـانقـاه |
| نشـود پـشـکـلـش چـو نافـه مشـک | ور شــتــر را تــبــت بــود شــبــگــاه |
| کـس بـافـسـر نگـشـت شـاه جـهان | کــس بــخــرقــه نــشــد ولــی آلــه |
| نــرســد خــر بــپــایـگــاه مــســیــح | ورچــه پــالــان کــنـنــدش از دیـبــاه |
| نـشــود جــامــه بــاف اگــر گــویـنـد | بـــمــثـــل عــنــکــبـــوت را جــولــاه |
| لــشــکــر عــمـر را مــدد کــم شــد | صــفـدر مـرگ عـرضــه کـرد ســپــاه |
| ای بــسـا تــاجــدار تــخـت نـشـیـن | کـــه بـــدســـت حـــوادث از نــاگــاه |
| خـــیــمــه آســـمـــان زریــن مــیــخ | بر زمین شان زده است چون خرگاه |
| دســــت ایـــام مـــی زنـــد گــــردن | ســـر بـــی مــغـــز را بـــرای کــلــاه |
| از ســر فــعــلــهــای بـــد بـــرخــیــز | ای بـــنــیــکــی فـــتـــاده در افـــواه |
| گــرچــه مــردم تــرا نــکــو گــویــنــد | بــس بــود کــرده تــو بـــر تــو گــواه |
| نــرهــد کـــس بـــحـــیــلـــه از دوزخ | مــاهـی از بــحــر نـگــذرد بــشــنـاه |
| سـرخ رویـی خــوهـی بــروز شـمـار | رو بــشـب چـون خـروس خـیـزپـگـاه |
| ناله کن گرچـه شـب رسـید بـصـبـح | تــوبــه کـن گـرچـه روز شـد بــیـگـاه |
| مــرض صـــد گــنــه شـــفــا یــابـــد | از ســــردرد اگـــر کــــنـــی یـــک آه |
| چــون زمــن بــازگــیـری آب حــیــات | گـــر بـــخـــاکـــم نــهــنــد یــا ربـــاه |
| مـر زمـیـن را بـگـو کـه چـون یوسـف | او غــریــبـــســت اکــرمــی مــثــواه |
| وآن چـنان کـن کـه عـمر بـنده شـود | خــــتــــم بــــر لـــاالـــه الـــاالـــلـــه |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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