بــاز بــه صـحــرا رسـیـد کـوکـبــه نـوبــهـارســاقــی گــلــرخ بــیـا بــاده گــلـگــون بــیـارزان مـی چـون لـعـل ناب کـز مـدد او مـدامعـیـش بــود بـ…
| بــاز بــه صـحــرا رسـیـد کـوکـبــه نـوبــهـار | ســاقــی گــلــرخ بــیـا بــاده گــلـگــون بــیـار |
| زان مـی چـون لـعـل ناب کـز مـدد او مـدام | عـیـش بــود بــر دوام عـمـر بــود خـوشـگـوار |
| روح فــزائی کـه او طــبــع کـنـد شــادمـان | آب حــیـاتــی کـز و مـســت شـود هـوشـیـار |
| هـمـدم بــرنـا و پــیـر مـونـس شــاه و گـدا | بـر همه کـس مهربـان بـا همه کس سـازگار |
| شـیـفـتــه را دلـپــذیـر دلـشــده را نـاگـزیـر | سـوخـتـه را دسـتـگـیر غـمـزده را غـمگـسـار |
| هاضـمـه را سـودمـند فـاکـره را نقـش بـند | بــاصـره را نـوربــخــش ســامـعـه را گـوشـوار |
| مـوسـم آن مـیـرسـد بــاز کـه در بـاغ و راغ | لــالــه بــرویــد ز خــاک گــل بــدر آیـد ز خــار |
| بـاد صـبـا مـیکـشـد رخـت ریاحـین بـه بـاغ | دســت هـوا مـیـکـنـد مـشـگ تــتــاری نـثــار |
| لـالـه خـوش جــلـوه را عـنـبــرتــر در مـیـان | غـنچـه خـوش خـنده را خـرمـن گـل در کـنـار |
| ماشـطـه نوبـهار بـاز چـه خـوش در گـرفـت | پــای چـمـن در حـنـا دسـت سـمـن در نـگـار |
| نرگـس مـخـمور را رعـشـه بـر اعـضـا فـتـد | بـس کـه بـه وقـت سـحـر آب خـورد در خـمار |
| وه کــه چــه زیــبـــا بــود بــر لــب آب روان | عـکـس گـل و ارغـوان ســایـه بــیـد و چــنـار |
| ظالم نفس خـود است هرکه در این روزگار | انـده پــیـمــان خــورد مــی نـخــورد آشــکــار |
| حـاصل عمری نیافت ممسـک دنیاپـرسـت | لــذت عــیـشــی نــدیـد زاهــد پــرهــیـزکــار |
| یـارب اگـر مـیـدهـی نـاز و نـعـیمـی بـه مـا | عـمـر بـه آخـر رسـیـد تـا کـی از این انـتـظـار |
| در پــی امـیـد بــود چــنـد تــوان داشــتــن | بــــر ســــر راه امــــیــــد دیــــده امــــیـــدوار |
| فـرصـت عـیـشـی بــده تـا بـسـتـانـیـم داد | از رخ رنــگــیــن گــل وز لــب شــیــریــن یــار |
| بـزم صبـوحی خوشست خاصه در ایام گل | عیش جوانی خوشست خاصه در این روزگار |
| کـز اثــر عـدل شــاه بــار دگـر شــد پــدیـد | حــال زمــان را نــظــام کــار جـــهــانــرا قــرار |
| خسرو فیروز بخت شاه اویس آنکه هست | مــظــهــر لــطــف خـــدا ســایــه پـــروردگــار |
| چــاکــر درگــاه او مــاه ســپــهــر آشــیـان | بــنـده فــرمــان او خــســرو نـیـلــی حــصــار |
| همچـو روان ناگزیر همچـو خـرد کامبـخـش | هـمـچـو قـضـا کـامـران همـچـو قـدر کـامـکـار |
| عــالـمـیـان را بــدو تــا بــه قــیـامـت امـیـد | آدمــیــان را بـــدو تـــا بـــه ابـــد افـــتـــخـــار |
| از هـنــرش گــاه رزم وز کــرمــش روز بــزم | رستـم دستـان خـجـل حـاتـم طی شرمسار |
| تــاج دل افــروز او داده ز کـســری نـشــان | تــخــت هــمــایـون او مــانــده زجــم یـادگــار |
| روز نـبــرد آنـزمـان کـز سـم اسـبــان شـود | پـشـت زمـیـن پـر هـلـال روی فـلـک پـرغـبـار |
| حـمـلـه شـیـر افـکـنـان کـوه درآرد ز جــای | وز مـدد جــوی خـون جــوش بــرآرد بــه خــار |
| از فــزع رعــد کــوس کـوه شــود پــرغــرور | وز اثــر بـــرق تــیــغ دشــت شــود پــرشــرار |
| پـشت دلیران شود چون قد چوگان بـه خم | کـلـه گـردان شــود گـوی صـفـت خــاکـســار |
| در صـف جــنـگ آنـزمـان افـکـنـد از گـرد راه | تــیـغ جـهـانـگـیـر شـاه زلـزلـه بــر کـوهـسـار |
| سجده بـرد پـیش او چون بـکشد تـیغ کین | رسـتــم تــوران گـشـای قـارن خــنـجــر گـذار |
| از ســر پــیـکـان او مـهـر شــود مـضــطـرب | وز دم شــمــشــیـر او چــرخ کــنــد زیـنــهــار |
| یـارب تــا مـمـکــنـســت دور زمــانـرا بــقــا | جــرم زمـیـن را ســکــون دور فــلــک را مـدار |
| بـــاد ز اقــبـــال او پـــایــه دانــش بـــلــنــد | بـــاد ز پــشــتــی او بـــازوی دیــن اســتــوار |
| نـعـمـت او بـی زوال مـعـدلـتـش بــر مـزیـد | مـمـلـکـتــش بــر دوام سـلـطـنـتــش پــایـدار |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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