آن شـنـیـدی کـه عـاشـقـی جــانـبــازوعـظ گـفـتــی بــه خــطــه شــیـراز؟ســخــنــش مــنــبــع حــقــایــق بــودخـــاطــرش کــاشــف دقــایــق بـــودروز…
| آن شـنـیـدی کـه عـاشـقـی جــانـبــاز | وعـظ گـفـتــی بــه خــطــه شــیـراز؟ |
| ســخــنــش مــنــبــع حــقــایــق بــود | خـــاطــرش کــاشــف دقــایــق بـــود |
| روزی آغــــاز کــــرد بـــــر مــــنــــبــــر | ســخــنــی دلــفــریـب و جــان پــرور |
| بــود عـاشـق، زد از نـخـسـت سـخـن | سـکـه عـشـق بــر درســت سـخــن |
| مـســتــمـع عــاشــقـان گـرم انـفـاس | همه مستان عشق بی می و کاس |
| گـــرم تــــازان عـــرصـــه تــــجــــریـــد | پــــاکـــبــــازان عـــالـــم تـــوحـــیـــد |
| عـارفـی زان مـیـان بــپــا بــرخــاسـت | گفـت: عـشـاق را مقـام کـجـاسـت؟ |
| پـیـر عـاشـق، کـه در مـعـنـی سـفـت | از ســر ســوز عـشــق بــا او گـفـت: |
| نـــشــــنـــیـــدی کــــه ایـــزد وهـــاب | گفت: «طوبـی لهم و حسن مآب »؟ |
| ایـن بــگـفـت و بــرانـد از ســر شــوق | سـخــن انـدر مـیـان بــه غـایـت ذوق |
| نـــاگـــهـــان روســـتـــایــیــی نـــادان | خـــالـــی از نــور، دیــده دل و جـــان |
| نــاتــراشــیـده هـیـکــلــی نــاراســت | همچـو غـولی از آن میان بـرخـاسـت |
| لب شـده خـشـک و دیده تـر گـشـتـه | پـــا ز کــار اوفــتــاد، ســر گــشــتــه |
| گـفـت: کـای مـقـتــدای اهـل سـخـن | غـم کـارم بــخــور، کـه امـشــب مـن |
| خــرکـی داشــتــم، چــگـونـه خــری؟ | خـــری آراســتـــه بـــه هــر هــنــری |
| خــانــه زاد و جــوان و فــربـــه و نــغــز | اسـتـخـوانش، ز فـربـهی، همه مـغـز |
| مــن و او چـــون بـــرادران شـــفــیــق | روز و شـب همـنـشـین و یار و رفـیق |
| یـــک دم آوردم آن ســـبــــک رفـــتـــار | بــــه تــــفــــرج مــــیــــانــــه بـــــازار |
| نـــاگـــهــانـــش ز مـــن بـــدزدیــدنـــد | از جــمـاعــت بــپــرس: اگـر دیـدنـد؟ |
| مــجــلــس گــرم و غــرقــه در اســرار | چـون در آن مـعـرض آمـد ایـن گـفـتـار |
| حـــاضـــران خـــواســـتـــنــدش آزردن | خـــر ز مــســجـــد بـــپـــا گــه آوردن |
| پــیــر گــفــتــا بــدو کــه: ای خــرجــو | بــنـشــیـن یـک زمـان و هـیـچ مـگــو |
| نـطــق دربــنـد و گــوش بــاش دمــی | بــنـشــیـن و خــمــوش بــاش دمـی |
| پــس نـدا کـرد ســوی مـجــلـسـیـان: | کـانـدریـن طــایـفــه، ز پــیـر و جــوان |
| هــرکــه بـــا عــشــق در نــیــامــیــزد | زیــن مــیــانــه بــه پــای بـــرخــیــزد |
| ابــلـهـی، هـمـچــو خــر، کــریـه لـقــا | چـسـت بــرخـاسـت، از خـری، بــرپـا |
| پــیــر گــفــتــا: تــویــی کــه در یــاری | دل نبـسـتـی بـه عشق؟ گفت: آری |
| بــانــگ بــر زد، بــگــفــت: ای خــر دار | هـان! خــرت یـافــتــم بــیـار افـســار |
| ویحـک! ای بـی خـبـر ز عـالم عـشـق | نـاچــشــیـده حــلـاوت غـم عــشــق |
| خــر صــفــت، بـــار کــاه و جــو بـــرده | بــی خــبـــر زاده، بــی خــبــر مــرده |
| از صـــفــاهــای عــشـــق روحـــانــی | بــی خـبــر در جـهـان، چـو حـیـوانـی |
| طـرفـه دون هـمـتــی و بــی خــبــری | کـــه نــدارد بـــه دلـــبـــری نــظـــری |
| هـر حــرارت، کـه عــقــل شــیـدا کـرد | نـور خــورشــیـد عــشــق پــیـدا کـرد |
| هـر لـطــافــت، کــه در جــمـال افــزود | اثـــر عـــشـــق پـــاکـــبــــازان بــــود |
| گـر تــو پــاکـی، نـظـر بــه پــاکـی کـن | مــنـقــطــع از طــبــاع خــاکــی کــن |
| سـوز اهـل صـفـا بــه بــازی نـیـســت | عـشـقـبــازی خــیـالـبــازی نـیـسـت |
| رو، در عــــشــــق آن نـــگـــاریـــن زن | کـه تـو از عـشـق او شـدی احـسـن |
| هر که عشـقش نپـخـت و خـام بـماند | مــرغ جــانــش اســیـر دام بــمــانــد |
| عشق ذوقی اسـت، همنشین حـیات | بـلکه چـشم اسـت بـر جـبـین حـیات |
| عشق افزون ز جان و دل جانی است | بـلکـه در ملک روح سـلطـانی اسـت |
| گـاه بــاشــد کـه عـشــق جــان گـردد | گـــاه در جـــان جـــان نــهــان گـــردد |
| گاه جـان زنده شـد، حـیاتـش عـشـق | گاه شـد چـون زمین، نبـاتـش عشق |
| آب در مــیــوه خـــرد عــشــق اســت | بـلکـه آب حـیات خـود عـشـق اسـت |
| لــذت عــشـــق عــاشـــقــان دانــنــد | پـــاکــبـــازان جــان فــشــان دانــنــد |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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