تــحــفـه و شـیـخ در سـخــن بــودنـدرازگــــوی نـــو و کــــهـــن بــــودنـــدتـــاجـــر دیــن و دل ز دســـت شــدهدر لـگـدکـوب غـصــه پــســت شــدهنــ…
| تــحــفـه و شـیـخ در سـخــن بــودنـد | رازگــــوی نـــو و کــــهـــن بــــودنـــد |
| تـــاجـــر دیــن و دل ز دســـت شــده | در لـگـدکـوب غـصــه پــســت شــده |
| نــــاگـــــهــــانــــی ز در درون آمـــــد | ســـوی آن بــــنـــدی زبـــون آمـــدی |
| شــیــخ را چــون بـــدیــد خــرم شــد | دلـش از کـار تــحـفـه بــی غـم شـد |
| گــفــت شــایـد بــه یـمـن هـمــت او | ســهــل گــردد بـــلــا و مــحــنــت او |
| بــعــد تــســلــیـم چــهـره نــمــنــاک | بـهـر تـعـظـیم شـیخ سـود بـه خـاک |
| شـیخ گفـت کـه این حـد من نیسـت | کـین کـنیزک ز من بـه این اولـیسـت |
| پــس ازان شـیـخ رو بــه تــاجــر کـرد | رغــبــت بــیـع تــحــفـه ظــاهـر کـرد |
| کــرد تـــاجـــر فــغـــان کــه واویــلــاه | کـه شــد احــوال مـن ز فــقـر تــبــاه |
| نیست در دستت آن گشاد ای شیخ | کــه تــوانـی بــهـاش داد ای شــیـخ |
| از درم شــد بــهـاش بــیـســت هـزار | کـی بــرآیـد ز دســتــت ایـن مـقــدار |
| هـمـه مـالــم ز دســت شــد بــیـرون | در بـــهـــای کـــنـــیــزک و اکـــنـــون |
| نـه کــنـیـزک بــه دســت نـی مـالــم | مـحــرمـی کــو کــه پــیـش او نـالــم |
| شـیـخ رفـت و بــه خـانـه دانـگـی نـه | جــز دعــا را غــریــو و بــانــگــی نــه |
| دســت بــرداشــت کــای الـه کــریـم | ایـــزد فــــرد و پــــادشــــاه قـــدیـــم |
| آبـــرو بـــخــش اشــک ریــخــتــگــان | خـاک ذلـت بــه چــهـره بــیـخـتــگـان |
| کــــارســــاز فــــتــــادگــــان از کــــار | بــــار بــــردار مـــانـــدگــــان در بــــار |
| مـانـده در بــار تــحــفــه اســت دلــم | سـخـنـی گـفـتــه ام وز آن خــجــلـم |
| کــار مــن تــنـگ شــد ز تــنـگــدلــی | ســرخــرویـیــم ده دریــن خــجــلــی |
| در گــنــجـــیــنــه کــرم بـــگــشـــای | قــیـمـت تــحــفــه ام کــرم فــرمــای |
| شــیــخ را بـــود رو بـــه خــاک نــیــاز | کـــــه بـــــرآمـــــد ز ســـــوی در آواز |
| در چــو بــگـشــاد دیـد کــرده مـقــام | بــر درش خــواجــه ای و چــار غـلـام |
| هــمـــه بـــر آســـتـــان او زده صـــف | هـر یـکـی شـمـع و بـدره ای در کـف |
| اذن خـــــواهــــان درآمـــــدنــــد از در | بـــر زمـــیــن نـــیـــازمـــنـــدی ســـر |
| پــنــج بـــدره ز ســیــم پـــاک عــیــار | هــر یـکــی در شــمــار پــنــج هــزار |
| پــیـش شــیــخ زمــانــه بــنــهــادنــد | بــر ســر پــای خــدمــت اســتــادنـد |
| شـیـخ پــرسـیـدشـان ز صـورت حـال | خــواجـــه فــرمــود در جـــواب سؤال |
| کـه مـرا شـب بــه خـواب بــنـمـودنـد | صــورت فــقــر شــیـخ و فــرمــودنــد |
| کـه دلـش بـهـر تـحـفـه دربــار اسـت | قـیـمـت تــحــفـه را طـلـبــگـار اسـت |
| قـیمـت تـحـفـه بـر بـه خـدمت شـیخ | تــا شـوی بــهـره ور ز هـمـت شـیـخ |
| شــیـخ بــا خــواجــه بــامـداد پــگــاه | رو نـهـادنـد ســوی تــحــفــه بــه راه |
| چـــون رســیــدنــد از قــضــا تـــاجـــر | نــیــز شــد بــی تــوقــفــی حــاضــر |
| عــرضــه کــردنــد بـــدره هــا بــر وی | گـفــت مـن کـی فـروشــم او را کـی |
| قـیـمـت تــحـفـه هـسـت ازان افـزون | کــش بــدیـنـهـا کــنــم ز دل بــیـرون |
| مـــی فــــزودنـــد در بــــهـــا ز کـــرم | تــا رســیــد آن بـــه چــل هــزار درم |
| گـــفـــت تـــاجـــر ز دیـــده ریــزان آب | کـه شـبـم گـفـت کـردگـار بـه خـواب |
| کــه بـــود تـــحــفــه بـــرگــزیــده مــا | او خـــود و غــیــر خــود رمــیــده مــا |
| خـــــط آزادیـــــش بــــــلـــــا اکـــــراه | مـی دهـم خــالــصــا لــوجــه الــلــه |
| غــیـر او هـر چــه دارم از زر و ســیـم | بـه فـقـیـران هـمـی کـنـم تـسـلـیـم |
| هــمــه را مــی دهــم بــرای خــدای | بــو کـه حــاصـل کـنـم رضـای خـدای |
| خـواجـه چـون گوش کرد آن سـخـنان | دســت بــر رو نــهــاد گــریـه کــنــان |
| گــفــت گــویـا کــه خــالـق مـعــبــود | نـیـسـت از کـار و بــار مـن خـشـنـود |
| کـه مـرا سـاخـت زین شـرف نـومـیـد | سـوخـت جـانـم بـه حـسـرت جـاویـد |
| بــه کــف مـن ز مـلـک و مـال اکـنـون | هـر چــه هـسـت آمـدم ازان بــیـرون |
| هــمــه کــردم ســبــیــل راه خــدای | که خـدایم بـس اسـت در دو سـرای |
| تــحـفـه از بــنـد بــنـدگـی چـو رهـیـد | از سـر و بــر هـر آنـچـه بـود کـشـیـد |
| جـای اطـلس پـلـاس سـاخـت لبـاس | مـوی مـشـکـین نـهـفـت در کـربـاس |
| پــا نـهـاد از حــریـم بــقــعــه بــیـرون | چـون پـری شد بـه سـتـر غیب درون |
| شــیــخ بـــا آن دو تــن ز دنــبــالــش | مـــتــــحـــیـــر ز صـــورت حــــالـــش |
| پـــرس پـــرســان چــو آمــدنــد پـــدر | نــه خــبـــر یــافــتـــنــد ازو نــه اثـــر |
| هـر ســه کــردنـد مــتــفــق بــا هـم | روی در بــــادیـــه بــــه عـــزم حـــرم |
| خــواجــه در ره بــه درد و داغ بــمــرد | تـن بـه بـوم استـخوان بـه زاغ سپـرد |
| مـغـز سـر طـعـمه کـلـاغـان سـاخـت | دیـده مـنـقــارگــاه زاغــان ســاخــت |
| تــاجــر و شــیـخ پــا بــیـفــشــردنــد | ریـگ کـوبــان بـه کـعـبـه پـی بــردنـد |
| بـــا دل بـــی غــش و درونــه صـــاف | شــیـخ مـی کـرد گـرد خــانـه طـواف |
| آمـــد آواز نــالـــه ایــش بـــه گـــوش | کـش بـرآمد ز جـان خـسـتـه خـروش |
| وز پــی نـالـه نـکــتــه ایـش نـهـفــت | شـد شـنیده کـه بـیدلی می گـفـت |
| کـــای چـــراغ شـــب ســـیـــه روزان | مــــایــــه شــــادی غــــم انــــدوزان |
| آگــهــی بـــخــش جــهــان آگــاهــان | رهـــنـــمــــای فــــتــــاده از راهـــان |
| درد عــشــقــت شــفــای بــیـمــاری | زخـــم تـــو مـــرهـــم دل افـــگـــاری |
| هر که از شوق توست در تـب و تـاب | نـشــود جــز بــه وصـل تــو ســیـراب |
| هـر کــه زد در مــحــبــت تــو نـفــس | مـونـس جـان او تــو بــاشـی و بــس |
| از غــمــت هــر کــه بـــی قــرار آمــد | تـــا نـــبـــیــنـــد تـــو را نـــیـــارامـــد |
| چــون مـنـاجــات او سـری بــشـنـیـد | سوی آن چون سرشک خویش دوید |
| ســر بـــرآورد کــای ســری چــونــی | کـــانـــدریـــن درد بـــادت افـــزونـــی |
| شــیـخ گـفـتــا کـیـی تــو بــاز نـمـای | کـــه فـــتـــادم ز نــالـــه تـــو ز پـــای |
| گـفـت تـن زن کـه هـسـت رسـوایـی | نـاشـنـاسـی پــس از شـنـاســایـی |
| تــحــفــه ام مـن خــلــاص کــرده تــو | صـــد نـــوا یـــافـــتـــه ز پــــرده تــــو |
| شــیــخ دیــدش بـــه خــاک افــتــاده | چـــشـــم هــا در مــغـــاک افــتـــاده |
| ســر و ســیـمــیـن او خــلــال شــده | مـــاه رخـــســـار او هـــلـــال شـــده |
| الــف قــامـتــش چــو نـون گــشــتــه | طـره ســرکـشــش نـگـون گـشــتــه |
| چــشـمـی و صـد هـزار قـطـره خــون | لــبـــی و صـــد هــزار نــالــه فـــزون |
| شـیخ گـفـتـا کـه تـحـفـه حـال بـگوی | وصـف احــسـان ذوالـجــلـال بــگـوی |
| چــــون ز یـــار و دیـــار بــــبــــریـــدی | از کــــرم هــــای او چــــهـــا دیـــدی |
| تــحــفــه گــفــت از هــزار تــاریـکــی | داد بـــارم بـــه قـــرب و نـــزدیــکـــی |
| بــر ســریـر مــحــبــتــم بــنــشــانــد | وزدو صـد رنـج و مـحــنـتــم بــرهـانـد |
| شـیـخ گـفـتـا کـه آن سـتـوده شـیـم | کــت خــریــدی بـــه چــل هــزار درم |
| بـــود هــمــراه مــا بـــه راه حـــجـــاز | در غــمــت مــرد رو بــه خــاک نــیـاز |
| تــحــفــه گـفــتــا کــه آن گــرانـمـایـه | در جـنـان بــا مـن اسـت هـمـسـایـه |
| دادش آنــهــا خـــدا کـــه کـــم دیــده | دیــده و گـــوش نــیــز نــشـــنــیــده |
| شــیـخ گـفــتــا کــه آن کــریـم نـهـاد | کـــــه تــــــو را کـــــرد از کـــــرم آزاد |
| بــر امـیـدت دریـن طــوافــگــه اســت | چـشم بـنهاده هر طرف بـه ره است |
| تــحــفـه پــنـهـان ره دعـاش ســپــرد | بـــر در کــعــبـــه اوفــتـــاد و بـــمــرد |
| نـاگـهـان تــاجــر از عــقـب بــرســیـد | تــحــفــه را اوفــتــاده مــرده بـــدیــد |
| او هـم از بــیـدلـی بــه خــاک افـتــاد | پــیــش آن پـــاک جــان پـــاک بـــداد |
| هـر دو را شــیـخ گــور کــرد و کــفــن | بــعــد حــج رو نــهــاد ســوی وطــن |
| رحــمــت حــق نــثــار ایــشــان بـــاد | جـــای مــا در جـــوار ایــشـــان بـــاد |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
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