هسـت کسـی کو چـو من اشـکار نیسـتهسـت کسـی کو تـلف یار نیسـت؟هست سری کو چو سرم مست نیست؟هسـت دلی کو چـو دلم زار نیست؟مــخـــتـــلــف آمــد هــمــه کـــ…
| هسـت کسـی کو چـو من اشـکار نیسـت | هسـت کسـی کو تـلف یار نیسـت؟ |
| هست سری کو چو سرم مست نیست؟ | هسـت دلی کو چـو دلم زار نیست؟ |
| مــخـــتـــلــف آمــد هــمــه کـــار جـــهــان | لیک همه جـز کـه یکـی کـار نیسـت |
| غـــــرقــــه دل دان و طـــــلــــب کــــار دل | آنـک گـلـه کــرد کــه دلـدار نـیـســت |
| گــرد جـــهــان جـــســـتـــم اغـــیــار مــن | گشـت یقینم که کس اغـیار نیسـت |
| مـشـتـریـان جـمـلـه یکـی مـشـتـریـسـت | جـز کـه یـکـی رسـتـه بـازار نـیـسـت |
| مــاهــیــت گــلــشــن آنــکــس کــه دیــد | کشف شد او را که یکی خـار نیست |
| خــــنــــب ز یــــخ بــــود و درو کــــردم آب | شـد هـمـه آب و زخـم آثـار نـیـسـت |
| جــمــلــه جــهــان لــایـتــجــزی بــدســت | چـنـگ جـهان را جـز یک تـار نـیسـت |
| وســـوســـه ایــن عـــدد و ایــن خـــلـــاف | جــز کـه فـریـبــنـده و غـرار نـیـســت |
| هـســت دریـن گــفــت تــنــاقــض ولــیـک | از طـــرف دیــده و دیــدار نــیــســـت |
| نــقــطــه دل بــی عــدد و گــردش اســت | گـفـت زبـان جـز تـک پـرگـار نـیـسـت |
| طــاقــت و بـــی طــاقــتـــی آمــد یــکــی | پــیـش مـرا طـاقـت گـفـتـار نـیـسـت |
| مـســت شــدی ســر بــنـه ایـنـجــا، مـرو | زانـکـه گـلـسـت و ره همـوار نیسـت |
| مـــســــت دگـــر از تــــو بــــدزدد کـــمـــر | جــز تــو مـپــنـدار کـه طـرار نـیـسـت |
| چــونـک ز مـطــلــوب رســیـدســت بــرات | گـشــت نـهـان از نـظــر تــو صــفــات |
| بـــار دگـــر یــوســـف خـــوبـــان رســـیـــد | سـلـسـلـه صـد چـو زلـیـخـا کـشـیـد |
| جــــامـــه درد مـــاه ازیـــن دســـتــــگـــاه | نـعـره زنـد چــرخ کـه هـل مـن مـزیـد |
| جــمـلــه دنـیـا نـمـکــســتــان شــدســت | تــا کــه یـکــی گــردد پــاک و پــلـیـد |
| بــار دگــر عــقــل قــلــمــهـا شــکــســت | بــار دگــر عــشــق گــریــبــان دریــد |
| کــــرد زلـــیـــخــــا کـــه نـــکـــردت کـــس | بـــنــده خـــداونــده خــود را خـــریــد |
| مـســت شــدی بــوســه هـمـی بــایـدت | بـوسه بـران لب ده، کان می چشید |
| سـخـت خـوشـی، چـشـم بــدت دور بــاد | ای خـنک آن چـشـم که روی تـو دید |
| دیـــدن روی تــــو بــــســـی نـــادرســــت | ای خـنک آن، گوش کـه نامت شـنید |
| شــعــشــعــه جــام تـــو عــالــم گــرفــت | ولــولــه صـــبـــح قـــیــامــت دمــیــد |
| عــــقــــل نـــیـــابــــنـــد بــــه دارو، دگــــر | عــقــل ازیـن حــیـرت شــد نـاپــدیـد |
| بـــــاز نــــیــــایــــد، بـــــدود تـــــا هــــدف | تــیـر چـو از قـوس مـجــاهـد جــهـیـد |
| هــدهــد جــان چــون بــجــهـد از قــفــص | می پـرد از عـشـق بـه عـرش مجـید |
| تـــیــغ و کـــفـــن مـــی بـــرد و مـــی رود | روح ســوی قـیـصــر و قـصـرمـشــیـد |
| رســتــه ز انـدیـشـه کـه دل مـی فـشــرد | جـسـتـه ز هر خـار کـه پـا می خـلید |
| چـــــرخ ازو چـــــرخ زد و گــــفـــــت مــــاه | مــنــک لــنــا کــل غــد الــف عـــیــد |
| شــد گــه تــرجــیــع و دلــم مــی جــهــد | دلــبــر مــن داد ســخــن مــی دهـد |
| ایــــن بـــــخــــورد جــــام دگــــر آرمــــش | بـــارد و هــشـــیــار بـــنــگــذارمــش |
| از عـــدمـــش مـــن بــــخـــریـــدم بــــه زر | بـی می و بـی مـایده کـی دارمش؟ |
| شـــیــره و شـــیــریــن بـــدهــم رایــگــان | لــیـک چــو انــگــور نـیـفــشــارمــش |
| هـمـچـو سـر خـویـش هـمـی پــوشـمـش | همـچـو سـر خـویش همی خـارمش |
| روح مـــــنــــســـــت و فـــــرج روح مـــــن | دشــمـن و بــیـگــانـه نـیـنـگــارمـش |
| چــون زنـم او را؟! کـه ز مـهـر و ز عـشــق | گـفــتــن گــســتــاخ نـمـی یـارمـش |
| گـــر بـــرمــد کـــبـــکـــبـــه چـــار طـــبـــع | مــن عــوض و نــایـب هـر چــارمــش |
| مــن بـــه ســـفـــر یــار و قـــلـــاووزمـــش | من بـه سـحـر سـاقـی و خـمـارمش |
| تـــا چـــه کــنــد لــکـــلــکــه زر و ســـیــم | کـه تـو بـگویی کـه: « گرفـتـارمش » |
| او چـــو ز گـــفـــتــــار بــــبــــنـــدد دهـــن | از جــهـت تــرجــمــه گــفــتــارمــش |
| ور دل او گــــــرم شـــــــود از مــــــلــــــال | مــروحــه و بــاد ســبــکــســارمــش |
| ور بـــســـوی غــیــب نــظـــر خـــواهــد او | آیـــــنــــــه دیـــــده دیـــــدارمــــــش |
| ور بــــه زمـــیـــن آیـــد چـــون بــــوتــــراب | جـمـلـه زمـیـن لـالـه و گـل کـارمـش |
| ور بـــــســــوی روضــــه جــــانــــهــــا رود | یـاســمـن و ســبــزه و گــلــزارمــش |
| نــوبـــت تـــرجـــیــع شـــد ای جـــان مــن | مــوج زن ای بــحــر درافــشــان مــن |
| شـد سـحــر ای سـاقـی مـا نـوش، نـوش | ای ز رخـت در دل مـا جـوش، جـوش |
| بـــاده حــمــرای تــو هــمــچــون پــلــنــگ | گـرگ غـم اندر کـف او مـوش، مـوش |
| چـــونـــک بــــرآیـــد بـــه قـــصـــور دمـــاغ | افــتــد از بــام نـگـون هـوش، هـوش |
| چــونـک کـشـد گـوش خــرد ســوی خــود | گـوید از درد خـرد: « گـوش، گوش » |
| گـوش او: خــیـز، بــه جــان ســجــده کـن | در قـــدم ایــن قـــمــر مــی فـــروش |
| گــفــت: کــی آمــد کــه نــدیــدم مــنــش | گفت که: تو خفته بودی دوش دوش |
| عــاشــق آیـد بــر مــعــشــوقــه مــســت | کـه نـبـرد بـوی از آن شـوش شـوش |
| عــشـــق ســـوی غــیــب زنــد نــعـــرهــا | بــر حــس حـیـوان نـزنـد آن، خـروش |
| شــهــر پـــر از بـــانــگ خـــر و گــاو شـــد | بــر سـر کـه بــاشـد بــانـگ وحــوش |
| تـــرک ســـوارســـت بـــریــن یـــک قـــدح | ســاغـر دیـگـر جــهـت قـوش، قـوش |
| چـــونـــک شـــدی پــــر ز مـــی لـــایـــزال | هـیـچ نـبـینـی قـدحـی بـوش، بـوش |
| جــمــلــه جــمــادات ســلــامــت کــنــنــد | راز بـگـویند چـو خـویش، و چـو تـوش |
| روح چــــو ز مـــهـــر کــــنـــارت گـــرفــــت | روح شـود پـیـش تـو جـمـلـه نـقـوش |
| نــوبـــت آن شـــد کـــه زنـــم چـــرخ مـــن | عـشـق عـزل گـویـد بــی روی پـوش |
| هــمــچـــو گـــل ســـرخ ســـواری کـــنــد | جـملـه ریاحـین پـی او چـون جـیوش |
| نـقــل بــیـار و مــی و پــیـشــم نــشــیـن | ای رخ تــو شـمـع و مـیـت آتــشـیـن |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
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