ای بــســا تــیـز طــبــع کـاهـل کـوشکـه شـد از کـاهـلـی سـفـال فـروشوای بــســا کــور دل کــه از تــعــلـیـمگشـت قـاضـی القضـات هفـت اقلیمنـیـم خــور…
| ای بــســا تــیـز طــبــع کـاهـل کـوش | کـه شـد از کـاهـلـی سـفـال فـروش |
| وای بــســا کــور دل کــه از تــعــلـیـم | گشـت قـاضـی القضـات هفـت اقلیم |
| نـیـم خــورد ســگــان صــیـد ســگــال | جـز بـه تـعـلـیم عـلـم نیسـت حـلـال |
| سگ به دانش چو راست رشته شود | آدمــی شــایــد ار فــرشــتــه شــود |
| خـویـشـتـن را چـو خـضـر بــازشـنـاس | تــا خـوری آب زنـدگـانـی بــه قـیـاس |
| آب حـــیــوان نــه آب حـــیــوانــســـت | جـان بـا عـقـل و عـقـل بـا جـانـسـت |
| جــان چــراغـســت و عــقـل روغـن او | عـقـل جــانـســت و جــان مـا تــن او |
| عـقـل بــا جــان عـطـیـه احــدیـســت | جــان بــا عــقــل زنــده ابــدیــســت |
| حــاصــل ایــن دو جــز یــکــی نــبـــود | کـان دو داری در ایـن شــکـی نـبــود |
| تــا از یـن دو بــه آن یــکــی نــرســی | هـیچـکـس را مـگـو کـه هیچ کـسـی |
| کــان یــکــی یــافــتـــی دو را کــم زن | پــــای بــــر تــــارک دو عــــالــــم زن |
| از سـه بـگذر که محـملی نه قویسـت | از دو هـم در گـذر کـه آن ثـنـویـسـت |
| ســر یـک رشــتــه گـیـر چــون مـردان | دو رهــا کــن ســه را یـکــی گــردان |
| تـــا ز ثـــالــث ثــلــثــه جــان نــبـــری | گــوی وحــدت بــر آســمــان نــبــری |
| زین دو چـون کم شدی فسـانه مگوی | چـون یـکـی یـافـتـی بـهـانـه مـجـوی |
| تــا بــدیــن پــایـه دســتــرس بــاشــد | هــرچ ازیـن بــگــذرد هــوس بــاشــد |
| تــا جــوانـی و تــنـدرســتــی هـسـت | آیـد اســبــاب هــر مــراد بــه دســت |
| در سـهـی سـرو چـون شـکـسـت آید | مــومــیــائی کــجــا بــه دســت آیــد |
| تــو کــه ســرســبـــزی جــهــان داری | ره کــــنـــون رو کـــه پــــای آن داری |
| در ره دیــن چــونــی کــمــر بـــربــنــد | تــا سـرآمـد شـوی چـو سـرو بــلـنـد |
| مـن کـه سـرسـبـزیم نـمـانـد چـو بـید | لـالـه زرد و بـنفـشـه گـشـت سـپـید |
| بـــاز مـــانـــدم ز نـــا تـــنـــومـــنـــدی | از کـــلـــه داری و کـــمـــر بــــنـــدی |
| خـــدمـــتــــی مـــردوار مـــی کـــردم | راســـتـــی را کــنــون نــه آن مــردم |
| روزگــارم گــرفــت و بــســت چــنـیـن | عـــادت روزگــار هــســـت چـــنــیــن |
| نــافــتــاده شــکــســتــه بــودم بـــال | چـون فـتــادم چــگـونـه بــاشـد حـال |
| احـــمــدک را کـــه رخ نــمــونــه بـــود | آبـــلـــه بـــر دمـــد چـــگـــونــه بـــود |
| گرچـه طـبـعم ز سـایه بـر خـطـرسـت | ســایـبــانــم شــمــایـل هـنــرســت |
| ســایــه ای در جـــهــان نــدارد کــس | کـو بـره نیسـت پـیش و گرگ از پـس |
| هــیـچــکــس نــنــگــرم ز مــن تأمــن | که نشد پیش دوست و پس دشمن |
| چـون قـفـا دوسـتــنـد مـشـتــی خـام | روی خــود در کــه آورم بـــه ســلــام |
| گـرچــه بــرنـائی از مـیـان بــرخـاسـت | چـه کنم حـرص همچـنان بـرجـاست |
| تــا تــن ســالــخــورده پــیـر تــرســت | آز او آرزوپـــــــذیــــــر تـــــــرســــــت |
| گــوئی ایــن ســـکــه نــقـــد مــا دارد | یـا هـمـه کــس خــود ایـن بــلــا دارد |
| بـــــــازدار ای دوا کـــــــن دل مـــــــن | از زمـیـن بـوس هـر کـسـی گـل مـن |
| تـــیــرگـــی چـــنـــد روشـــنـــائی ده | چــون شــکــســتــیـم مـومـیـائی ده |
| آنــچــه زو خــاطــرم پــریـشــانـســت | بــکـن آسـان کـه بــر تـو آسـانـسـت |
| گـــردنـــی دارم از رســـن رســــتــــه | مــکــنــم زیــر بــار خــس خــســتــه |
| مـن کـه قـانـع شـدم بـه دانه خـویش | سرورم چـون صدف بـه خـانه خویش |
| ســروری بـــه کــه یــار مــن بـــاشــد | سـرپــرسـتــی چـه کـار مـن بــاشـد |
| شــیــر از آن پــایــه بــزرگــی یــافــت | که سـر از طوق سـرپـرسـتـی تـافت |
| نـانی از خـوان خـود دهی بـه کـسـان | بـه که حـلوا خـوری ز خـوان خـسـان |
| صـبــح چـون بــرکـشـیـد دشـنـه تــیـز | چــنـد خــسـبــی نـظـامـیـا بــرخــیـز |
| کــان نـو کــن زرنــج خــویـش مــرنــج | بــاز کــن بــر جــهــانــیــان در گــنــج |
| ای پــســر هـان و هـان تــرا گــفــتــم | کـه تـو بــیـدار شـو کـه مـن خـفـتــم |
| چـــون گـــل بــــاغ ســـرمـــدی داری | مــــهـــر نـــام مــــحــــمــــدی داری |
| چــون مـحــمـد شـدی ز مـســعـودی | بــانـک بــرزن بــه کـوس مـحــمـودی |
| ســکـه بــر نـقــش نـیـکــنـامـی بــنـد | کـز بــلـنـدی رسـی بــه چـرخ بــلـنـد |
| تــا مـن آنـجــا کـه شـهـر بــنـد شــوم | از بـــلــنــدیــت ســر بــلــنــد شــوم |
| صــحــبــتــی جــوی کــز نـکــونـامــی | در تـــو آرد نــکـــو ســـرانــجـــامـــی |
| هـمـنـشــیـنـی کـه نـافــه بــوی بــود | خــوبــتــر زانــکــه یــافــه گــوی بــود |
| عیب یک همنشـسـت بـاشـد و بـس | کـافـکـنـد نـام زشــت بــر صــد کـس |
| از در افــــتــــادن شــــکــــاری خــــام | صـــد دیــگــر در اوفـــتـــنــد بـــه دام |
| زر فـــرو بــــردن یـــکـــی مـــحـــتـــاج | صـــد شـــکـــم را دریــد در ره حـــاج |
| در چـنـیـن ره مـخـسـب چـون پــیـران | گـــرد کـــن دامــن از زبـــون گــیــران |
| تـــا بـــدیــن کـــاخ بـــاژگـــونــه نـــورد | نـفــریـبــی چــو زن کــه مــردی مـرد |
| رقـص مـرکـب مـبـیـن کـه رهـوارسـت | راه بــیـن تــا چــگـونـه دشــوارســت |
| گـر بــر ایـن ره پــری چـو بــاز سـپـیـد | دیــده بــر راه دار چــون خــورشــیــد |
| خـاصـه کـایـن راه راه نـخـچــیـر اسـت | آسـمـان بــا کـمـان و بــا تــیـر اسـت |
| آهـنـت گـرچــه آهـنـیـســت نـفــیـس | راه سـنگـسـت و سـنگ مغـناطـیس |
| بـــار چــنــدان بــر ایــن ســتــور آویــز | کــه نــمــانــد بــر ایــن گــریـوه تــیــز |
| چــون رســد تــنـگـیئی ز دور دو رنـگ | راه بــــر دل فــــراخ دار نـــه تــــنـــگ |
| بــس گـره کـو کـلـیـد پــنـهـانـیـســت | پـس درشـتـی که دروی آسـانیسـت |
| ای بـــســا خــواب کــو بــود دلــگــیــر | واصـل آن دل خـوشـیسـت در تـعبـیر |
| گـرچــه پــیـکـان غـم جــگـر دوزســت | درع صــبـــر از بـــرای ایــن روزســـت |
| عــهـد خــود بــا خــدای مـحــکــم دار | دل ز دیــگــر عــلــاقــه بــی غــم دار |
| چـون تــو عـهـد خـدای نـشـکـسـتـی | عـهـده بـر مـن کـز ایـن و آن رسـتـی |
| گـــوهــر نـــیــک را ز عـــقـــد مـــریــز | وآنـکــه بــد گـوهـرســت ازو بــگــریـز |
| بــدگــهــر بـــا کــســی وفــا نــکــنــد | اصــل بــد در خــطــا خــطــا نــکــنــد |
| اصـل بــد بــا تـو چـون شـود مـعـطـی | آن نـخــوانـدی کـه اصــل لـایـخــطـی |
| کــژدم از راه آنــکــه بـــدگــهــرســـت | ماندنش عیب و کشـتـنش هنرسـت |
| هـــنـــرآمـــوز کــــز هـــنـــرمــــنـــدی | در گــشــائی کــنـی نــه در بــنــدی |
| هــرکــه ز آمــوخـــتـــن نــدارد نــنــگ | در بـــرآرد ز آب و لـــعـــل از ســـنــگ |
| وانــکـــه دانــش نــبـــاشـــدش روزی | نـــــنـــــگ دارد ز دانـــــش آمـــــوزی |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
منبع : درج
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