شـب چـو نزدیک شد بـه وقت سـحـرحــبــشـی بــرد سـوی بــالـیـن سـرچـشم حس بـست ازین جـهان خرابداد نــقــد خـــرد بـــه غــارت خـــوابدایـه آن را چـو دیـ…
| شـب چـو نزدیک شد بـه وقت سـحـر | حــبــشـی بــرد سـوی بــالـیـن سـر |
| چـشم حس بـست ازین جـهان خراب | داد نــقــد خـــرد بـــه غــارت خـــواب |
| دایـه آن را چـو دیـد چـابـک و چـسـت | بــاز بــردش بــه خـوابــگـاه نـخـسـت |
| بــیـخـود افـتــاد تــا بــلـنـدی چـاشـت | چــاشـتــگـاه بــلـنـد ســر بــرداشـت |
| چــشــم مـالـیـد و هـر طــرف گــردیـد | زانـچـه شـب دیـده بــود هـیـچ نـدیـد |
| دیــد ازان مـــنـــزل چـــو عـــلـــیــیــن | رخــت خــود در نـشـیـمـن سـجــیـن |
| نــه ازان هــمــدمــان شــب خــبــری | نـــه ازان شــــادی و طــــرب اثــــری |
| نـــه ازان آفـــتــــاب جـــاه و جـــمـــال | هـیـچ چـیزش بـه دسـت غـیر خـیـال |
| ره بــه مـقـصـود خـود ز پــیـر و جــوان | جـست چـندانکه داشت تـاب و تـوان |
| نـــاشـــده بـــر مـــراد خـــود فـــیــروز | مــاتــمـی در گــرفــت عــالــم ســوز |
| دوسـتــی حـال وی چــو آنـسـان دیـد | مــوجــب آنــچــه دیــد ازو پــرســیــد |
| گـفــت بــس حــال مـشــکــلـی دارم | غـرقـه گـشـتــه بــه خـون دلـی دارم |
| زد ره مــن بـــه عــشــوه نــاگــاهــی | دلـپـذیـری بــه حـسـن و دلـخـواهـی |
| بــی نـظــیـری کـه شــد زبــان مـقـال | عـقـل را در صــفـات حــســنـش لـال |
| گـر کـســی نـعـت و نـام او پــرســیـد | یــا مــحــل یــا مــقــام او پـــرســیــد |
| ور بـــگــویــد کــجـــاســت خـــانــه او | خـــانـــه کـــیــســـت آشـــیــانـــه او |
| مــولــدش خــلــخ اســت یــا فــرخــار | مـسـکـنـش تــبــت اسـت یـا تــاتــار |
| شـاه اقـلـیـم و مـاه کـشـور کـیـسـت | خـصم جـانسوز و یار غمخـور کیست |
| چـشـم او سـرمـه نـاک افـتـاده سـت | یا خـود از سـرمـه پـاک افـتـاده سـت |
| نخل قدش که صنع حق بـستـه ست | مـعـتـدل یـا بــلـنـد یـا پــسـت اسـت |
| گـیـسـویش چـون کـمـنـد تـافـتـه انـد | یــا پـــی دام و بـــنــد بـــافــتــه انــد |
| رخش از نقش خال و خط ساده ست | یـا خـود آن زیـب دیـگـرش داده سـت |
| لـعـلـش آمـد حــیـات تــشــنـه لـبــان | یـــا هـــلـــاک مـــراد دل طـــلـــبـــان |
| ابــروی او کـه در جــهـان طـاق اسـت | قـبــلـه عـاشـقـان مـشـتــاق اســت |
| شـد ز پــیـوســتــگـیـش پــیـوســتــه | بــر جــهــان راه عــافــیـت بــســتــه |
| یـا گـشـاده ســت و رخــنـه گـاه بــلـا | بــــاز کــــرده بــــه روی اهــــل ولــــا |
| از دهــان و مــیـانــش هـیـچ نــشــان | هـیـچ کـس یـافــت آشــکـار و نـهـان |
| یـا خــود آن ســر مــخــفــی مــرمــوز | هـسـت مـسـتــور سـر غـیـب هـنـوز |
| هـر چـه زین نـکـتـه هـا خـیـال کـنـنـد | وز مــن خــســتــه دل سؤال کــنـنـد |
| جـز خـمـوشـی جـواب دیگـر نـیـسـت | جـز نـدانـم سـخـن مـیـسـر نـیـسـت |
| زانــکـــه مــن در جـــمــال آن دلـــبـــر | مــعــنــیــی دیــده ام بـــرون ز صــور |
| گــر چــه آن مــعــنــی ز صــورت فــرد | در لـــبـــاس صـــور تـــجـــلــی کـــرد |
| نــور آن بـــرق پــرده ســوز افــروخــت | سر به سر پرده های صورت سوخت |
| مــحـــو مــعـــنــی و فــارغ از صـــورم | نــیــســت از جـــلــوه صــور خــبـــرم |
| پـیش مـن نـیـسـت رخ ز خـط مـمـتـاز | زلــف او رانــمــی شـــنــاســـم بـــاز |
| گـر کـشـد چـشـم او بــه تـیـغ سـتـم | ور دهـــد لــــعــــل او نـــویـــد کــــرم |
| هــر دو در ذوق مــن بــود یــکــســان | نـیسـت این مـشـکـل آن دگـر آسـان |
| دأب مـن نـیـسـت جــز مـحــبــت ذات | ذات بـر مـن زده سـت ره نـه صـفـات |
| مـن صــفـت بــهـر ذات مـی خــواهـم | نــز بـــرای صـــفـــات مـــی کـــاهــم |
| چــون ز دل بــرق عـشـق شـد لـامـع | ذات مــتــبــوع شــد صــفــت تــابـــع |
| مـن صــفــت بــهـر ذات دارم دوســت | نـه کـه در عـشـق ذات تـابـع اوسـت |
| چــون کـنـی مـیـل ذات بــهـر صــفـات | هسـت معـشـوق تـو صـفـات نه ذات |
| هر صـفت کش تـو عاشـقی بـه مثـل | چـون شـود بــا نـقـیـض خـود مـبــدل |
| عــشــق تــو نــیـز رو نــهــد بــه زوال | بــلـکـه گـیـرد بــه نـفـرت اسـتـبــدال |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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