چــمـن خــلــد کــی ایـن لــالـه و نـســریـن دارد؟لـب اعــجــاز کــی ایـن خــنـده شــیـریـن دارد؟ســر فــتــراک شــهـادت بــه ســلـامـت بــاشــد!ســر …
| چــمـن خــلــد کــی ایـن لــالـه و نـســریـن دارد؟ | لـب اعــجــاز کــی ایـن خــنـده شــیـریـن دارد؟ |
| ســر فــتــراک شــهـادت بــه ســلـامـت بــاشــد! | ســر شــوریــده مــا کــی ســر بـــالــیــن دارد؟ |
| کـــبـــک اگــر نــاز بـــه فـــرهــاد کـــنــد جـــا دارد | کــه قـــدم بـــر قـــدم جـــلــوه شـــیــریــن دارد |
| *** | |
| بــا رخــت آیــنــه خــوش عــیــش تــمــامــی دارد | شــانــه بــا هــر شــکــن زلــف تــو دامــی دارد |
| عــمــرهــا رفــت ز وارســتـــگــی و مــی ســوزم | تـــب واســـوخـــتـــگــی طـــرفــه دوامــی دارد |
| *** | |
| خـــنــک آن دل کـــه ز وســـواس تـــمــنــا گـــذرد | دامـن افـشـان چــو نـسـیـم از ســر دنـیـا گـذرد |
| در دل ســنــگ تــوان رخــنـه بــه هـمــواری کــرد | رشــتــه را عــقــد گـهـر کـوچــه دهـد تــا گـذرد |
| بـه شـتـابـی کـه گـذشـتـم مـن ازین وحـشـتـگـاه | رفــــرف مـــوج مــــگــــر از ســــر دریـــا گــــذرد |
| *** | |
| رهــنـــوردی کـــه مـــدارش بـــه تـــوکـــل گـــذرد | گــر قـــدم بـــر ســـر دریــا نــهــد از پـــل گــذرد |
| کـی بـه فـکـر خـس و خـاشـاک مـن افـتـد بـرقـی | کــز ســیـه خــانـه لـیـلـی بــه تــغــافــل گــذرد |
| *** | |
| داغــم از خــنــده بــیـهــوده خــود، مــی تــرســم | کـه چـو گـل مـدت عـمـرم بــه شـکـفـتـن گـذرد |
| *** | |
| قـــطـــع امـــیــد ازان زلـــف دوتـــا نـــتـــوان کـــرد | دامـــن دولـــت جـــاویـــد رهـــا نـــتــــوان کـــرد |
| قـاصـد و نـامـه و پــیـغـام نـمـی خــواهـد عـشـق | در حــرم پــیــروی قــبـــلــه نــمــا نــتــوان کــرد |
| *** | |
| بــرو ای غــیــر بــه مــا داغ مــحــبـــت مــفــروش | ایـن زر قــلـب بــه کـار هـمـه کـس نـتــوان کـرد |
| *** | |
| هـر کـه شـبــهـا ز ســر زانـوی خــود بــالـیـن کـرد | غنچـه سـان جـیب و بـغل پـرسـخـن رنگین کرد |
| زهر چـشمش چه عجـب گر بـه تـبـسم کم شد؟ | بــه نـمـک تــلـخــی بــادام تــوان شـیـریـن کـرد |
| آه ازین عشق سـتـم پـیشه که بـا چـندین سعی | دهـن تــیـشـه فـرهـاد بــه خــون شـیـریـن کـرد |
| *** | |
| هـر کـجــا از خــط سـبــز تــو سـخــن مـی خـیـزد | مـوی از ســبــزه بــر انـدام چــمـن مـی خــیـزد |
| مـشـرق مـصـرع بــرجــسـتــه دل پــرخـون اسـت | این سـهیلی اسـت که از خـاک یمن می خـیزد |
| *** | |
| مــرغ مــن در بـــغــل بـــیــضـــه هــم آزاد نــبـــود | آشــیــان هــیــچ کــم از خــانــه صــیــاد نــبــود |
| دل بــی درد مـن از خــواب فـرامـوشـی جــســت | نـامـه دوســت کـم از ســیـلـی اســتــاد نـبــود |
| *** | |
| نــکــشــم نــاز بـــتـــی را کــه جــفــاجــو نــبـــود | بــه چــه کـار آیـدم آن گـل کـه در او بــو نـبــود؟ |
| بـیسـتـون پـیش سـبـکدسـتـی ما بـی وزن است | عـشـق را سـنـگ کـم ایـنـجــا بــه تــرازو نـبــود |
| *** | |
| مــصــر روشــن ز جــمــال مــه کــنـعــان نــشــود | تــا بــرافــروخــتــه از ســیـلــی اخــوان نـشــود |
| خــواریــی هــســت بـــه دنــبـــال خــودآرایــی را | پــرطــاوس مـحــال اســت مـگــس ران نـشــود |
| *** | |
| رام عـــاشـــق نـــشـــدن، کـــام زلـــیـــخـــا دادن | هـــمـــه از یـــوســـف بـــازاری مـــا مـــی آیـــد |
| *** | |
| ســخــنــی کــز دهــن تـــنــگ تـــو بـــرمــی آیــد | راز غــیــب اســت کــه از پــرده بـــدر مــی آیــد |
| از گــلــســتــان در و دیـوار و ز آیـیـنـه قــفــاســت | آنـچــه از حــســن تــو مـا را بــه نـظـر مـی آیـد |
| آمـد کـار مـن و رشـتــه تــســبــیـح یـکـی اســت | کـه ز صـد رهـگـذرم ســنـگ بــه ســر مـی آیـد |
| *** | |
| خــون بــه جــوشـم ز خــط غـالـیـه گـون مـی آیـد | ایـن بـهـاری اسـت کـز او بـوی جـنـون مـی آیـد |
| عـشـق را خـلوت خـاصـی اسـت که از مشـتـاقان | هـر کـه از خــویـش بــرون رفــت درون مـی آیـد |
| بــه تــمـاشــای تــو ای ســرو خــرامـان ز چــمـن | گـل نـفـس سـوخـتـه چـون لـالـه بـرون مـی آید |
| *** | |
| مــگـــر از نــالــه بـــلــبـــل دل مــا بـــگـــشـــایــد | ورنـه پــیـداســت چــه از بــاد صـبــا بــگـشـایـد |
| مــی تــوانــد گــره از غــنــچــه پـــیــکــان وا کــرد | هـر نـســیـمـی کــه دل تــنـگ مـرا بــگـشــایـد |
| صــبــح را بــخــیـه انــجــم نــشــود مــهــر دهــن | نــتــوان بــســت دری را کــه خــدا بــگــشــایـد |
| *** | |
| گـلـی از عــیـش نـچــیـدم کــه مـلـالـی نـرســیـد | خـاری از پـا نکـشـیدم کـه بـه چـشـمـم نخـلـید |
| عــالـم افــروزی حــســن از نـظــر پــاکــان اســت | گـل خــورشــیـد ز فـیـض نـفــس صــبــح دمـیـد |
| *** | |
| دو دل شــوم چــو بــه زلـفــش مـرا نـگــاه افــتــد | چــو رهـروی کــه رهـش بــر ســر دو راه افــتــد |
| فـــروتـــنـــی اســـت بـــرازنـــده از ســـرافـــرازان | که خـوشنماسـت شـکسـتـی که بـر کلاه افتـد |
| *** | |
| کـــجـــا دمــاغ تـــو گــرم از شـــراب مــی گــردد؟ | کــه مــی ز شـــرم نــگــاه تـــو آب مــی گــردد |
| هـمـیـشــه در پــی آزار مـاســت چــشــم فــلـک | بــه قــصــد شــبــنــم مــا آفــتــاب مــی گــردد |
| *** | |
| دریـن ریـاض کــســی خــوشــه اش دو ســر دارد | کــه غــیـر اشــک دگــر دانــه ای نــمــی کــارد |
| ازان ز عـــمــر ابـــد کـــامــیــاب شـــد ابـــلــیــس | کــه ســـر بـــه ســـجـــده آدم فــرو نــمــی آرد |
| دلـی کـه تــشــنـه دیـدار آتــشـیـن رویـی اســت | بـــه غـــیــر آب شـــدن چـــاره ای نــمـــی دارد |
| *** | |
| کـســی کـه کــاوش عــشــقــی درون خــود دارد | هــمــیـشــه بــاده لــعــلــی ز خــون خــود دارد |
| بــه آتــش دگــری خــشــمــگــیـن نـمــی ســوزد | فـــتـــیــلـــه داغ پـــلـــنـــگ از درون خـــود دارد |
| *** | |
| چــو دســت خــود بــه دعـا مـی پــرسـت بــردارد | بــه بـــاغ گــریــه کــنــان تــاک دســت بـــردارد |
| دعـای صــبــح بــنـاگـوش بــی اثــر شــده اســت | دگــر کــســی بــه چــه امـیـد دســت بــردارد؟ |
| *** | |
| لــبـــش بــه ظــاهــر اگــر حــرف شــکــریــن دارد | ز خـــط ســبـــز هــمــان زهــر در نــگــیــن دارد |
| عـجـب کـه پـشـت زمین خـم چـو آسـمـان نشـود | ز مـــنــتـــی کـــه خـــرام تـــو بـــر زمــیــن دارد |
| حـــجـــاب روشــنــی دل بـــود حــلــاوت عــیــش | کــه مــوم روز ســـیــاهــی در انــگــبـــیــن دارد |
| *** | |
| شــــــراب روز دل لــــــالــــــه را ســــــیــــــه دارد | چه حاجـت است بـه شاهد سخن چـو تـه دارد |
| بـه داد و عـدل بــود خـسـروی، نـه طـبــل و کـلـاه | وگـرنـه شــاهـیـن، هـم طـبــل و هـم کـلـه دارد |
| بــــرآورد ز گــــریــــبــــان رســــتــــگــــاری ســــر | کـسـی کـه سـر بــه تــه از خـجـلـت گـنـه دارد |
| *** | |
| ز خـــط صـــفـــا لــب مــیــگــون یــار پـــیــدا کــرد | بـــهـــار نـــشأه ایـــن بــــاده را دوبـــالـــا کـــرد |
| مـرا بــه دسـت تـهـی هـمـچـو شـانـه مـی بــایـد | گـــره ز کـــار پـــریــشـــان عـــالــمــی وا کـــرد |
| *** | |
| بــه حـسـن، خـیـرگـی مـا چـه مـی تــوانـد کـرد؟ | بــه آفــتــاب، تــمـاشــا چــه مـی تــوانـد کــرد؟ |
| اگـــر دو یــار مـــوافـــق زبـــان یــکـــی ســـازنـــد | فـلـک بــه یـک تـن تـنـهـا چـه مـی تـوانـد کـرد؟ |
| *** | |
| بـــه آه ســـرد دل خـــود دو نـــیـــم بـــایـــد کـــرد | چـو غـنـچـه خـنـده بـه روی نـسـیـم بــایـد کـرد |
| نـــدا کــــنـــد بــــه زبــــان بــــریـــده زلــــف ایـــاز | کـــه پـــا دراز بـــه حـــد گـــلــیــم بـــایــد کـــرد |
| دلـی کـه جــمـع ز ذکـر خـفـی چـو غـنـچـه شـود | ز ذکـــر اره چـــه لـــازم دو نــیــم بـــایــد کـــرد؟ |
| *** | |
| ز ســـرنــوشـــت قــضـــا احـــتـــراز نــتـــوان کــرد | گــره بـــه نــاخــن از ابـــروی بـــاز نــتــوان کــرد |
| مــرا ز عــالــم تــکــلــیــف عــشــق بــیــرون بــرد | چــو دل بــه جــای نـبــاشــد نـمـاز نـتــوان کـرد |
| اگـــر ز لـــوث ریـــا ســـجـــده گـــاه بـــایــد پـــاک | بــه غــیـر دامـن مـســتــان نـمــاز نـتــوان کــرد |
| *** | |
| سـخـن چـو هـر دو لـب او بـه یـکـدگـر مـی خـورد | چـو رشتـه غوطه بـه سرچـشمه گهر می خورد |
| سـفـر گزین که بـه چـشـم جـهان شـوی شـیرین | عـزیـز مـصـر شـب و روز ایـن شـکـر مـی خــورد |
| خــوش آن مــلــال کــه از آســتــیـن مــرهـمــیـان | نـسـیـم ســوده الـمـاس بــر جــگـر مـی خــورد |
| *** | |
| ســبــکـروی بــه صـف دشـمـنـان شـبــیـخــون زد | کــه نـعــل ســیـر بــه گــلـگــون عــزم وارون زد |
| کــنــار خــویــش ز خــون شــفــق لــبــالــب دیــد | چـو صـبـح هـر کـه دم خـوش بـه زیـر گـردون زد |
| *** | |
| چــو شـبــنـم آن کـه دل خـویـش بــا صـفـا سـازد | ز گــرد بـــالــش خـــورشــیــد مــتـــکــا ســـازد |
| عــبــث بــه کـیـنـه مـا گـرم مـی شــود دشــمـن | ســمــوم را چــمــن خــلــق مــا صــبـــا ســازد |
| تــرا کـه بــاده لـعـلـی اســت در قـدح مـپــســنـد | کــه اســـتـــخـــوان مــرا درد کــهــربـــا ســـازد |
| *** | |
| غــریــب کــوی تـــو در هــر کــجـــا وطــن ســـازد | ز پـــاره هـــای دل آن خـــاک را یــمـــن ســـازد |
| وفــا مــجــوی ز مــصــر وجــود، هــیـهــات اســت | کـه بــوی پــیـرهـن ایـنـجــا بــه پــیـرهـن سـازد |
| *** | |
| دل رمــیــده بـــه ایــن خـــاکــدان نــمــی ســـازد | بــه هـیـچ وجــه شـرر بــا دخــان نـمـی ســازد |
| بــه خــارخـار قـفـس بــلـبــلـی کـه خـوی گـرفـت | دگــر بــه خــار و خــس آشــیـان نـمــی ســازد |
| فـــغـــان مـــن کـــه دل ســـنـــگ را بــــه درد آرد | غــنـیـمــت اســت تــرا مـهـربــان نـمـی ســازد |
| *** | |
| غــبـــار خــط چــو بــه عــزم نــبـــرد مــی خــیــزد | ز آب چــشــمــه خــورشــیـد گــرد مــی خــیـزد |
| ســـتـــاره در قـــدم او ســـپــــنـــد مـــی ســـوزد | سـبـکـروی کـه چـو خـورشـیـد فـرد مـی خـیـزد |
| *** | |
| بــه دل عـلـاقـه نـداریـم تــا بــه جــان چــه رســد | گـذشـتـه ایـم ز خـود تـا بــه دیـگـران چـه رسـد |
| فـقـیر را ز غـنـی کـاهش اسـت قـسـمـت و بـس | ز آشـنـایـی گـوهـر بــه ریـسـمـان چــه رســد؟ |
| *** | |
| مـــس وجــــود مـــرا درد کـــیـــمـــیـــا بــــاشــــد | طــلــای بــی غــش مــن درد بــی دوا بــاشــد |
| حــصــار عــافــیـت مـن شــده اســت درویـشــی | دعــای جــوشــن مــن نــقــش بــوریــا بــاشــد |
| ز آشـــنــایــی مــردم، گــزیــده هــر کـــس شـــد | کــنــاره گــیـرد ازان ســگ کــه آشــنــا بــاشــد |
| *** | |
| شـکـسـتـه بـند قـناعـت مرا دهان بـسـتـه اسـت | هـمــانـیـم کــه مــرادم ز اســتــخــوان بــاشــد |
| *** | |
| کــجــا بــه ســیـر چــمـن بــا رخ گـشــاده نـشــد | کـه گـل ز شــاخ بــه تــعـظـیـم او پــیـاده نـشـد |
| هــزار نــاخـــن الــمــاس ریــشـــه کــرد و هــنــوز | ز زلــف طــالــع مــا یـک گــره گــشــاده نــشــد |
| *** | |
| رخ تـــــو روی نــــگــــاه از پـــــری بـــــگــــردانــــد | عـــــنـــــان دل ز بــــــت آزری بـــــگـــــردانـــــد |
| چــو آفــتـــاب، مــرا چــنــد دربـــدر غــم عــشــق | بـــه زیــر خـــیــمــه نــیــلــوفـــری بـــگــردانــد؟ |
| عــلـاقـه هـاســت بــه مـن دام را، نـه آن صــیـدم | کــه گــرد خــویـش مــرا ســرســری بــگــردانـد |
| چــو آفــتــاب ز ســیـمــای گــوهــرم پــیــداســت | کــــه آب در نـــظــــر جــــوهـــری بــــگـــردانـــد |
| *** | |
| ســحــر کــه پـــرده ز رخ گــلــرخــان بـــرانــدازنــد | ( ) زلــــزلــــه در مــــلــــک خـــــاور انــــدازنــــد |
| حــذر ز گــرمــی ایــن ره مــکــن کــه آبـــلــه هــا | بــه هـر قــدم کـه نـهـی فــرش گـوهـر انـدازنـد |
| *** | |
| درسـت سـازد اگـر شـیشـه شـیشـه گـر شـکـند | خـوشـم کـه عـشـق دلم را بـه یکـدگـر شـکـند |
| بــه روغـن آتــش ســوزان نـمـی شـود خــامـوش | خـمـار جــاه مـحــال اسـت سـیـم و زر شـکـنـد |
| *** | |
| دلـــاوران کـــه صـــف کـــارزار مــی شـــکـــنــنــد | بــه خــون گـرم مـن اول خــمـار مـی شــکـنـنـد |
| هــنــوز ســاقــی مــحـــجـــوب مــا نــمــی دانــد | کـه دلـبــران ز لـب خــود خــمـار مـی شـکـنـنـد |
| چـه حـاجـت اسـت بـه مـی بـزم زهدکـیشـان را؟ | بــه خـون یـکـدگـر ایـنـجـا خـمـار مـی شـکـنـنـد |
| *** | |
| تــــرا کــــه چــــتــــر زرانــــدود آفــــتـــــاب بـــــود | هـــلــــال عــــیـــد بــــه انــــدازه رکــــاب بــــود |
| هــمــان خــورم بــه رگ خــواب نــیــش بــیــداری | اگـر چــه بــســتــرم از پــرده هـای خــواب بــود |
| مـزن بــه شـیـشـه مـا سـنـگ مـحـتـسـب زنـهـار | کــــبــــوتــــر حــــرم مــــا بــــط شــــراب بــــود |
| *** | |
| ز هــر نـــهــال بـــه قـــد ســـرو اگـــر زیــاده بـــود | نــظـــر بـــه قــامــت رعـــنــای او پـــیــاده بـــود |
| حـــریــص بـــیــش ز انــدازه رزق مــی طـــلـــبـــد | هــمــیـشــه لــقــمــه مــور از دهـن زیـاده بــود |
| *** | |
| بــه تــیـغ هـر کـه شــود کـشــتــه پــایـدار شــود | رســد چــو قـطــره بــه دریـا یـکـی هـزار شــود |
| ز چـــارپـــای عــنــاصــر پـــیــاده هــر کــس شــد | بـه یک نـفـس چـو مـسـیحـا فـلـک سـوار شـود |
| *** | |
| ز درد مــــی دل زهـــاد بــــا صــــفــــا نــــشــــود | کـه چــشــم آبــلـه روشــن بــه تــوتــیـا نـشـود |
| پـس از فـراق، قـلـم نـیسـت بـر شـکـسـتـه دلـان | چــو نـی جــدا ز شــکـر گـشــت بــوریـا نـشـود |
| جــــــدا فــــــتـــــــاده ام از کــــــاروان در آن وادی | کـــه نــالــه جـــرس از کـــاروان جـــدا نــشـــود |
| گــرفــتـــه ای پـــی طـــول امــل بـــه عــنــوانــی | کــه هــیـچ کــور چــنــان پــیـرو عــصــا نــشــود |
| تــا ز خــود گــم نـشــود دل بــه هـدایـت نــرســد | درد درمــان نــشــود تــا بــه نــهــایــت نــرســد |
| راه طـی گـشـت و همـان دوری مـنزل بـرجـاسـت | کـه شـنیده اسـت کـه مـنزل بـه نهایت نرسـد؟ |
| ستم این است که می فهمد و می پوشد چشم | کـاش آن شـوخ بـه مـضـمـون شـکـایـت نـرسـد |
| *** | |
| مـــحــــنـــت مـــردم آزاده فـــزونـــتــــر بــــاشـــد | بـــار دل لــازمــه ســـرو و صـــنــوبـــر بـــاشـــد |
| عـالـم خــاک بــود مـنـتــظــم از پــســت و بــلـنـد | مـصـلـحـت نـیـسـت ده انـگـشـت بـرابـر بـاشـد |
| مـی تــوان شـمـع بــرافـروخــت ز نـقـش قـدمـش | هـر کـه را آتــش ســودای تــو در ســر بــاشــد |
| *** | |
| فــیـض در دامــن صــحــرای جــنـون مـی بــاشــد | خـاک این بـادیه آغـشـتـه بـه خـون مـی بـاشـد |
| از جـــوان بـــیــش بـــود طـــول امـــل پـــیـــران را | ریـشــه نـخــل کـهـنـســال فـزون مـی بــاشــد |
| *** | |
| آب بـــر آتـــش هــر بـــی ســـر و پـــا افــشــانــد | چـون رسـد نـوبــت مـا، دسـت بـه مـا افـشـانـد |
| مــن کــه بــر نـکــهـت پــیـراهـن او دارم چــشــم | آب بـــر آتـــش مـــن بـــاد صـــبـــا افـــشـــانـــد |
| *** | |
| سـاده لـوحـان کـه بـدآمـوز بـه صـحـبـت شـده اند | غـافـل از جــنـت دربــسـتــه خــلـوت شـده انـد |
| بــه خــوشــی چــون گــذرد عــمــر بــنـی آدم را؟ | کــه ز پــشــت پـــدر آواره ز جــنــت شــده انــد |
| *** | |
| ســرزلــف ســخـــن آن روز بـــه دســـتـــم دادنــد | کـه بـه هر مـو چـو سـر زلـف شـکـسـتـم دادند |
| پــــرده دیـــده مـــن کـــاغـــذ ســــوزن زده شـــد | تــا ســر رشــتــه مـقـصـود بــه دســتــم دادنـد |
| نـیـســت در طــالـع مـن عــقـده گـشــایـی، ورنـه | عــقــده چــون تــاک بــه انـدازه دســتــم دادنـد |
| *** | |
| نـــی اگـــر از دل پـــررخـــنـــه صـــدایــی نـــزنـــد | راه عـــشـــاق تـــرا هـــیـــچ نـــوایـــی نـــزنـــد |
| می زند مـار بـه هر عـضـو، ولـی نی مـاری اسـت | کــه بــه غــیــر از دل آگــاه بــه جــایــی نــزنــد |
| خـــون مـــا را کـــه دل آهـــن ازو جـــوش کـــنـــد | جـوهر تـیغ مـحـال اسـت کـه خـس پـوش کـنـد |
| دل بــــی طـــاقـــت مـــا صــــبــــر نـــدارد، ورنـــه | حـسـن از آیـیـنـه مـحـال اسـت فـرامـوش کـنـد |
| هـیـچ نـفـریـن بـه ازیـن نـیـسـت کـه عـاقـل گـردد | هـر کـه حــق نـمـک عــشــق فــرامـوش کــنـد |
| *** | |
| دل چـــو آرایــش مــژگـــان تـــر خـــویــش کـــنــد | داغ را آیـــنـــه دار جــــگـــر خــــویـــش کــــنـــد |
| مـی بــرد بــخــت بــه ظــلــمــت کــده هـنـد مـرا | تـا چـه خـاک (سـیه) آنجـا بـه سـر خـویش کند |
| *** | |
| عشق چـون شـعله کشـد اشک دمادم چـه کند؟ | پـیش خـورشـید صـف آرایی شـبـنم چـه کـنـد؟ |
| از جــگـر تــشــنـگـیـم ریـگ روان ســیـراب اســت | بـا چـو من سوختـه ای چـشمه زمزم چـه کند؟ |
| *** | |
| آه را یـــاد ســـر زلـــف تـــو پـــیـــچـــیــده کـــنـــد | فــکــر را شــیـوه رفــتــار تــو ســنـجــیـده کـنـد |
| دل مـحــال اســت کـه بــا داغ هـوس جــوش زنـد | کـعـبـه حـاشـا کـه بـه بـر جـامـه پـوشـیده کـند |
| *** | |
| خــلــد تــســخــیــر دل اهــل مــحــبـــت نــکــنــد | بـــرق در بـــوتـــه خــاشــاک اقــامــت نــکــنــد |
| کــرد دلــگــیــر ســـفــرپـــای گــرانــخـــواب، مــرا | هـیـچ کــس بــا قــلـم کــنـد کــتــابــت نـکــنـد! |
| *** | |
| بـــاده ای را نــپـــرســتــم کــه خــرابـــم نــکــنــد | گــرد آن شــمــع نـگــردم کــه کــبــابــم نـکــنـد |
| خــون مـنـصـورم و بــیـداردلـی جــوش مـن اسـت | مـی طـفـل افـکـن افـسـانـه بـه خـوابــم نـکـنـد |
| آب گـشـتــه اسـت دل یـک چــمـن از خـنـده مـن | مـی شــود حــشــر مـکـافــات گـلـابــم نـکـنـد؟ |
| *** | |
| عـاشــقـانـی کـه دل از گـریـه ســبــکـبــار کـنـنـد | شـکـوه خـود چـه ضـرورسـت کـه اظـهار کـننـد؟ |
| بـــوی پـــیــراهــن گــلــزار ازان شــوخــتـــرســت | کــه نــظـــربـــنــد ز خـــار ســـر دیــوار کــنــنــد |
| *** | |
| عــشــقــبــازان چــو جــلــای نــظــر پــاک دهـنــد | مـنـصـب بـرق جـهـانـسـوز بـه خـاشـاک دهـنـد |
| مـفــلــســم، حــوصــلــه نـاز خــریـدارم نـیـســت | مـی فـروشـم بــه بــهـای دل اگـر خـاک دهـنـد |
| (در دو روزش چــو سـر زلـف بــهـم مـی شـکـنـی | حیف دل نیست که در دست تو بی باک دهند) |
| *** | |
| داغ ســودای تــرا بـــر دل بـــی کــیــنــه نــهــنــد | گـوهـری را کـه عـزیزسـت بـه گـنـجـینـه نـهـنـد |
| بــی تــو جــمـعــی کـه نـظــر آب دهـنـد از گـلـزار | تـشـنـگـانـنـد کـه بــر ریـگ روان سـیـنـه نـهـنـد |
| قــســمــت مــردم هــمــوار نــگــردد ســخــتـــی | بــالــش از مــوم بــه زیـر ســر آیـیـنــه نــهــنــد |
| *** | |
| دل بـه خـال تـو عـبـث چـشـم طـمـع دوخـتـه بـود | مـشـک این نافـه سـراسـر جـگـر سـوخـتـه بـود |
| چــون صــبــا بــیـهــده بــر گــرد چــمــن گــردیـدم | رزق مـن غـنـچـه صـفـت در دلـم انـدوخـتـه بـود |
| *** | |
| مـی خـرامـید و صـبـوح از مـی بـی غـش زده بـود | لــالــه ای بـــود کــه ســر از دل آتــش زده بــود |
| ای مــه عــیــد کــجــا گــم شــده بــودی دیــروز؟ | که کمان ابـروی من دسـت بـه تـرکـش زده بـود |
| *** | |
| پـیـش ازیـن سـیـنـه ام از چـاک گـلـسـتـانـی بـود | هـر شــکـاف از دل چــاکـم لـب خــنـدانـی بــود |
| روزگـاری اســت نـرفـتــیـم بــه صــحــرای جــنـون | یاد مجـنون کـه عـجـب سـلسـله جـنبـانی بـود! |
| *** | |
| *** | |
| (چــشــمــت کــه راه تــوبــه احــبـــاب مــی زنــد | ســاغــر بــه طــاق ابــروی مــحــراب مـی زنـد) |
| (یک صـبـحـدم بـه طـرف گـلـسـتـان گـذشـتـه ای | شــبــنــم هــنــوز بـــر رخ گــل آب مــی زنــد؟) |
| *** | |
| چــون لــالــه هــر کــه بــاده حــمــرا نــمــی زنــد | جــوش نـشــاط چــون خــم صـهـبــا نـمـی زنـد |
| مـجــنـون کـه از لـبــاس تــعــلـق بــرآمـده اســت | آتـــش چـــرا بـــه دامــن صــحــرا نــمــی زنــد؟ |
| از داغ گــــشــــت شــــورش مـــغــــزم زیـــادتــــر | گـــرداب مـــهـــر بـــر لـــب دریــا نـــمـــی زنـــد |
| *** | |
| دم گــر چــه پـــیــش آیــنــه عــالــم نــمــی زنــد | آیــیــنــه پـــیــش عـــارض او دم نـــمـــی زنـــد |
| از پــــنـــبــــه داغ مــــا نـــرود زنـــده در کــــفــــن | از بــخــیـه زخــم مــا مــژه بــر هـم نـمــی زنــد |
| از شــشــدر جــهــات، مــرا نــقــش کــم رهـانــد | گـیـرد اگـر کــســی کــم خــود، کـم نـمـی زنـد |
| *** | |
| مــاه از حــجـــاب روی تـــو پـــرویــن عــرق کــنــد | آیــیــنــه را شــکــوه جــمــال تـــو شــق کــنــد |
| اســکــنـدرســت اگـر چــه بــود در لـبــاس فــقــر | هـر کــس کـه اخــتــصــار بــه ســد رمـق کــنـد |
| چــون بــا رخ تــو چــهـره شــود مـه، کــه آفــتــاب | از شــرم عـارضــت ز شــفـق خــون عـرق کـنـد |
| *** | |
| تــا چــنـد رخ ز بــاده کــســی لــالـه گــون کــنـد؟ | تـا کـی کـسـی شـنـاه بــه دریـای خـون کـنـد؟ |
| هر کـس ز عـشـق سـایه دسـتـی گرفـتـه اسـت | چـون تـیـشـه دسـت در کـمـر بــیـسـتـون کـنـد |
| روزی کـــه چـــرخ پـــنـــبـــه گـــذارد بـــه داغ مـــا | خــورشــیــد ســر ز روزن مــغــرب بــرون کــنــد |
| اول شـــکـــار لــاغـــر آن صـــیــد پـــیــشـــه ایــم | مــا را مــگــر شــهــیــد بـــرای شــگــون کــنــد |
| *** | |
| چـندان کـه مـمـکـن اسـت کـسـی مـردمـی کـند | دم را چـــرا عـــلــم کــنــد و کـــژدمــی کــنــد؟ |
| نان جـوی بـه سـفره هر کس که هسـت ازوسـت | آدم زبـــان خـــویــش اگـــر گـــنــدمـــی کـــنــد |
| طـــوفــان نــوح، کــودک دریــا نــدیــده ای اســـت | جـــایــی کــه آب دیــده مــا قـــلــزمــی کـــنــد |
| *** | |
| اول بـــه ظـــالـــمـــان اثـــر ظـــلـــم مــی رســـد | پـیش از هدف همـیشـه کـمـان نـالـه مـی کـند |
| *** | |
| در خـشـت خـم بــه چــشـم حـقـارت نـظـر مـکـن | خـورشـیـد سـاغـر از لـب ایـن بــام شـد بــلـنـد |
| پـــرواز مــرغ بـــســمــل ازو بـــیــشــتــر مــخــواه | بــال و پــری کــه در شــکــن دام شــد بــلــنــد |
| *** | |
| ایـن نـاقـصـان کـه فـخــر بــه انـسـاب مـی کـنـنـد | پـس پـس سـفر چـو طفل رسـن تـاب می کنند |
| اســلــاف را هـم از نــســب خــود کــنــنــد خــوار | بـس نیست این ستـم که بـه اعقاب می کنند؟ |
| *** | |
| تــیـر از فـراق شـسـت تــو مـی کـرد نـالـه دوش؟ | یــا بـــال عــنــدلــیــب پـــر ایــن خــدنــگ بـــود |
| از آبـــــــــیــــــــاری عــــــــرق شــــــــرم، روی او | تــــا آفـــتــــاب زرد خـــزان لـــالـــه رنـــگ بــــود |
| امـشــب کــه شــوخــی هـوســش آرمـیـده بــود | جــان شــراب بـــر لــب ســاغــر رســیــده بــود |
| درد طــلــب بــلــاســت، وگــرنــه رفــیــق خــضــر | لـب تــشــنـگـی خــویـش در آیـیـنـه دیـده بــود |
| *** | |
| مــژگــان مــن ز اشــک دمــی بــی گــهــر نــبــود | ایـن شــاخ بــی شــکـوفـه لـخــت جــگـر نـبــود |
| آیـــیـــنـــه ات ز دود خــــط آخــــر ســـیـــاه شـــد | خــط بــر زمـیـن کــشــیـدن مـا بــی اثــر نـبــود |
| *** | |
| خــطــت ز پـــیــش چــشــم ســوادم نــمــی رود | دلــــســـــوزی رخ تـــــو ز یــــادم نــــمــــی رود |
| هــر جــلــوه ای کــه دیــده ام از ســروقــامــتــی | چـــون مـــصـــرع بـــلـــنــد ز یــادم نــمـــی رود |
| (هــرگــه لــبــت بــه خــنــده تــبــســم ادا شــود | هـر عـضـو مـن چـو بـرگ گـل از هم جـدا شـود) |
| (پـــیــکــان یــار را نــتـــوانــد بـــه خـــود گــرفـــت | گــر اســتــخــوان مــن هـمـه آهـن ربــا شــود) |
| *** | |
| دل روبـــرو بـــه خـــنــجـــر مــژگــان چـــرا شـــود | بــا بــرق، خــار دســت و گـریـبــان چــرا شـود؟ |
| جــان داد صــبـــح بـــر ســر یــک خــنــده خــنــک | دنـدان کــس بــه خــنـده نـمـایـان چــرا شــود؟ |
| *** | |
| آنـجــا کــه عــارض تــو ز مـی لــالــه گــون شــود | در دیـده رشـتــه هـای نـگـه جــوی خـون شـود |
| لــنــگـــر دریــن مــحـــیــط کـــنــد کـــار بـــادبـــان | دیـوانــگــی ز ســنــگ مــلــامــت فــزون شــود |
| *** | |
| عــمـرم بــه تــلـخــکــامـی مـل خــرج مـی شــود | اشــکـم بــه رنـگ لـالـه و گـل خــرج مـی شـود |
| بــا عـاشـقـان هـمـیـن سـخـن عـاشـقـی بـگـوی | در کــشــور قــفــس زر گــل خــرج مــی شــود |
| *** | |
| ای ســنـگــدل عــقــیـق تــو بــدنــام مــی شــود | ورنـه مـرا چــه از دو ســه دشـنـام مـی شـود؟ |
| ایــــام بــــرگــــریــــز پــــر و بــــال مــــیــــرســــد | تــا عــنـدلــیـب مـا بــه قــفــس رام مـی شــود |
| در خـــانـــه ای کـــه روی تــــو افـــزود از شـــراب | تــبــخـالـه خـوش نـشـیـن لـب بــام مـی شـود |
| *** | |
| از خـواب، چـشـم شـوخ تـو سـنـگـین نمـی شـود | در زیـر ابــر بــرق بــه تــمــکــیـن نــمــی شــود |
| تــلـخــی پــذیـر بــاش کـه بــی آب تــلـخ و شــور | چـون گـوهر اسـتـخـوان تـو شـیرین نمـی شـود |
| *** | |
| هــر کـــس کــه از رخ تـــو نــظـــر آب مــی دهــد | خـرمـن بـه بـرق و خـانـه بـه سـیلـاب مـی دهد |
| در خـــون یــک جـــهــان دل بـــی تـــاب مــی رود | مــشــاطــه ای کــه زلــف تــرا تــاب مــی دهـد |
| صـیـدی کـه بـی قـراری وحـشـت کـشـیده اسـت | در چــشــم دام، داد شــکــرخــواب مــی دهــد |
| *** | |
| گـــل بــــوی بــــی وفــــایـــی ارواح مـــی دهـــد | یـــادی ز کــــم بــــقــــایـــی ارواح مـــی دهـــد |
| خــنــدیــدن و شــکــفــتــن یــاران بـــه روی هــم | یــاد از بـــغـــل گـــشـــایــی ارواح مـــی دهـــد |
| *** | |
| آیـیـنـه ات ز چـشـم بـدان بـی صـفـا شـده اسـت | خــاکــســتــر ســپــنـد، جــلــای تــو مـی دهـد |
| *** | |
| عــاشــق عــنـان بــه چــرخ مـقــوس نـمـی دهـد | صـیـد رمـیـده دسـت بــه هـر کـس نـمـی دهـد |
| بـی حـاصـلـی اسـت حـاصـل نـیـکـی بـه بـدگـهـر | آبــی کــه خــورد ریـگ روان پــس نــمــی دهـد |
| چـــون طـــفـــل خـــام، آرزوی بـــی تـــمــیــز مــا | فــرصــت بــه هـیـچ مــیـوه نــارس نـمــی دهـد |
| *** | |
| هــرگــز کــســـی ز قــافــلــه دل نــشــان نــدیــد | یـــک آفـــریـــده آتــــش ایـــن کـــاروان نـــدیـــد |
| چــون سـرو، خـام آمـد و خـام از چــمـن گـذشـت | نــخــلــی کــه انــقــلــاب بــهـار و خــزان نــدیـد |
| *** | |
| بــه جــای قــطــره بــاران بــه کـشــت طــالـع مـا | ز آســمــان ســتـــم پـــیــشــه مــور مــی آیــد |
| *** | |
| تــبــســمــی پــی دشــنــام تــلــخ در کــارســت | نــمــکــچــش مــزه ای بــا پــیـالــه مــی بــایـد |
| *** | |
| چـه شـد دگـر کـه فـغـان از دلـم خـروش کـشـید؟ | لـبــاس عـافـیـتــم دســت غـم ز دوش کـشـیـد |
| کــمـان حــســن کــه در بــنـد مـاه کــنـعــان بــود | خـط سـیـاه تـو از گـوش تــا بــه گـوش کـشـیـد |
| *** | |
| مــرا در آتـــش بـــی رحـــمــی عــتـــاب مــســوز | کــه شــمــع طــور مــرا بــا چــراغ مــی جــویـد |
| مــگــر نــهــال تــو در بــاغ ســایـه افــکــن شــد؟ | کــه ســـرو رخـــنــه دیــوار بـــاغ مــی جـــویــد |
| *** | |
| نــســیـم از چــمــن و مــشــک از خــتــن گــویــد | گــل شــکــفــتــه ازان چــاک پــیـرهــن گــویــد |
| دلـم نشـسـت بـه خـون تـا بـه اشـک شـد همراز | کـسـی بــه طـفـل چـرا راز خـویـشـتــن گـویـد؟ |
| *** | |
| رونـــق ز لــــالـــه زار تــــو خــــط ســــیـــاه بــــرد | ایـن هـالـه روشـنـی ز شــبــســتــان مـاه بــرد |
| ای نـــاخـــدای مـــوج بـــه فـــریـــاد مـــن بــــرس | بــــاد مـــراد کــــشــــتــــی مــــا را ز راه بــــرد |
| *** | |
| گـــفــــتــــار او غــــم از دل نـــاکـــام مـــی بــــرد | ایــن قــنــد ســوده تــلــخــی بــادام مــی بــرد |
| رعـــــنـــــا قـــــدان بـــــاغ، بـــــرآورده تـــــوانـــــد | نــــام تــــرا نـــهـــال بــــه انــــدام مــــی بــــرد |
| *** | |
| تــــا چــــنـــد نــــاگــــواری از انـــدازه بــــگــــذرد؟ | اوقـــات در شـــکــنــجـــه خـــمــیــازه بـــگــذرد |
| شـایـســتــه هـزار شـبــیـخــون کـوتــهـی اســت | عـمـری کـه چــون خـمـار بــه خـمـیـازه بــگـذرد |
| *** | |
| تــنـهـا نـه کــار مــن بــه نــگــاه نــخــســت کــرد | هـر کـس کـه دیـد جـلـوه او پــای سـسـت کـرد |
| زلـف از مـتــاع فـتــنـه تــهـیـدسـت گـشـتــه بــود | خــط عـاقـبــت شــکـســتــه او را درســت کـرد |
| *** | |
| کــی دیـدمـش کــه گـریـه ســر حــرف وا نـکــرد؟ | رنــگ شــکــســتـــه راز دلــم بـــرمــلــا نــکــرد |
| تـــنــهــا نــبـــرد جـــلـــوه او شـــمـــع را ز جـــای | سـرزنـده ای نـمـانـد کـه بـی دسـت و پـا نـکـرد |
| *** | |
| تــا عـشـق هـســت نـالـه بــه فـریـاد مـی رســد | تـــا هــســت آتــشــی مــدد بـــاد مــی رســد |
| ای تــیـشـه کـامـرانـی خــســرو ز حــد گـذشــت | زورت هـمـیـن بــه بــازوی فــرهـاد مـی رســد؟ |
| *** | |
| جــان چـون کـمـال یـافـت بــه جـانـانـه مـی رسـد | انـگـور چــون رسـیـد بــه مـیـخــانـه مـی رســد |
| طـوفـان کـنـد شـراب در آن سـر کـه مـغـز نیسـت | فــیـض بــهـار، بــیـش بــه دیـوانــه مــی رســد |
| حــســن غـریـب حــوصــلـه پــرداز طـاقـت اســت | کـی آشـنـا بــه مـعـنـی بــیـگـانـه مـی رســد؟ |
| *** | |
| از بـــس ادب کـــه یـــافـــت دل مـــا ادیــب شـــد | بــیـمــار مــا ز رنــج کــشــیـدن طــبــیــب شــد |
| بـــی درد و داغ، فـــکـــر تـــرقـــی نــمــی کـــنــد | دل شــد یـتــیـم تــا ســخــن مـن غـریـب شــد |
| بـــعــد از هــزار شــب کــه شــب وصــل داد روی | اوقـــات صـــرف پـــاس نـــگـــاه رقـــیـــب شـــد |
| *** | |
| آخــــر غـــبــــار خـــط تــــو گـــرد کـــســـاد شـــد | جــوهــر بـــه چــشــم آیــنــه مــوی زیــاد شــد |
| هـر عـاشـقـی کـه شـیـوه وارسـتـگـی شـنـاخـت | چــون بــنـده گــریـخــتــه بــی اعــتــمــاد شــد |
| *** | |
| خــالــش بــلــای جــان ز خــط مـشــکــبــار شــد | پــرهــیـز ازان ســتــاره کــه دنــبــالــه دار شــد |
| انـصـاف نـیـســت ســوخــتــن از تــشــنـگـی مـرا | کــز خـــون مــن عــقــیــق لــبـــت آبـــدار شــد |
| *** | |
| بـــال و پـــر مـــحـــیــط ز مـــوج آشـــکـــاره شـــد | گــردد یــکــی هــزار چــو دل پـــاره پـــاره شــد |
| بـــالــیــدگــی اســت لــازمــه الــتـــفــات خــلــق | فـربــه بـه یـک دو هـفـتـه هـلـال از اشـاره شـد |
| *** | |
| آثــار عــشــق در دل چــون ســنـگ مــن نـمــانـد | در بــیـســتــون مــن اثــر از کــوهـکــن نـمــانـد |
| تــا رنـگ مـن شــکـســتــه خــود را درســت کــرد | گــلــگــونـه در بــســاط ســهـیـل یـمـن نـمـانـد |
| *** | |
| گـردنـکـشــی مـکـن کـه ضـعـیـفـان بــه آه ســرد | دیـهـیـم نـخــوت از ســر قــیـصــر گــرفــتــه انـد |
| *** | |
| مــردم ز حـــد خـــویــش بـــرون پـــا نــهــاده انــد | راه هــزار تـــفـــرقــه بـــر خـــود گــشـــاده انــد |
| بــســتــه اســت روزگــار جــهـان را بــه کــار گــل | یـکـســر بــه فــکـر بــاغ و عــمـارت فــتــاده انـد |
| خــواهــنــد عــاقــبـــت ز نــدامــت بـــه ســر زدن | دسـتـی کـه ظـالـمـان بــه تـعـدی گـشـاده انـد |
| *** | |
| روشــــنـــدلـــان کــــه آیـــنـــه جــــان زدوده انـــد | از روی حــشـر پــرده هـم ایـنـجــا گـشـوده انـد |
| غــافــل مـشــو ز گــل کــه فــرورفــتــگــان خــاک | آن نــامــه را بــه خــون دل انـشــا نـمــوده انــد |
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| ایــن ریــش پـــروران کــه گــرفــتـــار شــانــه انــد | غــافــل کـه صــد خــدنـگ بــلـا را نـشــانـه انـد |
| در خــانـمــان خــرابــی دل ســعــی مـی کــنـنـد | ایـن غــافـلـان کـه در پــی تــعــمـیـر خــانـه انـد |
گروه کتاب پایگاه خبری شاعر
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